कुछ सुनी कुछ अनसुनी सी
अधूरेपन में कुछ पूरी सी
कभी सखी कभी बैरी सी
कुछ तेरी
कुछ मेरी
और कुछ हमारी सी
यादों में सिमटी
अनमनी सी
अनगिनत कहानियाँ
उन कहानियों को टटोलती
उनमें छुपी
आशाओं- निराशाओ, धुप- छॉंव
मायनो को खंगालती
उनकी फिदरत उनकी नियत
कहानियत।।।
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