Pandit Jitender हिमाचली भजन

देवभूमि हिमाचल

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Pandit Jitender हिमाचली भजन

अपरा एकादशी व्रत

6 days ago | [YT] | 105

Pandit Jitender हिमाचली भजन

भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु और उनसे मिली शिक्षाएँ इस प्रकार हैं-

​प्रकृति और पंचतत्व (Nature & Elements)

1) ​पृथ्वी: क्षमा और धैर्य की सीख। लोग पृथ्वी को खोदते हैं, चोट पहुँचाते हैं, फिर भी वह सबको सहन करती है और फल देती है।
2) ​वायु: निर्लिप्तता की सीख। हवा सुगंध और दुर्गंध दोनों के साथ बहती है, लेकिन वह खुद वैसी नहीं बनती; वह हमेशा शुद्ध रहती है।
3) ​आकाश: व्यापकता की सीख। आकाश हर जगह है, लेकिन वह किसी सीमा में नहीं बंधता। आत्मा भी ऐसी ही निर्लिप्त होनी चाहिए।
4) ​जल: स्वच्छता और शीतलता। जैसे पानी सबको पवित्र करता है, वैसे ही साधु को अपने संपर्क में आने वालों को पावन बनाना चाहिए।
5) ​अग्नि: तपस्या और समानता। अग्नि लकड़ी के आकार के अनुसार जलती है, लेकिन स्वयं निराकार है। वह सबको जलाकर भस्म कर देती है।
6)​चंद्रमा: घटते-बढ़ते स्वरूप में भी स्थिरता। जैसे चंद्रमा की कलाएँ बदलती हैं पर चंद्रमा नहीं बदलता, वैसे ही शरीर बदलता है, आत्मा नहीं।
7)​सूर्य: संग्रह और त्याग। सूर्य जल सोखता है और फिर बारिश के रूप में उसे वापस कर देता है।

​पशु और पक्षी (Animals & Birds)

8) ​कपोत (कबूतर): अत्यधिक मोह से बचने की सीख। मोह ही दुख का कारण है।
9) ​अजगर: संतोष की सीख। जो मिल जाए उसी में संतुष्ट रहना और आलस्य त्याग कर ईश्वर पर भरोसा करना।
10) ​समुद्र: मर्यादा और गहराई। जैसे समुद्र में नदियाँ मिलने पर वह उफनता नहीं, वैसे ही सुख-दुख में विचलित नहीं होना चाहिए।
11) ​पतंगा: रूप-रंग के आकर्षण से बचने की सीख। जैसे वह अग्नि में जल जाता है, वैसे ही इन्द्रियों के वश में नहीं होना चाहिए।
12) ​भंवरा: सार ग्रहण करना। जैसे भंवरा हर फूल से रस लेता है, वैसे ही हमें हर शास्त्र से अच्छी बातें लेनी चाहिए।
13) ​मधुमक्खी: संचय न करना। मधुमक्खी शहद जमा करती है जिसे कोई और ले जाता है। अतः आवश्यकता से अधिक संग्रह नहीं करना चाहिए।
14) ​गज (हाथी): कामवासना से बचाव। हाथी हथनी के लालच में गड्ढे में गिर जाता है, अतः मोह से दूर रहें।
15) ​मृग (हिरण): मीठी बातों या मधुर संगीत में न फंसना।
16) ​मछली: स्वाद (जीभ) पर नियंत्रण। मछली चारे के लालच में कांटे में फंस जाती है।
17) ​कुरर पक्षी: अधिकार का त्याग। जब इस पक्षी के पास मांस का टुकड़ा था, सब उसे परेशान कर रहे थे। छोड़ते ही सब शांत हो गए।
18) ​सांप: घर का मोह न करना। सांप खुद का बिल नहीं बनाता, बल्कि दूसरों के बनाए बिल में रहता है।

​मनुष्य और अन्य (Humans & Others)

19) ​पिंगला वैश्या: आशा ही परम दुख है। जब उसने अपेक्षा छोड़ दी, तभी उसे शांति मिली।
20) ​बालक: चिंता रहित रहना। छोटा बच्चा न मान जानता है न अपमान, वह अपनी धुन में मस्त रहता है।
21) ​कुंवारी कन्या: एकांत की महत्ता। कंगन खनके तो शोर हुआ, एक रहने पर शांति। अकेले चलने में ही साधना सफल होती है।
22) ​तीर बनाने वाला: एकाग्रता की सीख। वह अपने काम में इतना मग्न था कि पास से राजा की सवारी निकल गई और उसे पता भी नहीं चला।
23) ​मकड़ी: सृष्टि और संहार। मकड़ी खुद जाल बुनती है और खुद ही उसे निगल लेती है, वैसे ही ईश्वर संसार रचते और समेटते हैं।
24) ​भृंगी (कीड़ा): ध्यान की शक्ति। जैसे कीड़ा भृंगी का ध्यान धरते-धरते वैसा ही बन जाता है, वैसे ही ईश्वर का ध्यान करने से हम ब्रह्ममय हो जाते हैं

शिक्षा : इन 24 गुरुओं के माध्यम से श्री दत्तात्रेय जी ने यह संदेश दिया कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए केवल पुस्तकों की नहीं, बल्कि एक खोजी नजर की जरूरत होती है।

6 days ago | [YT] | 45