Welcome! Here I share the right knowledge and eliminate confusion about the things being spread in the name of astrology and sanatan dharma!

An effort with my little knowledge of the oceans named hindu ideology, astrology, mundane astrology and Puranas is made here for sharing the essence in simple language!

Sharing authentic stories of ShivMahaPuran!

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NOTE -

1) Before the consultation day and time, sit with a pen and paper and draft your questions well!
2) Avoid eating Nonveg and drinking alcohol 3 days min prior to consultation, suggested is 9days though!
3) Check the details sent ( DOB, Birth Time, Birth place) well if it is accurate, no repeating of session for the " Ohh By mistake I gave this that" corrections!
4) During the consultation sit with Pen & Paper, to note the things for your reference, we do not provide computer generated general report, its all customised and live for you!


Dipanshu Bansal

मां सरस्वती पूजा एवं बसंत पंचमी की शुभकामनाएं!

बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने के पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक कारण बहुत ही गहरा है। आज, यानी 23 जनवरी 2026 को ही पूरे देश में यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

1. देवी सरस्वती का प्राकट्य (Birth of Goddess Saraswati)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि की रचना की, तो उन्हें सब कुछ शांत और मौन लगा। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का जिससे एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई—जिनके एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वरमुद्रा में था। जैसे ही उन्होंने वीणा बजाई, संसार में शब्द और वाणी का संचार हुआ। इसी कारण बसंत पंचमी को सरस्वती माता के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

2. ज्ञान और बुद्धि का वरदान

देवी सरस्वती को ज्ञान, विद्या, कला, संगीत और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन उनकी पूजा करने से:
* अज्ञानता का नाश होता है और मन में ज्ञान का प्रकाश फैलता है।
* विद्यार्थियों के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है; वे इस दिन अपनी किताबें, पेन और वाद्य यंत्र (musical instruments) माता के चरणों में रखकर आशीर्वाद मांगते हैं।
* इस दिन 'अक्षर अभ्यासम' या 'विद्यारंभ' की परंपरा भी है, जहाँ छोटे बच्चों को पहली बार लिखना सिखाया जाता है।

3. ऋतु परिवर्तन और पीला रंग

बसंत पंचमी से बसंत ऋतु (Spring Season) का आगमन होता है। इसे 'ऋतुराज' (ऋतुओं का राजा) कहा जाता है।
* प्रकृति में सरसों के पीले फूल खिलने लगते हैं और चारों ओर हरियाली छा जाती है।
* पीला रंग माँ सरस्वती का प्रिय माना जाता है, जो उत्साह, समृद्धि और सात्विकता का प्रतीक है। इसीलिए लोग इस दिन पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले रंग का मीठा चावल या केसरिया खीर का भोग लगाते हैं।

आज के लिए विशेष मुहूर्त (23 जनवरी 2026):

अगर आप आज पूजा करना चाहते हैं, तो शुभ मुहूर्त दोपहर 12:33 PM तक है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज 'अमृत बेला' और 'अभिजीत मुहूर्त' का बहुत ही शुभ संयोग बना है।

2 weeks ago | [YT] | 1

Dipanshu Bansal

Hi All,

Tomorrow is amavasya, and called Mauni Amavasya! This day it us very important to observe Maun (silence) which uplifts spirtual spirit in an individual by giving the control over Indriya!

This Maagh Maas Amavasya is very umportant in many aspect, time was short, was occupied, couldnt make a video so giving a brief write up here, what to do and what not to do-

1. Take a dip in any holy river, drop some black sesame first and then take a dip with the name of of your ishta, then take another dip in the name of Rishis/guru, who gave us knowledge, then।in the name of pitra for their upliftment and blessing over you from them!

If cant go to a holu river, drop some ganga jal in a bucket in your house only, mix it with normal water then and chant Har Har Gange and do Snana!

2. Do Anna Daan, Til (Sesame) daan!

3. Do Homa (Hawan) with black sesame and samagri, do aahutis for Dev, rishi, and pitra and if any of the mantra given by guru or you practice even without guru!

4. Around 1130am।to 1230pm (kutup kaal) offer tarpan to your pitra of either side, Maternal and paternal, of any Peedhi, gyaat or Agyaat, wish for their wellbeing and seek blessings from them!

In Tarpan do jo use Steel utensils, use silver at best then copper or even disposable you can! Drop some gangajal first, then normal water then black sesame, tulai patra, kusha and।do 7th Adhyay of Geeta Ji! Offer this to your pitra by offer water in form।of tarpan! It needs to be done by flowing the water fr the middle।of your thumb and first, index finger as told in many videos, towards Dakshina disha (South direction), saying 3 times Trapyami!

Make sure this water doesn't goes to a dirty।place or comes।in feets of walkerbys, collect it।in another Patra(pot) ajd offer।in Peepal tree or any other plant! Its Sunday but atill।you can offer it in peepal thats an exception of the Parv greater than Vaar!

Offer a Diya in Peepal।in the evening! Keep a maun as much as you can, do not।complaint or bitch about anything! Feed a needy or a brahmin, one can do full shraadh karm as well for pitru if they wiah for!

5. Do shivlinga abhishek with a water (ganga jal) mixed with black sesame in the name of pitra for thwir Sadgati! Tremendous benefits!

This Amavasya comes with lots of Good and auspicious Yogas like -

1. Ravivari or Bhanu Amavasya
2. Sarvarth Siddhi Yog
3. Its Maagh Amavasya
4. Yugadi Tithi ( Dwapar Yug was started from this tithi)

It will give Phala of many surya Grahans together along with।amavasya benefits! So dont miss it, things told here are doable and easy!

Har Har Mahadev!

3 weeks ago | [YT] | 1

Dipanshu Bansal

मार्गशीर्ष पूर्णिमा, दत्तात्रेय जयंती, भैरवी जयंती, अन्नपूर्णा जयंती चंद्र दर्शन!

2 months ago | [YT] | 1

Dipanshu Bansal

मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत! जिनका चंद्रमा कमजोर है, दुःस्थान में है, मानसिक पीड़ा हो, उनके लिए पूर्णिमा व्रत लाभकारी है!

2 months ago | [YT] | 1

Dipanshu Bansal

विवाह पंचमी! इस दिन हुआ था श्री राम और माता सीता का विवाह! शीघ्र विवाह का।उपाय!

*विवाह पंचमी*

25 नवंबर 2025 को है विवाह पंचमी! हर साल मार्गशीर्ष मास की पंचमी तिथि को मनाया जाता है विवाह पंचमी!

इस दिन हुआ था राम जी व सीता जी का विवाह! इस दिन विवाह करना शुभ नही माना जाता है, खर मास भी आरंभ हो जाता जिसमे कोई शुभ कार्य नही किए जाते और अब मकर सक्रांति के बाद ही विवाह आदि शुभ कार्य किए जायेंगे!

जिन लोगो को विवाह न हो रहा हो उन्हे विवाह पंचमी के दिन श्री राम और सीता माता की पूजा कर अपने शीघ्र विवाह की कामना करनी चाहिए, कहते है इससे विवाह बाधा दूर होती है!

विवाह पंचमी 2025 मुहूर्त (Vivah Panchami 2025 Muhurat)

विवाह पंचमी का उत्सव
25 नवंबर 2025,, दिन मंगलवार

विवाह पंचमी तिथि
24 नवंबर 2025, सोमवार को रात 9.22 मिनट पर शुरू और मंगलवार 25 नवंबर 2025 को 10.56 PM पर समाप्त!

खरमास में सूर्य उपासना का विशेष महत्व है, रोज सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में लाल पुष्प, गुड, रोली, अक्षत डालकर सूर्य को अर्घ्य देना अति पुण्य प्राप्त करने वाला है।

शीघ्र विवाह के लिए
इस दिन भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा के सामने बैठकर उन्हें लाल या पीले वस्त्र अर्पित करें। फिर उनके बीच पीले रंग की मौली से गठबंधन करें। इससे विवाह के योग जल्द बनने लगते हैं। इसके साथ ही विवाह पंचमी के दिन रामचरितमानस में वर्णित सीता स्वयंवर प्रसंग का पाठ करें। ऐसा करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलने की कामना पूरी होती है।

सुखी दांपत्य जीवन के लिए
इस दिन राम दरबार की विधिवत पूजा करें। पूजा में लाल सिंदूर और सुहाग की सामग्री माता सीता को अर्पित करें। इसके साथ ही भगवान राम और देवी सीता को तुलसी दल डालकर खीर का भोग लगाएं। फिर इस भोग को पति-पत्नी साथ में ग्रहण करें। इससे उनके बीच प्यार बढ़ेगा। वहीं, पूजा के दौरान "ॐ जानकी वल्लभाय नमः", "श्री राम जय राम जय जय राम" मंत्र का 108 बार जाप जरूर करें।

तो उठाइए आप भी इसका लाभ 😊

जय श्री राम

Disclaimer: (धार्मिक मान्यताओं के अनुसार)

2 months ago | [YT] | 2

Dipanshu Bansal

देवउठनी एकादशी पर श्री हरि को निद्रा से उठाने के लिए कुछ मंत्रों का।प्रयोग किया जाता है, वो यहां दे रहा हूं, जिसमें सुविधा रहे वो 3 बार बोलकर विष्णु जी को उठाए, स्नान कराए, वस्त्र गंध पुष्प मिष्ठान धूप दीप आदि अर्पित कर विष्णु सहस्त्रनाम।का पाठ करें!

उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम।'

'उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव। गता मेघा वियच्चैव निर्मलं निर्मलादिशः।'

'शारदानि च पुष्पाणि गृहाण मम केशव।'

या

उत्तिष्ठो उत्तिष्ठ गोविंदो, उत्तिष्ठो गरुड़ध्वज।
उत्तिष्ठो कमलाकांत, जगताम मंगलम कुरु।।’

जय श्री हरि!

3 months ago | [YT] | 2

Dipanshu Bansal

Thank you for understanding!

To block your slots or in case of emergency, connect at - +91-99580-62227!

3 months ago | [YT] | 1

Dipanshu Bansal

What I observed that many people forgets or just worship to Ganesha and Lakshmi in Diwali Pooja!

Whereas, by shashtras and tradionally, we must worship Ganesha Laxmi and Saraswati all 3!

What about you? Do comment and tell me if worshiped Maa Saraswati too in Diwali Pooja!

:)

3 months ago | [YT] | 1

Dipanshu Bansal

नमस्कार,

आशा है आप सभी ने शरद पूर्णिमा के निमित बनाई वीडियो का भरपूर लाभ लिया होगा!

सभी को शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं!

जय श्री हरि, जय महादेव!

4 months ago | [YT] | 4

Dipanshu Bansal

दशांश हवन ,तर्पण और मार्जन सम्पूर्ण जानकारी! ( पार्ट - 1/2)

दशांश हवन

हवन करना शास्त्रों में बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। भारतीय परम्पराओ में हवन अथवा यज्ञ को बहुत महत्व बताया गया है। दशांश हवन प्रत्येक मंत्रो को सिद्ध करने के बाद किया जाता है। जिसके अंतर्गत मन्त्र जप का दसवा हिस्सा आहुतियों के माद्यम से सिद्ध किया जाता है। मान लीजिये हमने 125000 जप किये है तो हमें कुल के दसवां भाग 12500 जप का हवन करना होता है। इसको समझने के लिए हम तालिका का प्रयोग करेंगे :-

क्र. जप संख्या कर्म विधान
1 125000 कुल मंत्र जप
2 125000/10= 12500 हवन अहुतिया
3 12500/10 = 1250 तर्पण
4. 1250/10 = 125 मार्जन
5 125/10 = 12 ब्रम्ह या कन्या भोज

दशांश हवन

उपरोक्त दी गई तालिका के माद्यम से हम समझ सकते है कि सपूर्ण दशांश हवन कैसे किया जाये। यदि किसी कारणवश तर्पण ,मार्जन या कन्या भोज में असमर्थ है तो आप उससे दुगना जप करके भी सिद्ध मान सकते है। लेकिन कुछ मतानुसार हवन कर्म करने से देवताओ को शक्ति मिलती है अर्थात मंत्र हवन से अधिक लाभ मिलता है।


हवन से पहेले हमें सामग्री की आवश्यकता पड़ेगी। सर्वप्रथम सामग्री पर विचार कर लेते है :

कुण्ड : कुण्ड अगर हम जमीन पर बना रहे है तो अति उत्तम माना जाता है। अगर किसी कारण से जमीन पर नहीं बनाया जा सके तो आप किसी भी पात्र का चयन कर सकते है। 12500 आहुतियों के लिए लगभग 2X2 कि लम्बाई चोड़ाई होना चाहिए तथा गहराइ 1.6 इंच लगभग होना चाहिए।

आसन: कुश का आसन हो तो बहुत ही अच्छा है अन्यथा आप कोई भी ऊनि आसन का प्रयोग कर सकते है।

जलपात्र : आपको ताम्बे का लोटा तथा एक बड़ा पात्र जिसमे 1-2 लीटर पानी आ जाये तर्पण ,मार्जन के लिए आवश्यकता पड़ेगी।

हवन लकड़ी/समिधा : अधिकांशतः आम की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है क्योंकि यह आसानी से उपलब्द हो जाता है। शास्त्रों में अन्य लकड़ियों को भी विवरण मिलता है। गृह शांति के लिए गृह अनुसार भी लकड़ी प्रयोग में लाई जाती है। सूर्य: मदार, चन्द्र: पलाश, मंगल : खैर, बुध: चिड़चिड, बृहस्पति: पीपल, शुक्र: गूलर, शनि: शमी, राहु: दूर्वा केतु: कुशा की लकड़ी उपयोगी है।

नारियल गोला/बाटकी: पूर्ण आहुति के लिए नारियल की बाटकी की आवश्यकता पड़ेगी।

हविष्य या आहुति सामग्री: सर्वप्रथम हमें घी लेकर आ जाये। अलग अलग प्रकार के हवन में अलग अलग सामग्री उपयोग में लाई जाती है। सामान्यतः पांच तरह की सामग्री मिलाकर पंचांग धुप बना सकते है : 100 ग्राम तिल ,80 ग्राम मिश्री ,50 ग्राम जों , 25 ग्राम चावल, 25 नारियल बुरा। आप मार्केट से भी सामग्री ला सकते है। लक्ष्मी जी के दशांश हवन के लिए आप सिर्फ कमलगट्टे और घी से भी आहुतियाँ दे सकते है। सामान्य पंचोपचार पूजन सामग्री। नवग्रह लकड़ी, कपूर,शक्कर,फल ,मेवा आदि।


सम्पूर्ण - लघु दशांश हवन विधि!

माला एवं सम्पूर्ण सामग्री के साथ आसन पर बेठ जाना चाहिए। दशांश हवन से पहले पंचोपचार पूजन विधि द्वारा गुरु ,गणेश , दशांश हवन कुण्ड आदि का पूजन संपन्न करे :

सबसे पहले पवित्रीकरण-

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वा गतोअपी वा

य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यांतर: शुचि: |

इसके बाद पंचपात्र से जल लेकर निम्न मंत्र बोलते हुए जल पिए :

ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा |

ॐ अमृतापिधानीमसि स्वाहा |

ॐ सत्यं यश: श्रीर्मयि श्री:श्रयतां स्वाहा |

अब निम्न मंत्र बोलकर हाथ धो ले

ॐ नारायणाय नमः।

Cont.... Part 2/2

4 months ago (edited) | [YT] | 1