भाग्य भरोसे जीवन सारा फिर भी ना घबराना ।
कर्म धुरी है जीवन का बस आगे बढ़ते जाना ।।
- अनुुुपम
जय हिन्द हमारे माता पृथ्वी के प्रांगण में निवास करने वाले समस्त बंधु आपको अवगत कराना है कि चैनल के माध्यम से जहां एक और साहित्य के समस्त रसों का रसास्वादन करने का अवसर प्राप्त होगा वहीं दूसरी ओर समय-समय पर तमाम प्रेरक वक्तव्यय के माध्यम से जीवन जीने की कला के सााथ-सथ आपके समस्तत गूढ़ प्रश्नों के हल भी मैं प्रदान करने कोशिश करुंगा ।
आपका अनूप अनुपम