ऐ जलालुद्दीन रूमी शाह, जाने अंजुमन
तेरी बज़्में दिल में है मसनद नशी ख़्वाजा हसन
तेरी हस्ती बन गई है यादें अस्लाफे कोहन
साया अफ़गन तुझपे है जिल्ले शहंशाहे जमन
इश्क़ की जलवागरी अब तेरे अफसाने में है
रौशनी ही रौशनी अब तेरे अफसाने में है
तेरे अफकारो नजायर का अजब अफसाना है
तेरी नजरों में समाया जलवाये जानाना है
तेरा दिल अब इस सरापा नाज़ का काशाना है
एक ज़माना आज तेरे हुस्न का दीवाना है
तेरी सूरत का तसव्वुर इस कदर है जौफिशा
सैकड़ों जलवे नजर आए जमी व आसमान
तेरे नग्मो में तेरे साजे सुखन की बात है
इब्तेदा ता इंतेहा राजे सुखन की बात है
जौके उल्फत में ये परवाजे सुखन की बात है
मरहबा क्या खूब एजाज़ ए सुखन की बात है
मदभरी आंखो में मयखाने फिदा होने लगे
तुझपे साकी जाम ओ पैमाने फिदा होने लगे
अहले अक्लो होशो फरजाने फिदा होने लगे
शाने महबूबी पे दीवाने फिदा होने लगे
एक हुजूमें आशिका है आस्ताने पर तेरे
एक ज़माना रक्श करता है ज़माने पर तेरे
अब सबक लेगा जमाना तेरे सुब्हो शाम से
दर्श दुनिया को मिलेगा इश्क़ के पैगाम से
तुने मतवाला बनाया है नज़र के जाम से
है मोहब्बत तेरे 'सादिक' को भी तेरे नाम से