नीली आवाज़ – यह सिर्फ एक चैनल नहीं, एक क्रांति है।
यहाँ हम सुनाते हैं उन आवाज़ों को जो इतिहास की किताबों में दबा दी गईं, उन आंसुओं को जो समाज की चुप्पी में खो गए, और उन संघर्षों को जो आज भी ज़िंदा हैं।

हमारी कहानियाँ हैं:

दलित समाज के संघर्ष, आत्मसम्मान और अस्मिता की।

समाजिक अन्याय, भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ़ उठती आवाज़ की।

उन लोगों की, जिन्होंने अपने आँसुओं से क्रांति लिखी।


"नीली आवाज़" का मकसद है — शोषितों को आवाज़ देना, समाज को झकझोरना और बदलाव की चिंगारी जगाना।

अगर आपकी भी कोई कहानी है, जो सुनी जानी चाहिए — तो जुड़िए हमसे।