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AstroNitesh
2 weeks ago | [YT] | 2
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AstroNitesh
ज्योतिष में कुछ भी पूरी तरह से रद्द नहीं होता है। नकारात्मक योगों के 'नीच भंग राज योग' या अन्य सकारात्मक योगों द्वारा पूरी तरह से समाप्त हो जाने का विचार एक सांत्वना मात्र है। वास्तविकता में, सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव जुड़ जाते हैं, और ये योग अक्सर पेशेवर जीवन में मदद करते हैं, लेकिन व्यक्तिगत संबंधों में नहीं।
2 months ago | [YT] | 0
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AstroNitesh
जब गहराई से देखा जाए, तो ज्योतिष नियति के कठोर नियमों का एक सेट नहीं है, बल्कि आत्म-जागरूकता और सशक्तिकरण के लिए एक परिष्कृत उपकरण है। यह आपको बताता नहीं है कि आप क्या बनेंगे, बल्कि यह आपको दिखाता है कि आप क्या बन सकते हैं। यह आपको पिंजरे में बंद नहीं करता, बल्कि आपको एक नक्शा देता है ताकि आप अपने रास्ते को बेहतर ढंग से नेविगेट कर सकें।
अब जब आप ज्योतिष को एक गहरी दृष्टि से देखते हैं, तो आप अपने जीवन के 'नकारात्मक' योगों को चुनौतियों के बजाय मार्गदर्शक के रूप में कैसे उपयोग करेंगे? Comments में बताये
2 months ago | [YT] | 0
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AstroNitesh
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2 months ago | [YT] | 0
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AstroNitesh
द्वितीय भाव में चंद्रमा का ज्योतिषीय विश्लेषण: एक गहन विवेचन 🌙
दूसरे भाव में चंद्रमा की स्थिति एक जटिल और बहुआयामी ज्योतिषीय घटना है, जिसका जातक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह स्थिति जातक के वित्त, परिवार, और वाणी को भावनात्मक रूप से प्रभावित करती है। यह लेख दूसरे भाव में चंद्रमा के प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें इसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं, प्रमुख ज्योतिषीय योगों और लाल किताब के विशिष्ट उपायों पर प्रकाश डाला गया है।
द्वितीय भाव और चंद्रमा का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष में, द्वितीय भाव को 'धन भाव' (House of Wealth), 'कुटुंब भाव' (House of Family), और 'वाणी भाव' (House of Speech) के रूप में जाना जाता है। यह व्यक्ति की भौतिक संपत्ति, वित्तीय सुरक्षा, पैतृक परिवार और संवाद शैली को नियंत्रित करता है। दूसरी ओर, चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक स्थिति, और मातृशक्ति का कारक माना जाता है। यह एक संवेदनशील और चंचल ग्रह है।
जब चंद्रमा द्वितीय भाव में आता है, तो यह जातक की वित्तीय सुरक्षा, परिवार और वाणी को भावनात्मक रंग देता है। इस स्थिति में, व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और उसकी वाणी की मिठास उसके मन की शांति और भावनाओं से सीधे तौर पर जुड़ी होती है। यह जातक को अत्यधिक संवेदनशील बनाता है, जिससे जीवन के इन क्षेत्रों में एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव पैदा होता है।
द्वितीय भाव में चंद्रमा के सामान्य फल: शुभ और अशुभ प्रभाव
द्वितीय भाव में चंद्रमा के परिणाम उसकी शक्ति और कुंडली के अन्य कारकों पर निर्भर करते हैं।
सकारात्मक प्रभाव (शुभ फल)
जब चंद्रमा इस भाव में बलवान होता है, तो जातक के कई सकारात्मक गुण सामने आते हैं:
• व्यक्तित्व: जातक एक मधुरभाषी, शांतिप्रिय और सहनशील व्यक्ति होता है। उसकी वाणी में एक स्वाभाविक मिठास और आकर्षण होता है।
• धन: आर्थिक दृष्टि से, यह स्थिति जातक की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाती है और उसे धन संचय करने में मदद करती है। उन्हें अपने परिवार से भी धन लाभ हो सकता है।
• शिक्षा और करियर: जातक को अच्छी शिक्षा मिलती है और वह शिक्षण, यात्रा, या डेयरी उत्पाद जैसे चंद्रमा से संबंधित व्यवसायों में सफल हो सकता है।
• पारिवारिक जीवन: पारिवारिक जीवन में स्थिरता आती है और जातक को अपने परिवार का पूरा सहयोग मिलता है।
नकारात्मक प्रभाव (अशुभ फल)
यदि चंद्रमा कमजोर या पीड़ित हो, तो इसके नकारात्मक परिणाम भी हो सकते हैं:
• धन: वित्तीय स्थिति में अचानक उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है, जिससे धन संचय में बाधा आ सकती है।
• स्वास्थ्य: जातक को आँखों और कफ से संबंधित रोग होने की संभावना रहती है।
• वाणी: व्यक्ति को अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता होती है, क्योंकि वाणी में कटुता या तीखापन आ सकता है।
• मानसिक स्थिति: किसी वस्तु या व्यक्ति के प्रति अत्यधिक भावनात्मक लगाव जातक को मानसिक और भावनात्मक रूप से परेशान कर सकता है।
यह विरोधाभास चंद्रमा की चंचल प्रकृति के कारण है। जब मन शांत होता है, तो व्यक्ति की वाणी मधुर होती है, लेकिन जब मन अत्यधिक भावनात्मक तनाव में होता है, तो वाणी में कटुता आ सकती है।
3 months ago | [YT] | 1
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AstroNitesh
3 months ago | [YT] | 0
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AstroNitesh
चंद्रमा वृष राशि में उच्च होता है क्योंकि वृष राशि पृथ्वी तत्व की है और स्थिर तथा सुख-सुविधाओं से जुड़ी हुई है। यहाँ चंद्रमा की चंचलता कम होती है और मन शांति, स्थिरता और संतुलन पाता है। वृषभ राशि की विशिष्टता के चलते चंद्रमा अपनी ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल कर सकता है और ये स्थिति व्यक्ति को भौतिक सुख, धन और मानसिक शांति देती है।
वृश्चिक राशि में चंद्रमा नीच होता है क्योंकि वृश्चिक राशि जीवन में अस्थिरता, परिवर्तन और रहस्यों की राशि है, जो मन को बेचैन और अस्थिर बनाती है। वृश्चिक की जल तत्वीय प्रकृति के कारण भावनाएँ अत्यधिक चलायमान होती हैं, जिससे जीवन में मानसिक संघर्ष और भ्रम उत्पन्न होता है। विशाखा नक्षत्र का अंतिम हिस्सा वृश्चिक में आता है और यहां चंद्रमा नीच होता है, जो मन में असमंजस और अस्थिरता का प्रतीक है।
3 months ago | [YT] | 0
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AstroNitesh
राहु-शनि और पितृ दोष का उपाय" का सार गूगल सर्च के नतीजों के अनुसार यहाँ दिया गया है:
* श्रापित दोष (Shrapit Dosh): यह दोष तब बनता है जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि (Saturn) और राहु (Rahu) एक साथ होते हैं। इसे "प्रेत श्राप योग" भी कहते हैं।
* प्रभाव: इस दोष के कारण जीवन में एक के बाद एक परेशानियां आती हैं और अचानक भारी नुकसान हो सकता है। यह संतान सुख में भी बाधा डाल सकता है और दोस्त से ज़्यादा दुश्मन बन सकते हैं।
* पितृ दोष (Pitra Dosh): यह दोष पिछले जन्म में किए गए गलत कार्यों के कारण लगता है।
* उपाय: इन दोषों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए ज्योतिषीय उपाय बताए गए हैं, जैसे कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करवाना, नवचंडी कराना और पितरों को शांति देना।
4 months ago | [YT] | 0
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AstroNitesh
1 year ago | [YT] | 2
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