Ek Kadam Ujaale ki oor

मानव जो कि ईश्वर की श्रेष्ठतम कृति है, आज जीवन की छोटी छोटी सी चुनौतियों, छोटी छोटी सी समस्याओं से घबरा कर अत्यधिक अवसाद ग्रसित हो जाता है| धैर्य हीन मनुष्य अपनी परेशानियों का समाधान न ढूंढ पाने की वजह से और अवसाद से निकल न पाने की वजह से अपने जीवन को ही समाप्ति की ओर ले जाता है।
जिन्दगी की ओहापोह में उलझा मनुष्य अपने जीवन के वास्तविक उददेश्य तक को भुल बैठता है। अपनी जिम्मेदारियों तक से मुँह मोड़ लेने में तनिक भी संकोच नहीं करता।
ये आज के समाज का एक सोचनीय विषय बनता जा रहा है। हमारे युवा सबसे अधिक इसकी चपेट में आते जा रहे हैं।
हारे हुए जीवन को नये उत्साह और उम्मीद से भरना हम सब का कर्तव्य है , जिसे हमें अपने जीवन की प्राथमिकता बनाना होगा।
मानव जीवन के आदर्शों को अपने जीवन में अंगीकार करते हुए जीवन पथ पर चलते जाना और कदम दर कदम उजाले की ओर बढ़ते जाना ही हमारा उददेश्य बन जाये, इसी में मानव जीवन की सार्थकता है ।