Path Of Shabad

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Happy New Year..

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RAMPAL के चेलो PANCH SHABD के बारे में ध्यान से पढ़ो निचे :-


तुलसी साहब ने जो पांच नाम कल के बोले हैं उसके बारे में जानू



मूर्ख वह पांच नाम यह है
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सत्त पुरुष सत नाम कहाई। वह अनाम गति संतन पाई॥
सत्त नाम से निर्गुन आया। यह सब भेद संत बतलाया ॥
पाँच नाम निरगुन के जाना। निरगुन निराकार निरबाना ॥
और निरंजन है धर्मराई। ऐसे पाँच नाम गति गाई ॥
सोई ब्रह्म परचंड कहाई। ता को जपै जगत मन लाई ॥
दस औतार ब्रह्म कर होई। ता को कहिये निरगुन सोई॥
तिन पुनि रचा पिंड ब्रह्मंडा। सात दीप पृथ्वी नौ खंडा ॥
सब जग ब्रह्म ब्रह्म करि गाई। आदि अन्त की राह न पाई ॥
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यह है काल के 5 नाम

1 .निरगुन
2. निराकार
3. निरबाना
4. निरंजन
5. धर्मराई

ध्यान से पढ़ो :-


पाँच नाम निरगुन के जाना। निरगुन निराकार निरबाना ॥
और निरंजन है धर्मराई। ऐसे पाँच नाम गति गाई ॥

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सतनाम या सतपुरुष में से जोत निरंजन यानी निर्गुण उत्पन्न हुआ, जिसे काल, निराकार, धर्मराज या ब्रह्म भी कहा जाता है। पिंड, ब्रह्मांड, सातदीप, नौ खंड, तीन देवता तथा दस अवतार ये सब उसकी रचना हैं। दुनिया के सभी लोग उनकी पूजा- भक्ति में लगे हुए हैं। सतलोक के स्वामी सतपुरुष या सतनाम की भक्ति की ओर किसी का ध्यान ही नहीं है। उसका भेद केवल पूर्ण संतों ने ही खोला है।

तुलसी साहिब की वाणी में सतलोक से नीचे की रचना को तीन भागों में विभाजित किया गया है: पिंड, अंड और ब्रह्मांड। पिंड के छः चक्र हैं- गुदाचक्र, इंद्रियचक्र, नाभिचक्र, हृदयचक्र, कंठचक्र और आँखों से ऊपर आज्ञाचक्र यानी तीसरा तिल आँखों से ऊपर सहस्रदल कमल तक की रचना को अंड कहा गया है। इससे ऊपर त्रिकुटी और पारब्रह्म या सुन्न तक की रचना को ब्रह्मांड कहा गया है। पारब्रह्म में शब्द प्रधान है और माया का प्रभाव न के बराबर है, परंतु यह लोक भी नाशवान है।

ब्रह्मांड तक की रचना कृत्रिम है। सतलोक अकृत्रिम है, स्वयं सृजित है। ब्रह्मांड तक की रचना जन्म-मरण के चक्र में है।

ओअं सब्द काल को जानो। सुन्न में सब्द पुरुष पहिचानो ॥ -

त्रिकुटी या ब्रह्म मंडल तक का शब्द ओंकार कहलाता है और यह काल की सीमा में है। सतलोक या चौथा पद अमर-अविनाशी है।

तुलसी साहिब समझाते हैं: सुन्न नाश होकर महासुन में समाता है।

महासुन्न नाश होकर सतलोक में, जहाँ सत साहिब रहता है।

यहाँ प्रलय और महाप्रलय की गम्यता नहीं।"

सतलोक परमपुरुष का निज धाम है। नीचे की रचना का हिस्सा बनने से पहले सब जीव सतलोक के निवासी थे, इसलिये उनका निज धाम भी सतलोक ही है।

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3 months ago (edited) | [YT] | 5

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RAMPAL ke मूर्ख चेलो :-

वाणी की सिर्फ एक ही लाइन पढ़ना आता है तुम लोगों को दूसरी लाइन भी पढ़ो ध्यान से



अंतर गुफा तहाँ चलि जाऊँ। जहँ साहिब के दरसन पाऊँ ।। पाँचौ नाम जीव जब भाखा छठवाँ नाम गुप्त करि राखा ॥

पाँचौ नाम काल के जानौ । तब दानी मन संका आनौ  ॥ निरगुन निराकार निरबानी । धर्मराय यों पाँच बखानी ॥


जीव नाम निज कहै बिचारी। जानि बूझि दानी झख मारी ॥ जाव जीव यह राह तुम्हारी । हम नहिं रोकें बात बिचारी ॥ पोचं पाँच हमहूँ सुनि पाई। हम नहिं निकट तुम्हारे आई ॥ पोचं चोर रहे अलगाई। होइ निरभै जिव आगे जाई ॥ आगे सात सुमेर उँचाई नौ नाटक तापर रहें भाई ॥ नौ नाटक पूछन चले आगे कहाँ जीव केहि मारग लागे ॥ हम यहि घाट बाट रखवारी यहाँ न अदली चलै तुम्हारी ॥ कहै जीव दृग दानी भाई । हम चलि जाइ नाम चित लाई ॥

दानी दान चुकावी आई। जब यहि बाट निभन तुम पाई ॥ केहि कर अंस कहाँ तुम जाई बात आपनी कहाँ बुझाई ॥ कहै जीव सतलोक निवासा। मैं चल जावँ पुरुष के पासा ।। दानी कहै दूरि है भाई। अगम पथ कैसे निभ जाई ॥ कौन नाम मारग को जाई। कौन नाम से उबरै आई ॥ इतना भेद कहाँ समझावा बाट जीव जब घर की पावा ॥




👉 RAMPAL ने तुम्हें सिर्फ वाणी की एक ही लाइन पढ़ने को दी है


पाँचौ नाम काल के जानौ । तब दानी मन संका आनौ  ॥


👉 इस लाइन के नीचे जो लाइन लिखी है वह किसने पढ़नी थी मूर्ख


निरगुन निराकार निरबानी । धर्मराय यों पाँच बखानी ॥

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👉 तुलसी साहब ने साफ-साफ वह पांच नाम लिखें हैं

यह है काल के 5 नाम:-

1 .निरगुन  
2. निराकार  
3. निरबाना 
4. निरंजन 
5. धर्मराई




👉 एक और नीचे वाणी दे रहा हूं इसे ध्यान से पढ़ो 5 के 5 नाम लिखें हुए हैं ऊपर की वाणी में भी लिखें हैं और नीचे की वाणी में भी वह पांच नाम


सत्त पुरुष सत नाम कहाई। वह अनाम गति संतन पाई॥
सत्त नाम से निर्गुन आया। यह सब भेद संत बतलाया ॥
पाँच नाम निरगुन के जाना। निरगुन निराकार निरबाना ॥
और निरंजन है धर्मराई। ऐसे पाँच नाम गति गाई ॥
सोई ब्रह्म परचंड कहाई। ता को जपै जगत मन लाई ॥
दस औतार ब्रह्म कर होई। ता को कहिये निरगुन सोई॥
तिन पुनि रचा पिंड ब्रह्मंडा। सात दीप पृथ्वी नौ खंडा ॥
सब जग ब्रह्म ब्रह्म करि गाई। आदि अन्त की राह न पाई ॥


ध्यान से पढ़ो :-


पाँच नाम निरगुन के जाना। निरगुन निराकार निरबाना ॥
और निरंजन है धर्मराई। ऐसे पाँच नाम गति गाई ॥

पर ना तो रामपाल को समझ आएगी इसकी ना रामपाल के चेलों को समझा आए गी इसकी ।

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3 months ago (edited) | [YT] | 5

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3 months ago | [YT] | 25

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साध - संगत जी COMMENT मै जरूर बताना।

4 months ago | [YT] | 11