‘नई धारा’ एक द्विमासिक पत्रिका है, जिसका प्रकाशन अप्रैल, 1950 से निरंतर हो रहा है। ‘नई धारा’ अपने समय और संस्कृति की प्रगतिशील चेतना से रचनात्मक संवाद का साहित्यिक दस्तावेज़ है, जिसकी विकास यात्रा भारत की साहित्यिक पत्रकारिता के समानान्तर रही और जिसके प्रेरणास्रोत राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह, रामवृक्ष बेनीपुरी, आचार्य शिवपूजन सहाय, उदयराज सिंह आदि रहे।

'नई धारा' अब एक डिजिटल स्वरुप में भी प्रस्तुत है। एक उत्तम व सरल ऑनलाइन प्लेटफार्म के रूप में 'नई धारा' वेबसाइट साहित्य प्रेमियों को हिंदी की उत्कृष्ट रचनाओं और उनके लेखकों से जोड़ने का काम करेगी। इसके अलावा 'नई धारा' सभी प्रमुख सोशल मीडिया मंचों पर भी उपलब्ध है और विभिन्न प्रकार की मल्टीमीडिया प्रस्तुतियों द्वारा हिंदी साहित्य के सौंदर्य को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।



Nayi Dhara

जो गुडविन एक प्रतिभाशाली फिल्म निर्माता और रचनात्मक निर्देशक हैं, जिन्होंने प्रतिष्ठित London Film School से शिक्षा प्राप्त की है। वे मुख्य रूप से विज्ञापनों, संगीत वीडियो और शॉर्ट फिल्मों के निर्देशन के लिए जाने जाते हैं, जहाँ उनकी विजुअल स्टोरीटेलिंग और बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों और कलाकारों के साथ मिलकर काम किया है, जिससे उन्हें फिल्म जगत में एक खास पहचान मिली है। उनकी रचनात्मक शैली और तकनीकी कौशल उन्हें आधुनिक निर्देशकों की कतार में एक प्रभावशाली नाम बनाते हैं।

5 days ago | [YT] | 57

Nayi Dhara

गजानन माधव मुक्तिबोध हिन्दी के समादृत आधुनिक कवि, कथाकार और आलोचक हैं। मुक्तिबोध की कविता आत्मसंघर्ष, बौद्धिक बेचैनी और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध वैचारिक प्रतिरोध की अभिव्यक्ति है। 'अँधेरे में' उनकी सबसे प्रसिद्ध कविता है, जो आधुनिक मनुष्य की नैतिक और वैचारिक उलझनों को गहराई से उजागर करती है। वे प्रगतिशील विचारधारा से जुड़े रहे, लेकिन उनका लेखन नारेबाज़ी से अधिक आत्मालोचन और विचार-संकट का साहित्य है। उनकी मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार में एम. एफ. हुसैन भी शामिल हुए थे और कहा जाता है कि उसके बाद उन्होंने कभी चप्पल नहीं पहनी—यह घटना मुक्तिबोध के प्रति कला-जगत के गहरे सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। यह कहना अतिरेक नहीं होगा कि मुक्तिबोध को पढ़े बग़ैर हिंदी साहित्य का अध्ययन अधूरा है।

5 days ago | [YT] | 93

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गोएटे जर्मन साहित्य के सबसे महान और बहुआयामी रचनाकारों में माने जाते हैं। वे कवि, नाटककार, उपन्यासकार और दार्शनिक—सभी रूपों में सक्रिय रहे। उनकी कृति फ़ाउस्ट विश्व साहित्य की सर्वाधिक महत्वपूर्ण रचनाओं में गिनी जाती है, जिसमें ज्ञान, सत्ता और मानव आकांक्षा के द्वंद्व का गहन चित्रण मिलता है। यंग वेर्थर के दुख ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई। गोएटे का लेखन रोमांटिक भावुकता और बौद्धिक चिंतन के संतुलन का उदाहरण है। वे प्रकृति विज्ञान, कला-दर्शन और सौंदर्यशास्त्र में भी गहरी रुचि रखते थे। गोएटे ने यूरोपीय साहित्य को आधुनिक आत्मचेतना और मानवीय दृष्टि प्रदान की।

5 days ago | [YT] | 43

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रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी साहित्य में आलोचना को नई दिशा देने वाले साहित्यकार थे। उन्हें हिन्दी साहित्य का पहला वैज्ञानिक और व्यवस्थित इतिहासकार माना जाता है। उनकी प्रसिद्ध कृति हिन्दी साहित्य का इतिहास ने साहित्य अध्ययन को ठोस वैचारिक और आलोचनात्मक आधार दिया। शुक्ल जी ने कविता को लोकजीवन, सामाजिक चेतना और मानवीय अनुभवों से जोड़कर देखने की परंपरा स्थापित की। उनका मानना था कि साहित्य केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि समाज की नैतिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतिबिंब होता है। ‘रस सिद्धांत’ और ‘लोकमंगल’ की अवधारणा उनके आलोचनात्मक दृष्टिकोण की पहचान है। रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी आलोचना को भावुकता से निकालकर विचार और विवेक की दिशा में अग्रसर किया।

5 days ago | [YT] | 78

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एंटोन चेखव रूसी साहित्य के महान कथाकार और नाटककार माने जाते हैं। उनका जन्म 29 जनवरी 1860 को रूस में हुआ था। उनकी कहानियों की खास पहचान सूक्ष्म यथार्थ, मानवीय संवेदना और जीवन की साधारण घटनाओं में छिपे गहरे अर्थ हैं। चेख़व बड़े नाटकीय मोड़ों के बजाय छोटे क्षणों, अधूरे रिश्तों और भीतर के अकेलेपन को केंद्र में रखते हैं। द लेडी विद द डॉग, द स्टेप, थ्री सिस्टर्स और द चेरी ऑर्चर्ड जैसी रचनाएँ उनके साहित्यिक कौशल का उदाहरण हैं।

1 week ago | [YT] | 77

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30 जनवरी भारतीय इतिहास के पन्नों पर एक काले दिन के रूप में दर्ज है। वह देश जहाँ न जाने कितनी नैतिक किताबें लिखी गईं, उसी की भूमि पर एक ऐसे शख़्स की हत्या कर दी गई, जिन्होंने संसार को सत्य और अहिंसा का महत्व समझाया। आज महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि है। वे कल भी प्रासंगिक थे आज भी हैं और कल भी रहेंगे। नमन!

1 week ago | [YT] | 28

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कृष्णा सोबती का जन्म 18 फरवरी 1925 में गुजरात (अब पकिस्तान में) में हुआ। उन्होंने अपनी साहित्य यात्रा की शुरुआत कहानी लेखन से की। उनकी कहानियों में देश-विभाजन और मनुष्य के जीवन के नाते-रिश्तों की पड़ताल नज़र आती है। उनकी सम्मोहक शैली और सुन्दर भाषा की मिसाल हिन्दी गद्य में अन्यत्र देखने को नहीं मिलती।

1 week ago | [YT] | 98

Nayi Dhara

अज़र नफ़ीसी ईरानी-अमेरिकी लेखिका और शिक्षाविद् हैं। वे अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Reading Lolita in Tehran के लिए जानी जाती हैं। इसमें ईरान में महिलाओं के जीवन, पढ़ने की स्वतंत्रता और साहित्य की भूमिका पर गहरा प्रकाश डाला गया है। उनके लेखन में साहित्य और राजनीति का आपसी संबंध स्पष्ट दिखाई देता है। वे यह दिखाती हैं कि कैसे किताबें दमन और नियंत्रण के बीच भी सोचने की जगह बना सकती हैं। अज़र नफ़ीसी का लेखन स्वतंत्रता, स्मृति और स्त्री अनुभव की एक सशक्त आवाज़ है।

1 week ago | [YT] | 39

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कमलेश्वर हिन्दी के प्रमुख कथाकार, उपन्यासकार और संपादक थे। उनके लेखन में समकालीन समाज, राजनीति और मध्यवर्गीय जीवन की उलझनें स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। वे नई कहानी आंदोलन से जुड़े रहे और उन्होंने कथा साहित्य को आधुनिक संवेदना और समय के सवालों से जोड़ा। 'कितने पकिस्तान' उपन्यास के लिए उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान से पुरस्कृत किया गया साथ ही वर्ष 2005 में उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया।

1 week ago | [YT] | 49

Nayi Dhara

अंचित हमारे समय के युवा कवि हैं। वे अपनी कविताओं के ज़रिए हिन्दी साहित्य में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

1 week ago | [YT] | 52