मीडिया के जानकार पंडितों ने मीडिया को अपने अनुभव के हिसाब से परिभाषित किया है । कोई इसे समाज का दर्पण कहता है, तो कोई इसे समाज, संस्कृति और राजनीति का मिला जुला रूप, ये सही भी है ।

इसलिए ‘फांटाबुलस ’ का मानना है कि ‘समाज में फैली अराजकता, संस्कृति में व्याप्त कुरीतियां और राजनीति का ओछापन भी मीडिया का ही हिस्सा हो जाता है’

हम आपको समाज, संस्कृति और राजनीति के हर पहलू को दिखाएंगे साथ ही साथ ये भी बताएंगे, कि हमारे लिए क्या अच्छा है । हम उन विषयों पर भी बहस करेंगे जिससे समाज बचता आया है ।
हम इंसान की मानसिकता को भी उजागर करेंगे । हम जानते हैं कि हमारी सोच क्या है क्योंकि हम समाज हैं, हम संस्कृति हैं, हम राजनीति और हम ही इंसान हैं ।

राजनीति की उठक-पठक तो दिखाएंगे ही साथ में रणनीति भी बनाएंगे । हम आपको हंसाएगे, समझाएंगे, सिखाएंगे, मनोरंजित करेंगे । इस भागम-भाग भरी जिंदगी के बीच में दबे उस बचपने को बाहर निकाल कर शरारतों की सारी हदें पार करके उस रोचकता की तरफ ले जाएंगे, जिसे हम महसूस करते हैं क्योंकि हम इंसान हैं ।