“जा पर कृपा राम की होई। ता पर कृपा करें सब कोई।।”
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'ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥'
अर्थात: अंजना और वायु देव के पुत्र, भगवान हनुमान से हमारी प्रार्थना है, कि हनमुन हमारी बुद्धि को सही दिशा प्रदान करें, हम आप से प्रार्थना करते हैं।
'अन्तकाल रघुवरपूर जाईं, जहां हरिभक्त कहाई
और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई।।'
अर्थात कलियुग में मात्र हनुमान जी का ध्यान भर कर लेनें से सारे दुखों, कष्टों और पीड़ाओं का अंत हो जाता है, क्योंकि वे आज भी जीवित, जागृत अवस्था में हमारें बीच विद्यमान हैं।
'सतयुग में पावन रूप में सजीव रूप से विद्यमान हनुमान जी को शिव रूप में पूजा जाता था और वे भगवान् शिव के आठ रुद्रावतारों में शंकर सुवन केसरी नन्दन के रूप में कहलाये जाते थे।'
निवेदन :- शिव गंगा मंदिर सुंदरकांड परिवार।।
किसी भी तरह की त्रुटिओं एवं भूलों के लिए क्षमा प्रार्थी हैं ।
🚩ॐ श्री हनुमते नमः🚩
🚩जय सिया राम🚩
आषुतोष शशांक शेखर चंद्रमौली चिदंबरा। कोटि-कोटि प्रणाम शंभू कोटि नमन दिगम्बरा।।
🕉️🚩🚩🚩
"ओम वसुधरे स्वाहा"
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