यह संगठन किसी भी दलगत राजनैतिक पार्टी के करीब नहीं है ।
इसकी विचारधारा को धर्म, भाषा, जाति और क्षेत्रवाद के आधार पर बांटा नहीं जा सकता ।
संस्था के संविधान 4 के अनुसार संस्था का उद्देश्य है -
क-लोक कला, लोक साहित्य, लोककथा, लोकगाथा, लोक संस्कृति, लोक संगीत( गायन,वादन एवं नृत्य ) का अध्ययन, संवर्द्धन, संरक्षण और अनुसंधान करना ।
ख-देश के बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों, लोक कलाकारों को विभिन्न कार्यक्रमों में आमन्त्रित करना, उनकी प्रतिभा, विचारों और कार्यों का प्रचार -प्रसार करना ।
ग- लोक कला, संगीत, साहित्य को समर्पित `लोक-रंग´ पत्रिका का प्रचार-प्रसार करना ।
घ- विचार गोष्ठियां आयोजित करना ।
ड.- जनोपयोगी लोकगीतों , फिल्मों, कविताओं के पोस्टरों का प्रदर्शन करना ।
च-अंधविश्वास,अश्लीलता,पाखण्ड,पतनशीलसाहित्य, साम्प्रदायिकता, जातिवाद, क्षेत्रवाद, अपसंस्कृति का निषेध करना और जनसामान्य के बीच प्रगतिशील,संवेदनशील संस्कृति विकसित करना ।
Lokrang Sanskritik Samiti
लोकरंग 2025, पत्रिका छप कर आ गई है। लोकरंग आयोजन के समय गांव में लोकार्पित होने वाली लोक संस्कृति की यह पत्रिका अपने सामाजिक सरोकारों के लिए जानी जाती है। अकादमिक जगत में लोक संस्कृतियों की जो परम्परागत समझ बना दी गई है, उससे यह पत्रिका थोड़ी अलग समझ रखती है। 18 सालों में इस पत्रिका ने विशेषांक स्वरूप चार किताबें भी प्रकाशित की हैं जो लोकरंग-1, 2, 3 और 4 के नाम से जानी जाती हैं।
10 months ago | [YT] | 0
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