Rashtra Sevika Samiti

भारतिय समाज रचना का ताना बाना ब्रह्ममयी चैतन्य शक्ति के अंशरूप नारी अस्तित्त्व से चारो तरफ बुना हुआ दिखाई देता है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने समाज धारणा के लिए नारी की सुप्त शक्तियोंको आधार रूप माना है। हम देखते है की प्रत्येक कार्य में शक्ति आंतरनिहीत होती है। उस शक्ति का जागरण करते हुए, शक्ति को संघटित करते हुए, उसे राष्ट्र निर्माण कार्य में लगाने का विलक्षण ध्येय अधुनिक ऋषिका वं. मौसीजी ने अपने सामने रखा और उस उद्देश की पूर्ति हेतू राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना की।