महाकारूणिक भगवान बुद्ध के चरणों में नमन।
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज के चरणों में नमन।
सामाजिक न्याय, समता,समानता और ज्ञान के प्रतीक डॉ बी आर अंबेडकर जी के चरणों में मेरा कोटि कोटि प्रणाम।
स्वागत है आपके अपने चैनल "Bodhivriksha Official" पर!
इस चैनल पर हम डॉ. भीमराव अंबेडकर और गौतम बुद्ध और संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज के विचारों, शिक्षाओं और योगदानों को गहराई से समझेंगे। हमारे वीडियो में आप पाएंगे:
🌻 अंबेडकर जी के संघर्ष और उनके द्वारा किए गए सामाजिक सुधार
🌻 गौतम बुद्ध की शिक्षा और उनके जीवन का सार .
🌻 संत रविदास जी के समानता, न्याय और शांति के संदेश
🌻 बाबा साहेब की पुस्तको से उनके क्रांतिकारी विचार और बौद्ध धर्म के पावन ग्रंथो से भगवान बुद्ध के उपदेश।
विचारशील चर्चाएं और प्रेरणादायक कहानियाँ.
हमारा उद्देश्य है समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और आपको ऐसे ज्ञान से अवगत कराना जो आपकी सोच और दृष्टिकोण को बदल सके।
अगर आप समानता, न्याय और मानवता के मूल्यों में विश्वास रखते हैं, तो इस चैनल को सब्सक्राइब करें और हमारे साथ इस यात्रा में शामिल हों!
~ आप सभी को मेरा प्रणाम। 🕉️🙏
Bodhivriksha Official
अपनी ऊर्जा और अपने समय को हमेशा किसी सही कार्य में लगाना सीखिए। ये छोटी छोटी चीजे होती है जो आपके जीवन की शान्ति बनाए रखती है। उन बहसों में कभी न पड़े जिनसे आपकी चेतना का कोई विकास नहीं। ध्यान रखिएगा। प्रणाम आप सभी को। 🙇🙏❤️
3 weeks ago | [YT] | 1
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Bodhivriksha Official
"मुझे मामूली 'भीमा' से 'डॉ. आंबेडकर' बनाने का श्रेय रमाबाई को जाता है।" ~ डॉ भीमराव अंबेडकर जी।
रामाबाई आंबेडकर, डॉ. भीमराव आंबेडकर की पत्नी थीं, जिन्होंने उनके जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक भूमिका निभाई। उन्होंने अत्यधिक गरीबी, सामाजिक कठिनाइयों और व्यक्तिगत दुखों का सामना करते हुए भी डॉ. आंबेडकर की शिक्षा और उनके सामाजिक मिशन में पूर्ण सहयोग दिया।
रामाबाई का जन्म लगभग 1896–1897 के आसपास हुआ था। उस समय की प्रचलित परंपराओं के अनुसार उनका विवाह मात्र 9 वर्ष की आयु में डॉ. आंबेडकर से कर दिया गया था। उनका वैवाहिक जीवन आर्थिक तंगी और संघर्षों से भरा रहा।
उनके पाँच संतानें हुईं, किन्तु अत्यंत दुखद रूप से केवल एक संतान ही वयस्क अवस्था तक जीवित रह सकी। इस गहरे व्यक्तिगत शोक के बावजूद रामाबाई ने धैर्य, त्याग और समर्पण का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने बीमारी, अभाव और पारिवारिक दुखों के बीच भी डॉ. आंबेडकर के महान लक्ष्य—शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय—के प्रति अपना अटूट समर्थन बनाए रखा।
रामाबाई आंबेडकर का निधन 27 मई 1935 को हुआ। उनका जीवन मौन त्याग, सहनशीलता और प्रेरणादायक समर्थन की ऐसी विरासत छोड़ गया, जिसने डॉ. आंबेडकर के ऐतिहासिक कार्यों की नींव को मजबूत किया।
🙇🙏
4 weeks ago (edited) | [YT] | 13
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गणतंत्र दिवस 2026 की सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं। आइए हम प्रतिज्ञा करे कि हमारे महापुरुषों, स्वतंत्रता सेनानियों के सपनो का भारत बनाने के लिए हम कार्य करे और अपने जीवन में संवैधानिक मूल्यों को भी शामिल करे, ताकि हम एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर सके। जय भीम। जय संविधान। जय भारत। 🇮🇳🙇🙏
4 weeks ago | [YT] | 24
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केवल मूर्ति तक ही सिमट जाने का यही खतरा होता है,की हम अपने संतो को पढ़ना भूल जाते है। जब आप पढ़ेंगे संत रैदास को, तो वहां राम, हरि, ठाकुर, ऐसे अनेक शब्दों का प्रयोग हुआ है और सबका एक ही अर्थ है तुम्हारे भीतर छिपी हुई परम संभावना जिसको तुम भुलाए बैठे हो। मैं यहां यही काम कर रहा हूं,मैं संत रैदास जी को लेकर वो काम कर रहा हूं जो कोई नहीं कर रहा है। देर अबेर आप समझोगे! प्रणाम आप सभी को। 🙇🙏🌻
4 weeks ago | [YT] | 3
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Bodhivriksha Official
प्रश्न : हमारे लोगों को हरि शब्द से भी दूर रहना चाहिए।हरि हिंदुओं के कृष्ण परम्परा की निशानी है।
उत्तर: रैदास के हरि और राम वो नहीं है, जो आपका शोषण करने वालो ने बना दिया।
"हरि सा हीरा छांड कै, करै आन की आस।
ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषै रविदास।"
आगे ये भी कहते है कि
रैदास हमारौ राम जी, दशरथ करि सुत नाहिं।
राम हमउ मांहि रहयो, बिसब कुटंबह माहिं ॥
तो हमें सही अर्थ पकड़ने है, हमें वो अर्थ ग्रहण करने है, जो हमारे संतो ने कहे है। ऐसे अगर दूर जाने लगे तो ये तो हमारी कायरता हो जाएगी। न हरि शब्द से घबराने की जरूरत है, न राम से। घबराएगा वही जिसके पास कोई आध्यात्मिक बुनियाद नहीं है भीतर। आपने व्याकरण में श्लेष अलंकार पढ़ा है, वहां एक ही शब्द के एक से अधिक अर्थ होते है, तो संत जब राम और हरि शब्द का उल्लेख करे तो समझिए वो आपकी ही चेतना की जो परम ऊंचाई है, आपकी जो परम संभावना है, उसकी बात कर रहे है, उनका परमात्मा कही बाहर नहीं है, आपकी ही उच्चतम संभावना है। बीज की भांति हो आप अभी, तो परमात्मा उस खिलावट का नाम है, जब ये बीज फूल बन गया। जब आपके जीवन से प्रेम और ज्ञान की अहर्निश धारा बहने लगी। आप प्रेम ही हो गए, ज्ञान ही हो गए। तो घबराए नहीं, ऐसे शब्दों से डरने लगे आप तो फिर तो संतो को कभी पढ़ भी नहीं पाएंगे। तो ध्यान रखिएगा, आप मेरी एक लॉन्ग वीडियो पड़ी है, उसे देखिएगा की संत रैदास के राम और हरि कौन हैं? आपको सब स्पष्ट हो जाएगा। प्रणाम आपको।
4 weeks ago | [YT] | 7
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Bodhivriksha Official
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी! 🙇🙏
4 weeks ago | [YT] | 9
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Bodhivriksha Official
सभी को जय भीम। नमो बुद्धाय। 🙇🙏
1 month ago | [YT] | 10
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Bodhivriksha Official
बुद्ध के मार्ग पर दो गलतियों से सावधान! मेरी इस वीडियो पर ये कॉमेंट आया है। अब इस ईर्ष्या ओर क्रोध से व्यक्ति कहां ही पहुंचेगा।
1 month ago | [YT] | 2
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Bodhivriksha Official
शिक्षा , साहस और सेवा की त्रिवेणी: माता सावित्रीबाई फुले। 🙇🙏
youtube.com/shorts/PMCZ8vYj3j...
1 month ago | [YT] | 2
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Bodhivriksha Official
भीमा कोरेगांव
1 जनवरी 1818 को पेशवाशाही की जातिवादी सेना के विरुद्ध
महज़ 500 महार सैनिकों ने
असमानता और अत्याचार के ख़िलाफ़
ऐतिहासिक संघर्ष किया।
यह युद्ध सिर्फ़ जीत-हार का नहीं,
सम्मान, समानता और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
जय भीम ✊ जय गुरु रविदास जी महाराज। 🙇🙏
1 month ago | [YT] | 3
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