भक्ति एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है किसी व्यक्तिगत ईश्वर या देवता के प्रति प्रेमपूर्ण समर्पण या भावुक प्रेम, जिसे मोक्ष या आध्यात्मिक ज्ञान का मार्ग माना जाता है। यह ईश्वर के साथ गहन भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव तथा ईश्वर के साथ प्रत्यक्ष, व्यक्तिगत संबंध पर जोर देता है, न कि पुजारियों, जटिल अनुष्ठानों या बलिदानों पर निर्भरता पर। भक्ति आंदोलन, जो 8वीं से 18वीं शताब्दी के बीच भारत में उभरा, ने भक्ति गीतों, कविताओं और जप, तीर्थयात्रा और पूजा जैसी प्रथाओं के माध्यम से इन विचारों को बढ़ावा दिया, जिससे सभी सामाजिक स्तरों के लोगों के लिए आध्यात्मिक जीवन अधिक सुलभ हो गया।
भक्ति के प्रमुख पहलू
प्रेमपूर्ण भक्ति: मूलतः भक्ति ईश्वर के प्रति गहन, निःस्वार्थ और बिना शर्त प्रेम विकसित करने का अभ्यास है।
व्यक्तिगत ईश्वर: यह किसी अमूर्त या अवैयक्तिक दिव्य शक्ति के बजाय व्यक्तिगत रूप से कल्पित ईश्वर या देवता की आराधना पर केंद्रित है।
मोक्ष का मार्ग: भक्ति को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति (मोक्ष या निर्वाण) का मार्ग माना जाता है,
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