EMOTIONAL DIARIES

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🌹 राधे कृष्णा राधे 🌹

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳 ✅

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चतरा में CRPF जवान को हाइवा ने रौंदा, मौत ,जम्मू-कश्मीर से छुट्‌टी पर सात दिन पहले ही आए थे घर, आक्रोशितों ने किया सड़क जाम | 🙏🥺🌼

1 day ago | [YT] | 541

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भारतीय सेना के बहादुर जवान सूबेदार संदीप कुमार हैं,यह संदेश उनके सर्वोच्च बलिदान के प्रति सम्मान प्रकट करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए साझा किया जा रहा है ,मुख्य विवरणव्यक्ति का नाम सूबेदार संदीप कुमार क्षेत्र,नारायणपुर, बानसूर, राजस्थान (पायला की ढाणी / कोलेहेड़ा)सन्दर्भ: देश की सेवा करते हुए अपना कर्तव्य निभाते समय वे वीरगति (शहादत) को प्राप्त हुए. सोशल मीडिया पर लोग 2 मिनट का समय निकालकर देश के इस वीर सपूत को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं 🙏💔😭

1 day ago | [YT] | 359

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उत्तराखंड के लिए अरुणाचल प्रदेश से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है ,जहां पर पिथौरागढ़ जिले के अनिल सिंह ओली का मां भारती की सेवा करते हुए आकस्मिक निधन हो गया। बताया जा रहा है कुछ दिनों से उनका स्वास्थ्य खराब चल रहा था।जिसके कारण उन्होंने बीते 7 जुलाई को अंतिम सांस ली।🙏💔🌼
भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏🌼

2 days ago | [YT] | 514

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अब इनसे मिलो जयपुर आयुषी शर्मा जी से उम्र 23 साल है बहुत भोली लग रही है लेकिन इनके कारनामे सुनकर आपकी रूह काप जायेगी कि लोग किस हद तक नीचे गिर जाते है..की उन्हें रिश्ते की जरा भी कदर नहीं होती
इनके बाप सरकारी कर्मचारी थे उनकी डेथ के बाद उनकी मम्मी को नौकरी मिल गई पर उन्हें ये मंजूर नहीं था
इन्हें सरकार से पैसे और बाप की नौकरी दोनों चाहिए थी तो इन्होंने अपने चाचा के साथ मिलकर अपने ही माँ को मारने की सुपारी 7 लाख में दे दी...
और मरवा भी दिया और उसे एक्सीडेंट का नाम दे दिया...
वो तो भला हो पुलिस का जिसने सुझबुझ से मामले का संज्ञान लेकर उसकी जड़ तक गए और सही कारण का पता लगाया...

जहां लोग अपने पति/ पत्नी को मार देते है वहां इन्होंने अपनी ही मां को मार दिया..😞

3 days ago | [YT] | 15

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हवलदार शीशराम गिल जी 🙏🌼
16-07-1961 - 09-07-1999

वीर चक्र (मरणोपरांत)

वीरांगना - श्रीमती संतरा देवी

कारगिल युद्ध 1999

हवलदार शीशराम का जन्म 16 जुलाई 1961 को, राजस्थान के झुंझुनूं जिले की बुहाना तहसील के बिशनपुरा (ब्राह्मण की ढाणी) गांव में चौधरी शंकराराम गिल एवं श्रीमती राजकौरी देवी के परिवार में हुआ था। बाद में उन्हें ASC के पूर्व सैनिक चौधरी सरदाराम एवं श्रीमती सुरजी देवी ने गोद ले लिया था। बड़़ागांव से 11 वीं उत्तीर्ण कर के 6 दिसंबर 1979 को वह भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 8 जाट बटालियन में नियुक्त किया गया था। 20 अप्रैल 1980 को, उनका विवाह सुश्री संतरा से हुआ था।

ऑपरेशन विजय में, 8 जुलाई 99 को हवलदार शीशराम गिल को उनके समूह के साथ 17000 फीट की ऊंचाई पर मजनू में, शत्रु की चौकी पर आक्रमण करने का कार्य सौंपा गया। हवलदार शीशराम ने आगे हो कर अपने समूह का नेतृत्व किया और लक्ष्य तक पहुंचने के लिए, अनारोहणीय, कठिन चढ़ाई वाले उबड़खाबड़ भूभाग की ऊंचाइयों को विशेष पर्वतारोही उपकरणों की सहायता से, शत्रु के तोपखाने व मोर्टार की बमबारी एवं स्वचालित हथियारों की गहन गोलीबारी का सामना करते हुए पार किया।🙏🫡🌼

शत्रु के प्रभावी फायर से, हवलदार शीशराम को, पैर में गंभीर चोट लगी परंतु, वह अपने समूह को निरंतर लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। गंभीर चोट के उपरांत भी उन्होंने प्रति अवसर पर अपनी स्नाइपर और लाइट मशीनगन से फायर किए जिसके परिणामस्वरूप 6 शत्रु मारे गए और 4 घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल होने के उपरांत भी उन्होंने मोर्चे छोड़ने से मना कर दिया क्योंकि वह जानते थे कि उनके हटने से समूह के लड़ने के बल में कमी से विफल हो जाएगा।🙏🌼

असाधारण साहस, कर्तव्य के प्रति अति समर्पण प्रदर्शित करते हुए वह वीरता से लड़ते रहे और अंततः 9 जुलाई 1999 की रात 03:00 बजे वह वीरगति को प्राप्त हुए। हवलदार शीशराम गिल ने, शत्रु की भीषण गोलीबारी में अदम्य साहस, दृढ़ निश्चय वो वीरता का प्रदर्शन किया तथा जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया।

3 days ago | [YT] | 315

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सूबेदार निर्मल सिंह, वीर चक्र
8 सिख रेजिमेंट
टाइगर हिल ऑपरेशन
वीरगति- 5 जुलाई 1999

टाइगर हिल हमला (कारगिल युद्ध) – जुलाई 1999

1999 के कारगिल संघर्ष के दौरान, सूबेदार निर्मल सिंह की यूनिट 8 सिख को 14-15 मई 1999 को 121 इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान के तहत द्रास में तैनात किया गया था। बाद में 192 माउंटेन ब्रिगेड को टाइगर हिल पर कब्जा करने का कार्य सौंपा गया और 8 सिख बटालियन को 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन के साथ ब्रिगेड में शामिल किया गया। 🌼🙏

3/4 जुलाई 1999 को तीन दिशाओं से एक बहुआयामी हमले की योजना बनाई गई, जिसमें 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन ने हमले का नेतृत्व किया और 8 सिख बटालियन ने मजबूत आधार प्रदान किया। 5062 मीटर की ऊंचाई पर स्थित टाइगर हिल द्रास क्षेत्र की सबसे प्रमुख पहाड़ी थी और यहाँ से मुश्कोह घाटी और राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-1डी पर नजर रखी जा सकती थी। इसे कई छोटे-छोटे लक्ष्यों में विभाजित किया गया था। पश्चिमी भाग को पूर्व से पश्चिम की ओर कई भागों में बांटा गया था, जैसे इंडिया गेट, हेलमेट और रॉकी नॉब; और दक्षिण-पूर्वी भाग को टंग कहा जाता था। इलाका बेहद ऊबड़-खाबड़ था और कुछ जगहों पर ढलान 80 डिग्री तक बढ़ जाती थी।

टाइगर हिल पर दुश्मन के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए भारी तोपखाने और मोर्टार से हमला किया गया। 3 जुलाई की रात को, 18 ग्रेनेडियर्स ने पूर्वी ढलान पर कब्जा कर लिया, लेकिन पश्चिमी ढलान पर स्थित हेलमेट और इंडिया गेट की ओर से दुश्मन की प्रभावी गोलीबारी के कारण आगे बढ़ना रुक गया।

5 जुलाई 1999 को, सिपाही निर्मल सिंह को तीन टीमों में से एक का नेतृत्व करने और एक मजबूत आधार स्थापित करने का कार्य सौंपा गया और आधी रात तक, तीनों टीमें इंडिया गेट, हेलमेट और रॉकी नॉब पर कब्जा करने के लिए पूरी तरह से तैयार थीं। "बोले सो निहाल, सत सिरी अकाल" के युद्धघोष के साथ ही, जवान आगे बढ़े और भयंकर युद्ध छिड़ गया। दुश्मन की ओर से भारी गोलाबारी और सीधी गोलीबारी शुरू हो गई। सिपाही निर्मल सिंह और उनके साथियों ने एक-एक करके बंकरों को खाली कराने में असाधारण वीरता और आक्रामकता का प्रदर्शन किया। सुबह 4 बजे तक, इंडिया गेट और हेलमेट पर कब्जा कर लिया गया था।
इस बीच, हमलावर सैनिकों ने 700 मीटर गुणा 500 मीटर के क्षेत्र में अपनी रक्षा व्यवस्था मजबूत कर ली थी। दुश्मन की ओर से हिंसक जवाबी कार्रवाई की आशंका से, किसी भी हमले को नाकाम करने के लिए सभी तैयारियां कर ली गई थीं।

सूबेदार निर्मल सिंह और उनके साथी गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, अत्यंत वीरता और साहस के साथ दुश्मन से भिड़ते रहे और आखिरी सिपाही और आखिरी गोली तक लड़ते रहे। इस अभियान के दौरान, सूबेदार निर्मल सिंह ने अकेले ही दुश्मन का डटकर मुकाबला किया और सैनिकों को सौंपे गए कार्य को पूरा करने के लिए प्रेरित करते रहे। हालांकि, सूबेदार निर्मल सिंह बाद में अपनी चोटों के कारण वीरगति को प्राप्त हो गए।🙏🌼💔

3 days ago | [YT] | 224

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मध्य प्रदेश के भिण्ड जिले के ग्राम उदोतपुरा निवासी भारतीय सेना के वीर जवान अरविंद वर्मा मातृभूमि की सेवा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।🙏💔🌼
अरविंद वर्मा केवल एक जांबाज़ सैनिक ही नहीं, बल्कि अपने गांव के लोकप्रिय युवा क्रिकेटर भी थे। मैदान पर उनका जोश और वर्दी में उनका समर्पण हमेशा युवाओं के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
सबसे भावुक पल तब आया, जब उनके महज़ 5 वर्षीय मासूम बेटे ने अपने शहीद पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। 🙏💔🌼

3 days ago | [YT] | 420

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हरियाणा के हिसार जिले के नारनौंद तहसील के मिलकपुर गांव के सिपाही पवित्र सिंह श्योराण (यूनिट 8 जाट) ऑपरेशन विजय में प्वाइंट 5301 पर भारतीय सेना द्वारा कब्जा करते समय भारी गोलीबारी के बीच आज ही के दिन शहीद हुए थे। शहादत के समय इनकी उम्र 20 साल 11 महीने थी|🙏🌼
भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏💔🌼

3 days ago | [YT] | 313

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लालकुआं। मणिपुर में उग्रवादियों के हमले में बलिदान हुए असम राइफल्स के वारंट अधिकारी बलवंत सिंह खेतवाल का पार्थिव शरीर गुरुवार सुबह करीब पांच बजे मोटाहल्दू के बकुलिया गांव स्थित अंबिका विहार, लाइन नंबर छह स्थित उनके आवास पर पहुंचा।

पार्थिव शरीर के पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, जबकि अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उमड़ पड़े।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
सेना के वाहन में तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जैसे ही आवास पहुंचा, पूरा क्षेत्र भारत माता की जय और बलिदानी बलवंत सिंह अमर रहें के नारों से गूंज उठा। लोगों ने नम आंखों से वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की।

सुबह 8:40 बजे बलिदानी की अंतिम यात्रा उनके आवास से चित्रशिला घाट के लिए रवाना हुई। अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए और पूरे मार्ग में लोगों ने पुष्पवर्षा कर अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

चित्रशिला घाट पर सेना की ओर से पूरे सैनिक सम्मान के साथ बलिदानी बलवंत सिंह खेतवाल का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सेना के जवानों ने शस्त्र झुकाकर और सलामी देकर वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। 🙏🏻🥹

3 days ago | [YT] | 93

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लांस नायक राजेन्द्र सिंह धामा जी के शहादत दिवस पर उन्हे नमन 🙏💔🌼
वीरांगना - श्रीमती मुनेश देवी
कारगिल युद्ध 1999
लांस नायक राजेन्द्र सिंह धामा का जन्म उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के खेकड़ा गांव में श्री जयसिंह धामा एवं श्रीमती शकुंतला देवी के परिवार में हुआ था। इंटर तक शिक्षा प्राप्त कर वर्ष 1988 में वह भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में भर्ती हुए थे।🙏💔

ऑपरेशन विजय में 08 जुलाई 1999 को द्रास सेक्टर के पिंपल कॉमप्लेक्स की लड़ाई में राजेन्द्र सिंह अदम्य साहस एवं वीरता से लड़ते हुए बलिदान हुए थे । 🙏🌼
भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏💔

5 days ago | [YT] | 585