अखंड ज्योति जला ज्ञान का
तिमिर नाश कर, प्रकाश भर देता।
शिक्षक वह पारस पत्थर है जो
पत्थर को भी कुंदन कर देता ।।
ज्ञान हीन अबोध मस्तक में
विनय- शील-गुण- तप भर देता ।
दीपक पुंज स्वत: बनकर वह
जीवन ज्योतिर्मय कर देता ।।
'गुरु' तो ईश्वर से भी गुरूतर
सत जीवन सिखलाने वाला ।
सीख दया -धर्म की देकर
सत्य मार्ग दिखलाने वाला ।।
गुरु कुम्हार, शिष्य घट सम है
मन तराश निर्मल कर देता ।
डांट-डपट-अनुशासन देकर
खुशियों का मधुबन है देता ।।
नमन करें उस ईश तुल्य को
जिसने जीवन सफल बनाया ।
मोम सदृश खुद को पिघलाकर
हमको सच्ची राह दिखाया ।।