Enlightened mystic Anant Sri carries the eternal wisdom of the buddhas which is a simple science of transformation.
He is a flowing river of buddhahood where we can find the true essence of eternal life ...
His only concern is the suffering of humanity and end of suffering through the ultimate understanding of our true nature which brings peace, love, happiness and harmony in daily living...


Anant Sri

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This podcast episode with Anant Sri explores the concept of women empowerment on International Women's Day, focusing on liberating the true essence of women beyond societal conditioning, biological limitations, and the concept of motherhood.

Key Discussion Points:

• Motherhood vs. Biological Motherhood (1:05 - 2:24): Anant Sri distinguishes between merely giving birth (biological motherhood) and true motherhood, which is defined as a heightened state of consciousness, extreme sensitivity, and active compassion.
• Consciousness-Based Motherhood (2:34 - 3:20): This state of consciousness is accessible to both men and women, moving beyond biological limitations and promoting the idea that a man can also achieve a "motherly" consciousness through profound love and sensitivity.
• Biological Predispositions (9:53 - 11:23): Men and women have different biological predispositions—men tend to be more action-oriented and competitive, while women are more receptive, patient, and trusting by nature.
• The Role of Love in Empowerment (24:45 - 25:34): True empowerment for women comes from experiencing love and profound connections rather than just fulfilling societal roles like marriage.
• Overcoming Societal Norms (37:09 - 39:25): Women need to free themselves from seeing their bodies solely as objects of desire or fear. They must become comfortable with their bodies to reduce objectification and violence.
• Empowering Through Dialogue (1:00:11 - 1:01:21): Anant Sri encourages dialogue between generations and emphasizes financial independence for women as a crucial step towards empowerment.

3 days ago | [YT] | 17

Anant Sri

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Anant Sri Podcast - तंत्र और अंधविश्वास
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यह पॉडकास्ट तंत्र और अंधविश्वास के विषय पर अनंत श्री और पिकू जी के बीच बातचीत का सारांश प्रस्तुत करता है।

तंत्र और मन की शक्तियाँ (1:09 - 2:37)
अनंत श्री बताते हैं कि तंत्र मूलतः मनोविज्ञान का एक गहरा रूप है, जो मानसिक शक्तियों को विकसित करने और जीवन में सुंदरता लाने की एक प्रणाली है।
लोगों ने इसका दुरुपयोग करके इसे काला जादू, वशीकरण, भूत-प्रेत आदि में बदल दिया, जिससे वे लोगों के डर से खेलने लगे।
मन की शक्तियों को जानने से मन की बड़ी संभावनाएँ खुल जाती हैं। एक सशक्त और संतुलित मन सम्मोहक हो सकता है, जबकि विकृत मन मारक भी हो सकता है।
जादू-टोना और अंधविश्वास इसी कमजोर मन को गलत सुझाव देकर निकलता है।

मंत्रों का वास्तविक अर्थ (3:52 - 6:04)
मंत्र वे शब्द समूह हैं जो मन को सुझाव देते हैं। प्राचीन काल में लोग सुनने से ज्यादा प्रभावित होते थे, इसलिए मंत्रों का आविष्कार हुआ।
आज के समय में भी हम सीधे शब्दों में मन को सुझाव दे सकते हैं, जो एक प्रकार का मंत्र ही है।
संस्कृत या अन्य भाषाओं में ढले हुए सुझाव मंत्र बन जाते हैं, लेकिन यदि उनका अर्थ समझ न आए तो वे अर्थहीन हो सकते हैं।

भय और मान्यताएँ (6:30 - 11:45)
लोग किसी बात पर विश्वास करते हैं तो वह उनके साथ घटित होने लगती है।
बंगाल में लोग सतगुरु की तलाश करते हैं ताकि वे तांत्रिकों के डर से बच सकें, लेकिन अक्सर वे सतगुरु से भी मंत्र ही मांगते हैं।
अनंत श्री कहते हैं कि उनके पास लोग डर से नहीं आते, बल्कि समझ और शांति के लिए आते हैं।
दीक्षा की माला प्रेम का प्रतीक है, न कि कोई अतिरिक्त शक्ति। माला टूटने पर लोग डरते हैं क्योंकि उनकी पुरानी मान्यताएँ जुड़ी होती हैं।

बुद्ध और तांत्रिक (15:56 - 19:15)
अनंत श्री के अनुसार, हर बुद्ध ही असली तांत्रिक होता है, जैसे रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद।
जो लोग तंत्र के नाम पर शक्ति प्रदर्शन, भयभीत करने या सिद्धियों का लालच देते हैं, वे तंत्र के साथ खिलवाड़ करते हैं।
रामकृष्ण परमहंस ने तंत्र मार्ग को गहराई से समझा और पाया कि तंत्र प्रेम का मार्ग है।
तंत्र की मूल आत्मा में प्रेम समाया है, जिससे मिलने वाले के हृदय में उल्लास और आशा जागृत होनी चाहिए, न कि भय।

मानसिक बीमारियाँ और इलाज (19:52 - 25:08)
लगभग 70-75% बीमारियाँ मानसिक होती हैं। मन की उलझनों से पैदा हुई बीमारियाँ विपरीत सुझाव या विश्वास से ठीक हो सकती हैं।
किसी स्थान, बाबा, तेल या पानी में जादू नहीं होता, बल्कि व्यक्ति की मान्यता बदलने से वह ठीक होता है (प्लेसहो इफेक्ट)।
जो लोग गंभीर शारीरिक बीमारियों के लिए ऐसे बाबाओं के पास जाते हैं, वे अपराध करते हैं। चिकित्सा विज्ञान को प्राथमिकता देनी चाहिए।
केवल उन्हीं साँपों का जहर उतारा जा सकता है जिनमें जहर नहीं होता। असली जहरीले सांप के काटने पर ऐसे उपाय काम नहीं करते।

बलि प्रथा और अंधविश्वास (25:10 - 32:51)
बलि प्रथा आदिम मनुष्य के भोजन और प्रसन्नता से जुड़ी थी, जिसे बाद में देवी-देवताओं से जोड़ा गया।
अनंत श्री नरबलि को हिंसात्मक वृत्ति का रूप मानते हैं, जहाँ लोग अपनी हिंसा और ईर्ष्या को संतुष्ट करते हैं।
वे मिठाइयों और छप्पन भोग चढ़ाने को भी मूढ़ता कहते हैं, क्योंकि देवी-देवता उन्हें खाने नहीं आते।
नकारात्मक वृत्तियों को "बलि चढ़ाने" को भी वे हिंसात्मक मानते हैं। वे कहते हैं कि अपनी वृत्तियों से प्रेम करना चाहिए, उनसे लड़ना नहीं चाहिए।
प्रेम ही वास्तविक बदलाव लाता है, जैसे बुद्धों के सानिध्य में चोर और हत्यारे बदल गए।

मन की शक्ति और अंधविश्वास का खेल (43:47 - 51:25)
नींबू-मिर्च लटकाना, नजर उतारना और काला जादू जैसी चीजें बाल मन की बचकानी कहानियाँ हैं।
मारण-मोहन-उच्चाटन सभी मन की शक्तियों का खेल है। मन में मरने, बीमार होने या स्वस्थ होने की शक्ति है।
किसी को मारने या बीमार करने की कोशिश करना हिंसक प्रवृत्ति है।
ये सब मनोविज्ञान का विषय है, इनकी कोई वास्तविकता नहीं है।
यदि कोई व्यक्ति कमजोर मन का है और उसे बार-बार नकारात्मक सुझाव दिए जाएँ तो वह वास्तव में बीमार महसूस करने लगता है।

नकारात्मकता से निकलने का तरीका (51:30 - 52:43)
सबसे पहले अपनी गलतियों से प्यार करें और उनसे संवाद करें।
अपनी गलतियों के प्रति संवेदनात्मक दृष्टि रखें, जिससे उन पर पकड़ ढीली हो जाएगी।
नियमित ध्यान नकारात्मकता से निकलने का सबसे बड़ा उपाय है।

2 weeks ago | [YT] | 21

Anant Sri

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Anant Sri Podcast - डिकोडिंग महाशिवरात्रि
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अनंत श्री पॉडकास्ट के इस एपिसोड में महाशिवरात्रि और शिव से जुड़े कई रहस्यों पर चर्चा की गई है (0:00)। अनंत श्री ने शिव और शिवलिंग के महत्व को समझाया है, जहाँ शिवलिंग अमूर्त स्थिरता का प्रतीक है (1:56-2:09)। उन्होंने शिव की प्रतिमा में मौजूद विभिन्न प्रतीकों जैसे नीले रंग (2:49), खुली जटाएं (3:00), त्रिशूल (4:19), डमरू (6:21), और चंद्रमा (7:10) का गहरा अर्थ बताया।

मुख्य बातें:
शिव और शिवलिंग का महत्व: शिवलिंग स्थिरता और शांति का प्रतीक है (1:56-2:09)। शिव की मूर्ति शून्यता और चरम चेतना को दर्शाती है, जहाँ उनका नीला रंग आकाश की शून्यता, जटाएं मन की उलझन, गंगा चेतना का प्रवाह, त्रिशूल वर्तमान में ठहरने का प्रतीक, डमरू सृजन का नाद, और चंद्रमा शीतलता का प्रतीक है (2:45-7:40)।
महाशिवरात्रि जागरण: रात भर जागने की प्रथा को अर्ध-सत्य बताया गया है। सहज जागरण ही श्रेयस्कर है, क्योंकि रात्रि प्रकृति के विश्राम का समय है और इस समय ध्यान अधिक प्रभावी होता है (8:01-10:06)।
शिवलिंग पर त्याज्य वस्तुएं: शिव को बेलपत्र, भांग, और धतूरा जैसी त्याज्य वस्तुएं अर्पित करने का अर्थ यह है कि जो व्यक्ति परम अवस्था को प्राप्त कर चुका है, उसके लिए संसार में कुछ भी त्याज्य नहीं है। वह सभी को प्रेम और स्वीकार करता है (10:21-12:50)। भांग का प्रतीकवाद उन लोगों के लिए है जो कल्पनाओं और नशे में जीते हैं, और शिव उन सबको स्वीकार करते हैं (13:15-15:49)।
शिव-पार्वती विवाह: इसे वैराग्य (शिव) और शक्ति (पार्वती) के मिलन के रूप में एक प्रतीकात्मक कथा बताया गया है। यह दर्शाता है कि विपरीत ध्रुवों का मिलन संभव है और शक्ति ही चेतना को सक्रिय करती है (17:49-21:02)। पार्वती समय और संभावनाओं की निरंतरता का प्रतिनिधित्व करती हैं (22:12-22:59)।
शिव का तांडव: शिव का नृत्य (तांडव) सृजन और विनाश दोनों का प्रतीक है, जो जीवन में लयबद्धता और निरंतरता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि सब कुछ नृत्यमय है, चाहे वह सृजन हो या विध्वंस (23:02-27:21)।
पुरुष और स्त्री की साधना: भारतीय दर्शन में पुरुष की दृष्टि में मातृत्व चरम पर होता है, जबकि स्त्री के लिए पति अंततः परमात्मा का स्वरूप बन जाता है। यह जेंडर भेदभाव नहीं, बल्कि गहरे मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य हैं (28:08-29:37)।
शिव की तीसरी आँख: यह अतीत और भविष्य से मुक्त होकर वर्तमान में ठहरने की ऊर्ध्वगामी दृष्टि का प्रतीक है। शिव के प्रतीकों में तीसरा बिंदु हमेशा ट्रांसेंडेंस या ऊर्ध्वगमन को दर्शाता है (30:53-32:44)।
शिव-पार्वती विवाह और लोक कल्याण: शिव का विवाह लोक कल्याण के लिए नहीं, बल्कि प्रेम के लिए था, और पार्वती के आने से उनकी वेदना कम हुई (33:43-34:57)। प्रेम ही सभी अराजकताओं का एंटीडोट है और उच्चतम प्रेम की तरंगें पूरे विश्व को प्रभावित कर सकती हैं (38:22-39:15)।
हलाहल का ग्रहण: शिव का हलाहल ग्रहण करना भी प्रेम की ही अवस्था है, जहाँ प्रेम से भरा व्यक्ति जीवन की अराजकता और विषैली परिस्थितियों को संभाल लेता है (39:21-40:55)।
देवताओं की श्रेष्ठता पर बहस: कथाएं बताती हैं कि कोई भगवान छोटा या बड़ा नहीं है; सभी एक-दूसरे के पूज्य और स्वीकार्य हैं। समाज में इस पर बहस करना अर्थ का अनर्थ है (41:12-44:01)।
विज्ञान भैरव तंत्र: शिव ने पार्वती के समक्ष 'विज्ञान भैरव तंत्र' जैसे गहन सूत्र रखे, जो मानवीय चेतना को बदलने की कीमिया है। दुर्भाग्य से, समाज ने इसे छुपाकर केवल चालीसाओं को प्रचलित किया है (44:05-47:12)।
महामृत्युंजय मंत्र और मृत्यु का स्वीकार: शिव को महाकाल और मृत्यु का देवता कहा जाता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप मृत्यु से बचने के लिए नहीं, बल्कि मृत्यु को स्वीकार करने के लिए है। जब व्यक्ति मृत्यु का स्वीकार कर लेता है, तो उसकी आंतरिक उपचार शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं (47:37-52:19)।
भक्ति के प्रकार: अंतर्मुखी व्यक्ति शिव का उपासक होगा, जो स्थिरता और शांति चाहेगा। बहिर्मुखी व्यक्ति शक्ति का साधक होगा, जो सृजन और विस्तार चाहेगा। जो दोनों का संतुलन चाहते हैं, वे शिव-शक्ति दोनों के भक्त होते हैं, जो मध्य मार्ग को तलाशते हैं (52:19-54:47)।

3 weeks ago | [YT] | 20

Anant Sri

‪@AnantSri‬
When AI ( Artificial Intelligence) touches AI ( Anant Intelligence)

3 weeks ago | [YT] | 99