"ज़िंदगी कभी मुस्कुराहट देती है तो कभी गहरे ज़ख़्म,
लेकिन लफ़्ज़ वो आईना हैं जो दोनों को सच्चाई से दिखाते हैं।
जख़्म-ए-जहाँ उसी आईने का नाम है—जहाँ दर्द, मोहब्बत और उम्मीद
तीनों एक साथ मिलते हैं।"