आज विद्यालय में हेड बॉय व हेड गर्ल का चुनाव करवाया गया जिसमें बच्चो ने लोकतांत्रिक तरीके से वोटिंग की जिस से बच्चो को भारतीय लोकतंत्र की परिभाषा भी समझ मे आई व साथ साथ लोकतंत्र प्रणाली का ज्ञान हुआ SRS ACADEMY MINDA 9079174273
गिरी सुमेल युद्ध मे दुश्मन सेना के दांत खट्टे करने वाले मारवाड़ सेना के सेनापति व वीर योद्धा वीर राव पंचायण जी खींवसर, वीर जैता जी व वीर कुम्पा जी सहित हजारों वीरों के बलिदान दिवस पर कोटि कोटि नमन।
आप सभी को भारतीय इतिहास के एक ऐसे अभिन्न "गिरी सुमेल युद्ध" के बारे में बताते हुए गौरवान्वित महसूस कर रहा हुं जो आज भी राजपुताना के वीरों के शौर्य की परिचायक है, इस युद्ध में मारवाड़ के वीरों से सामना होने के बाद शेरशाह सूरी बोलने पर मजबूर हो गया था की वो
"मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता"
यह युद्ध मारवाड़ के राजा के बिना लड़ा गया था, मैं इस युद्ध में शहीद सभी शूरवीरों को बारम्बार नमन करता हुं।
इस युद्ध में दुश्मन के पास 80 हजार सैनिकों की सेना और 40 तोपें थी तो दूसरी तरफ गिरी में डेरा डाले मारवाड़ के शूरवीर राव मालदेव जी के पास महज 15 हजार सैनिक ही थे, मारवाड़ के शासक राव मालदेव जी ने जब युद्ध क्षेत्र छोड़ने का ऐलान किया और सेना को वापस लौटने का फरमान सुनाया उस समय राव मालदेव जी के साथ 5 हजार सैनिक वापिस लौट गए तब मारवाड़ की सेना के दो सेनापति जैता जी राठौड़ ,कूंपा जी राठौड़ और खींवसर के राव पंचायण जी सहित 10 हजार सैनिकों ने युद्ध क्षेत्र नहीं छोड़ने का ऐलान करते हुए युद्ध का शंखनाद कर दिया, मारवाड़ की आन, बान और शान को बचाये रखने का जिम्मा अब जैता जी,कूंपा जी और राव पंचायण जी पर था, इन वीर योद्धाओं ने मात्र 10 हजार सैनिकों के साथ सुमेल की तरफ कूच कर दिया, 5 जनवरी 1544 ई. की सुबह सुमेल की धरती पर भीषण युद्ध हुआ, शेरशाह सुरी इन शूरवीरों और राजपुताना के सैनिकों के शौर्य को देख समझ गया था कि उसका तोपखाना और 80 हजार सैनिक, राजपूताना के 10 हजार सैनिकों को देखते ही देखते नस्तेनाबूत कर देंगे।
जोधपुर के सेनापति जैता जी,कूंपा जी और राव पंचायण जी खींवसर ने युद्ध में अपने दस हजार राजपूत सैनिकों के साथ शहीद होने से पहले शेरशाह सूरी की 80 हजार फ़ौज के 40 हजार सैनिको को काट डाला था, इन शूरवीरों के वीरता और शौर्य सर्वविदित है,
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1 year ago | [YT] | 15
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आज विद्यालय में हेड बॉय व हेड गर्ल का चुनाव करवाया गया जिसमें बच्चो ने लोकतांत्रिक तरीके से वोटिंग की जिस से बच्चो को भारतीय लोकतंत्र की परिभाषा भी समझ मे आई व साथ साथ लोकतंत्र प्रणाली का ज्ञान हुआ
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2 years ago | [YT] | 22
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2 years ago | [YT] | 25
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2 years ago | [YT] | 16
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"बोल्यो सूरी बैन यूँ गिरी घाट घमसाण,
मुठी खातर बाजरी खो देतो हिंदवाण।"
अढीतेस असवर चढे भड़ साथ सवाई।
लिया धराका झूडोद चहुं दिस फिरै दुहाई।
जेतो, कूपो जेसो जेतसी तेजल भरी ।
अभे पंचायण जसू सिघ खियों खगधारी ।।
गिरी सुमेल युद्ध मे दुश्मन सेना के दांत खट्टे करने वाले मारवाड़ सेना के सेनापति व वीर योद्धा वीर राव पंचायण जी खींवसर, वीर जैता जी व वीर कुम्पा जी सहित हजारों वीरों के बलिदान दिवस पर कोटि कोटि नमन।
आप सभी को भारतीय इतिहास के एक ऐसे अभिन्न "गिरी सुमेल युद्ध" के बारे में बताते हुए गौरवान्वित महसूस कर रहा हुं जो आज भी राजपुताना के वीरों के शौर्य की परिचायक है, इस युद्ध में मारवाड़ के वीरों से सामना होने के बाद शेरशाह सूरी बोलने पर मजबूर हो गया था की वो
"मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता"
यह युद्ध मारवाड़ के राजा के बिना लड़ा गया था, मैं इस युद्ध में शहीद सभी शूरवीरों को बारम्बार नमन करता हुं।
इस युद्ध में दुश्मन के पास 80 हजार सैनिकों की सेना और 40 तोपें थी तो दूसरी तरफ गिरी में डेरा डाले मारवाड़ के शूरवीर राव मालदेव जी के पास महज 15 हजार सैनिक ही थे, मारवाड़ के शासक राव मालदेव जी ने जब युद्ध क्षेत्र छोड़ने का ऐलान किया और सेना को वापस लौटने का फरमान सुनाया उस समय राव मालदेव जी के साथ 5 हजार सैनिक वापिस लौट गए तब मारवाड़ की सेना के दो सेनापति जैता जी राठौड़ ,कूंपा जी राठौड़ और खींवसर के राव पंचायण जी सहित 10 हजार सैनिकों ने युद्ध क्षेत्र नहीं छोड़ने का ऐलान करते हुए युद्ध का शंखनाद कर दिया, मारवाड़ की आन, बान और शान को बचाये रखने का जिम्मा अब जैता जी,कूंपा जी और राव पंचायण जी पर था, इन वीर योद्धाओं ने मात्र 10 हजार सैनिकों के साथ सुमेल की तरफ कूच कर दिया, 5 जनवरी 1544 ई. की सुबह सुमेल की धरती पर भीषण युद्ध हुआ, शेरशाह सुरी इन शूरवीरों और राजपुताना के सैनिकों के शौर्य को देख समझ गया था कि उसका तोपखाना और 80 हजार सैनिक, राजपूताना के 10 हजार सैनिकों को देखते ही देखते नस्तेनाबूत कर देंगे।
जोधपुर के सेनापति जैता जी,कूंपा जी और राव पंचायण जी खींवसर ने युद्ध में अपने दस हजार राजपूत सैनिकों के साथ शहीद होने से पहले शेरशाह सूरी की 80 हजार फ़ौज के 40 हजार सैनिको को काट डाला था, इन शूरवीरों के वीरता और शौर्य सर्वविदित है,
3 years ago | [YT] | 13
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#sam #jeslmer #rajsthan #
3 years ago | [YT] | 23
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बादलों री छांव ,धोरां बिचमे म्हारो गांव
घोट घोट ने पीवां,छावड़ली इणरो नाम॥
आओरा सा चाय पिओ तो
3 years ago | [YT] | 13
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मेहन्दी प्रतियोगिता
3 years ago | [YT] | 37
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Principal & DIRECTOR
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3 years ago | [YT] | 48
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#rajasthancet
#srkarijob
#govermentjob
राजस्थान cet की डेट बढाई गई 3 नवम्बर तक आप फॉर्म भर सकते हैं
3 years ago (edited) | [YT] | 14
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