दोहा ॥

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

वरनऊँ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार।

बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥Jai shri ram Jai Bajrangbali 🙏🌺💐🪷🌷🪷🌷💐🌺🙏🪷🌷💐🌺🙏