माँ कुखी दरकाल्टी देवता बकरालू की सभी रानियों मे से बड़ी (जेठी) है। देवी अपने आप में बहुत शक्तिशाली है और असंख्य जोगणियो, सावनियों की स्वामी है। कहा जाता है कि पहले देवी जी, दरकाली नारायण जी की अर्धांगिनी थी। जब बकरालू जी कंछीन (रामपुर) घाटी में थे तो उस समय देवता साहेब की देवी जी से भेंट हुई और बकरालू जी ने देवी जी को हार (अपने साथ भगा दिया । उस समय देवी जी ने बकरालू जी से वचन मांगा कि जब बकरालू जी का रथ बनेगा तो देवी उनके शीर (सबसे उपर) सुशोभित होगी और करालू जी ने भी उन्हे ये वचन दे दिया । इसी कारण से आज भी देवी बकरालू जी के शीर पर विराजमान है ।
jay davta bakralu
माँ कुखी दरकाल्टी देवता बकरालू की सभी रानियों मे से बड़ी (जेठी) है। देवी अपने आप में बहुत शक्तिशाली है और असंख्य जोगणियो, सावनियों की स्वामी है। कहा जाता है कि पहले देवी जी, दरकाली नारायण जी की अर्धांगिनी थी। जब बकरालू जी कंछीन (रामपुर) घाटी में थे तो उस समय देवता साहेब की देवी जी से भेंट हुई और बकरालू जी ने देवी जी को हार (अपने साथ भगा दिया । उस समय देवी जी ने बकरालू जी से वचन मांगा कि जब बकरालू जी का रथ बनेगा तो देवी उनके शीर (सबसे उपर) सुशोभित होगी और करालू जी ने भी उन्हे ये वचन दे दिया । इसी कारण से आज भी देवी बकरालू जी के शीर पर विराजमान है ।
2 years ago | [YT] | 11
View 1 reply