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भारत में Net FDI 97% क्यों गिरा? RBI और वित्त मंत्रालय के आंकड़े क्या कहते हैं?
क्या भारत में विदेशी निवेश घट रहा है? हाल के दिनों में यही सवाल सबसे ज़्यादा चर्चा में है। वजह है संसद में पेश किए गए वित्त मंत्रालय और RBI के आंकड़े। पहली नज़र में तस्वीर थोड़ी उलझी हुई लगती है। एक तरफ भारत का Gross FDI रिकॉर्ड स्तर पर है, लेकिन दूसरी तरफ Net FDI पिछले कई वर्षों के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया।
आंकड़ों पर नज़र डालें तो वित्त वर्ष 2022-23 में भारत का Net FDI करीब 28 अरब डॉलर था। 2023-24 में यह घटकर 10.13 अरब डॉलर रह गया। इसके बाद 2024-25 में इसमें लगभग 97% की गिरावट दर्ज हुई और Net FDI सिर्फ 960 मिलियन डॉलर रह गया, जो करीब दो दशकों का सबसे निचला स्तर माना गया।
हालांकि 2025-26 में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला और Net FDI बढ़कर लगभग 7.65 अरब डॉलर पहुंच गया। लेकिन सवाल यही है कि जब इसी दौरान Gross FDI 94 अरब डॉलर से ज्यादा रहा, तो Net FDI इतना कम क्यों रह गया?
इसकी सबसे बड़ी वजह है Profit Repatriation। यानी भारत में कारोबार कर रही विदेशी कंपनियां यहां कमाया गया मुनाफा अपने मूल देशों में वापस ले जा रही हैं। पिछले वित्त वर्ष में यह रकम करीब 52 अरब डॉलर रही।
दूसरा कारण है Outward ODI (Overseas Direct Investment)। अब भारतीय कंपनियां भी विदेशों में फैक्ट्री, बिजनेस और एसेट्स खरीदने पर तेजी से निवेश कर रही हैं। यानी जितनी पूंजी भारत में आ रही है, उसका एक बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों के मुनाफे और भारतीय कंपनियों के विदेश निवेश के रूप में बाहर भी जा रहा है।
इसलिए सिर्फ Net FDI में गिरावट देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि विदेशी निवेशकों का भारत से भरोसा उठ गया है। यह भारत की अर्थव्यवस्था के परिपक्व होने और भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार की भी कहानी है। हालांकि, अगर देश के भीतर मैन्युफैक्चरिंग और लॉन्ग-टर्म निवेश को और मजबूत बनाना है, तो ऐसी नीतियों की जरूरत होगी जो विदेशी पूंजी को लंबे समय तक भारत में निवेशित रहने के लिए प्रोत्साहित करें।
आपकी राय क्या है? क्या Net FDI में यह गिरावट चिंता की बात है या फिर यह भारत की बदलती आर्थिक ताकत का संकेत है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।
News Raj
भारत में Net FDI 97% क्यों गिरा? RBI और वित्त मंत्रालय के आंकड़े क्या कहते हैं?
क्या भारत में विदेशी निवेश घट रहा है? हाल के दिनों में यही सवाल सबसे ज़्यादा चर्चा में है। वजह है संसद में पेश किए गए वित्त मंत्रालय और RBI के आंकड़े। पहली नज़र में तस्वीर थोड़ी उलझी हुई लगती है। एक तरफ भारत का Gross FDI रिकॉर्ड स्तर पर है, लेकिन दूसरी तरफ Net FDI पिछले कई वर्षों के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया।
आंकड़ों पर नज़र डालें तो वित्त वर्ष 2022-23 में भारत का Net FDI करीब 28 अरब डॉलर था। 2023-24 में यह घटकर 10.13 अरब डॉलर रह गया। इसके बाद 2024-25 में इसमें लगभग 97% की गिरावट दर्ज हुई और Net FDI सिर्फ 960 मिलियन डॉलर रह गया, जो करीब दो दशकों का सबसे निचला स्तर माना गया।
हालांकि 2025-26 में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला और Net FDI बढ़कर लगभग 7.65 अरब डॉलर पहुंच गया। लेकिन सवाल यही है कि जब इसी दौरान Gross FDI 94 अरब डॉलर से ज्यादा रहा, तो Net FDI इतना कम क्यों रह गया?
इसकी सबसे बड़ी वजह है Profit Repatriation। यानी भारत में कारोबार कर रही विदेशी कंपनियां यहां कमाया गया मुनाफा अपने मूल देशों में वापस ले जा रही हैं। पिछले वित्त वर्ष में यह रकम करीब 52 अरब डॉलर रही।
दूसरा कारण है Outward ODI (Overseas Direct Investment)। अब भारतीय कंपनियां भी विदेशों में फैक्ट्री, बिजनेस और एसेट्स खरीदने पर तेजी से निवेश कर रही हैं। यानी जितनी पूंजी भारत में आ रही है, उसका एक बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों के मुनाफे और भारतीय कंपनियों के विदेश निवेश के रूप में बाहर भी जा रहा है।
इसलिए सिर्फ Net FDI में गिरावट देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि विदेशी निवेशकों का भारत से भरोसा उठ गया है। यह भारत की अर्थव्यवस्था के परिपक्व होने और भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार की भी कहानी है। हालांकि, अगर देश के भीतर मैन्युफैक्चरिंग और लॉन्ग-टर्म निवेश को और मजबूत बनाना है, तो ऐसी नीतियों की जरूरत होगी जो विदेशी पूंजी को लंबे समय तक भारत में निवेशित रहने के लिए प्रोत्साहित करें।
आपकी राय क्या है? क्या Net FDI में यह गिरावट चिंता की बात है या फिर यह भारत की बदलती आर्थिक ताकत का संकेत है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।
Source: RBI और वित्त मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़े
3 weeks ago | [YT] | 0
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