श्री वीर हनुमान सहेलीनगर धाम उदयपुर राजस्थान

उदयपुर शहर के सहेलियो की बाड़ी के निकट हनुमानजी की अति प्राचीन प्रतिमा है इसके बारे में कहा जाता है कि उदयपुर बसने से भी पहले यहां पर हनुमानजी की प्रतिमा अस्तित्व में थी जो की स्वयंभू प्रतिमा है कई साल पहले एक भक्त को हनुमानजी ने साधु वेश में सपने में जाकर यहां एक प्रतिमा होने का प्रमाण दिया जब उसने यहां बड़े बड़े थोर की झाड़ियो को हटाया तब यहां एक आदमकद दिव्य प्रतिमा प्रकट हुई उसके बाद गोवर्धन सिंह जी जो कि दाता हुकम के नाम से जाने गए उनकी भक्ति और सादगी से उनके समय मे मंदिर की महिमा काफी दूर दूर तक फैली फिर उनके देवलोक गमन के बाद उनके ज्येठ पुत्र पदम् सिंह जी राठौड़ ने अपने पिता की तरह ही अपना जीवन हनुमानजी की सेवा में अर्पित कर दिया और उनके द्वारा यहां अखण्ड धूणी बनाई गई पिता पुत्र की निश्चल भक्ति से मंदिर की ख्याति दूर दूर तक फैलने लगी और आज मंदिर में काफी दूर दूर से दर्शनाभिलाषी अपनी मनोकामनाये लेकर आते है रोज़ सुबह और शाम दोनो समय तय समय मे आरती होती है
यहां एक अखण्ड धूणी भी है जिसमे दाता हुकम श्री पदम् सिंह जी द्वारा भक्तो के हित हेतु रोजाना हवन किया जाता है