Enlightened mystic Anant Sri carries the eternal wisdom of the buddhas which is a simple science of transformation.
He is a flowing river of buddhahood where we can find the true essence of eternal life ...
His only concern is the suffering of humanity and end of suffering through the ultimate understanding of our true nature which brings peace, love, happiness and harmony in daily living...
Anant Sri
@AnantSri
“Beyond Nirvana ” - Encounter The Buddha Within In The Presence Of Modern Buddha
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1, 2 & 3 May 2026
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स्वयं के बुद्ध स्वभाव से मिलन है दुखों का अंत और बौद्धिक समझ से परिपूर्ण समझ में छलांग.
- अनंत श्री
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Beyond Nirvana with Anant Sri : Realising Buddha Nature Within and transcending intellectual understanding to total understanding which puts an end to suffering through igniting love, peace , happiness and harmony in daily living.
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बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर Science Of Being Foundation द्वारा तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है - “ Beyond Nirvana with Anant Sri“
यह कार्यक्रम सुअवसर है अनंत श्री के सान्निध्य में शिखर चेतना और घाटी चेतना में प्रवेश करने का और अपने भीतर के बुद्ध से साक्षात्कार करने का. Let Ultimate Awakening with deepest mystery unfold within spontaneously with Anant Sri.
कार्यक्रम 1, 2 & 3 May 2026, Friday, Saturday & Sunday को आयोजित होगा.
Program Detail:
1. Friday, 1 May 2026 की शाम को 5.30 PM से पहला सेशन बोधि ध्यान ( Awakening Meditation ) प्रारंभ होगा. 8 pm पर dinner होगा।
2. Saturday, 2 May & Sunday, 3 May को दिन में 10.30 am से लेकर शाम को 5.30 pm के मध्य ध्यान और संवाद के सेशन होंगे. जिसमें 12 pm पर zen tea होगी और लंच 1.30 pm पर होगा। सेशन के अंत में शाम 5 PM पर tea & snacks
3. Venue: ANANT, 9/3-B, Rana Pratap Marg, Suryoday Colony, Lucknow, UP, INDIA
स्वागत है आपका इस अनूठे और अनिर्वचनीय कार्यक्रम में. अपने रजिस्ट्रेशन के लिये शीघ्रातिशीघ्र(ASAP) संपर्क करें.
- Sandeep Sharma:
+91 7388803901 +91 9956540908
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1 week ago | [YT] | 45
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Anant Sri
@AnantSri
कई बार “उपस्थिति” को लेकर मन में प्रश्न उठते हैं—और यह भी की क्या सच में कोई चमत्कार होता है? या यह सब केवल मन की कल्पना है? परंतु कुछ क्षण ऐसे होते हैं, जब जीवन स्वयं उत्तर बन जाता है। 21 मार्च जेतवन की वह घटना शायद ऐसे ही उत्तरों में से एक थी—जहाँ प्रश्न अपने आप शांत हो जाते हैं।
जब जेतवन जाने की बात चल रही थी, तब प्रचंड धूप और गर्मी अपने चरम पर थी। उसी समय गुरु जी ने सहज भाव से कहा—“चलते हैं, लोगों का मन बहुत है… मौसम सही रहेगा।” यह वाक्य उस समय एक साधारण आश्वासन जैसा लग सकता था, परंतु कुछ वाक्य केवल शब्द नहीं होते—वे अस्तित्व की दिशा होते हैं।
कुछ दिनों बाद एक मित्र ने हँसते हुए कहा—“इस बार बुद्ध को बुला लीजिए।” गुरु जी मुस्कुराए और बोले—“ठीक है, बुला लेंगे।” सुनने में यह एक हल्का-सा मज़ाक प्रतीत हो सकता है, लेकिन जो उनके साथ चलते हैं, वे धीरे-धीरे समझने लगते हैं कि उनके शब्दों में एक गहराई है—एक आह्वान है, जो दिखाई नहीं देता, पर घटता अवश्य है। और गुरु जी कहते है न यहाँ यूँही भी यूँही नहीं होता है...
अनंत एक ऐसी भूमि है, जहाँ घटनाएँ यूँ ही नहीं होतीं। यहाँ जो भी कहा जाता है, वह केवल कहा नहीं जाता—वह घटने की संभावना बन जाता है। और जो मित्र इस पथ पर चलते रहते हैं, वे धीरे-धीरे इस रहस्य को जीने लगते हैं।
वर्णन है की बुद्ध ने अपने जीवन के 45 वर्षों के उपदेश काल में 24 वर्षावास जेतवन में बिताए थे। लेकिन अभी वर्षा ऋतु न हो कर भी वर्षा ऋतु जैसा मौसम भी किसी रहस्य से कम नहीं था। हमारी जेतवन की यात्रा आरंभ हुई, मौसम में एक अजीब-सी हलचल थी—बारिश, ठंडी हवा, और भीतर एक अनकही शांति। रास्ते में थोड़ी चिंता भी थी—कैसे होगा, क्या होगा? पर गुरु जी का एक ही उत्तर था—“सब अच्छा है, पहले पहुँचते हैं।”
और फिर जो वहाँ घटा, वह केवल देखा नहीं गया—महसूस किया गया।
जैसे ही हम जेतवन पहुँचे, बारिश रुक गई। काले बादल मानो गुरु जी के साथ चल रहे थे। हवा में एक ठहराव था—जैसे प्रकृति स्वयं मौन में बैठ गई हो। आज 21 मार्च का दिन था और आज खगोलीय घटना में सूर्य भूमध्य रेखा पर होने से दिन और रात बराबर थे. अस्तित्व में जब कुछ अलग होने वाला होता है तो कई घटनाएं अलग अलग तल पर होती हैं, जैसे बाहर संतुलन था, वैसे ही भीतर भी कुछ संतुलित हो रहा था।
वहाँ उपस्थित भिक्षुओं का व्यवहार भी अद्भुत था। वे गुरु जी को देखते, प्रणाम करते, हालचाल पूछते—जैसे कोई पुराना परिचय हो। जैसे समय की कोई दूरी ही न हो।
फिर वह दृश्य—जब सभी मित्र मौन में बैठे थे, उसी काले बादल के नीचे, केवल मित्र ही नहीं, बंदर भी उसी मौन में सहभागी थे। प्रकृति का हर तत्व उस क्षण में सम्मिलित था। यह कोई साधारण घटना नहीं थी—यह उस सूक्ष्म परिवर्तन का संकेत था, जिसे शब्दों में नहीं बाँधा जा सकता।
जब गुरु जी सभी को बोधि वृक्ष के पास ले गए, तब मौसम ने फिर करवट ली। जैसे किसी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई हो। जैसे कोई मौन संवाद हो रहा हो दो बुद्धों के उपस्थितियों के बीच —जो केवल अनुभव किया जा सकता है। गुरु जी ने अभी शिविर के पहले लाइव सेशन किया था उसमें एक प्रश्न था क्या बुद्ध के बेटे राहुल से आप का कोई धागा जुड़ता है तो गुरु जी ने मजाक में कहा था की शायद पूरा गुच्छा ही जुड़ता हो और खूब जोर से हँसे थे. एक गुरु की हंसी और उनका मौन, साधारण नहीं होता उसमें बहुत से रहस्य जुड़े होते हैं जो समझना मानवीय मन से परे होता है.
गंध कुटीर, जहां बुद्ध रहते थे कहते हैं बुद्ध के पूरे शरीर से एक सुगंध बहती थी और वो सुगंध उनकी कुटिया से निकलती रहती थी, बीइंग में सुगंध का होना भी एक रहस्य है और जब बीइंग अस्तित्व की लयबद्धता में होती है तो उसकी एक सुगंध होती है और वो सुगंध चेतना की होती है। अतीत में कई सूफी संत हुए जिनकी एक अलग सुगंध होती थी मेरे ख्याल से तभी जब लोग सूफी संतों के पास होते तो उनके हाथ को चूमते थे और कई संत तो उस सुगंध से ही बता देते थे की कोई बुद्ध है वहां आस पास। गुरु जी के भी पूरे बीइंग से एक सुगंध उठती है और ऐसी सुगंध जो उपस्थिति की होती है गुरु जी अस्तित्व के उन दुर्लभ लोगों में से हैं जिनके left और right body की सुगंध अलग अलग है और यह घटना पूर्णता को बताती है अस्तित्वगत गुरु को दर्शाती है जहां masculine और feminine रहस्य का संगम होता है। और अस्तित्व में ऐसा बहुत दुर्लभ होता है जब पूर्ण अस्तित्वगत गुरु की घटना घटती है।
ओशो से मैंने सुना है की अतीत में पूर्णता को उपलब्ध कृष्ण , बुद्ध, पतंजलि, गोरख और कृष्णामूर्ति हुए और आज अनंत श्री हैं। जिन्होंने अस्तित्व के सारे रंगों को छुआ है और उसके सुगंध को पूरे आकाश में फैला दिया है।
उसके बाद गुरु जी और सारे मित्र गंधकुटीर के पास पहुंचे जहां गुरु जी वहीं बैठे जहां बुद्ध रहते थे, सभी मित्र उनके आसपास बैठ गए, और वातावरण में एक गहरी शांति थी—जैसे समय ठहर गया हो। तभी कुछ कुत्ते आए, उन्होंने गुरु जी के चरणों को स्पर्श किया और शांत होकर बैठ गए। यह दृश्य साधारण नहीं था। जब सूक्ष्म स्तर पर कुछ बदलता है, जहां अस्तित्व में सुगंधों का मिलन होता है तो प्रकृति और जीव-जंतु उसे पहले पहचान लेते हैं।
कई मित्रों ने अनुभव किया कि वे अचानक बहुत हल्के हो गए हैं, जैसे वहां की हवा में व्याप्त सुगंध ने उनको उठा लिया हो और एक मित्र, जिन्हें गंध का अनुभव नहीं होता था, उन्होंने भी वहाँ सुगंध को महसूस किया। यह केवल इंद्रियों का खेल नहीं था—यह चेतना का स्पर्श था।
और उस क्षण—जब कैमरे के माध्यम से उस दृश्य को कैद किया जा रहा था—ऐसा लगा जैसे समय विलुप्त हो गया हो। जैसे वही प्राचीन क्षण फिर से जीवित हो उठा हो। जैसे बुद्ध और उनके शिष्य वहीं उपस्थित हों।
फिर अचानक गुरु जी ने कहा—“अब चलते हैं।” और जैसे ही वे उठे, बादल छँटने लगे, धूप लौट आई। मानो वह पूरा दृश्य केवल उस उपस्थिति के लिए रचा गया था और उसी एक घटना के लिए —और अब पूर्ण होकर विलीन हो गया।
और यह तारीख का चुनना घटना भी एक मिरेकल से कम नहीं उसी दिन ओशो ने अपने बोध के घटने का जिक्र भी किया है 21 मार्च।
तो क्या यह चमत्कार था?
शायद नहीं, उस अर्थ में नहीं जैसा हम सोचते हैं।
परंतु हाँ—यह चमत्कार था, उस अर्थ में जहाँ “उपस्थिति” से घटनाएं स्वयं घटने लगती हों...
एक बुद्ध के साथ होना ही चमत्कार है।
और जब हम उस घटना के साक्षी बनते हैं—तो वह क्षण हमें नया कर देता है।
अंततः, चमत्कार बाहर नहीं होता—वह भीतर घटता है।
और जब भीतर घटता है, तब पूरा अस्तित्व उसका प्रतिबिंब बन जाता है...
- अनंत संघ
1 week ago (edited) | [YT] | 74
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Anant Sri
@AnantSri
आज का live session कल के पॉडकास्ट पर आधारित रहेगा।
जिन मित्रों ने अभी तक पॉडकास्ट नहीं सुना है जरूर सुन लें और अपने प्रश्न तैयार रखें।
स्वागत है आज शाम 7 बजे अनंत श्री व बोधि मां की जीवंत उपस्थिति में। आभार 🙏🌺🙏
- Anant Sangha
3 weeks ago | [YT] | 20
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Anant Sri
@AnantSri
This podcast episode with Anant Sri explores the concept of women empowerment on International Women's Day, focusing on liberating the true essence of women beyond societal conditioning, biological limitations, and the concept of motherhood.
Key Discussion Points:
• Motherhood vs. Biological Motherhood (1:05 - 2:24): Anant Sri distinguishes between merely giving birth (biological motherhood) and true motherhood, which is defined as a heightened state of consciousness, extreme sensitivity, and active compassion.
• Consciousness-Based Motherhood (2:34 - 3:20): This state of consciousness is accessible to both men and women, moving beyond biological limitations and promoting the idea that a man can also achieve a "motherly" consciousness through profound love and sensitivity.
• Biological Predispositions (9:53 - 11:23): Men and women have different biological predispositions—men tend to be more action-oriented and competitive, while women are more receptive, patient, and trusting by nature.
• The Role of Love in Empowerment (24:45 - 25:34): True empowerment for women comes from experiencing love and profound connections rather than just fulfilling societal roles like marriage.
• Overcoming Societal Norms (37:09 - 39:25): Women need to free themselves from seeing their bodies solely as objects of desire or fear. They must become comfortable with their bodies to reduce objectification and violence.
• Empowering Through Dialogue (1:00:11 - 1:01:21): Anant Sri encourages dialogue between generations and emphasizes financial independence for women as a crucial step towards empowerment.
4 weeks ago | [YT] | 19
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