रामायण में हनुमान जी की राम भक्ति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं: समुद्र लांघना: माता सीता की खोज में हनुमान जी ने बिना किसी की सहायता के पूरा 100 योजन (लगभग 1,200 किलोमीटर) चौड़ा समुद्र पार किया। यह कार्य उनकी अटूट रामभक्ति और उनके दृढ़ विश्वास को दर्शाता है कि श्री राम की कृपा से कोई भी कार्य असंभव नहीं है। संजीवनी बूटी लाना: मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे। उन्हें बचाने के लिए हनुमान जी ने द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा की। इस कार्य में उन्होंने न केवल अपनी भक्ति, बल्कि अपनी शक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का भी परिचय दिया। अशोक वाटिका में माता सीता को श्री राम की अंगूठी देना: अशोक वाटिका में माता सीता को श्री राम की मुद्रिका (अंगूठी) देकर हनुमान जी ने उन्हें विश्वास दिलाया कि श्री राम उन्हें बचाने के लिए आ रहे हैं। इस कार्य में उन्होंने एक दूत के रूप में अपनी निष्ठा और भक्ति का परिचय दिया। हनुमान जी द्वारा अपनी छाती फाड़कर राम-सीता के दर्शन कराना: जब भरत ने हनुमान जी से पूछा कि वे अपने हृदय में किसे धारण करते हैं, तो हनुमान जी ने अपनी छाती फाड़कर अपने हृदय में श्री राम और माता सीता के दर्शन कराए। यह दृश्य उनकी अनूठी और निस्वार्थ राम भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है। ये उदाहरण यह दर्शाते हैं कि हनुमान जी ने अपने हर कार्य में राम भक्ति को सर्वोपरि रखा। वे राम के प्रति एक सेवक के रूप में ही नहीं, बल्कि एक परम मित्र और भक्त के रूप में भी समर्पित थे। हनुमान जी की भक्ति को 'दास्य भक्ति' का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है🙏🌹jai Shri Ram 🌹🙏
सूर्यपुत्र कर्म फल दाता श्री शनिदेव महराज प्रभु अपनी शीतल छाया एवं कृपा दृष्टि सदैव अपने भक्तों पर बनाए रखना!! ऊँ शं शनैश्चराय नमः🙏 शनिदेव हम सभी के हर कष्ट का निवारण करे। एवं हर कार्य को संपूर्ण करे, हे देव यही हमारी प्रार्थना है॥
ॐ जय शनि देव प्रभु जय शनि देव सकल विश्व के संकट क्षण में दूर करे, ॐ जय शनि देवा
तुम करुणामय स्वामी विश्व विदित देवा, भक्त हितों के रक्षक तनिक पायें सेवा, ॐ जय शनि देवा
सूर्य पुत्र भय काल मिटाओ सबके सुख राशि, दुःख दारिद्र विनाशक तुम चहुँ दिश वासी, ॐ जय शनि देवा
दीन बंधू अति द्रवित दयामय सबके प्राण पति, प्रभु सदमार्ग दिखाओ करो दूर कुमति, ॐ जय शनि देवा
[]🌹श्री शनिदेव आप और आपके परिवार पर अपनी कृपा दृष्टि सदैव शीतल बनाए रखें👏 []
ऋषि पंचमी🙏🌷 पर्व की बहुत-बहुत शुभकामनाएं🙏🌷 ऋषियों के चरण प्रणाम से आपके सभी कष्ट दूर हो !!!!सप्त ऋषि !!!!. कश्यप अत्रि भारद्वाज विश्वामित्र गौतम जमदग्नि वशिष्ठ🌹👏
श्री सिद्धवट मंदिर(सिद्धनाथ घाट),उज्जैन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी विशेष🕉️👏जय महाकाल महाकालेश्वर🕉️👏
उज्जैन के भैरवगढ़ के पूर्व में शिप्रा के तट पर प्रचीन सिद्धवट का स्थान है। इसे शक्तिभेद तीर्थ के नाम से जाना जाता है। हिंदू पुराणों में इस स्थान की महिमा का वर्णन किया गया है। हिंदू मान्यता अनुसार चार वट वृक्षों का महत्व अधिक है। अक्षयवट, वंशीवट, बौधवट और सिद्धवट के बारे में कहा जाता है कि इनकी प्राचीनता के बारे में कोई नहीं जानता। इस वटवृक्ष को मुगल काल में काटकर लोहे का तवा जडवा दिया गया था, परंतु कोई भी इसको पुनः फुटने से रोक नहीं पाया एवं यह फिर से हरा-भरा हो गया था। यह एक घाट पर स्थित है जहां पर पित्रुओं के लिए श्राद्धकर्म किये जाते है। इस स्थान पर शिवलिंग भी स्थित है, जिसे पातालेश्वर के नाम से पुकारा जाता है। यहां पर एक शिला है जिसको प्रेत-शीला के नाम से जाना जाता है।
स्कंद पुराण अनुसार पार्वती माता द्वारा लगाए गए इस वट की शिव के रूप में पूजा होती है। पार्वती के पुत्र कार्तिक स्वामी को यहीं पर सेनापति नियुक्त किया गया था। यहीं उन्होंने तारकासुर का वध किया था। संसार में केवल चार ही पवित्र वट वृक्ष हैं। प्रयाग (इलाहाबाद) में अक्षयवट, मथुरा-वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट जिसे बौधवट भी कहा जाता है और यहाँ उज्जैन में पवित्र सिद्धवट हैं।
यहाँ तीन तरह की सिद्धि होती है संतति, संपत्ति और सद्गति। तीनों की प्राप्ति के लिए यहाँ पूजन किया जाता है। सद्गति अर्थात पितरों के लिए अनुष्ठान किया जाता है। संपत्ति अर्थात लक्ष्मी कार्य के लिए वृक्ष पर रक्षा सूत्र बाँधा जाता है और संतति अर्थात पुत्र की प्राप्ति के लिए उल्टा सातिया (स्वस्विक) बनाया जाता है। यह वृक्ष तीनों प्रकार की सिद्धि देता है इसीलिए इसे सिद्धवट कहा जाता है।
यहाँ पर नागबलि, नारायण बलि-विधान का विशेष महत्व है। संपत्ति, संतित और सद्गति की सिद्धि के कार्य होते हैं। यहाँ पर कालसर्प शांति का विशेष महत्व है, इसीलिए कालसर्प दोष की भी पूजा होती है। वर्तमान में इस सिद्धवट को कर्मकांड, मोक्षकर्म, पिंडदान, कालसर्प दोष पूजा एवं अंत्येष्टि के लिए प्रमुख स्थान माना जाता है।
Santoshi Rajput 21
हक़ छीनने वाला चाहे
जितना इतराए.. वक़्त
की अदालत में हर अन्याय
का हिसाब होता है 💯
45 minutes ago | [YT] | 1
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Santoshi Rajput 21
रामायण में हनुमान जी की राम भक्ति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:
समुद्र लांघना: माता सीता की खोज में हनुमान जी ने बिना किसी की सहायता के पूरा 100 योजन (लगभग 1,200 किलोमीटर) चौड़ा समुद्र पार किया। यह कार्य उनकी अटूट रामभक्ति और उनके दृढ़ विश्वास को दर्शाता है कि श्री राम की कृपा से कोई भी कार्य असंभव नहीं है।
संजीवनी बूटी लाना: मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे। उन्हें बचाने के लिए हनुमान जी ने द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा की। इस कार्य में उन्होंने न केवल अपनी भक्ति, बल्कि अपनी शक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का भी परिचय दिया।
अशोक वाटिका में माता सीता को श्री राम की अंगूठी देना: अशोक वाटिका में माता सीता को श्री राम की मुद्रिका (अंगूठी) देकर हनुमान जी ने उन्हें विश्वास दिलाया कि श्री राम उन्हें बचाने के लिए आ रहे हैं। इस कार्य में उन्होंने एक दूत के रूप में अपनी निष्ठा और भक्ति का परिचय दिया।
हनुमान जी द्वारा अपनी छाती फाड़कर राम-सीता के दर्शन कराना: जब भरत ने हनुमान जी से पूछा कि वे अपने हृदय में किसे धारण करते हैं, तो हनुमान जी ने अपनी छाती फाड़कर अपने हृदय में श्री राम और माता सीता के दर्शन कराए। यह दृश्य उनकी अनूठी और निस्वार्थ राम भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है।
ये उदाहरण यह दर्शाते हैं कि हनुमान जी ने अपने हर कार्य में राम भक्ति को सर्वोपरि रखा। वे राम के प्रति एक सेवक के रूप में ही नहीं, बल्कि एक परम मित्र और भक्त के रूप में भी समर्पित थे। हनुमान जी की भक्ति को 'दास्य भक्ति' का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है🙏🌹jai Shri Ram 🌹🙏
4 hours ago | [YT] | 1
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Santoshi Rajput 21
सूर्यपुत्र कर्म फल दाता श्री शनिदेव महराज प्रभु अपनी शीतल छाया एवं कृपा दृष्टि सदैव अपने भक्तों पर बनाए रखना!!
ऊँ शं शनैश्चराय नमः🙏
शनिदेव हम सभी के हर कष्ट का निवारण करे।
एवं हर कार्य को संपूर्ण करे, हे देव यही हमारी प्रार्थना है॥
ॐ जय शनि देव प्रभु जय शनि देव
सकल विश्व के संकट क्षण में दूर करे,
ॐ जय शनि देवा
तुम करुणामय स्वामी विश्व विदित देवा,
भक्त हितों के रक्षक तनिक पायें सेवा,
ॐ जय शनि देवा
सूर्य पुत्र भय काल मिटाओ सबके सुख राशि,
दुःख दारिद्र विनाशक तुम चहुँ दिश वासी,
ॐ जय शनि देवा
दीन बंधू अति द्रवित दयामय सबके प्राण पति,
प्रभु सदमार्ग दिखाओ करो दूर कुमति,
ॐ जय शनि देवा
[]🌹श्री शनिदेव आप और आपके परिवार पर अपनी कृपा दृष्टि सदैव शीतल बनाए रखें👏 []
4 hours ago | [YT] | 2
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Santoshi Rajput 21
जबलपुर का सुप्तेश्वर गणेश मंदिर..!!!
संस्कारधानी जबलपुर में एक ऐसा गणेश मंदिर है, यहां भगवान श्री सुप्तेश्वर कल्कि के रूप में घोड़े पर विराजमान हैं।
यहाँ 50 फीट की ऊंचाई पर भगवान गणेश की स्वयंभू प्रतिमा शिला स्वरूप में है।
भगवान श्री सुप्तेश्वर की विशाल सूंड धरती के बाहर नजर आती है, जबकि शेष शरीर धरती के अंदर है।
मान्यता है कि जो भी इस सिद्ध गणेश मंदिर में लगातार 41 दिन सच्चे मन से दीप जलाता है और विघ्नहर्ता की आराधना करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
जय श्री गणेश🌹👏
5 hours ago | [YT] | 1
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Santoshi Rajput 21
गणेश उत्सव विशेष दर्शन हैप्पी गणेश चतुर्थी ओम गणेशाय नमः 🌹👏
भगवान राम द्वारा स्थापित #श्री_चिंतामन_गणेश_मंदिर उज्जैन, मध्यप्रदेश
#महाकालेश्वर #mahakal #mahakaleshwar #ujjain🌹👏
1 day ago | [YT] | 5
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Santoshi Rajput 21
ऋषि पंचमी🙏🌷 पर्व की बहुत-बहुत शुभकामनाएं🙏🌷 ऋषियों के चरण प्रणाम से आपके सभी कष्ट दूर हो
!!!!सप्त ऋषि !!!!.
कश्यप
अत्रि
भारद्वाज
विश्वामित्र
गौतम
जमदग्नि
वशिष्ठ🌹👏
1 day ago | [YT] | 4
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Santoshi Rajput 21
🙏🌹 *🐍ॐजय श्री महाकाल🐍* 🌹🙏
*꧁_ ॐ नमः पार्वती पतये*
*हर हर महादेव।_꧂*
🔱🕉🔱
🙏🏻🚩 🚩🙏🏻
*स्वयंभू दक्षिणमुखी राजाधिराज मृत्युलोकाधिपति भूतभावन अवंतिकानाथ बाबा श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जी का भस्म श्रृंगार आरती दर्शन*
*ऋषि पंचमी*🌹🌹🚩🚩
*‼️२८-०८-२०२५‼️ब्रह्स्पतिवार !*
#mahakal #mahakaleshwar #bhasmaarti #mahakaleshwar_temple_ujjain #ujjain #mahadev #shivji🌹👏
2 days ago | [YT] | 3
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Santoshi Rajput 21
🙏ॐ श्री महाकालेश्वराय नमः
🙏दिनांक 27 अगस्त 2025 का ज्योतिर्लिंग भगवान श्री 🙏महाकालेश्वर जी का प्रातः कालीन भस्म आरती श्रृंगार दर्शन
🙏#गणेश_चतुर्थी_महापर्व_की_हार्दिक_शुभकामनाएं
🙏#shrimahakaleshwarujjain
🙏#mahakaleshwar_temple_ujjain
3 days ago | [YT] | 5
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Santoshi Rajput 21
श्री सिद्धवट मंदिर(सिद्धनाथ घाट),उज्जैन
कृष्ण पक्ष चतुर्दशी विशेष🕉️👏जय महाकाल महाकालेश्वर🕉️👏
उज्जैन के भैरवगढ़ के पूर्व में शिप्रा के तट पर प्रचीन सिद्धवट का स्थान है। इसे शक्तिभेद तीर्थ के नाम से जाना जाता है। हिंदू पुराणों में इस स्थान की महिमा का वर्णन किया गया है। हिंदू मान्यता अनुसार चार वट वृक्षों का महत्व अधिक है। अक्षयवट, वंशीवट, बौधवट और सिद्धवट के बारे में कहा जाता है कि इनकी प्राचीनता के बारे में कोई नहीं जानता। इस वटवृक्ष को मुगल काल में काटकर लोहे का तवा जडवा दिया गया था, परंतु कोई भी इसको पुनः फुटने से रोक नहीं पाया एवं यह फिर से हरा-भरा हो गया था। यह एक घाट पर स्थित है जहां पर पित्रुओं के लिए श्राद्धकर्म किये जाते है। इस स्थान पर शिवलिंग भी स्थित है, जिसे पातालेश्वर के नाम से पुकारा जाता है। यहां पर एक शिला है जिसको प्रेत-शीला के नाम से जाना जाता है।
स्कंद पुराण अनुसार पार्वती माता द्वारा लगाए गए इस वट की शिव के रूप में पूजा होती है। पार्वती के पुत्र कार्तिक स्वामी को यहीं पर सेनापति नियुक्त किया गया था। यहीं उन्होंने तारकासुर का वध किया था। संसार में केवल चार ही पवित्र वट वृक्ष हैं। प्रयाग (इलाहाबाद) में अक्षयवट, मथुरा-वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट जिसे बौधवट भी कहा जाता है और यहाँ उज्जैन में पवित्र सिद्धवट हैं।
यहाँ तीन तरह की सिद्धि होती है संतति, संपत्ति और सद्गति। तीनों की प्राप्ति के लिए यहाँ पूजन किया जाता है। सद्गति अर्थात पितरों के लिए अनुष्ठान किया जाता है। संपत्ति अर्थात लक्ष्मी कार्य के लिए वृक्ष पर रक्षा सूत्र बाँधा जाता है और संतति अर्थात पुत्र की प्राप्ति के लिए उल्टा सातिया (स्वस्विक) बनाया जाता है। यह वृक्ष तीनों प्रकार की सिद्धि देता है इसीलिए इसे सिद्धवट कहा जाता है।
यहाँ पर नागबलि, नारायण बलि-विधान का विशेष महत्व है। संपत्ति, संतित और सद्गति की सिद्धि के कार्य होते हैं। यहाँ पर कालसर्प शांति का विशेष महत्व है, इसीलिए कालसर्प दोष की भी पूजा होती है। वर्तमान में इस सिद्धवट को कर्मकांड, मोक्षकर्म, पिंडदान, कालसर्प दोष पूजा एवं अंत्येष्टि के लिए प्रमुख स्थान माना जाता है।
5 days ago | [YT] | 4
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Santoshi Rajput 21
🌷🙏 जय श्री राम 🌷🙏जय श्री हनुमान🌷🙏
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
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#hanuman #shriram#mahakal #god #ujjain #bajrangbali🚩जयसियाराम🚩
1 week ago | [YT] | 4
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