“सरिता प्रसाद” एक तेजी से उभरती युवा कवियित्रि और उपन्यासकार हैं।

इन्हें 'विश्व हिंदी लेखिका मंच' द्वारा "नारी गौरव सम्मान" से भी सम्मानित किया गया है।


अपनी रचनाओं में कवियित्रि ने एक ओर तो नारी सुलभ भावनाओं और संवेदनाओं की सूक्ष्म विवेचना करने का सार्थक प्रयास किया है तो दूसरी ओर भारतीय पौराणिक चरित्रों को सकारात्मक स्वरूप में समझने का प्रयास भी किया है। इनकी कई रचनाएँ, जैसे – “अपना राग”, “लोकतंत्र और जातिवाद” और “लोकतन्त्र और हमारी भूमिका” हैदराबाद से प्रकाशित होने वाले “दैनिक हिन्दी मिलाप” में प्रकाशित हो चुकी हैं।

इनके द्वारा लिखित और प्रकाशित उपन्यास “सफर के हमसफर”, कविता संग्रह "दिल से" एवं "चलो नभ से तारें तोड़ लाएँ" काफी लोकप्रिय रही है।


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