हां,मैं किसी "नएं की शुरुआत" हूं, लेकिन किसी "नएं धर्म" की नहीं। मैं एक तरह की "नई धार्मिकता" की शुरुआत हूं, जिसकी कोई सीमा नहीं, जिसका संबंध केवल और केवल "आत्मा की स्वतंत्रता", "आंतरिक मौन" और "आंतरिक शक्ति का विकास" करने से है।
जिसका "मकसद" तुम्हे तुम्हारे "बाहर के भगवान" का नहीं बल्कि "भीतर की भगवता" का अनुभव करवाना है।