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बेगम साहिबा जवान हुई, प्यार हिलोरे मारने लगा लेकिन अब्बू शाहजहां के समय तक मुगल बेटियों की शादी करना बंद किया जा चुका था क्योकि हमेशा डर रहता था की दामाद जीजा फूफा कहीं सत्ता का हकदार न बन जाय।
घत जातक में सर्वमान्य कहानी की बहन का बेटा मामा कंस उपकंस हत्या करके सत्ता छीन लेगा इसके वावजूद शादी का हक नहीं छीना गया था मुगलो ने प्रेरणा लेते हुए घर की बेटियों की शादी से ही मनाही कर दी। न शादी होगी न बच्चे होंगे न कोई प्रतिद्वंदी होगा। कुछ भारतीय कबीले मुगल पूतों से इतने प्रभावित हुए की लड़की जन्म लेते ही जिंदा दफना देते तो नमक खिला के मारने लगे।

खैर मुद्दे पर आते है।

शाहजहां की बड़ी बेटी बेगम साहिबा की जवानी सबपर भारी थी ऊपर से खूबसूरत जिनकी चर्चाए पूरे शहर में थी।
बेगम साहिबा की नज़रे एक सामान्य सुंदर युवक से मिली आँखे चार हुई दो दिल एक हो गए। फिर क्या मिलना जुलना जारी हुआ। शाहजहां का पहरा बेगमसाहिबा पर तगड़ा था भनक लगी।
रंगे हाथ पकड़ने शाहजहां, बेगम साहिबा के महल में पहुँचे ।
साहिबा घबरा उठी। प्रेमी को छुपाने की कोई जगह नहीं मिली तो आग जलाने वाली देगी में ही लिटा दिया।
शाहजहां भारत का बादशाह था अपने बीबी बच्चों से बहुत प्यार करता था।
शाहजहां का प्यार बातो वाला नहीं रिजल्ट देता था ।
प्यार इतना की आठवा रिजल्ट पैदा करते प्रसव पीड़ा में एक बीबी रुखसत कर गई थी नतीजा ताजमहल था।

खैर मुद्दे से भटकने नहीं है।

शाहजहां मझा हुआ खिलाड़ी था, पचासो जवानी चख चुखा था।
बिना किसी शिकन भाव के अपनी बेटी को अहसास नहीं होने दिया की किस मकसद से आया है बोला साहिबा कैसी हो ?
हाल चाल लेकर उसे नहाने, फ्रेश होने के लिए भेज दिया ।

बादशाह की नजर से बेचारा प्रेमी कैसे बचता उधर साहिबा हम्माम में गई और इधर शाहजहाँ के नौकर देगी में लकड़ी जलाने लगे बेचारा प्रेमी, जितना प्रेम नहीं किया उसेसे ज़्यादा जलते हुए भट्ठे में जल कर खाक हो गया । इस्लाम में जवान लड़के लड़कियों का प्रेम कितना जायज़ है पता नहीं लेकिन मुग़ल की बेटियों के प्रेमी को यही जमीं पर जलती भट्टी नसीब हुई ये इतिहास है ।

लेकिन जवान शरीर की ज़रूरत को चाहे कितना भी दबाया जाय इच्छायें मरती नहीं ।
एक गया दूसरा पसंद आ गया ।
कुछ दिनों तक लुका छिपी प्रेम मुहब्बत चलता रहा ।
एक बार फिर बादशाह को भनक लगी और इस दूसरे प्रेमी का भी वही हश्र किया गया ।

एक बार फिर बेगम साहिबा तन्हा थी लेकिन शरीर की ज़रूरत ने फिर हिलोरे मारी ।
इस बार साहिबा ने ख़ुद को अपग्रेड किया सोची अब किसी ऐसे लेवल के लौंडे से इश्क़ करूँगी जिससे शाहजहाँ से लेकर दारा शिकोह हो या औरंजेब किसी को आपत्ति न हो ।
सो साहिबा ने इस बार जवान ईरानी सुंदर दरबारी को चुना जो शिया था। दरबार के लोग भी उसको पसंद करते थे ।
दारा शिकोह को जब अपनी बहन के तीसरे प्रेमी को पता चला तो उसने प्रॉमिस तक कर डाला की बहन मुझे सत्ता मिलने में मदद कर मैं सारे नियम तोड़ तेरी इश्क़ को निकाह में बदल दूँगा ।
शाहजहाँ का मामा तो चार कदम आगे निकल गया । उस जवान शिया का रिश्ता भरे दरबार में लेकर शाहजहाँ से प्रस्तावित कर दिया ।
शाहजहाँ को पहले से ही शक था कि उसकी ख़ूबसूरत बेटी फिर कहीं चक्कर चला रही है, शक यकीन में बदल गया ।
शाहजहाँ ने मामा ने कहा उसे दरबार में हाज़िर करो हम ख़ुद उससे मिलना चाहते है ।
सब दरबारी ख़ुश हो गए चलो अब मुग़ल बेटी का निकाह होना सुरु हो जाएगा ।
जवान शिया भरे दरबार में आया । शाहजहाँ ने उसे पान खाने को दिया । दरबार में बादशाह के द्वारा पान दिया जाना सम्मान की बात थी । तीसरे प्रेमी ने पान लिया और खा लिया।
कुछ देर में शिया प्रेमी जमीं पर लुढ़का तड़प तड़प कर मर गया । सारे दरबारी सन्न थे । आख़िर औरंगज़ेब का बाप शाहजहाँ ही तो था।
मुग़ल बेटी न ही प्रेम कर सकती है न ही प्रेम विवाह। इस नियम का पालन करना शाहजहां ने पूरे भारत को सिखाया ?
क्या तब से मुगलों की औलादे ये नियम मानते हुए आ रहे है?
आज भी शाहजहां की संताने पूरे भारत में पायी जाती है जो अपने बच्चे बच्चियो को स्कूल कॉलेज में भेजते समय यही सिखाते है तुम्हें प्रेम करने का हक नहीं है और हा गलती से भी दूसरी जाति में तो कतई प्रेम मुहब्बत मत करना वहाँ शाहजहां पापा वाला हाल करेंगे ।

तो सवाल यह है की शाहजहां पूरे भारत का बादशाह था तो सभी ने बिना धर्म देखे इस नियम का पालन करना जारी रखा ?

(उपरोक्त इतिहास की थीम 17 वी सदी में शाहजहां के समकालीन भारत यात्रा करने वाले फ़्रांसीसी डॉ बर्नियर की भारत यात्रा से लिया गया है ।)
अगर किसी को डाउट है तो ख़ुद किताब पढ़ कर वेरीफाई कर लेवे ।

2 months ago | [YT] | 2,532



@dckstudy3074

बहुत रोचक और आज के समय की सत्य जानकारी जो समाज में फैली है। धन्यवाद SJ सर🎉🎉🎉

2 months ago | 42

@rational-sapien

ओनर किलिंग की परंपरा समाज में यहाँ से आई है, वह मुगल दरबारी के वंशज इसे आज भी follow कर रहे है, अपनी परम्परा बना रखे है,इनका मुगल प्रेम इनके रगों में दौड़ता है,

2 months ago | 35

@ggsofficial559

किसी को औकात नहीं जो आपको झूठा साबित कर दे क्योंकि आप सच के साथ डट के खड़े हैं जो सच है वही दिखाते हैं❤❤

2 months ago | 41

@ramvilasprajapati258

बहुत अच्छी जानकारी प्राप्त हुआ सर् मैं तो समझता था कि कहि ब्राह्मणों ने अपनी जातंकि सोच और नस्लीय भेदभाव के लिए ऐसा किया होगा, पर यहा तो सत्ता की बात निकली❤❤🙏

2 months ago | 15

@manoharmahajan7826

नमो बुद्धाय,जय भीम, जय संविधान 🙏 बहुत ही सटीक जानकारी दी है सर 🙏 धन्यव

2 months ago | 22

@Sanghmitra-dt9qu

Good 👍👍 great 💯💯 Sir 👍जय भीम नमो बुद्

2 months ago | 12

@neerajbhai8006

Great SJ sir 🙏

2 months ago | 7  

@TINKUKUMAR-vk2dn

सर कहानी तो बहुत इंटरेस्टिंग है । और उतनी ही हकीकत भी आज भी ऐसे घटनाएं हमको देखने को मिल जाती है।

2 months ago | 13

@AmarSingh-b3s3g

Sj sir Aapka gyan anamol hai. Aapse bahut kuchh sikhane ko milta hai . Jai bheem nano budhay

2 months ago | 8

@AjayPalSingh-ki3xn

SJ sir नमो बुद्धाए ⚘️🙏 जय भीम ⚘️

2 months ago | 8

@RohitKumar-nf9fo

नमो बुद्धाय जय भीम बहुत अच्छी जानकारी दी है आपने । सर!अहिल्याबाई के बारे में कुछ जानकारी दीजिए,उनके बारे में मैने गूगल से पढ़ा जो हमे संतुष्टि नहीं मिला । उनके हाथ में शिवलिंग देखकर और अधिक घालमेल दिख रहा है ।

2 months ago | 14

@girajasankarmaurya9746

🎉❤🎉❤🎉 बुद्धम नमामि धम्मनमामि संघम नमामि जय भीम नमो बुद्धाय जय चक्रवर्ती सम्राट जयजो

2 months ago | 3

@GaneshNayak-c1t

आज तक जो इतने अत्याचार दलितों और पिछड़ों पर हुए हैं, कभी घोड़ी चढ़ने पर,कभी मटकी छूने पर, कभी बराबर बैठने पर तो कभी अपनी जयंती मनाने पर , उसका हिसाब कब दोगे जातिवादियों, देवी देवता आपको मुबारक, हमे तो बस अपने महापुरुषों पर आस्था है , और हमारी आस्था से अब कोई नहीं खेल सकता 🙏

2 months ago | 35

@thepowerofpenbybabasahab203

💯Allright sir 🙏Jay bhim, दिमाग में बहुत पहले से doubt था अब clear हो गया, thank you so much

2 months ago | 0

@SantoshKumar-kv5ce

Dear science journey sir ji good afternoon aap ko dil se Abhaar 🙏

2 months ago | 11

@vian1111

Ek or history se aaj awagat hue hum . thanks 🙏

2 months ago | 4

@jaydevgan5672

❤❤ आप के इतिहास की पकड का कोई तोड नही है सर।

2 months ago | 3  

@djssturki108

बहुत अच्छी कहानी है sj sir 😊

2 months ago | 6

@GayatriGautam-o9p

नमो बुधाय जय सम्राट असोक जय ज्योतिबा फुले जय भीम जय भारत जय संविधान जय मूलनिवासी जय जोहार रेस्पेक्टेड प्रोफेसर डॉ sj सर 🙏

2 months ago | 3

@chandrikaram6564

SJ सर सुनकर हंसी आ गई। पोल खोल कर रख दिए है।

2 months ago | 4