Astro. Pt.Premshankar Sharma

शरीर और आत्मा की भलीभाँति जानकारी हो जाने को ही अध्यात्म ज्ञान कहा है।

पंच महाभूतों सहित इनके गुणों का अर्थात् तत्वों का ज्ञान हो जाने को ही तत्त्वज्ञान कहा है।

वेदों के महावाक्यों का सिद्ध हो जाना ही वेदान्त ज्ञान या आत्मज्ञान कहा है।

"ज्योतिषां सूर्यादिग्रहाणां बोधकं शास्त्रम्"

सूर्यादि ग्रह और काल का बोध कराने वाले शास्त्र को ज्योतिष शास्त्र कहा है।

इसमें मुख्य रूप से ग्रह,नक्षत्र आदि के स्वरूप,संचार,परिभ्रमण काल,ग्रहण और स्थिति संबधित घटनाओं का निरूपण एवं शुभाशुभ फलों का कथन किया जाता है।

इसके द्वारा किसी व्यक्ति के भविष्य में घटने वाली घटनाओं के साथ-साथ ही यह भी मालूम हो जाता है कि व्यक्ति के जीवन में कौन-कौन से घातक अवरोध उसकी राह रोकने अथवा प्रारब्ध के किस दुर्योग को उसे किस समय सहने के लिए विवश होना पड़ेगा।

ऐसे समय में ज्योतिष ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा जातक को सही दिशा प्राप्त होती है।

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