🔴*सागर में जहरीली शराब से मौतें* ♦️*राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक भ्रष्टाचार ने लील ली जिंदगियां : माकपा*
भोपाल | सागर जिले की बंडा तहसील के छह गांवों में शराब पीने से अब तक हुई 19 मौतों के लिए कुछ कनिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड कर देने से न तो मृतकों को इन्साफ मिलने वाला है और न ही असली अपराधी कानून के शिकंजे में आने वाले हैं l मगर भाजपा की डॉ मोहन यादव सरकार से यह उम्मीद भी नहीं की जा सकती है, क्योंकि निष्पक्ष जांच होते ही जब छोटी मछलियों की बजाय मगरमच्छों को पकड़ने को कोशिश होगी तो भाजपा के कई नेताओं का असली चेहरा भी बेनकाब हो जाएगा l
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी कर कहा है कि जिस जहरीली शराब की वज़ह से कई परिवारों के आंगन में मातम पसर गया है, उसके पैकिंग का ठेका भाजपा नेता और उसके परिवार के पास हैl उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व ही एक दैनिक अखबार ने नकली पैकिंग का मामला प्रकाशित किया था, मग़र बिना फॉरेंसिक जांच करवाए शनिवार को उसे क्लीनचिट दे दी गई थी l और एक दिन बाद ही इस जहरीली शराब ने 19 लोगों की जीवन लीला समाप्त कर डाली| इसलिए सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि किसके दबाव में, बिना फॉरेंसिक जांच करवाए पुलिस और आबकारी विभाग ने इस जहरीली शराब को क्लीनचिट दी थी?
माकपा नेता ने कहा है कि सागर के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के शराब माफियाओं से संबंध पुराने हैंl 2021 में जब मुरैना में जहरीली शराब से 24 लोगों की मौत हुई थी, तब यही सज्जन मुरैना के पुलिस अधीक्षक थे | इन मौतों के बाद पुलिस और शराब माफियाओं के रिश्ते उजागर होने के बाद इन्हें हटा दिया गया थाl अब सागर में भी इन्होंने मुरैना हादसे को दोहराया है l अभी तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है I दो लोग लोग वेंटिलेटर पर हैं और 190 लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं l
जसविंदर सिंह ने कहा है कि इस सबके बावजूद यदि पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया को संदेह के घेरे में भी नहीं लिया गया है तो शराब माफियाओं की पुलिस प्रशासन के साथ सांठगांठ और इसे राजनीतिक संरक्षण स्पष्ट हो जाता है l
माकपा नेता ने कहा है कि 2020 से लेकर अभी तक उज्जैन, खरगोन, मंदसौर, इंदौर, भिंड, छत्तरपुर, सागर सहित शराब से मरने वालों की संख्या सौ को पार कर गयी है l बार बार हादसों के बाद यदि यह हादसे हो रहे हैं तो जाहिर है कि सागर सहित हर घटना के अपराधी शराब माफियाओं को भाजपा सरकार का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है l
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने असली अपराधियों को पकड़ने, पुलिस अधीक्षक की भूमिका और अपराधियों के राजनीतिक रिश्ते उजागर करने के साथ ही मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने और बीमारों का उचित उपचार करने की मांग की हैI
*"💥रेत की राजनीति"* *=============* *💥रेत उत्खनन के लिए चम्बल के कम से कम 10 घाट खोले जाएं*। *माकपा* *=============* मुरैना - वर्तमान में संपूर्ण मुरैना जिले में सभी को रेत की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। चंबल में रेत उत्खनन, परिवहन पूरी तरह बंद है। स्थिति यहां तक है कि खेतों से निकलने वाले रेत का भी उपयोग नहीं किया जा सकता है। जिले भर में केवल सिंध नदी का रेत भारी महंगी दर पर उपलब्ध है। कुल मिलाकर 80% से ज्यादा भवन निर्माण कार्य पूरी तरह बंद है। जिसके चलते राजमिस्त्री, बेलदार, बंधानी और अन्य सभी श्रम कार्य में लगे हुए मजदूर बैरोजगार बैठे हुए हैं। जरूरी निर्माण कार्य करने को भी लोग परेशान हैं। पहले चार घाट खोलने की स्वीकृति दी गई थी। जिसे केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की आपत्ति के बाद रद्द कर दिया गया। स्थिति इतनी ज्यादा बदतर बनी हुई है कि आम आदमी हर तरह से परेशान है। ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बाद भी अपने निजी स्वार्थों के लिए जनता के हितों को ताक पर रखकर रेत की उपलब्धता और परिवहन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल सदस्य अशोक तिवारी, जिला सचिव मुरारी लाल धाकड़, मध्य प्रदेश किसान सभा के जिला कोषाध्यक्ष गयाराम सिंह धाकड़ आदि नेता गणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जिले में कम से कम 10 चंबल के घाटों को खोलने की कार्यवाही की जाए। घड़ियाल और अन्य जालीय जीवों को संरक्षित करने वाले क्षेत्रों को छोड़कर अन्य स्थानों से और खासकर खेतों से उत्खनन होने वाले रेत की उपलब्धता और परिवहन को सुनिश्चित कराया जाए। इससे सरकार को राजस्व भी मिलेगा और भवन निर्माण कराने वालों, एवं श्रमिकों को सुविधा होगी। बेरोजगारों को रोजगार भी मिलेगा तथा परिवहन करने वाले किसानों का कार्य भी सुचारू रूप से जारी रहेगा। उन्होंने इस पर विचार कर सरकार के स्तर पर और जिला प्रशासन के स्तर पर तत्काल कार्यवाही करने की मांग की है। आगामी दिनों में जिले भर में विरोध कार्यवाहियां भी किसानों व्दारा आयोजित की जाएगी । प्रेषक अशोक तिवारी माकपा मुरैना
आज सुबह, दिल्ली में, मोर्निंग वाक करते समय क्यों उठाये गए थे भारत सरकार के एडिशनल सेक्रेटरी रहे आशीष जोशी ?
इसलिए कि उन्होंने एक पोस्ट लिखकर देश के गृह मंत्रालय में हुई कथित असहमति के बारे में बताया था : उनका दावा था कि गृह मंत्री अमित शाह चाहते थे कि जंतर मंतर पर गोली चलवाई जाए मगर गृह सचिव इसके खिलाफ थे !!
अमित शाह की पुलिस को यह दावा नागवार गुजरा . जोशी जी उठा लिए गए । दिन भर कहाँ, किसकी हिरासत में रहे अभी पता नहीं चला । शाम को वापस कर दिए गए हैं ।
पोस्ट हटवा दी गई : उनसे हटवाई, मेटा से हटवाई, जुकरबर्ग से हटवाई या एलन मस्क से, इस बारे में अभी तक किसी को कुछ नहीं पता ।
जौन एलिया कह ही गए हैं कि :
"अब नहीं कोई बात ख़तरे की, अब सभी को सभी से ख़तरा है।"
♦️प्रदेश में खसरे का प्रकोप 🔹अब मासूमों की जान ले रही भाजपा सरकार की अक्षमता और भ्रष्टाचार : माकपा
भोपाल | पूरे प्रदेश में एक साथ खसरे के प्रकोप ने मासूमों को अपने चंगुल में फंसा लिया है l जब मासूमों की जान खतरे में है, तब भाजपा की डॉ मोहन यादव सरकार की बीमारू प्रदेश से विकसित प्रदेश हो जाने के खोखले दावों की पोल भी खुल रही है I
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि यदि उत्तरी मध्यप्रदेश जैसे तुलनात्मक रूप से विकसित क्षेत्र में खसरा सबसे ज्यादा पांव पसार रहा है l राजधानी भोपाल भी इसकी चपेट में है तो आदिवासी क्षेत्रों की भले ही खबरें न आ रही हों, लेकिन वहां की भयावह स्थिति की कल्पना आसानी से की जा सकती है l क्योंकि कुपोषित होने के कारण वहां प्रतिरोधक क्षमता भी कम होने से आदिवासी और गरीब बच्चे ही बीमारी का पहला शिकार होते हैं l
माकपा नेता ने कहा है कि इससे भाजपा सरकार की दो तरह की आपराधिक लापरवाही उजागर हुई है l स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के अनुसार ही पिछले तीन सालों में खसरे के मरीजों की संख्या चिंताजनक तरीके से बढ़ रही है I जिससे साफ है कि भाजपा टीकाकरण का सरकारी दावा हवा हवाई हो गया है l जिन क्षेत्रों में टीकाकरण 90 प्रतिशत से कम होता है, वहां पर विशेष अभियान चलाये जाने की जरूरत होती है l मगर भाजपा सरकार काग़ज़ी खानापूरी को ही अभियान की सफलता मान लेती है और उसी का परिणाम अब मासूमों की परेशानी का सबब बन गया है l
जसविंदर सिंह ने कहा है कि बारिश के मौसम में खसरे और दूसरी मौसमी बीमारियों, जैसे हैजा, उल्टी दस्त और मलेरिया का हमला होता है l सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इसकी रोकथाम के लिए विशेष प्रबंध करने होते हैं l जब प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग का ढांचा ही चरमरा रहा है, तब बारिश से पहले रोकथाम के उचित कदमों की उम्मीद कैसे की जा सकती है l अभी भी प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर युद्ध स्तरीय अभियान चलाकर जाँच करने के लिए कोई पहल कदमी दिखाई नहीं दे रही है I
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने खसरे के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने, रोकथाम की व्यवस्था करने और बीमार बच्चों के उपचार की समुचित व्यवस्था करने की मांग की है I
विशेष व्यंग्य: जब सरकारें 'सब कुछ' बेचकर 'सबका विकास' खोजने निकलीं!
परिवर्तन न्यूज | विशेष रिपोर्ट
अगर आपके घर में राशन खरीदने के पैसे कम पड़ जाएं, तो एक समझदार तरीका यह होता है कि महीने का बजट सुधारा जाए। लेकिन हमारी दूरदर्शी सरकारों ने एक नया और आधुनिक अर्थशास्त्र खोज निकाला है—“घर का पुराना सोफ़ा, दादाजी की घड़ी और बालकनी की रेलिंग बेच दो, आज शाम की चाय का इंतज़ाम हो जाएगा!”
इसे सरकारी भाषा में बड़े सम्मान के साथ ‘एसेट मोनेटाइजेशन’ (संपत्ति विमुद्रीकरण) और ‘निजीकरण’ कहा जाता है।
'कंगाल' सरकारें या कॉर्पोरेट प्रेम?
जनता अक्सर भोला सवाल पूछती है—क्या सरकारें सच में आर्थिक रूप से कंगाल हो गई हैं जो रेल, तेल, सड़क और हवाई अड्डे सब निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं?
जवाब थोड़ा पेचीदा है। टैक्स तो सरकार जनता से पाई-पाई वसूल रही है—पेट्रोल पर टैक्स, जीएसटी, और यहाँ तक कि रोजमर्रा के खान-पान की चीजों पर भी। फिर यह पैसा जा कहाँ रहा है? अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पुरानी संपत्तियों से कमाकर नई चीजें बनाई जाएंगी। लेकिन जनता को डर इस बात का है कि कहीं यह "कमाई" निजी उद्योगपतियों के मुनाफे का जरिया न बन जाए और जनता के हिस्से सिर्फ 'यूज़र चार्ज' और 'टोल टैक्स' की पर्चियां आएं।
सहकारिता का 'स्वाहा': जनता का साथ, निजी का विकास?
सहकारिता (Cooperative Sector) का असली मतलब था—"सबका थोड़ा-थोड़ा योगदान और सबका बराबर फायदा।" दूध की डेयरियां, सहकारी बैंक और किसान समितियां इसी विचार पर बनी थीं ताकि छोटे किसानों और मजदूरों को बड़े उद्योगपतियों के रहमोकरम पर न जीना पड़े।
लेकिन अब हवा का रुख बदल रहा है। जहाँ-जहाँ जनता ने मिलकर अपना तंत्र खड़ा किया, वहाँ निजी कंपनियों की गिद्ध नजरें टिक गईं। सुधार और आधुनिकता के चमकदार रैपर में लपेटकर सहकारी ढांचे को निजी हाथों के हवाले करने की तैयारी है। तर्क दिया जाता है कि "सहकारी क्षेत्र में घाटा हो रहा है।" साहब, घाटा तो कुप्रबंधन से होता है, तो प्रबंधन सुधारिए ना! घर में चूहा घुस आए तो बिल्ली पाली जाती है, घर में आग नहीं लगाई जाती!
क्या सरकारों को यह सब बेचने का कानूनी अधिकार है?
कानूनी तौर पर देखा जाए तो संविधान के अनुच्छेद 298 के तहत सरकार को संपत्तियों के प्रबंधन और हस्तांतरण का अधिकार है। लेकिन नैतिक सवाल यह है कि ये संपत्तियां किसी एक सरकार की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि देश की कई पीढ़ियों के खून-पसीने और टैक्स से बनी 'राष्ट्रीय धरोहर' हैं।
सरकारें तो 5 साल के लिए आती-जाती ट्रस्टी (रक्षक) होती हैं, मालिक नहीं। अगर रक्षक ही पूरी तिजोरी को लीज पर देकर चाबी निजी तिजोरियों में बंद करने लगे, तो आम जनता सवाल न पूछे तो और क्या करे?
जनता के हित में बड़ा सवाल
निजीकरण का सीधा नियम है—'नो प्रॉफिट, नो सर्विस'। जबकि सरकार का काम लाभ कमाना नहीं, 'जनकल्याण' करना है। अगर अस्पताल, स्कूल, ट्रेन और बसें सब मुनाफे के तराजू पर तौले जाएंगे, तो इस देश का गरीब और मध्यम वर्ग कहाँ जाएगा?
'परिवर्तन न्यूज' का सीधा संदेश है: विकास का मतलब चमचमाते कॉर्पोरेट दफ्तर नहीं, बल्कि देश के अंतिम व्यक्ति की जेब और उसकी आत्मनिर्भरता की सुरक्षा है। जब तक संपत्तियों और सहकारिता को निजी मुनाफे की बलि चढ़ाया जाएगा, जनता ऐसे 'विकास' पर सवाल उठाती रहेगी!
आपकी क्या राय है?
क्या राष्ट्रीय संपत्तियों का निजीकरण और सहकारिता क्षेत्र में बदलाव देश के विकास के लिए ज़रूरी हैं, या फिर यह आम जनता के अधिकारों पर सीधा चोट है? ‘परिवर्तन न्यूज’ अपने पाठकों की निष्पक्ष आवाज को प्राथमिकता देता है।
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शक्कर कारखाना की बिक्री को निरस्त कर नई तकनीकी मशीनों के साथ पुनर्जीवित कर चालू करने की मांग को लेकर 15 अगस्त से कारखाना में आमरण अनशन कर रहे विधायक पंकज उपाध्याय का आज चौथा दिन है।
शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति कैलारस के आन्दोलन को समर्थन देने दिनांक 19 अगस्त को दोपहर 12 बजे गन्ना उत्पादक किसानों के राष्ट्रीय नेता एवं अखिल भारतीय किसान सभा की केन्द्रीय समिति सदस्य पुष्पेन्द्र त्यागी दिल्ली से कैलारस आ रहे हैं।
आप सभी से अनुरोध है अपने साथियों को लेकर अधिक से अधिक संख्या में कारखाना पहुंचने का कष्ट करें। धन्यवाद
आपका गयाराम सिंह धाकड़ पूर्व संचालक शक्कर कारखाना कैलारस
*💥शक्कर कारखाना चालू किया जाए* *जयवर्धन सिंह*। *💥विधायक पंकज उपाध्याय का आमरण अनशन चौथे दिन जारी रहा*। *💥कल होगी किसान महापंचायत, आन्दोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी*। *💥राष्ट्रीय किसान नेता पुष्पेन्द्र त्यागी मुख्य रूप से भाग लेंगे*। *=============* कैलारस - शक्कर कारखाना प्रांगण से - शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति की ओर से जारी आंदोलन और विधायक पंकज उपाध्याय का अनशन चौथे दिन में पहुंच गया। अभी तक सरकार की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं जा रही है। यहां तक कि अनशन कर रहे विधायक पंकज उपाध्याय का मेडीकल परीक्षण में नहीं किया गया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मंच ने दिया समर्थन दिया है और आन्दोलन में शामिल होने की घोषणा की है। नगर के सबसे बुजुर्ग व्यापारी 97 वर्षीय चिरोंजी लाल सिंघल आन्दोलन स्थल पर पहुंचे,और आंदोलन को समर्थन दिया,विजयी होने का आशीर्वाद दिया। आम सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री, विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि सरकार की नीतियों के चलते कारखाना बंदी हो रही है। हम इसका विरोध करते हैं। नारायण पुर गुना के शक्कर कारखाना और कैलारस के कारखाने के संघर्ष को मिलकर लड़ेंगे। उन्होंने विधायक पंकज उपाध्याय से अनशन को समाप्त करने का आग्रह किया। जिसे उन्होंने विनम्रता से अस्वीकार कर दिया। उसके बाद जयवर्धन सिंह ने इस संघर्ष को मंजिल तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। संघर्ष समिति की ओर से अशोक तिवारी ने 19 अगस्त को दोपहर किसान महापंचायत आयोजित करने, उसमें निर्णय लेकर आगामी चरण की घोषणा करने को कहा। आम सभा को सर्व श्री विधायक मुकेश मल्होत्रा, महेश दत्त मिश्रा पूर्व विधायक, अवनीश भार्गव सेवा दल, उम्मेद सिंह, राकेश बाथम, सुरेंद्र यादव, बृजमोहन मरैया,बैजनाथ कुशवाहा पूर्व विधायक, रामकिंकर गुर्जर जी, शेर सिंह मावई, एवरन सिंह, मोइन कुरैशी, प्रागीलाल जाटव पूर्व विधायक, राधेलाल बघेल पूर्व विधायक, रमेश कुशवाहा पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीवास राजेश गुप्ता पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष गयाराम सिंह धाकड़ किसान नेता, सम्मा कुरेशी, हरेंद्र जादौन आदि ने संबोधित किया। किसान महापंचायत के लिए अखिल भारतीय किसान सभा के केंद्रीय किस कमेटी के सदस्य पुष्पेंद्र त्यागी जी ने आने की सहमति दी है उनके अलावा कई विधायक गण और नेता गण भी किसान महापंचायत में मौजूद रहेंगे। इसमें किसान संगठनों के नेताओं को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। प्रेषक अशोक तिवारी प्रदेश अध्यक्ष मध्य प्रदेश किसान सभा
खाद के संकट के खिलाफ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की 24 घंटे की भूख हड़ताल आज से
भोपाल l प्रदेश के किसान एक ओर मानसून के लेट होने से और दूसरी ओर भाजपा की राज्य सरकार की लापरवाही और किसान विरोधी नीतियों के कारण बीज और खाद के संकट से परेशान हैं l किसान डी ए पी और यूरिया की किल्लत के कारण कालाबाजारी और नकली खाद से लूटे जा रहे हैं l
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी खाद की कालाबाजारी और नकली खाद के कारोबार पर रोक लगाने और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर प्रदेश भर में 24 घंटे की भूख हड़ताल करेगी l यह हड़ताल 16 जुलाई को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी और 17 जुलाई को दोपहर 12 बजे खत्म होगी l
राजधानी भोपाल सहित यह भूख हड़ताल विभिन्न जिलों में की जाएगी l पार्टी के राज्य स्तरीय नेता भी विभिन्न जिलों में भूख हड़ताल पर रहेंगे l
@परिवर्तन न्यूज
🔴*सागर में जहरीली शराब से मौतें*
♦️*राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक भ्रष्टाचार ने लील ली जिंदगियां : माकपा*
भोपाल | सागर जिले की बंडा तहसील के छह गांवों में शराब पीने से अब तक हुई 19 मौतों के लिए कुछ कनिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड कर देने से न तो मृतकों को इन्साफ मिलने वाला है और न ही असली अपराधी कानून के शिकंजे में आने वाले हैं l मगर भाजपा की डॉ मोहन यादव सरकार से यह उम्मीद भी नहीं की जा सकती है, क्योंकि निष्पक्ष जांच होते ही जब छोटी मछलियों की बजाय मगरमच्छों को पकड़ने को कोशिश होगी तो भाजपा के कई नेताओं का असली चेहरा भी बेनकाब हो जाएगा l
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी कर कहा है कि जिस जहरीली शराब की वज़ह से कई परिवारों के आंगन में मातम पसर गया है, उसके पैकिंग का ठेका भाजपा नेता और उसके परिवार के पास हैl उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व ही एक दैनिक अखबार ने नकली पैकिंग का मामला प्रकाशित किया था, मग़र बिना फॉरेंसिक जांच करवाए शनिवार को उसे क्लीनचिट दे दी गई थी l और एक दिन बाद ही इस जहरीली शराब ने 19 लोगों की जीवन लीला समाप्त कर डाली| इसलिए सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि किसके दबाव में, बिना फॉरेंसिक जांच करवाए पुलिस और आबकारी विभाग ने इस जहरीली शराब को क्लीनचिट दी थी?
माकपा नेता ने कहा है कि सागर के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के शराब माफियाओं से संबंध पुराने हैंl 2021 में जब मुरैना में जहरीली शराब से 24 लोगों की मौत हुई थी, तब यही सज्जन मुरैना के पुलिस अधीक्षक थे | इन मौतों के बाद पुलिस और शराब माफियाओं के रिश्ते उजागर होने के बाद इन्हें हटा दिया गया थाl अब सागर में भी इन्होंने मुरैना हादसे को दोहराया है l अभी तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है I दो लोग लोग वेंटिलेटर पर हैं और 190 लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं l
जसविंदर सिंह ने कहा है कि इस सबके बावजूद यदि पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया को संदेह के घेरे में भी नहीं लिया गया है तो शराब माफियाओं की पुलिस प्रशासन के साथ सांठगांठ और इसे राजनीतिक संरक्षण स्पष्ट हो जाता है l
माकपा नेता ने कहा है कि 2020 से लेकर अभी तक उज्जैन, खरगोन, मंदसौर, इंदौर, भिंड, छत्तरपुर, सागर सहित शराब से मरने वालों की संख्या सौ को पार कर गयी है l बार बार हादसों के बाद यदि यह हादसे हो रहे हैं तो जाहिर है कि सागर सहित हर घटना के अपराधी शराब माफियाओं को भाजपा सरकार का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है l
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने असली अपराधियों को पकड़ने, पुलिस अधीक्षक की भूमिका और अपराधियों के राजनीतिक रिश्ते उजागर करने के साथ ही मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने और बीमारों का उचित उपचार करने की मांग की हैI
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@परिवर्तन न्यूज
2 weeks ago | [YT] | 2
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@परिवर्तन न्यूज
*"💥रेत की राजनीति"*
*=============*
*💥रेत उत्खनन के लिए चम्बल के कम से कम 10 घाट खोले जाएं*। *माकपा*
*=============*
मुरैना - वर्तमान में संपूर्ण मुरैना जिले में सभी को रेत की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। चंबल में रेत उत्खनन, परिवहन पूरी तरह बंद है। स्थिति यहां तक है कि खेतों से निकलने वाले रेत का भी उपयोग नहीं किया जा सकता है। जिले भर में केवल सिंध नदी का रेत भारी महंगी दर पर उपलब्ध है। कुल मिलाकर 80% से ज्यादा भवन निर्माण कार्य पूरी तरह बंद है। जिसके चलते राजमिस्त्री, बेलदार, बंधानी और अन्य सभी श्रम कार्य में लगे हुए मजदूर बैरोजगार बैठे हुए हैं। जरूरी निर्माण कार्य करने को भी लोग परेशान हैं। पहले चार घाट खोलने की स्वीकृति दी गई थी। जिसे केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की आपत्ति के बाद रद्द कर दिया गया। स्थिति इतनी ज्यादा बदतर बनी हुई है कि आम आदमी हर तरह से परेशान है। ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बाद भी अपने निजी स्वार्थों के लिए जनता के हितों को ताक पर रखकर रेत की उपलब्धता और परिवहन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल सदस्य अशोक तिवारी, जिला सचिव मुरारी लाल धाकड़, मध्य प्रदेश किसान सभा के जिला कोषाध्यक्ष गयाराम सिंह धाकड़ आदि नेता गणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जिले में कम से कम 10 चंबल के घाटों को खोलने की कार्यवाही की जाए। घड़ियाल और अन्य जालीय जीवों को संरक्षित करने वाले क्षेत्रों को छोड़कर अन्य स्थानों से और खासकर खेतों से उत्खनन होने वाले रेत की उपलब्धता और परिवहन को सुनिश्चित कराया जाए। इससे सरकार को राजस्व भी मिलेगा और भवन निर्माण कराने वालों, एवं श्रमिकों को सुविधा होगी। बेरोजगारों को रोजगार भी मिलेगा तथा परिवहन करने वाले किसानों का कार्य भी सुचारू रूप से जारी रहेगा। उन्होंने इस पर विचार कर सरकार के स्तर पर और जिला प्रशासन के स्तर पर तत्काल कार्यवाही करने की मांग की है। आगामी दिनों में जिले भर में विरोध कार्यवाहियां भी किसानों व्दारा आयोजित की जाएगी ।
प्रेषक
अशोक तिवारी
माकपा मुरैना
2 weeks ago | [YT] | 3
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@परिवर्तन न्यूज
आज सुबह, दिल्ली में, मोर्निंग वाक करते समय क्यों उठाये गए थे भारत सरकार के एडिशनल सेक्रेटरी रहे आशीष जोशी ?
इसलिए
कि उन्होंने एक पोस्ट लिखकर देश के गृह मंत्रालय में हुई कथित असहमति के बारे में बताया था : उनका दावा था कि गृह मंत्री अमित शाह चाहते थे कि जंतर मंतर पर गोली चलवाई जाए मगर गृह सचिव इसके खिलाफ थे !!
अमित शाह की पुलिस को यह दावा नागवार गुजरा . जोशी जी उठा लिए गए । दिन भर कहाँ, किसकी हिरासत में रहे अभी पता नहीं चला । शाम को वापस कर दिए गए हैं ।
पोस्ट हटवा दी गई : उनसे हटवाई, मेटा से हटवाई, जुकरबर्ग से हटवाई या एलन मस्क से, इस बारे में अभी तक किसी को कुछ नहीं पता ।
जौन एलिया कह ही गए हैं कि :
"अब नहीं कोई बात ख़तरे की,
अब सभी को सभी से ख़तरा है।"
वी आर इन इंटरेस्टिंग टाइम
2 weeks ago | [YT] | 2
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@परिवर्तन न्यूज
♦️प्रदेश में खसरे का प्रकोप
🔹अब मासूमों की जान ले रही भाजपा सरकार की अक्षमता और भ्रष्टाचार : माकपा
भोपाल | पूरे प्रदेश में एक साथ खसरे के प्रकोप ने मासूमों को अपने चंगुल में फंसा लिया है l जब मासूमों की जान खतरे में है, तब भाजपा की डॉ मोहन यादव सरकार की बीमारू प्रदेश से विकसित प्रदेश हो जाने के खोखले दावों की पोल भी खुल रही है I
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि यदि उत्तरी मध्यप्रदेश जैसे तुलनात्मक रूप से विकसित क्षेत्र में खसरा सबसे ज्यादा पांव पसार रहा है l राजधानी भोपाल भी इसकी चपेट में है तो आदिवासी क्षेत्रों की भले ही खबरें न आ रही हों, लेकिन वहां की भयावह स्थिति की कल्पना आसानी से की जा सकती है l क्योंकि कुपोषित होने के कारण वहां प्रतिरोधक क्षमता भी कम होने से आदिवासी और गरीब बच्चे ही बीमारी का पहला शिकार होते हैं l
माकपा नेता ने कहा है कि इससे भाजपा सरकार की दो तरह की आपराधिक लापरवाही उजागर हुई है l स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के अनुसार ही पिछले तीन सालों में खसरे के मरीजों की संख्या चिंताजनक तरीके से बढ़ रही है I जिससे साफ है कि भाजपा टीकाकरण का सरकारी दावा हवा हवाई हो गया है l जिन क्षेत्रों में टीकाकरण 90 प्रतिशत से कम होता है, वहां पर विशेष अभियान चलाये जाने की जरूरत होती है l मगर भाजपा सरकार काग़ज़ी खानापूरी को ही अभियान की सफलता मान लेती है और उसी का परिणाम अब मासूमों की परेशानी का सबब बन गया है l
जसविंदर सिंह ने कहा है कि बारिश के मौसम में खसरे और दूसरी मौसमी बीमारियों, जैसे हैजा, उल्टी दस्त और मलेरिया का हमला होता है l सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इसकी रोकथाम के लिए विशेष प्रबंध करने होते हैं l जब प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग का ढांचा ही चरमरा रहा है, तब बारिश से पहले रोकथाम के उचित कदमों की उम्मीद कैसे की जा सकती है l अभी भी प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर युद्ध स्तरीय अभियान चलाकर जाँच करने के लिए कोई पहल कदमी दिखाई नहीं दे रही है I
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने खसरे के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने, रोकथाम की व्यवस्था करने और बीमार बच्चों के उपचार की समुचित व्यवस्था करने की मांग की है I
3 weeks ago | [YT] | 1
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@परिवर्तन न्यूज
विशेष व्यंग्य: जब सरकारें 'सब कुछ' बेचकर 'सबका विकास' खोजने निकलीं!
परिवर्तन न्यूज | विशेष रिपोर्ट
अगर आपके घर में राशन खरीदने के पैसे कम पड़ जाएं, तो एक समझदार तरीका यह होता है कि महीने का बजट सुधारा जाए। लेकिन हमारी दूरदर्शी सरकारों ने एक नया और आधुनिक अर्थशास्त्र खोज निकाला है—“घर का पुराना सोफ़ा, दादाजी की घड़ी और बालकनी की रेलिंग बेच दो, आज शाम की चाय का इंतज़ाम हो जाएगा!”
इसे सरकारी भाषा में बड़े सम्मान के साथ ‘एसेट मोनेटाइजेशन’ (संपत्ति विमुद्रीकरण) और ‘निजीकरण’ कहा जाता है।
'कंगाल' सरकारें या कॉर्पोरेट प्रेम?
जनता अक्सर भोला सवाल पूछती है—क्या सरकारें सच में आर्थिक रूप से कंगाल हो गई हैं जो रेल, तेल, सड़क और हवाई अड्डे सब निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं?
जवाब थोड़ा पेचीदा है। टैक्स तो सरकार जनता से पाई-पाई वसूल रही है—पेट्रोल पर टैक्स, जीएसटी, और यहाँ तक कि रोजमर्रा के खान-पान की चीजों पर भी। फिर यह पैसा जा कहाँ रहा है? अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पुरानी संपत्तियों से कमाकर नई चीजें बनाई जाएंगी। लेकिन जनता को डर इस बात का है कि कहीं यह "कमाई" निजी उद्योगपतियों के मुनाफे का जरिया न बन जाए और जनता के हिस्से सिर्फ 'यूज़र चार्ज' और 'टोल टैक्स' की पर्चियां आएं।
सहकारिता का 'स्वाहा': जनता का साथ, निजी का विकास?
सहकारिता (Cooperative Sector) का असली मतलब था—"सबका थोड़ा-थोड़ा योगदान और सबका बराबर फायदा।" दूध की डेयरियां, सहकारी बैंक और किसान समितियां इसी विचार पर बनी थीं ताकि छोटे किसानों और मजदूरों को बड़े उद्योगपतियों के रहमोकरम पर न जीना पड़े।
लेकिन अब हवा का रुख बदल रहा है। जहाँ-जहाँ जनता ने मिलकर अपना तंत्र खड़ा किया, वहाँ निजी कंपनियों की गिद्ध नजरें टिक गईं। सुधार और आधुनिकता के चमकदार रैपर में लपेटकर सहकारी ढांचे को निजी हाथों के हवाले करने की तैयारी है। तर्क दिया जाता है कि "सहकारी क्षेत्र में घाटा हो रहा है।" साहब, घाटा तो कुप्रबंधन से होता है, तो प्रबंधन सुधारिए ना! घर में चूहा घुस आए तो बिल्ली पाली जाती है, घर में आग नहीं लगाई जाती!
क्या सरकारों को यह सब बेचने का कानूनी अधिकार है?
कानूनी तौर पर देखा जाए तो संविधान के अनुच्छेद 298 के तहत सरकार को संपत्तियों के प्रबंधन और हस्तांतरण का अधिकार है। लेकिन नैतिक सवाल यह है कि ये संपत्तियां किसी एक सरकार की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि देश की कई पीढ़ियों के खून-पसीने और टैक्स से बनी 'राष्ट्रीय धरोहर' हैं।
सरकारें तो 5 साल के लिए आती-जाती ट्रस्टी (रक्षक) होती हैं, मालिक नहीं। अगर रक्षक ही पूरी तिजोरी को लीज पर देकर चाबी निजी तिजोरियों में बंद करने लगे, तो आम जनता सवाल न पूछे तो और क्या करे?
जनता के हित में बड़ा सवाल
निजीकरण का सीधा नियम है—'नो प्रॉफिट, नो सर्विस'। जबकि सरकार का काम लाभ कमाना नहीं, 'जनकल्याण' करना है। अगर अस्पताल, स्कूल, ट्रेन और बसें सब मुनाफे के तराजू पर तौले जाएंगे, तो इस देश का गरीब और मध्यम वर्ग कहाँ जाएगा?
'परिवर्तन न्यूज' का सीधा संदेश है: विकास का मतलब चमचमाते कॉर्पोरेट दफ्तर नहीं, बल्कि देश के अंतिम व्यक्ति की जेब और उसकी आत्मनिर्भरता की सुरक्षा है। जब तक संपत्तियों और सहकारिता को निजी मुनाफे की बलि चढ़ाया जाएगा, जनता ऐसे 'विकास' पर सवाल उठाती रहेगी!
आपकी क्या राय है?
क्या राष्ट्रीय संपत्तियों का निजीकरण और सहकारिता क्षेत्र में बदलाव देश के विकास के लिए ज़रूरी हैं, या फिर यह आम जनता के अधिकारों पर सीधा चोट है? ‘परिवर्तन न्यूज’ अपने पाठकों की निष्पक्ष आवाज को प्राथमिकता देता है।
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3 weeks ago | [YT] | 2
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@परिवर्तन न्यूज
शक्कर कारखाना की बिक्री को निरस्त कर नई तकनीकी मशीनों के साथ पुनर्जीवित कर चालू करने की मांग को लेकर 15 अगस्त से कारखाना में आमरण अनशन कर रहे विधायक पंकज उपाध्याय का आज चौथा दिन है।
शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति कैलारस के आन्दोलन को समर्थन देने दिनांक 19 अगस्त को दोपहर 12 बजे गन्ना उत्पादक किसानों के राष्ट्रीय नेता एवं अखिल भारतीय किसान सभा की केन्द्रीय समिति सदस्य पुष्पेन्द्र त्यागी दिल्ली से कैलारस आ रहे हैं।
आप सभी से अनुरोध है अपने साथियों को लेकर अधिक से अधिक संख्या में कारखाना पहुंचने का कष्ट करें।
धन्यवाद
आपका
गयाराम सिंह धाकड़
पूर्व संचालक
शक्कर कारखाना कैलारस
1 month ago | [YT] | 1
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@परिवर्तन न्यूज
*💥शक्कर कारखाना चालू किया जाए* *जयवर्धन सिंह*।
*💥विधायक पंकज उपाध्याय का आमरण अनशन चौथे दिन जारी रहा*।
*💥कल होगी किसान महापंचायत, आन्दोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी*।
*💥राष्ट्रीय किसान नेता पुष्पेन्द्र त्यागी मुख्य रूप से भाग लेंगे*।
*=============*
कैलारस - शक्कर कारखाना प्रांगण से -
शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति की ओर से जारी आंदोलन और विधायक पंकज उपाध्याय का अनशन चौथे दिन में पहुंच गया। अभी तक सरकार की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं जा रही है। यहां तक कि अनशन कर रहे विधायक पंकज उपाध्याय का मेडीकल
परीक्षण में नहीं किया गया है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मंच ने दिया समर्थन दिया है और आन्दोलन में शामिल होने की घोषणा की है।
नगर के सबसे बुजुर्ग व्यापारी 97 वर्षीय चिरोंजी लाल सिंघल आन्दोलन स्थल पर पहुंचे,और आंदोलन को समर्थन दिया,विजयी होने का आशीर्वाद दिया।
आम सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री, विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि सरकार की नीतियों के चलते कारखाना बंदी हो रही है। हम इसका विरोध करते हैं। नारायण पुर गुना के शक्कर कारखाना और कैलारस के कारखाने के संघर्ष को मिलकर लड़ेंगे। उन्होंने विधायक पंकज उपाध्याय से अनशन को समाप्त करने का आग्रह किया। जिसे उन्होंने विनम्रता से अस्वीकार कर दिया।
उसके बाद जयवर्धन सिंह ने इस संघर्ष को मंजिल तक पहुंचाने
का आश्वासन दिया।
संघर्ष समिति की ओर से अशोक तिवारी ने 19 अगस्त को दोपहर किसान महापंचायत आयोजित करने, उसमें निर्णय लेकर आगामी चरण की घोषणा करने को कहा।
आम सभा को सर्व श्री विधायक मुकेश मल्होत्रा, महेश दत्त मिश्रा पूर्व विधायक, अवनीश भार्गव सेवा दल, उम्मेद सिंह, राकेश बाथम, सुरेंद्र यादव, बृजमोहन मरैया,बैजनाथ कुशवाहा पूर्व विधायक, रामकिंकर गुर्जर जी, शेर सिंह मावई, एवरन सिंह, मोइन कुरैशी, प्रागीलाल जाटव पूर्व विधायक, राधेलाल बघेल पूर्व विधायक, रमेश कुशवाहा पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीवास राजेश गुप्ता पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष गयाराम सिंह धाकड़ किसान नेता, सम्मा कुरेशी, हरेंद्र जादौन आदि ने संबोधित किया।
किसान महापंचायत के लिए अखिल भारतीय किसान सभा के केंद्रीय किस कमेटी के सदस्य पुष्पेंद्र त्यागी जी ने आने की सहमति दी है उनके अलावा कई विधायक गण और नेता गण भी किसान महापंचायत में मौजूद रहेंगे। इसमें किसान संगठनों के नेताओं को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
प्रेषक
अशोक तिवारी प्रदेश अध्यक्ष मध्य प्रदेश किसान सभा
1 month ago | [YT] | 1
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@परिवर्तन न्यूज
*मध्य प्रदेश में खाद की बिक्री पर रोक।*
कृषि विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने स्टॉक के मिलान का हवाला देकर प्रदेश के कलेक्टरों को लिखा पत्र।
1 month ago | [YT] | 1
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@परिवर्तन न्यूज
खाद के संकट के खिलाफ
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की 24 घंटे की भूख हड़ताल आज से
भोपाल l प्रदेश के किसान एक ओर मानसून के लेट होने से और दूसरी ओर भाजपा की राज्य सरकार की लापरवाही और किसान विरोधी नीतियों के कारण बीज और खाद के संकट से परेशान हैं l किसान डी ए पी और यूरिया की किल्लत के कारण
कालाबाजारी और नकली खाद से लूटे जा रहे हैं l
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी खाद की कालाबाजारी और नकली खाद के कारोबार पर रोक लगाने और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर प्रदेश भर में 24 घंटे की भूख हड़ताल करेगी l यह हड़ताल 16 जुलाई को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी और 17 जुलाई को दोपहर 12 बजे खत्म होगी l
राजधानी भोपाल सहित यह भूख हड़ताल विभिन्न जिलों में की जाएगी l पार्टी के राज्य स्तरीय नेता भी विभिन्न जिलों में भूख हड़ताल पर रहेंगे l
जसविंदर सिंह
राज्य सचिव
15/07/2026
9425009909
2 months ago | [YT] | 2
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