‘नई धारा’ एक द्विमासिक पत्रिका है, जिसका प्रकाशन अप्रैल, 1950 से निरंतर हो रहा है। ‘नई धारा’ अपने समय और संस्कृति की प्रगतिशील चेतना से रचनात्मक संवाद का साहित्यिक दस्तावेज़ है, जिसकी विकास यात्रा भारत की साहित्यिक पत्रकारिता के समानान्तर रही और जिसके प्रेरणास्रोत राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह, रामवृक्ष बेनीपुरी, आचार्य शिवपूजन सहाय, उदयराज सिंह आदि रहे।
'नई धारा' अब एक डिजिटल स्वरुप में भी प्रस्तुत है। एक उत्तम व सरल ऑनलाइन प्लेटफार्म के रूप में 'नई धारा' वेबसाइट साहित्य प्रेमियों को हिंदी की उत्कृष्ट रचनाओं और उनके लेखकों से जोड़ने का काम करेगी। इसके अलावा 'नई धारा' सभी प्रमुख सोशल मीडिया मंचों पर भी उपलब्ध है और विभिन्न प्रकार की मल्टीमीडिया प्रस्तुतियों द्वारा हिंदी साहित्य के सौंदर्य को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
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Naihare Se Bhaiya Nahin Aile Ho Rama | Urmila Srivastava | Chaiti | नइहरे से भइया नाहीं अइले हो रामा
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