छत्तीसगढ़ के कांकेर के गाँव साल्हेभाट में जन्मी इस कलाकार के पिता का नाम तुलसी राम रामटेके और माता का नाम गीतादेवी है। पढ़ाई के दौरान मंजू अपने गुरुजनों के मार्गदर्शन में लोक संस्कृति से जुड़ी हुई लोक विधा के तहत धार्मिक ग्रंथों के कथाओं को पंडवानी के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने सहयोग प्रदान कर रहे है । मंजू पंडवानी गायन के क्षेत्र में बचपन से जुड़ी हुई हैं और इस कला के क्षेत्र में उन्हें देशभर में अंकुर सम्मान दिया गया है ।पद्म भूषण से सम्मानित तीजन बाई की मार्गदर्शन शुरू से मिल रही है इसीलिए तीजन बाई की शिष्या भी कहा जाता है इस अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर लोगों का लगातार प्यार मिल रहा है मंजू पंडवानी गायिका १३ वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया है।
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