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Kamlesh Yadav
मशाल उठाओ, इंकलाब करो !
क्या हम ऐसे ही सोते रहेंगे ?
अगर नहीं,
तो आओ, मिलकर एक नया आगाज़ करें ।
सड़ी-गली व्यवस्थाओं का
अब संहार करें,
पूंजीवाद की बेड़ियों से
खुद को आज़ाद करें ।
रक्त में बची
प्रतिरोध की आख़िरी बूंद की कसम,
उठो !
और उन बर्बर व्यवस्थाओं पर
प्रचंड प्रहार करो,
जो सदियों से मानवता को छलती आई हैं ।
उठो !
पहचानो उन लोगों को
जो तुम्हें शिक्षा और ज्ञान से वंचित रखना चाहते हैं,
तुम्हारी संपत्तियों को लूटना चाहते हैं,
तुम्हें गुलाम बनाकर रखना चाहते हैं ।
पहचानो उन लोगों को
जो आज भी तुम्हें जानवर समझते हैं ।
उठो !
भय, लालच और मौन की बेड़ियों को तोड़ डालो।
भूख, बेरोज़गारी, अन्याय और शोषण का
खुलकर प्रतिरोध करो !
लड़ो!
अपने अस्तित्व को बचाने के लिए,
नहीं तो
अपनी आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों के लिए लड़ो !
कायरों की तरह रोज़-रोज़ मरने से बेहतर है
कि हक़ के लिए आज ही मर मिटो ।
लेकिन लड़ो !
अपनी आवाज़ को बुलंद करो,
दिलों में संघर्ष की आग भरो,
और हुक्मरानों से अपने सारे अधिकार छीन लो ।
अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचा लो !
— कमलेश यादव
2 weeks ago | [YT] | 0
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Kamlesh Yadav
क्या आप टिक्टालिक (Tiktaalik) के बारे में जानते है ?
6 months ago | [YT] | 3
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Kamlesh Yadav
क्या आप साइनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria) के बारे में जानते हैं ?
6 months ago | [YT] | 3
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Kamlesh Yadav
आप सरदार भगत सिंह को कितना चाहते हैं
7 months ago | [YT] | 3
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Kamlesh Yadav
मैं अरावली हूँ
तुम्हारी साँसों की दीवार
मुझे बचा लो
नदियाँ सूख जाएँगी,
पेड़ काट दिए जाएँगे,
पर्वत तोड़ दिए जाएँगे
मुझे मार दिया जायेगा
मेरे मरते ही
रेत का तूफ़ान आएगा,
हर तरफ़
रेगिस्तान उतर जायेगा।
आग उगलती हवाएँ
तुम्हारे शहरों को जला देंगी।
मैं गिरूँगी
तो सिर्फ़ पहाड़ नहीं गिरेंगे,
तुम्हारे मौसम ढहेंगे
तुम्हारे फेफड़ों में हवा नही
रेत बहेगी
मैं अरावली हूँ
मेरी आवाज़ बनो
लालच के ख़िलाफ़
धरती का पक्ष लो
पहाड़ों का पक्ष लो
नदियों का पक्ष लो
पेड़ों का पक्ष लो
मानवता का पक्ष लो
हर ज़िन्दा इन्सान
प्रतिरोध करे
मुझे बचाये
मेरा मरना
एक सभ्यता का मरना होगा
नदियों का मरना होगा
पेड़ों का मरना होगा
असंख्य जीवों का मरना होगा
और अन्त में इन्सान का मरना होगा
7 months ago | [YT] | 2
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Kamlesh Yadav
कुंभ vs महादानभूमि-
पुराणो के अनुसार समुद्र मंथन से निकले अमृत को लेकर देवता और असुर आपस में लड़ने लगे जिसके बाद अमृत की कुछ बूँदे प्रयागराज,हरिद्वार,उज्जैन और नाशिक इन चार जगहों पर गिर पड़ी जिसके बाद कुंभ की शुरुआत हुई । इसमें सबसे महत्वपूर्ण शाही स्नान को माना जाता है जिसमें विभिन्न अखाड़े के साधु-संत और नागा लोग स्नान करते है ।
दूसरी तरफ़ कुंभ का पहला ऐतिहासिक प्रमाण 629 ई. में आए चीनी यात्री हेनसांग के भारत यात्रा विवरण में आता है उस समय देश में बौद्ध राजा हर्षवर्धन का राज था । उस समय आज के कुंभ को "महादानभूमि" कहा जाता था । जहाँ बुद्ध की बड़ी मूर्ति स्थापित की जाती थी उसके बाद स्थानीय बौद्ध भिक्षुओं,बुद्धिमान पुरुषों,विधवा,दुःखी,अनाथ बालक और अन्य धर्मावलम्बी लोगों को दान दिया जाता था । इसके साथ ही हेनसांग लिखता है की लोग इस स्थान पर स्नान करके अपना पाप धोते थे,दूर दूर से लोग यहाँ आकर सात दिन यहाँ उपवास करते हुए प्राण त्याग देते थे । कितने लोग स्नान करके वापस चले जाते थे ।
अब आगे आप लोग दिमाग़ लगाइये क्या सही है । वैसे सभी को "शाही स्नान"शब्द पर ज़रूर सोचना चाहिए । शाही किसका शब्द है और भारत में कब से प्रयोग में आना शुरू हुआ ।
@highlight
1 year ago (edited) | [YT] | 3
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Kamlesh Yadav
अंतरिम बजट में शिक्षा खर्च में 7 फ़ीसदी की कटौती कर दी गई है. यूजीसी की फंडिंग में तो रिकॉर्ड 61 फ़ीसदी कटौती की गई है. उच्च शिक्षा में 16.8 फ़ीसदी कटौती बाक़ी आप लोग पूरे मनोयोग से धर्म को बचाने में जुटे रहें ।
2 years ago | [YT] | 3
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