कुछ सुनी कुछ अनसुनी सी
अधूरेपन में कुछ पूरी सी
कभी सखी कभी बैरी सी
कुछ तेरी
कुछ मेरी
और कुछ हमारी सी
यादों में सिमटी
अनमनी सी
अनगिनत कहानियाँ
उन कहानियों को टटोलती
उनमें छुपी
आशाओं- निराशाओ, धुप- छॉंव
मायनो को खंगालती
उनकी फिदरत उनकी नियत
कहानियत।।।
Shared 7 months ago
298 views
Shared 1 year ago
16 views
Shared 1 year ago
29 views
Shared 1 year ago
39 views