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“नवरात्रि — माँ को बाहर नहीं, अपने भीतर खोजिए” । Urmila Sheokand
Urmila Sheokand - Chitkala Foundation
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किसी को खोने के बाद उसकी कीमत क्यों समझ आती है? | दिल को छूने वाली सच्ची कहानी | Chitkala Radio
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सावन के झूले,हमारी लोक संस्कृति// सामण का महीना पिया जाइए मत छोड़ क्यै// चन्द्रकिरण हरियाणवी फिल्म//
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आपकी ज़िंदगी में वह कौन है ,जिससे कभी बहुत बातें होती थीं//लेखन एवं प्रस्तुतिकरण, उर्मिलाश्योकन्द//
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"हम ठीक हैं... या सिर्फ ऐसा कहते हैं?"जब कोई आपसे पूछे, “कैसे हैं?” Chitkala Radio 📻
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एक ही परिस्थिति किसी इंसान को उम्मीद देती है,और दूसरे इंसान को डर से भर देती है//एक खूबसूरत कहानी /
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जिंदगी सवाल पूछती है अगर मैं अच्छा हूँ,तो मेरे साथ बुरा क्यों हुआ?जब भरोसा टूटे तो क्या करें?//
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जीते जी पानी नहीं, जाने के बाद पिंडदान क्यों? पितृ पक्ष की सच्ची बात ।#UrmilaSheokand #चित्कला
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गाँव की सुबह — जहाँ दिन निकलने से पहले गाँव जागता था// काश वो बचपन फिर से मिल जाए//
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क्या आपने कभी बिना पूरा सच जाने किसी को गलत समझा है? सास की शर्त क्या थी ? चित्कला रेडियो//
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हरियाणा में लोकगीतों की परम्परा कितनी पुरानी है? | हमारी सांस्कृतिक विरासत | चित्कला रेडियो
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