Radha Madhav Shringar

कलियुग केवल नाम अधारा ,
सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा।

“ कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन । मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि ॥“