केरल में गर्मी की लहरों से मुकाबला की तैयारी
‘हीट रेसिलिएंट मूडादी’ परियोजना की शुरुआत
ग्राम पंचायत मूडादी की अनूठी शुरुआत
परिचय
केरल राज्य में बढ़ती गर्मी की लहरों (heatwaves) से निपटने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। यह परियोजना मूडादी पंचायत (Moodadi Panchayat) में लागू की जा रही है, जो कोझीकोड जिले (Kozhikode district) में स्थित है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर तापमान को नियंत्रित करना और भविष्य में आने वाली गर्मियों के लिए तैयारियां सुनिश्चित करना है। यह परियोजना जलवायु परिवर्तन (climate change) के प्रभावों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो समुदायों को सुरक्षित रखने पर केंद्रित है।
पृष्ठभूमि संदर्भ
केरल, जो आमतौर पर अपनी समशीतोष्ण जलवायु के लिए जाना जाता है, हाल के वर्षों में असामान्य रूप से उच्च तापमान का सामना कर रहा है। पिछले गर्मी के मौसम में राज्य के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जिससे लोगों को एयर कंडीशनर (air conditioners) जैसी ऊर्जा-गहन सुविधाओं पर निर्भर होना पड़ा। जलवायु परिवर्तन के वैश्विक संदर्भ में, भारत जैसे देशों में गर्मी की लहरें अधिक तीव्र और बार-बार हो रही हैं, जो स्वास्थ्य, कृषि और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैं। मूडादी पंचायत को जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला (Living Lab) के रूप में चुना गया है, जहां स्थानीय चुनौतियों का विश्लेषण करके समाधान विकसित किए जा रहे हैं। यह परियोजना पिछले डेढ़ वर्षों में विकसित की गई है और केरल में किसी स्थानीय स्वशासी निकाय द्वारा तैयार की गई पहली व्यापक गर्मी कार्रवाई योजना है।
परियोजना का विवरण
“हीट रेसिलिएंट मूडादी” (Heat Resilient Moodadi) नामक इस परियोजना को केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Kerala State Disaster Management Authority – KSDMA) द्वारा तैयार किया गया है। इसमें डॉ. जॉय इलामोन (Dr. Joy Ilamon), डॉ. शेखर कुरियाकोस (Dr. Shekhar Kuriakose) और फहद मसरूक (Fahad Masrook) जैसे विशेषज्ञों का योगदान रहा है। परियोजना का फोकस गर्मी से संबंधित जोखिमों की पहचान करना और रोकथाम तथा आपातकालीन उपायों को लागू करना है। इसमें स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, कृषि, शिक्षा और स्थानीय सरकार जैसे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया है।
कार्यान्वयन की रणनीतियां
परियोजना की शुरुआत पायलट चरण में मुचुकुन्नू वलिया माला (Muchukunnu Valiya Mala) और मुचुकुन्नू उत्तर आंगनवाड़ी (Muchukunnu North Anganwadi) से की गई है। आगे चलकर इसे सभी 32 आंगनवाड़ियों, पारिवारिक स्वास्थ्य केंद्रों (family health centers), उपकेंद्रों, पंचायत कार्यालयों और संबद्ध संस्थानों तक विस्तारित किया जाएगा। निजी संस्थानों को भी गर्मी प्रतिरोधी निर्माण प्रथाओं (heat-resilient construction practices) को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। निर्माण कार्यकर्ताओं और ठेकेदारों को गर्मी प्रतिरोधी तकनीकों पर दिशानिर्देश दिए जा रहे हैं, जैसे छतों पर गर्मी प्रतिबिंबित सामग्री और पेंट (heat-reflecting materials and paints), दीवारों पर बांस की बाड़ (bamboo barriers), तथा खिड़कियों और दरवाजों पर छाया प्रदान करने वाले उपाय जो हवा के संचालन को बेहतर बनाते हैं। इसके अलावा, तीव्र गर्मी के दौरान निवासियों के लिए सुरक्षित स्थान के रूप में “कूलिंग पवेलियन” (cooling pavilions) स्थापित किए जा रहे हैं।
अपेक्षित लाभ और प्रभाव
यह परियोजना केरल के समुदायों को बढ़ती गर्मी की लहरों से बचाने में मदद करेगी और अन्य पंचायतों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगी। स्थानीय स्तर पर तापमान नियंत्रण से ऊर्जा की बचत होगी और पर्यावरण-अनुकूल समाधान अपनाए जाएंगे। समुदाय की जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षा उपायों के माध्यम से, यह योजना स्वास्थ्य जोखिमों को कम करेगी तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन (resilience) विकसित करेगी। जिला स्तर की समिति ने इसकी सराहना की है, जो इसे एक नवाचारी प्रयास मानती है।
Question: Consider the following statements for invasive alien species... 1. Invasive alien species are mainly responsible for biodiversity loss and extinction. 2. They do crop losses. 3. They contribute to climate changes. 4. They contribute to pollution.
यह एक ऐसा अनूठा वेबपोर्टल है जो किसानों के बहुत काम आ सकता है इस पोर्टल पर मात्र तीन क्लिक में आप अपनी ब्लाक पंचायत स्तर का मौसम का पूर्वानुमान जान सकते हैं वो भी अपनी स्थानीय भाषा में
सबसे पहली लाइन में आपको बताया जाता है कि आपके इलाके में अगले पांच दिनों में कुल कितने मिलीमीटर वर्षा होने का पूर्वानुमान है
इस जानकारी की मदद से आप यह यह फैंसला कर सकते हैं कि आपने सिंचाई के लिए खर्चा करना भी है या नहीं यदि ठीक ठाक वर्षा की संभावना है तो सिंचाई में लगने वाले श्रम और खर्च को बचाया जा सकता है इसके साथ यदि अनजाने में आप सिंचाई कर बैठते और ऊपर से राम जी बरस जाता तो डबल नुक्सान होने की संभावना हो जाती है
यदि आपको रासयनिक इनपुट खेतों में छिड़कने हैं तो उसके लिए आपको सूखा समय चाहिए होता है उसका पता भी इस पोर्टल से बड़ी ही आसानी से लगाया जा सकता है
किसान भाई इस लिंक को सेव करके रख लें और समय समय पर प्रयोग करके देखते रहें ऐसा करने से उनके धन और श्रम की बचत होगी
इस वेबपोर्टल को भारत सरकार के तीन मंत्रालयों और साईंलेक्स सॉफ्टवेयर्स संयुक्त सहयोग से भारत सरकार की पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप नीति के तहत विकसित किया गया है
इसकी पहुँच हरेक ग्राम पंचायत के सरपंच और पंचायत सेक्रेट्री तक करने के लिए किसान संचार एक बहुत वृहद् योजना कर कार्य कर रहा है
मंडी एक ऐसा शब्द है जिसे सुन कर किसान भागता है | आजादी के सत्तर साल के बाद भी आज किसान जब भी अपनी फसल बेचने के बारे में बात करता है तो वो सिटने फेंकने, गेरने,बगाने जैसे शब्द प्रयोग करता है | किसान में अभी तक यह आत्मविश्वास नही उपजा है कि वो अपनी फसल को अपने नाम से अपनी पहचान और ब्रांड के साथ मार्किट में उपलब्ध करा सके |
खेती का असली सार ही मंडी में छिपा है जहाँ से सारी अर्थव्यवस्था चलती है. खेती बाड़ी से जुड़े ज्यादातर महकमे और इदारे सिर्फ उत्पादन बढ़ाने का प्रयास करते रहते हैं खेतीबाड़ी सेक्टर में मार्केटिंग पक्ष को मजबूत करने के लिए देश में कोई ख़ास काम नहीं हुआ है | मंडियों के अंदर बेहद समझदार और चुस्त लोगों का एक नेटवर्क काम करता है जो सूचनाओं को एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने में माहिर होता है और उनकी यह समझदारी ही उनकी तरक्की का राज होती है |
विस्तार :
मंडी रेट्स प्रोजेक्ट किसानों में मंडी और फसलों के मंडीकरण की समझ को बढ़ाने के लिए शुरू किया गया एक प्रयास है | हम विभिन्न विश्वसनीय स्त्रोतों से पक्की सच्ची और सटीक सूचनाएं एकत्र करके उन्हें सरल समझ में आ सकने वाली भाषा में बदल कर किसान भाइयों तक पहुंचाने का जतन कर रहे हैं | सरकारें और उनके विभिन्न महक़मे करोड़ों रूपये खर्च करके छोटी छोटी सूचनाओं का संग्रह करके उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध करवाते हैं चूँकि इस काम में बहुत सारे विभाग अलग अलग स्तरों पर काम करते हैं जिसकी वजह से सूचनाएं इंटरनेट पर बिखरी छितरी अवस्था में उपलब्ध होती हैं |
यह प्रोजेक्ट की टीम इन सूचनाओं को एकत्र करती है और उन्हें सरल भाषा में बदल कर उन किसानों तक पहुंचाने का कार्य करती है जिनके लिए सूचनाएं सरकारी विभागों के द्वारा बनाई गयी थी इस प्रकार हम सरकार द्वारा किसानों के लिए किये जा रहे बड़े प्रयासों में एक स्पोर्ट सिस्टम की तरह से काम करते हैं|
यह पूरा कार्यक्रम पूर्णतया स्वायत: है और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है भविष्य में इसे ऑनलाइन विज्ञापनों की सहायता से मोनेटाईज करके इसकी सेवा का क्षेत्र बढ़ाने की योजना है | अभी फिलहाल हिंदी और पंजाबी लिपियों को सूचनाएं भेजने के लिए मंडी रेट्स प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है लेकिन आगे चलकर कन्नड़,तमिल,मलयालम, तेलगू ,मराठी,बांग्ला और उड़िया भाषाओँ को शामिल करने की योजना है |
हमारा प्रोजेक्ट ऐसे सभी किसानों की खोज करता है जिन्होंने अपनी सूझबूझ से अपने खेत के उत्पादों को बेचने के लिए नवाचार करने का प्रयास किया है ताकि उनसे सीख कर प्रबंधन के सूत्र निकाले जा सकें और उन्हें किसान समाज में बाँट कर उद्यमशीलता का माहौल देश में बनाया जाए ताकि हरेक किसान अपने लिए स्थानीय बाजार में जगह बना सके और अपनी खेती को लाभकारी बना कर खेती किसानी वाली उन्मुक्त रोगमुक्त जीवनशैली का आनंद ले सके |
KAMAL JEET SHOW
केरल में गर्मी की लहरों से मुकाबला की तैयारी
‘हीट रेसिलिएंट मूडादी’ परियोजना की शुरुआत
ग्राम पंचायत मूडादी की अनूठी शुरुआत
परिचय
केरल राज्य में बढ़ती गर्मी की लहरों (heatwaves) से निपटने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। यह परियोजना मूडादी पंचायत (Moodadi Panchayat) में लागू की जा रही है, जो कोझीकोड जिले (Kozhikode district) में स्थित है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर तापमान को नियंत्रित करना और भविष्य में आने वाली गर्मियों के लिए तैयारियां सुनिश्चित करना है। यह परियोजना जलवायु परिवर्तन (climate change) के प्रभावों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो समुदायों को सुरक्षित रखने पर केंद्रित है।
पृष्ठभूमि संदर्भ
केरल, जो आमतौर पर अपनी समशीतोष्ण जलवायु के लिए जाना जाता है, हाल के वर्षों में असामान्य रूप से उच्च तापमान का सामना कर रहा है। पिछले गर्मी के मौसम में राज्य के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जिससे लोगों को एयर कंडीशनर (air conditioners) जैसी ऊर्जा-गहन सुविधाओं पर निर्भर होना पड़ा। जलवायु परिवर्तन के वैश्विक संदर्भ में, भारत जैसे देशों में गर्मी की लहरें अधिक तीव्र और बार-बार हो रही हैं, जो स्वास्थ्य, कृषि और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैं। मूडादी पंचायत को जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला (Living Lab) के रूप में चुना गया है, जहां स्थानीय चुनौतियों का विश्लेषण करके समाधान विकसित किए जा रहे हैं। यह परियोजना पिछले डेढ़ वर्षों में विकसित की गई है और केरल में किसी स्थानीय स्वशासी निकाय द्वारा तैयार की गई पहली व्यापक गर्मी कार्रवाई योजना है।
परियोजना का विवरण
“हीट रेसिलिएंट मूडादी” (Heat Resilient Moodadi) नामक इस परियोजना को केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Kerala State Disaster Management Authority – KSDMA) द्वारा तैयार किया गया है। इसमें डॉ. जॉय इलामोन (Dr. Joy Ilamon), डॉ. शेखर कुरियाकोस (Dr. Shekhar Kuriakose) और फहद मसरूक (Fahad Masrook) जैसे विशेषज्ञों का योगदान रहा है। परियोजना का फोकस गर्मी से संबंधित जोखिमों की पहचान करना और रोकथाम तथा आपातकालीन उपायों को लागू करना है। इसमें स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, कृषि, शिक्षा और स्थानीय सरकार जैसे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया है।
कार्यान्वयन की रणनीतियां
परियोजना की शुरुआत पायलट चरण में मुचुकुन्नू वलिया माला (Muchukunnu Valiya Mala) और मुचुकुन्नू उत्तर आंगनवाड़ी (Muchukunnu North Anganwadi) से की गई है। आगे चलकर इसे सभी 32 आंगनवाड़ियों, पारिवारिक स्वास्थ्य केंद्रों (family health centers), उपकेंद्रों, पंचायत कार्यालयों और संबद्ध संस्थानों तक विस्तारित किया जाएगा। निजी संस्थानों को भी गर्मी प्रतिरोधी निर्माण प्रथाओं (heat-resilient construction practices) को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। निर्माण कार्यकर्ताओं और ठेकेदारों को गर्मी प्रतिरोधी तकनीकों पर दिशानिर्देश दिए जा रहे हैं, जैसे छतों पर गर्मी प्रतिबिंबित सामग्री और पेंट (heat-reflecting materials and paints), दीवारों पर बांस की बाड़ (bamboo barriers), तथा खिड़कियों और दरवाजों पर छाया प्रदान करने वाले उपाय जो हवा के संचालन को बेहतर बनाते हैं। इसके अलावा, तीव्र गर्मी के दौरान निवासियों के लिए सुरक्षित स्थान के रूप में “कूलिंग पवेलियन” (cooling pavilions) स्थापित किए जा रहे हैं।
अपेक्षित लाभ और प्रभाव
यह परियोजना केरल के समुदायों को बढ़ती गर्मी की लहरों से बचाने में मदद करेगी और अन्य पंचायतों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगी। स्थानीय स्तर पर तापमान नियंत्रण से ऊर्जा की बचत होगी और पर्यावरण-अनुकूल समाधान अपनाए जाएंगे। समुदाय की जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षा उपायों के माध्यम से, यह योजना स्वास्थ्य जोखिमों को कम करेगी तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन (resilience) विकसित करेगी। जिला स्तर की समिति ने इसकी सराहना की है, जो इसे एक नवाचारी प्रयास मानती है।
6 months ago | [YT] | 1
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KAMAL JEET SHOW
Question: Consider the following statements for invasive alien species...
1. Invasive alien species are mainly responsible for biodiversity loss and extinction.
2. They do crop losses.
3. They contribute to climate changes.
4. They contribute to pollution.
How many of the above statements are correct?
a. Only one
b. Only two
c. Only three
d. All four
2 years ago | [YT] | 5
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KAMAL JEET SHOW
www.greenalerts.in/
यह एक ऐसा अनूठा वेबपोर्टल है जो किसानों के बहुत काम आ सकता है इस पोर्टल पर मात्र तीन क्लिक में आप अपनी ब्लाक पंचायत स्तर का मौसम का पूर्वानुमान जान सकते हैं वो भी अपनी स्थानीय भाषा में
सबसे पहली लाइन में आपको बताया जाता है कि आपके इलाके में अगले पांच दिनों में कुल कितने मिलीमीटर वर्षा होने का पूर्वानुमान है
इस जानकारी की मदद से आप यह यह फैंसला कर सकते हैं कि आपने सिंचाई के लिए खर्चा करना भी है या नहीं यदि ठीक ठाक वर्षा की संभावना है तो सिंचाई में लगने वाले श्रम और खर्च को बचाया जा सकता है इसके साथ यदि अनजाने में आप सिंचाई कर बैठते और ऊपर से राम जी बरस जाता तो डबल नुक्सान होने की संभावना हो जाती है
यदि आपको रासयनिक इनपुट खेतों में छिड़कने हैं तो उसके लिए आपको सूखा समय चाहिए होता है उसका पता भी इस पोर्टल से बड़ी ही आसानी से लगाया जा सकता है
किसान भाई इस लिंक को सेव करके रख लें और समय समय पर प्रयोग करके देखते रहें ऐसा करने से उनके धन और श्रम की बचत होगी
इस वेबपोर्टल को भारत सरकार के तीन मंत्रालयों और साईंलेक्स सॉफ्टवेयर्स संयुक्त सहयोग से भारत सरकार की पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप नीति के तहत विकसित किया गया है
इसकी पहुँच हरेक ग्राम पंचायत के सरपंच और पंचायत सेक्रेट्री तक करने के लिए किसान संचार एक बहुत वृहद् योजना कर कार्य कर रहा है
धन्यवाद सहित
कमल जीत
निदेशक
किसान संचार भारत
2 years ago | [YT] | 2
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KAMAL JEET SHOW
Haryana Rajasthan Mandi Bhav 26 August 2023
2 years ago | [YT] | 1
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KAMAL JEET SHOW
www.greenalerts.in
2 years ago | [YT] | 1
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KAMAL JEET SHOW
आज का मंडी भाव 11 सितंबर 2022
www.mandirates.in/mandibhav/mandi-bhav-today-11-se…
3 years ago | [YT] | 0
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KAMAL JEET SHOW
www.mandirates.in/international/pradhanmantri-fasa…
3 years ago | [YT] | 0
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KAMAL JEET SHOW
नमस्कार
आज का मंडी रेट्स बुलेटिन आपकी सेवा में प्रस्तुत है।
www.mandirates.in/krishi-samachar-and-mandi-rates-…
धन्यवाद सहित
कमल जीत
4 years ago | [YT] | 0
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KAMAL JEET SHOW
कृषि समाचार एवं मंडी रेट्स बुलेटिन 20 अक्टूबर 2021
www.mandirates.in/krishi-samachar-and-mandi-rates-…
4 years ago | [YT] | 0
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KAMAL JEET SHOW
विषय : हमारा नया प्रोजेक्ट : www.mandirates.in
साथियों नमस्कार ,
मंडी एक ऐसा शब्द है जिसे सुन कर किसान भागता है | आजादी के सत्तर साल के बाद भी आज किसान जब भी अपनी फसल बेचने के बारे में बात करता है तो वो सिटने फेंकने, गेरने,बगाने जैसे शब्द प्रयोग करता है | किसान में अभी तक यह आत्मविश्वास नही उपजा है कि वो अपनी फसल को अपने नाम से अपनी पहचान और ब्रांड के साथ मार्किट में उपलब्ध करा सके |
खेती का असली सार ही मंडी में छिपा है जहाँ से सारी अर्थव्यवस्था चलती है. खेती बाड़ी से जुड़े ज्यादातर महकमे और इदारे सिर्फ उत्पादन बढ़ाने का प्रयास करते रहते हैं खेतीबाड़ी सेक्टर में मार्केटिंग पक्ष को मजबूत करने के लिए देश में कोई ख़ास काम नहीं हुआ है | मंडियों के अंदर बेहद समझदार और चुस्त लोगों का एक नेटवर्क काम करता है जो सूचनाओं को एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने में माहिर होता है और उनकी यह समझदारी ही उनकी तरक्की का राज होती है |
विस्तार :
मंडी रेट्स प्रोजेक्ट किसानों में मंडी और फसलों के मंडीकरण की समझ को बढ़ाने के लिए शुरू किया गया एक प्रयास है | हम विभिन्न विश्वसनीय स्त्रोतों से पक्की सच्ची और सटीक सूचनाएं एकत्र करके उन्हें सरल समझ में आ सकने वाली भाषा में बदल कर किसान भाइयों तक पहुंचाने का जतन कर रहे हैं | सरकारें और उनके विभिन्न महक़मे करोड़ों रूपये खर्च करके छोटी छोटी सूचनाओं का संग्रह करके उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध करवाते हैं चूँकि इस काम में बहुत सारे विभाग अलग अलग स्तरों पर काम करते हैं जिसकी वजह से सूचनाएं इंटरनेट पर बिखरी छितरी अवस्था में उपलब्ध होती हैं |
यह प्रोजेक्ट की टीम इन सूचनाओं को एकत्र करती है और उन्हें सरल भाषा में बदल कर उन किसानों तक पहुंचाने का कार्य करती है जिनके लिए सूचनाएं सरकारी विभागों के द्वारा बनाई गयी थी इस प्रकार हम सरकार द्वारा किसानों के लिए किये जा रहे बड़े प्रयासों में एक स्पोर्ट सिस्टम की तरह से काम करते हैं|
यह पूरा कार्यक्रम पूर्णतया स्वायत: है और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है भविष्य में इसे ऑनलाइन विज्ञापनों की सहायता से मोनेटाईज करके इसकी सेवा का क्षेत्र बढ़ाने की योजना है | अभी फिलहाल हिंदी और पंजाबी लिपियों को सूचनाएं भेजने के लिए मंडी रेट्स प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है लेकिन आगे चलकर कन्नड़,तमिल,मलयालम, तेलगू ,मराठी,बांग्ला और उड़िया भाषाओँ को शामिल करने की योजना है |
हमारा प्रोजेक्ट ऐसे सभी किसानों की खोज करता है जिन्होंने अपनी सूझबूझ से अपने खेत के उत्पादों को बेचने के लिए नवाचार करने का प्रयास किया है ताकि उनसे सीख कर प्रबंधन के सूत्र निकाले जा सकें और उन्हें किसान समाज में बाँट कर उद्यमशीलता का माहौल देश में बनाया जाए ताकि हरेक किसान अपने लिए स्थानीय बाजार में जगह बना सके और अपनी खेती को लाभकारी बना कर खेती किसानी वाली उन्मुक्त रोगमुक्त जीवनशैली का आनंद ले सके |
अधिक जानकारी के लिए विजिट करें www.mandirates.in
4 years ago (edited) | [YT] | 2
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