इतिहासकार जादूनाथ सरकार ने लिखा है, ‘मध्यकालीन दौर में जब मुगल भारत में आए तो उन्होंने मिलिट्री की नौसैनिक बल की क्षमताओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया था. ऐसा इसलिए था क्योंकि वो शासक उत्तरी क्षेत्र से होते हुए आगे बढ़े थे जहां पर उन्होंने जमीन पर कई लड़ाईयां आसानी से जीत ली थीं. लेकिन जब पुर्तगाली भारत में आए तो उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व कायम करने की कोशिशें की.’
उन्होंने आगे लिखा, ‘वो यहां पर व्यापार को नियंत्रित करना चाहते थे और उस पर अपना अधिकार चाहते थे. यह छत्रपति शिवाजी महाराज ही थे जिन्होंने एक मजबूत नेवी की अहमियत पर बल दिया. इसकी वजह से उन्होंने पहले मराठा जहाज का निर्माण किया. इसे कल्याण के करीब सन् 1654 में तैयार किया गया था.
शिवाजी महाराज का पहला युद्ध कब हुआ था?
10 नवम्बर प्रतापगढ़ की लड़ाई, 1659
यह युद्ध मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज और आदिलशाही सेनापति अफज़ल खान की सेनाओं के बीच महाराष्ट्र के सतारा शहर के पास प्रतापगढ़ के किले में लड़ा गया था। इतिहासकारो के अनुसार
खाफी खान जैसे फारसी इतिहासकारों का दावा है कि उस दिन जब अफजल सामने आया तो पहला वार शिवाजी की ओर से हुआ। दोनों गुत्थमगुत्था हो गए और इस दौरान अफजल मारा गया। ब्रिटिश अधिकारी जेम्स ग्रांट डफ ने 1818 में 'हिस्ट्री ऑफ द मराठाज' में लिखा है कि अफजल को धोखे से कत्ल किया गया और इसकी योजना पहले से बना ली गई थी।
शिवाजी महाराज ने कितने किले जीते थे?
छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य और महाराष्ट्र के इतिहास के सबसे बहादुर और महान योद्धा थे। नियोजन के साथ उनके अच्छे प्रशासन ने उन्हें विजय की एक राह तक पहुंचाया। छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने शासनकाल में मराठवाड़ा के लगभग 360 किले जीते। छत्रपति शिवाजी महाराज की ही वजह से आज महाराष्ट्र बहुत से किलो का घर है।
शिवाजी महाराज को छत्रपति क्यों कहा जाता है
शिवाजी का नाम लेते ही आंखों के सामने एक वीर शासक, आज्ञाकारी पुत्र और नेक मराठा योद्धा की तस्वीर घूम जाती है। ... इसी दिन शिवाजी ने महाराष्ट्र में हिंदू राज्य की स्थापना की थी, जिसके बाद ही उनको 'छत्रपति' की उपाधि मिली।
महाराज और औरंगजेब
दक्षिण में औरंगज़ेब के वायसराय मिर्ज़ा राजा सिंह ने बीड़ा उठाया कि वो किसी तरह शिवाजी को औरंगज़ेब के दरबार में भेजने के लिए मना लेंगे लेकिन इसको अंजाम देना इतना आसान नहीं था.
पुरंदर के समझौते में शिवाजी ने साफ़ कर दिया था कि वो मुगल मंसब के लिए काम करने और शाही दरबार में जाने के लिए बाध्य नहीं हैं. इसके कुछ ख़ास कारण भी थे.
शिवाजी को औरंगज़ेब के शब्दों पर विश्वास नहीं था. उनका मानना था कि औरंगज़ेब अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक जा सकते थे.
मशहूर इतिहासकार जदुनाथ सरकार अपनी किताब 'शिवाजी एंड हिज़ टाइम्स' में लिखते हैं, ''जय सिंह ने शिवाजी को यह उम्मीद दिलाई कि हो सकता है कि औरंगज़ेब से मुलाकात के बाद कि वो दक्कन में उन्हें अपना वायसराय बना दें और बीजापुर और गोलकुंडापर कब्ज़ा करने के लिए उनके नेतृत्व में एक फौज भेजें. हाँलाकि, औरंगज़ेब ने इस तरह का कोई वादा नहीं किया था.'' मुगलों से शिवाजी की पहली लड़ाई 1656-57 में हुई। यह युद्ध उनके नाम रहा। इसके बाद शिवाजी का नाम इतिहास के पन्नों पर दर्ज होता रहा। इस बीच जब अपने पिता शाहजहां को कैद करके औरंगजेब मुगल सम्राट बना, तब तक सारे दक्षिण भारत में शिवाजी अपना आधिपत्य जमा चुके थें। औरंगजेब के कहने पर उसके सूबेदार शाइस्ता खां ने सूपन, चापन और मावल में जमकर लूटपाट की। इसकी बात जब शिवाजी को मालूम हुई, तो उन्होंने शाइस्ता खां पर हमला किया। हालांकि वह बचकर निकलने में सफल हो गया, लेकिन उसे अपने हाथ की 4 उंगली गंवानी पड़ी।
शिवाजी की मृत्यु कब और कहां हुई थी?
शिवाजी की मृत्यु 03 अप्रैल 1680 के दिन उनके रायगढ़ फोर्ट में हो गई थी. उनके निधन को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है. कुछ इतिहासकार मानते हैं कि उनकी मृत्यु स्वाभाविक थी, लेकिन कई किताबों में इतिहासकारों ने लिखा कि उन्हें साजिश के तहत जहर दिया गया था.
आधिकारिक तौर पर सविंधान 26 जनवरी, सन 1950 को लागू हुआ था. इस दिन को चुनने की मुख्य वजह लाहौर कांग्रेस अधिवेशन है. इस दिन यानी 26 जनवरी, 1929 को पहली बार पूर्ण गणराज्य का प्रस्ताव पेश किया गया था. इसके लिए ही 26 जनवरी के दिन भारतीय सविंधान को लागू किया गया और तब से इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है , स्वतंत्र भारत के बाद 1950 में जब पहली बार सविधान पेश किया गया उस समय की कुछ चुनिंदा तस्वीरें | rednine न्यूज़ की ओर से देशवासियो 73 गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये #republicday#independentnation#bheemravambedkar#dr.amedkar #dr.rajedraprshad #jawaharlalnehru#mahatmagandhi
Happy birthday to a very confident and strong journalist. Today, we honor both your wonderful life and your extraordinary contributions towards raising the channel. You are certainly one of the best gifts God gave to our Rednine Family. Again
RED INDIA 24
छत्रपति शिवाजी को फादर ऑफ़ नेवी कहा जाता है।
इतिहासकार जादूनाथ सरकार ने लिखा है, ‘मध्यकालीन दौर में जब मुगल भारत में आए तो उन्होंने मिलिट्री की नौसैनिक बल की क्षमताओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया था. ऐसा इसलिए था क्योंकि वो शासक उत्तरी क्षेत्र से होते हुए आगे बढ़े थे जहां पर उन्होंने जमीन पर कई लड़ाईयां आसानी से जीत ली थीं. लेकिन जब पुर्तगाली भारत में आए तो उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व कायम करने की कोशिशें की.’
उन्होंने आगे लिखा, ‘वो यहां पर व्यापार को नियंत्रित करना चाहते थे और उस पर अपना अधिकार चाहते थे. यह छत्रपति शिवाजी महाराज ही थे जिन्होंने एक मजबूत नेवी की अहमियत पर बल दिया. इसकी वजह से उन्होंने पहले मराठा जहाज का निर्माण किया. इसे कल्याण के करीब सन् 1654 में तैयार किया गया था.
शिवाजी महाराज का पहला युद्ध कब हुआ था?
10 नवम्बर प्रतापगढ़ की लड़ाई, 1659
यह युद्ध मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज और आदिलशाही सेनापति अफज़ल खान की सेनाओं के बीच महाराष्ट्र के सतारा शहर के पास प्रतापगढ़ के किले में लड़ा गया था।
इतिहासकारो के अनुसार
खाफी खान जैसे फारसी इतिहासकारों का दावा है कि उस दिन जब अफजल सामने आया तो पहला वार शिवाजी की ओर से हुआ। दोनों गुत्थमगुत्था हो गए और इस दौरान अफजल मारा गया। ब्रिटिश अधिकारी जेम्स ग्रांट डफ ने 1818 में 'हिस्ट्री ऑफ द मराठाज' में लिखा है कि अफजल को धोखे से कत्ल किया गया और इसकी योजना पहले से बना ली गई थी।
शिवाजी महाराज ने कितने किले जीते थे?
छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य और महाराष्ट्र के इतिहास के सबसे बहादुर और महान योद्धा थे। नियोजन के साथ उनके अच्छे प्रशासन ने उन्हें विजय की एक राह तक पहुंचाया। छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने शासनकाल में मराठवाड़ा के लगभग 360 किले जीते। छत्रपति शिवाजी महाराज की ही वजह से आज महाराष्ट्र बहुत से किलो का घर है।
शिवाजी महाराज को छत्रपति क्यों कहा जाता है
शिवाजी का नाम लेते ही आंखों के सामने एक वीर शासक, आज्ञाकारी पुत्र और नेक मराठा योद्धा की तस्वीर घूम जाती है। ... इसी दिन शिवाजी ने महाराष्ट्र में हिंदू राज्य की स्थापना की थी, जिसके बाद ही उनको 'छत्रपति' की उपाधि मिली।
महाराज और औरंगजेब
दक्षिण में औरंगज़ेब के वायसराय मिर्ज़ा राजा सिंह ने बीड़ा उठाया कि वो किसी तरह शिवाजी को औरंगज़ेब के दरबार में भेजने के लिए मना लेंगे लेकिन इसको अंजाम देना इतना आसान नहीं था.
पुरंदर के समझौते में शिवाजी ने साफ़ कर दिया था कि वो मुगल मंसब के लिए काम करने और शाही दरबार में जाने के लिए बाध्य नहीं हैं. इसके कुछ ख़ास कारण भी थे.
शिवाजी को औरंगज़ेब के शब्दों पर विश्वास नहीं था. उनका मानना था कि औरंगज़ेब अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक जा सकते थे.
मशहूर इतिहासकार जदुनाथ सरकार अपनी किताब 'शिवाजी एंड हिज़ टाइम्स' में लिखते हैं, ''जय सिंह ने शिवाजी को यह उम्मीद दिलाई कि हो सकता है कि औरंगज़ेब से मुलाकात के बाद कि वो दक्कन में उन्हें अपना वायसराय बना दें और बीजापुर और गोलकुंडापर कब्ज़ा करने के लिए उनके नेतृत्व में एक फौज भेजें. हाँलाकि, औरंगज़ेब ने इस तरह का कोई वादा नहीं किया था.''
मुगलों से शिवाजी की पहली लड़ाई 1656-57 में हुई। यह युद्ध उनके नाम रहा। इसके बाद शिवाजी का नाम इतिहास के पन्नों पर दर्ज होता रहा। इस बीच जब अपने पिता शाहजहां को कैद करके औरंगजेब मुगल सम्राट बना, तब तक सारे दक्षिण भारत में शिवाजी अपना आधिपत्य जमा चुके थें। औरंगजेब के कहने पर उसके सूबेदार शाइस्ता खां ने सूपन, चापन और मावल में जमकर लूटपाट की। इसकी बात जब शिवाजी को मालूम हुई, तो उन्होंने शाइस्ता खां पर हमला किया। हालांकि वह बचकर निकलने में सफल हो गया, लेकिन उसे अपने हाथ की 4 उंगली गंवानी पड़ी।
शिवाजी की मृत्यु कब और कहां हुई थी?
शिवाजी की मृत्यु 03 अप्रैल 1680 के दिन उनके रायगढ़ फोर्ट में हो गई थी. उनके निधन को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है. कुछ इतिहासकार मानते हैं कि उनकी मृत्यु स्वाभाविक थी, लेकिन कई किताबों में इतिहासकारों ने लिखा कि उन्हें साजिश के तहत जहर दिया गया था.
3 years ago | [YT] | 36
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आधिकारिक तौर पर सविंधान 26 जनवरी, सन 1950 को लागू हुआ था. इस दिन को चुनने की मुख्य वजह लाहौर कांग्रेस अधिवेशन है. इस दिन यानी 26 जनवरी, 1929 को पहली बार पूर्ण गणराज्य का प्रस्ताव पेश किया गया था. इसके लिए ही 26 जनवरी के दिन भारतीय सविंधान को लागू किया गया और तब से इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है , स्वतंत्र भारत के बाद 1950 में जब पहली बार सविधान पेश किया गया उस समय की कुछ चुनिंदा तस्वीरें | rednine न्यूज़ की ओर से देशवासियो 73 गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये
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3 years ago | [YT] | 24
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4 years ago | [YT] | 32
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