‘नई धारा’ एक द्विमासिक पत्रिका है, जिसका प्रकाशन अप्रैल, 1950 से निरंतर हो रहा है। ‘नई धारा’ अपने समय और संस्कृति की प्रगतिशील चेतना से रचनात्मक संवाद का साहित्यिक दस्तावेज़ है, जिसकी विकास यात्रा भारत की साहित्यिक पत्रकारिता के समानान्तर रही और जिसके प्रेरणास्रोत राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह, रामवृक्ष बेनीपुरी, आचार्य शिवपूजन सहाय, उदयराज सिंह आदि रहे।
'नई धारा' अब एक डिजिटल स्वरुप में भी प्रस्तुत है। एक उत्तम व सरल ऑनलाइन प्लेटफार्म के रूप में 'नई धारा' वेबसाइट साहित्य प्रेमियों को हिंदी की उत्कृष्ट रचनाओं और उनके लेखकों से जोड़ने का काम करेगी। इसके अलावा 'नई धारा' सभी प्रमुख सोशल मीडिया मंचों पर भी उपलब्ध है और विभिन्न प्रकार की मल्टीमीडिया प्रस्तुतियों द्वारा हिंदी साहित्य के सौंदर्य को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
Nayi Dhara
हिंदी कथा-साहित्य की साठोत्तरी पीढ़ी के रचनाकार और ‘पहल’ पत्रिका के संपादक ज्ञानरंजन का न रहना हिंदी के एक अभिभावक का खो जाना है। ‘फेन्स के इधर और उधर’, ‘घंटा’, ‘बहिर्गमन’, ‘अमरूद’ और ‘पिता’ जैसी कहानियां हमारे समय की नैतिक दरारों के दस्तावेज़ हैं। ‘पहल’ पत्रिका के संपादक के रूप में उन्होंने साहित्य के ‘प्रगतिशील और वैचारिक विकास’ के लिए न सिर्फ हिंदी की नई और असुविधाजनक आवाज़ों को निर्भय मंच दिया बल्कि दुनिया भर के महान साहित्य को हिंदी में लेकर आये। ‘नई धारा’ की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
5 days ago | [YT] | 94
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Nayi Dhara
पर्यावरण चिंतन की भारतीय पारिस्थितिकी आंदोलन की पीढ़ी के अग्रणी वैज्ञानिक और बौद्धिक माधव गाडगिल का हमारे बीच से जाना, ज्ञान और नैतिक साहस की एक पूरी परंपरा का मौन हो जाना है। उन्होंने भारतीय पर्यावरण को केवल संसाधन नहीं, बल्कि समुदायों, संस्कृतियों और जैव-विविधता से जुड़े जीवित तंत्र के रूप में समझने की दृष्टि विकसित की। पश्चिमी घाट संरक्षण पर उनकी ऐतिहासिक रिपोर्ट ने विकास और संरक्षण के बीच के झूठे द्वंद्व को पहली बार गहराई से चुनौती दी। शिक्षक और जनबुद्धिजीवी के रूप में वे विज्ञान को अकादमिक कक्षाओं से निकालकर ग्रामसभाओं और आम नागरिकों तक ले गए। भारत का पर्यावरण विमर्श माधव गाडगिल के साहसिक, लोकतांत्रिक और संवेदनशील अवदान के बिना अधूरा है। उन्हें सादर श्रद्धांजलि।
5 days ago | [YT] | 102
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Nayi Dhara
मोहन राकेश हिन्दी के प्रमुख कथाकार और नाटककार थे, जिनका नई कहानी आन्दोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके लेखन में शहरी मध्यवर्ग की मानसिक उलझनें, अधूरे रिश्ते और व्यक्ति की आंतरिक बेचैनी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो नई कहानी की मूल संवेदना थी। आषाढ़ का एक दिन, आधे-अधूरे और लहरों के राजहंस जैसी कृतियों के माध्यम से उन्होंने परंपरा और आधुनिकता के टकराव को मानवीय दृष्टि से प्रस्तुत किया। आज उनकी जयंती है। उन्हें नमन!
5 days ago | [YT] | 92
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Nayi Dhara
स्वतंत्र अस्तित्व के लिए आत्म-प्रेम भी अतिआवश्यक है। यह हमारा आत्मविश्वास बढ़ाता है, बस हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि आत्म-प्रेम आत्ममुग्धता में न बदल जाए।
1 week ago | [YT] | 70
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Nayi Dhara
नई हिन्दी कहानी के सशक्त हस्ताक्षर कमलेश्वर की रचनाएँ आधुनिक मानव-जीवन के उन पहलुओं को उजागर करती हैं, हम जिन्हें अपनाने से कतराते हैं। उन्होंने कहानी और उपन्यास लिखने के साथ-साथ फ़िल्म और दूरदर्शन के लिए स्क्रिप्ट और संवाद लेखन का भी काम किया। कालांतर में वे दूरदर्शन के अतिरिक्त महानिदेशक भी बने। आज उनकी जयंती है और इस मौक़े पर हम उन्हें याद करते हैं।
1 week ago | [YT] | 58
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Nayi Dhara
मार्कण्डेय हिन्दी के महत्वपूर्ण कथाकारों में गिने जाते हैं, जिनकी कहानियाँ ग्रामीण जीवन, सामाजिक यथार्थ और मनुष्य की आंतरिक संघर्षों को सादगी और संवेदना के साथ प्रस्तुत करती हैं। उनकी रचनाओं में गाँव का जीवन किसी रोमानी कल्पना की तरह नहीं, बल्कि अपने पूरे तनाव, विषमता और मानवीय संबंधों के साथ सामने आता है। वे शोषण, गरीबी, जातिगत संरचनाओं और बदलते सामाजिक मूल्यों को सहज कथ्य और संयत भाषा में व्यक्त करते हैं। उनका लेखन हिन्दी कहानी परंपरा में एक यथार्थवादी और प्रभावशाली हस्तक्षेप के रूप में स्थापित होता है।
1 week ago | [YT] | 19
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Nayi Dhara
कथा, आलोचना, संपादन और पत्रकारिता में सक्रिय अविनाश मिश्र हमारे समय के सशक्त साहित्यकारों में हैं। उन्होंने अपने जीवन को लेखन का पर्याय बनाया है। ‘अज्ञातवास की कविताएँ’ उनका पहला काव्य-संग्रह था। उनकी कविताओं में मध्यमवर्गीय जीवन की पेचीदगियाँ होने के साथ-साथ प्रेम के कई आयाम भी नज़र आते हैं। आज उनका जन्म दिन है। उन्हें अशेष शुभकामनाएँ।
1 week ago | [YT] | 74
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Nayi Dhara
भीष्म साहनी इतिहास और समकालीन समाज को साधारण मनुष्यों के अनुभवों के माध्यम से देखते हैं। उनकी रचनाओं में साम्प्रदायिकता, सत्ता, विस्थापन, भय और नैतिक संकट जैसे विषय बिना शोर और नाटकीयता के सामने आते हैं। उनकी भाषा सरल, संयत और प्रभावी है, जिससे पात्र और घटनाएँ विश्वसनीय लगती हैं। तमस, वाङ्चू और हानूश जैसी रचनाओं में व्यक्ति और व्यवस्था के टकराव को उन्होंने संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है, जो उन्हें हिंदी साहित्य का एक भरोसेमंद यथार्थवादी लेखक बनाता है।
1 week ago | [YT] | 22
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Nayi Dhara
हिंदी के सुप्रतिष्ठित कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु को आंचलिक साहित्य का प्रतिनिधि लेखक माना जाता है। उनकी रचनाओं में बिहार के ग्रामीण जीवन, लोकसंस्कृति और बोली-भाषा की सजीव उपस्थिति दिखाई देती है। ‘रसप्रिया’ उनकी सुप्रसिद्ध कहानी है, जिसमें लोकजीवन की सहज संवेदना और प्रेम की पीड़ा चित्रित है। यह कथा परंपरा, सामाजिक बंधनों और व्यक्तिगत भावनाओं के टकराव को सामने लाती है। सरल भाषा और लोक-स्पर्श के कारण यह कहानी पाठकों पर अमिट छाप छोड़ती है।
1 week ago | [YT] | 52
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Nayi Dhara
सावित्रीबाई फुले भारतीय समाज के जकड़नों को तोड़ने वाली समाज सुधारक थीं। उन्होंने स्त्री शिक्षा और सामाजिक समानता के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई।ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर उन्होंने लड़कियों और दलित समाज के लिए विद्यालय स्थापित किए, जिसकी वजह से उन्हें विरोध का भी सामना करना पड़ा। अपमान, बहिष्कार और बाधाओं के बावजूद वे शिक्षा को परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानती रहीं। उनका जीवन साहस, सामाजिक प्रतिबद्धता और समानता के संघर्ष का प्रतीक है। जयंती पर सादर नमन!
1 week ago | [YT] | 61
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