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राजस्थान की कला, संस्कृति, लोक गीत, लोक नृत्य, इतिहास और परंपराओं को समर्पित चैनल।
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Rajasthani Culture Fans
Channels dedicated to the art, culture, folk songs, folk dances, history and traditions of Rajasthan.
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Rajasthani Culture Fans
📸☁️🌧️🌴🌦️
3 months ago | [YT] | 4
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Rajasthani Culture Fans
📸🌧️🌴🌴...
3 months ago | [YT] | 2
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Rajasthani Culture Fans
कच्छी घोड़ी नृत्य. 🐴🦄🦄
कच्छी घोड़ी राजस्थान का एक प्रसिद्ध लोकनृत्य है, जो विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र में लोकप्रिय है। इस नृत्य में कलाकार रंग-बिरंगी नकली घोड़ी की पोशाक पहनकर वीरता और लोककथाओं का प्रदर्शन करते हैं।
नर्तक पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा, साफा और हाथ में तलवार लेकर ढोल, नगाड़े और लोकगीतों की धुन पर नृत्य करते हैं। यह नृत्य राजस्थान के वीर इतिहास, शौर्य और लोकजीवन की झलक प्रस्तुत करता है।
कच्छी घोड़ी नृत्य विवाह समारोहों, मेलों और सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। इसकी रंगीन प्रस्तुति और मनोरंजक शैली दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करती है।
दो पंक्तियाँ: ✌️👇
रंग-बिरंगी घोड़ी सजे, वीरों की गाथा गाए,
कच्छी घोड़ी नृत्य राजस्थान की शान बढ़ाए।
3 months ago | [YT] | 9
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Rajasthani Culture Fans
चरी नृत्य (Chari Dance) 💃💃🔥🔥
चरी नृत्य राजस्थान का एक प्रसिद्ध और आकर्षक लोकनृत्य है। यह मुख्य रूप से राजस्थान के अजमेर और किशनगढ़ क्षेत्र में प्रचलित है। इस नृत्य में महिलाएँ अपने सिर पर जलती हुई चरी (पीतल या तांबे का कलश) रखकर संतुलन के साथ नृत्य प्रस्तुत करती हैं।
रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों और लोकसंगीत की मधुर धुनों पर किया जाने वाला यह नृत्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। चरी नृत्य राजस्थान की लोकसंस्कृति, नारी कौशल, संतुलन और सौंदर्य का अनूठा प्रतीक माना जाता है। यह नृत्य विशेष रूप से विवाह, त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुत किया जाता है।
दो पंक्तियाँ: 💃💃🔥🔥
सिर पर जलती चरी सजाए, नाचे राजस्थानी नार,
लोकसंस्कृति की शान बढ़ावे, चरी नृत्य अपार।
@Rajasthani.Culture.Fans177
3 months ago | [YT] | 7
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Rajasthani Culture Fans
🌞 गर्मी में गन्ने का रस अमृत समान, तन-मन को दे ठंडक अपार।
💧 प्यास बुझाए, ऊर्जा बढ़ाए, सेहत का रखे पूरा ध्यान। 🌿🍹
इन गर्मी में गन्ने का जुस भरपूर पियें।
@Rajasthani.Culture.Fans177
3 months ago | [YT] | 4
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Rajasthani Culture Fans
राजस्थान की मांड गायकी को देश और दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाने में अमूल्य योगदान देने वाली सुप्रसिद्ध लोक गायिका श्रद्धेय गवरी देवी जी के देहावसान का समाचार कला जगत के लिए अत्यंत दुखद खबर है।
उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण लोककला और लोकसंगीत के संरक्षण एवं संवर्धन को साधना ने राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।
एक संस्कृति साधिका के रूप में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों को यह दुःख सहने का संबल प्रदान करें।
ॐ शांति! 👏🙏🏵️🏵️
3 months ago | [YT] | 3
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Rajasthani Culture Fans
गवरी देवी (1928 – 11 जून 2026) राजस्थान की एक दिग्गज और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध मांड गायिका थीं।
उन्हें राजस्थान की "मरू कोकिला" के नाम से जाना जाता था। उन्होंने लगभग 8 दशकों तक अपनी मधुर आवाज से मरुस्थलीय लोक संगीत और 'मांड' शैली को विश्व मंच तक पहुंचाया।
गवरी देवी के बारे में मुख्य जानकारी और उपलब्धियां:जन्म: उनका जन्म बाड़मेर जिले के कोरण गांव में एक पेशेवर लोक कलाकार परिवार में हुआ था।
गायकी की शुरुआत: उनके माता-पिता बीकानेर दरबार में कलाकार थे, जिनसे उन्होंने मांड गायन की बारीकियां सीखीं।
प्रसिद्धि: उनका सबसे लोकप्रिय गीत 'केसरिया बालम पधारो म्हारो देस' है, जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रस्तुत किया।
मुख्य गीत: मांड गायकी के अलावा उन्होंने कई प्रसिद्ध भजन और लोकगीत गाए, जैसे 'ढोला थारे देश में', 'मोर बोले रे मलजी', और 'मैं तो लियो सांवरिया'।
सम्मान: उन्हें साल 1986 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था।
इसके अलावा उन्हें जवाहर कला Kendra, Doordarshan से सम्मान और वीर दुर्गादास राठौर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी मिला।
निधन: 98 वर्ष की आयु में, 11 जून 2026 को पाली (राजस्थान) में उनका निधन हो गया।
3 months ago | [YT] | 9
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🐪☁️🌧️🌦️📸🌴
3 months ago | [YT] | 7
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Rajasthani Culture Fans
भवाई नृत्य 💃💃💃
भवाई राजस्थान का एक प्रसिद्ध और अद्भुत लोकनृत्य है, जो संतुलन और कौशल का अनोखा प्रदर्शन प्रस्तुत करता है।
इस नृत्य में कलाकार, विशेषकर महिलाएँ, सिर पर कई मटके रखकर नृत्य करती हैं।
नर्तकियाँ कभी-कभी काँच के टुकड़ों, तलवारों या पीतल की थाली पर संतुलन बनाकर भी नृत्य करती हैं, जो दर्शकों को आश्चर्यचकित कर देता है।
रंग-बिरंगी वेशभूषा, मधुर लोकसंगीत और आकर्षक मुद्राएँ इस नृत्य की सुंदरता को और बढ़ाती हैं।
भवाई नृत्य राजस्थान की लोककला, साहस, संतुलन और सांस्कृतिक समृद्धि का जीवंत प्रतीक है।
यह नृत्य देश-विदेश में राजस्थान की विशिष्ट पहचान के रूप में प्रसिद्ध है।
@Rajasthani.Culture.Fans177
3 months ago | [YT] | 5
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Kumbhalgarh Fort 🕌🕌
Kumbhalgarh Fort राजस्थान के राजसमंद जिले में अरावली पर्वतमाला की ऊँची पहाड़ियों पर स्थित एक भव्य और ऐतिहासिक दुर्ग है। यह मेवाड़ राज्य की शक्ति, सुरक्षा और गौरव का प्रतीक माना जाता है। इसका निर्माण 15वीं शताब्दी में मेवाड़ के महान शासक Maharana Kumbha ने करवाया था, जिनके नाम पर इस दुर्ग का नाम "कुम्भलगढ़" रखा गया।
कुम्भलगढ़ दुर्ग समुद्र तल से लगभग 1100 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इसकी विशाल प्राचीर (दीवार) लगभग 36 किलोमीटर लंबी है, जो चीन की महान दीवार के बाद विश्व की दूसरी सबसे लंबी निरंतर दीवार मानी जाती है। इसकी चौड़ाई इतनी है कि उस पर एक साथ कई घोड़े दौड़ सकते हैं।
यह दुर्ग मेवाड़ की रक्षा का प्रमुख केंद्र था और युद्ध के समय राजपरिवार के लिए सुरक्षित शरणस्थली के रूप में कार्य करता था। महान वीर शासक Maharana Pratap का जन्म भी इसी दुर्ग में हुआ था, जिससे इसका ऐतिहासिक महत्व और बढ़ जाता है।
दुर्ग के भीतर 300 से अधिक प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जिनमें हिंदू और जैन दोनों धर्मों के मंदिर शामिल हैं। यहाँ का बादल महल, कुंभा महल और दुर्ग की ऊँची प्राचीरें पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं।
रात्रि के समय जब दुर्ग रोशनी से जगमगा उठता है, तब इसका दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है। इसकी भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के कारण इसे वर्ष 2013 में UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
दो पंक्तियाँ 🖋️🖋️
अरावली की चोटियों पर अडिग खड़ा कुम्भलगढ़ महान,
मेवाड़ की वीरता, शौर्य और स्वाभिमान की अमर पहचान।
4 months ago | [YT] | 8
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