जय बद्री..जय विशाल..
जय भारत ll जय उत्तराखंडll
आप सभी मित्रों को नमस्कार जो मेरे साथ जुड़ चुके हैं या वह सभी मित्र जिन्होंने अपना कीमती समय मेरे चैनल की वीडियो के लिए दिया मैं आप सभी का आभारी हूं और आप सब को तहे दिल से धन्यवाद करता हूं l
आधुनिक समय को देखते हुए , एक छोटी सी पहल की है l मैं आशा करता हूं , कि आप मेरा हौसला बनाएंगे और मेरा साथ देंगे। वैसे तो इस यूट्यूब चैनल को बनाने का कोई विशेष उद्देश्य तो नहीं था l और मेरा उद्देश्य कोई लाभ कमाना भी नहीं है l मेरा यह उद्देश है कि मैं अपने क्षेत्र के लोगों को दिखा सकूं l अपने रीति रिवाज और अपने परंपरा को दिखा सकूं तथा अपने लोगों का सुख दुख और उनकी मुसीबतों को सोशल मीडिया के माध्यम से आगे रख सकूं l
आशा है कि आप सभी लोग मुझसे जुड़ेंगे और मेरे चैनल को लाइक और सब्सक्राइब भी करेंगे @pahadirawat87
और मैं भी पूर्णता कोशिश करूंगा कि मैं सभी समाज को सभी धर्मों को एक साथ लेकर एक धागे में पिरोने की कोशिश करूंगा l
धन्यवाद जय उत्तराखंड ll
ll जय मां भगवती ll
youtube.com/@pahadirawat87
Pahadi Rawat
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने मृतक परिवारों को 25 लख रुपए देने की घोषणा करी. और हादसे की जांच के लिये तीन सदस्य टीम का गठन किया..
11 months ago (edited) | [YT] | 2
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Pahadi Rawat
महाकुंभ प्रयागराज में मची भगदड़ में उत्तराखंड से गए श्रद्धालुओं से संबंधित जानकारी आदि प्राप्त करने हेतु आदरणीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के निर्देश पर आपदा विभाग ने निम्न *हेल्पलाइन नंबर* जारी किए हैं : -
मोबाईल नं०
8218867005, 9058441404,
दूरभाष नं०.
0135 2664315
टोल फ्री नं0 1070
@highlight Thakur Arvind Singh
11 months ago | [YT] | 4
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Pahadi Rawat
प्रकृति की अनमोल धरोहर , हमारे बगीचे से भविष्य के परिंदों की उड़ान ..
1 year ago | [YT] | 1
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Pahadi Rawat
आज मित्र द्वारा .. श्री राम जन्मभूमि अयोध्या से प्रसाद और प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त हुआ...
1 year ago | [YT] | 1
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Pahadi Rawat
Dear Parents,
As you all are aware that India's pursuit of space exploration is on the verge of a remarkable milestone with the impending Chandrayaan-3 Mission, poised to achieve a landing on the Moon. This marks not only a quantum step forward for Indian Science, Engineering, Technology, and Industry but also for Brand India.
The landing of India's Chandrayaan-3 on the moon is a monumental occasion that will not only fuel curiosity but also spark a passion for exploration within the minds of our youth.
It will generate a protound sense of pride and unity as we collectively celebrate the prowess of Indian science and technology. Therefore, we encourage all the students to witness the history in making. It will be a proud privilege to live and experience the final phase of India’s moon mission.
This event will be broadcasted live on August 23, 2023 starting from 05:20 pm. The live coverage will be available via multiple platforms as follows:
1. ISRO Website www.isro.gov.in
2. ISRO's official YouTube channel https://www.youtube.com/watch?v=DLA_6...
3. ISRO's Facebook page www.facebook.com/ISRO
4. DD National TV channel
Regards
2 years ago | [YT] | 3
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Pahadi Rawat
Weather
2 years ago | [YT] | 2
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Pahadi Rawat
गढ़वाल के 52 गढ़ों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है |
पहला ... नागपुर गढ़ : यह जौनपुर परगना में था। यहां नागदेवता का मंदिर है। यहां का अंतिम राजा भजनसिंह हुआ था।
दूसरा ... कोल्ली गढ़ : यह बछवाण बिष्ट जाति के लोगों का गढ़ था।
तीसरा ... रवाणगढ़ : यह बद्रीनाथ के मार्ग में पड़ता है और रवाणीजाति का होने के कारण इसका नाम रवाणगढ़ पड़ा।
चौथा ... फल्याण गढ़ : यह फल्दकोट में था और फल्याण जाति के ब्राहमणों का गढ़ था। कहा जाता है कि यह गढ़ पहले किसी राजपूत जाति का था। उस जाति के शमशेर सिंह नामक व्यक्ति ने इसे ब्राह्मणों का दान कर दिया था।
पांचवां ... वागर गढ़ : यह नागवंशी राणा जाति का गढ़ था। इतिहास के पन्नों पर झांकने पर पता चलता है कि एक बार घिरवाण खसिया जाति ने भी इस पर अधिकार जमाया था।
छठा ... कुईली गढ़ : यह सजवाण जाति का गढ़ था जिसे जौरासी गढ़ भी कहते हैं।
सातवां ... भरपूर गढ़ : यह भी सजवाण जाति का गढ़ था। यहां का अंतिम थोकदार यानि गढ़ का प्रमुख गोविंद सिंह सजवाण था।
आठवां ... कुजणी गढ़ : सजवाण जाति से जुड़ा एक और गढ़ जहां का आखिरी थोकदार सुल्तान सिंह था।
नौवां ... सिलगढ़ : यह भी सजवाण जाति का गढ़ था जिसका अंतिम राजा सवलसिंह था।
दसवां ... मुंगरा गढ़ : रवाई स्थित यह गढ़ रावत जाति का था और यहां रौतेले रहते थे।
11वां ... रैका गढ़ : यह रमोला जाति का गढ़ था।
12वां ... मोल्या गढ़ : रमोली स्थित यह गढ़ भी रमोला जाति का था।
13वां ... उपुगढ़ : उद्येपुर स्थित यह गढ़ चौहान जाति का था।
14वां ... नालागढ़ : देहरादून जिले में था जिसे बाद में नालागढ़ी के नाम से जाना जाने लगा।
15वां ... सांकरीगढ़ : रवाईं स्थित यह गढ़ राणा जाति का था।
16वां ... रामी गढ़ : इसका संबंध शिमला से था और यह भी रावत जाति का गढ़ था।
17वां ... बिराल्टा गढ़ : रावत जाति के इस गढ़ का अंतिम थोकदार भूपसिंह था। यह जौनपुर में था।
18वां ... चांदपुर गढ़ : सूर्यवंशी राजा भानुप्रताप का यह गढ़ तैली चांदपुर में था। इस गढ़ को सबसे पहले पवांर वंश के राजा कनकपाल ने अपने अधिकार क्षेत्र में लिया था।
19वां ... चौंडा गढ़ : चौंडाल जाति का यह गढ़ शीली चांदपुर में था।
20वां ... तोप गढ़ : यह तोपाल जाति का था। इस वंश के तुलसिंह ने तोप बनायी थी और इसलिए इसे तोप गढ़ कहा जाने लगा था। तोपाल जाति का नाम भी इसी कारण पड़ा था।
21वां ... राणी गढ़ : खासी जाति का यह गढ़ राणीगढ़ पट्टी में पड़ता था। इसकी स्थापना एक रानी ने की थी और इसलिए इसे राणी गढ़ कहा जाने लगा था।
22वां ... श्रीगुरूगढ़ : सलाण स्थित यह गढ़ पडियार जाति का था। इन्हें अब परिहार कहा जाता है जो राजस्थान की प्रमुख जाति है। यहां का अंतिम राजा विनोद सिंह था।
23वां ... बधाणगढ़ : बधाणी जाति का यह गढ़ पिंडर नदी के ऊपर स्थित था।
24वां ... लोहबागढ़ : पहाड़ में नेगी सुनने में एक जाति लगती है लेकिन इसके कई रूप हैं। ऐसे ही लोहबाल नेगी जाति का संबंध लोहबागढ़ से था। इस गढ़ के दिलेवर सिंह और प्रमोद सिंह के बारे में कहा जाता था कि वे वीर और साहसी थे।
25वां ... दशोलीगढ़ : दशोली स्थित इस गढ़ को मानवर नामक राजा ने प्रसिद्धि दिलायी थी।
26वां ... कंडारागढ़ : कंडारी जाति का यह गढ़ उस समय के नागपुर परगने में थे। इस गढ़ का अंतिम राजा नरवीर सिंह था। वह पंवार राजा से पराजित हो गया था और हार के गम में मंदाकिनी नदी में डूब गया था।
27वां ... धौनागढ़ : इडवालस्यू पट्टी में धौन्याल जाति का गढ़ था।
28वां ... रतनगढ़ : कुंजणी में धमादा जाति का था। कुंजणी ब्रहमपुरी के ऊपर है।
29वां ... एरासूगढ़ : यह गढ़ श्रीनगर के ऊपर था।
30वां ... इडिया गढ़ : इडिया जाति का यह गढ़ रवाई बड़कोट में था। रूपचंद नाम के एक सरदार ने इस गढ़ को तहस नहस कर दिया था।
31वां ... लंगूरगढ़ : लंगूरपट्टी स्थिति इस गढ़ में भैरों का प्रसिद्ध मंदिर है।
32वां ... बाग गढ़ : नेगी जाति के बारे में पहले लिखा था। यह बागूणी नेगी जाति का गढ़ था जो गंगा सलाण में स्थित था। इस नेगी जाति को बागणी भी कहा जाता था।
33वां ... गढ़कोट गढ़ : मल्ला ढांगू स्थित यह गढ़ बगड़वाल बिष्ट जाति का था। नेगी की तरह बिष्ट जाति के भी अलग अलग स्थानों के कारण भिन्न रूप हैं।
34वां ... गड़तांग गढ़ : भोटिया जाति का यह गढ़ टकनौर में था लेकिन यह किस वंश का था इसकी जानकारी नहीं मिल पायी थी।
35वां ... वनगढ़ गढ़ : अलकनंदा के दक्षिण में स्थित बनगढ़ में स्थित था यह गढ़।
36वां ... भरदार गढ़ : यह वनगढ़ के करीब स्थित था।
37वां ... चौंदकोट गढ़ : पौड़ी जिले के प्रसिद्ध गढ़ों में एक। यहां के लोगों को उनकी बुद्धिमत्ता और चतुराई के लिये जाना जाता था। चौंदकोट गढ़ के अवशेष चौबट्टाखाल के ऊपर पहाड़ी पर अब भी दिख जाएंगे।
38वां ... नयाल गढ़ : कटुलस्यूं स्थित यह गढ़ नयाल जाति था जिसका अंतिम सरदार का नाम भग्गु था।
39वां ... अजमीर गढ़ : यह पयाल जाति का था।
40वां ... कांडा गढ़ : रावतस्यूं में था। रावत जाति का था।
41वां ... सावलीगढ़ : यह सबली खाटली में था।
42वां ... बदलपुर गढ़ : पौड़ी जिले के बदलपुर में था।
43वां ... संगेलागढ़ : संगेला बिष्ट जाति का यह गढ़ यह नैल चामी में था।
44वां ... गुजड़ूगढ़ : यह गुजड़ू परगने में था।
45वां ... जौंटगढ़ : यह जौनपुर परगना में था।
46वां ... देवलगढ़ : यह देवलगढ़ परगने में था। इसे देवलराजा ने बनाया था।
47वां ... लोदगढ़ : यह लोदीजाति का था।
48वां ... जौंलपुर गढ़
49वां ... चम्पा गढ़
50वां ... डोडराकांरा गढ़
51वां ... भुवना गढ़
52वां ... लोदन गढ..
2 years ago | [YT] | 2
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Pahadi Rawat
गढ़वाल में इसलिए मनाई जाती है "इगास" दिवाली ........
माधो सिंह भंडारी की वीरता से है इसका संबंध .............
माधो सिंह भंडारी 17 वीं शताब्दी में गढ़वाल के प्रसिद्ध भड़ (योद्धा) हुए। माधो सिंह मलेथा गांव के थे। तब श्रीनगर गढ़वाल के राजाओं की राजधानी थी।
माधो सिंह भड़ परंपरा से थे। उनके पिता कालो भंडारी की बहुत ख्याति हुई। माधो सिंह, पहले राजा महीपत शाह, फ़िर रानी कर्णावती और फिर पृथ्वीपति शाह के वजीर और वर्षों तक सेनानायक भी रहे।
एक गढ़वाली लोकगाथा गीत (पंवाड़ा) देखिए -
"सै़णा सिरीनगर रैंदू राजा महीपत शाही
महीपत शाह राजान भंडारी सिरीनगर बुलायो ...."
तब गढ़वाल और तिब्बत के बीच अक्सर युद्ध हुआ करते थे। दापा के सरदार गर्मियों में दर्रों से उतरकर गढ़वाल के ऊपरी भाग में लूटपाट करते थे। माधो सिंह भंडारी ने तिब्बत के सरदारों से दो या तीन युद्ध लड़े। सीमाओं का निर्धारण किया। सीमा पर भंडारी के बनवाए कुछ मुनारे (स्तंभ) आज भी चीन सीमा पर मौजूद हैं। माधो सिंह ने पश्चिमी सीमा पर हिमाचल प्रदेश की ओर भी एक बार युद्ध लड़ा।
एक बार तिब्बत युद्ध में वे इतने उलझ गए कि दिवाली के समय तक वापस श्रीनगर गढ़वाल नहीं पहुंच पाए। आशंका थी कि कहीं युद्ध में मारे न गए हों। तब दिवाली नहीं मनाई गई।
दिवाली के कुछ दिन बाद माधो सिंह की युद्ध विजय और सुरक्षित होने की खबर श्रीनगर गढ़वाल पहुंची। तब राजा की सहमति पर एकादशी के दिन दिवाली मनाने की घोषणा हुई।
तब से इगास बग्वाल निरंतर मनाई जाती है। गढ़वाल में यह लोक पर्व बन गया। हालांकि कुछ गांवों में फिर से आमावस्या की दिवाली ही रह गई और कुछ में दोनों ही मनाई जाती रही। इगास बिल्कुल दीवाली की तरह ही मनाई जाती है। उड़द के पकोड़े, दियों की रोशनी, भैला और मंडाण ........
शायद यह 1630 के आसपास की बात है। इन्हीं माधो सिंह भंडारी ने 1634 के आसपास मलेथा की प्रसिद्ध भूमिगत सिंचाई नहर बनाई, जिसमें उनके पुत्र का बलिदान हुआ।
जीवन के उत्तरार्ध में उन्होंने तिब्बत से ही एक और युद्ध लड़ा, जिसमें उन्हें वीरगति प्राप्त हुई। इतिहास के अलावा भी अनेक लोकगाथा गीतों में माधो सिंह की शौर्य गाथा गाई जाती है। इगास दिवाली पर उन्हें याद किया जाता है -
""दाळ दळीं रैगे माधो सिंह
चौंऴ छड्यां रैगे माधो सिंह
बार ऐन बग्वाळी माधो सिंह
सोला ऐन शराद मधो सिंह
मेरो माधो निं आई माधो सिंह
तेरी राणी बोराणी माधो सिंह .........."
वीरगाथा गीतों में उनके पिता कालो भंडारी, पत्नियां रुक्मा और उदीना तथा पुत्र गजे सिंह और अमर सिंह का भी उल्लेख आता है। मलेथा में नहर निर्माण, संभवत पहाड़ की पहली भूमिगत सिंचाई नहर पर भी लोक गाथा गीत हैं।
रुक्मा का उलाहना -
" योछ भंडारी क्या तेरू मलेथा
जख सैणा पुंगड़ा बिनपाणी रगड़ा ........"
और जब नहर बन जाती है तब -
भंडारी रुक्मा से कहता है -
" ऐ जाणू रुक्मा मेरा मलेथा
गौं मुंड को सेरो मेरा मलेथा .........."
बहुत विस्तृत है माधो सिंह भंडारी की इतिहास शौर्य गाथा और लोकगाथा भी। इंद्रमणि बडोनी जी के निर्देशन में माधो सिंह भंडारी से सम्बन्धित गाथा गीतों को 1970 के दशक में संकलित करके नृत्य नाटिका में ढाला गया था। एक डेढ़ दशक तक दर्जनों मंचन हुए। स्वर और ताल देने वाले लोक साधक 85 वर्षीय शिवजनी अब भी टिहरी के ढुंग बजियाल गांव में रहते हैं .......
लोग इगास तो मनाते रहे लेकिन इसका इतिहास और इसकी गाथा भूलते चले गए। आधा गढ़वाल भूल गया, जबकि आधा गढ़वाल में अब भी बड़े उत्साह से इगास मनाई जाती है।
खास बात यह भी समझें कि मध्य काल में उत्तर की सीमाएं माधो सिंह, रिखोला लोदी, भीम सिंह बर्त्वाल जैसे गढ़वाल के योद्धाओं के कारण सुरक्षित रही हैं।
चीन से भारत का युद्ध आजादी के बाद हुआ लेकिन तिब्बत से तो गढ़वाल के योद्धा शताब्दियों तक लड़ते रहे। पर्वत की घाटियों में ही तिब्बत के सरदारों को रोकते रहे। सिर्फ गढ़वाल ही नहीं भारत भूमि की रक्षा भी की। राहुल सांकृत्यायन के अनुसार एक बार तो टिहरी के निकट भल्डियाणा तक चले आए थे तिब्बत के सरदार।
तो फिर ...... गढ़वाल ही क्यों, पूरे भारत देश को इन योद्धाओं का ऋणी होना चाहिए। गाथा सुननी चाहिए, पढ़नी चाहिए ..............
फोटो - माधो सिंह भंडारी की शौर्य गाथा पर बनी नृत्य नाटिका में करीब 40 वर्ष पूर्व माधो सिंह के पात्र के साथ गाथा का मंच निर्देशन करने वाले पहाड़ के गांधी इंद्रमणि बडोनी।
2 years ago | [YT] | 5
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Pahadi Rawat
आज से कुछ साल पहले जब एक तेंदुआ गलती से जाल में घुस गया ।..
#wildcat #leopard #wildanimal #Bigcat #Nainital #Jimcorrbt
2 years ago | [YT] | 5
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Pahadi Rawat
*बजरंग बाण*
बजरंग बाण की रचना संत गोस्वामी तुलसीदास जी ने उस समय की, जब उनके ऊपर हर ओर से तंत्र आदि के माध्यम से प्रेत पिसाच भूत आदि के द्वारा आक्रमण किया जा रहा था। इन सबसे तुलसीदास जी अत्यंत पीड़ित होकर भगवान श्री हनुमान जी से प्रार्थना करने लगे। यही प्रार्थना है "श्री बजरंग बाण" । बजरंग बाण हर प्रकार की भूत प्रेत आदि की बाधा से मुक्ति दिलाता है, एवम् ऐसे कार्य के लिए अमोघ अस्त्र के रूप में कार्य करता है, इसलिए इसका नाम बजरंग बाण है।
*बजरंग बाण 4 चरणों में कहा गया है, जो इस प्रकार से है:*
1. *।।निश्चय प्रेम प्रतीति ते विनय करें सनमान, तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करें हनुमान।।* यहां पर ये बताया गया है की हनुमान जी किनके कार्य सिद्ध करते हैं। यानी निश्चय के साथ या संकल्प लेकर प्रेम पूर्वक जो विनय से झुककर श्री हनुमान जी से प्रार्थना करेगा, उसके सभी कार्य हनुमान जी स्वयं सिद्ध कर देंगे।
2. *।। जय हनुमंत संत हितकारी सुन लिजै प्रभु विनय हमारी,.... से लेकर ।। लाह समान लंक जर गई, जय जय ध्वनि सुरपुर नभ भई।।* यहां तक जो भाग में इसमें श्री हनुमान जी स्तुति की गई, उनकी महिमा का बखान किया गया है की कैसे उन्होंने सिंधु लांघा, सुरसा की परीक्षा पार करी, कैसे अक्षय कुमार का संघार किया, लंका विध्वंस किया, सीता माता का पता लगाया, विभीषण को सुख प्रदान किया।
जब हम अपने किसी बड़े से कोई कार्य सिद्ध कराते हैं तो पहले विधिवत उसकी महिमा कहते हैं उसे प्रसन्न करते हैं उसकी स्तुति करते हैं, यही नियम है और यही कार्य तुलसीदास जी ने किया है। एवम् हमे भी ये सदैव ध्यान रखना चाहिए की अपने से श्रेष्ठ के सम्मुख किस प्रकार से अपनी प्रार्थना रखनी चाहिए यही तुलसीदास जी ने हमें बताया है।
3. *।। अब विलंब केही कारण स्वामी, कृपा करूह उर अंतर्यामी,..... से लेकर ।।अपने जन को तुरंत उबारो, सुमिरत होय आनंद हमारे।। --*
अब हनुमान जी की विधिवत स्तुति करने के उपरांत तुलसीदास जी ने अपनी समस्या श्री हनुमानजी को बताई है एवम् अपनी असमर्थता बताते हुए यहां पर समर्पण करते हुए श्री हनुमान जी को अनेक प्रकार से शपथ दिलाई की प्रभु दया करो, रक्षा करो, कल्याण करो। भूत, प्रेत, पिसाच, निशाचर, अग्निबेताल, काल, मारी, मार इन्हे मारने की शपथ दिलाई हनुमान जी को, पूजा, जप, तप, विधि विधान, आचार विचार कुछ नही जानता आपका ये दास, परंतु किसी अवस्था में भी आपके नाम से सहारे कही भी रह सकते हैं चाहे वन उपवन हो या कोई अन्य स्थान। अर्थात जब अपने श्रेष्ठ से, गुरु से माता पिता से अपनी समस्या या व्यथा बताता हो तो फिर पूर्ण रूप से बिना संकोच के सब बता देना चाहिए कुछ भी नही छुपाना चाहिए। एवम् प्रेमवश यदि शपथ भी देना पड़े तो इसमें भी कोई दोष नही है। यही तुलसीदास जी ने बताया है।
4. *।।यह बजरंग बाण जेहि मारए ताहि कहो फिर कवन उबारय, पाठ करे बजरंग बाण की हनुमत रक्षा करै प्राण की।।.... से लेकर ।।धूप देय जो जपे हमेशा, तन नही ताके रहे कलेशा।।*
जैसा की अधिकतर स्तोत्र एवम् स्तुति में होता अंतिम में उसकी फलश्रृति कही गई है की, बजरंग पाठ करने से क्या क्या लाभ होगा। बजरंग बाण पाठ करने वाले को भूत प्रेत आदि से भय नहीं होता, उसके शरीर के क्लेश समाप्त होने लगते हैं, एवम्
*सबसे महत्वपूर्ण की जो बजरंग बाण का पाठ करेगा हनुमान जी उसके प्राणों की रक्षा अवश्य करेंगे।*
*- विघ्नेश शुक्ला*
*( स्वामी रूपेश्वरानन्द चैनल से जुड़ा एक श्रध्दालु )*
विशेष : बजरंग बाण का पाठ करने वाले उपासक शुद्ध, सात्विक आहार विहार रखें। किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध दुर्भावना से प्रयोग कभी न करें ।
2 years ago | [YT] | 5
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