It's deep


Dipak M Pal

AI के आने से IT इंडस्ट्री में लगभग सभी लोग बहुत ज़्यादा दबाव में काम कर रहे हैं।
हर किसी के ऊपर यह दबाव है कि कम समय में, कम से कम खर्च में काम को कैसे पूरा किया जाए।

3 weeks ago | [YT] | 2

Dipak M Pal

आप सभी को होली की ढेरों शुभकामनाएँ! 🌸🎨

#होली #रंगोंकात्योहार #HappyHoli #प्यारकेरंग

3 months ago | [YT] | 3

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4 months ago | [YT] | 1

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पिछले कुछ दिनों या महीना पहले तक देखा जाए तो अपराध बहुत बढ़े हैं। विपक्ष चाहे तो इन पर कई तरह से सवाल जवाब जनता के साथ जमीन पर उतर कर कर सकती है। मैं देख रहा हूं बहुत से सोशल मीडिया के पत्रकार अच्छा काम कर रहे हैं वह उनके साथ मिलकर भी सवाल जवाब कर सकते हैं और पत्रकारों का हौसला बढ़ा सकते हैं। जनता की आशा और उम्मीद भी बढ़ा सकते हैं। मैं जानता हूं विपक्ष को बड़े टीवी चैनल या बड़ा कोई पत्रकार नहीं दिखाता है लेकिन छोटे पत्रकार सच्चाई तो दिखा रहे हैं वो सरकार से सवाल जवाब भी कर रहे हैं। विपक्ष चाहे तो बहुत कुछ कर सकती है वैसे भी विपक्ष के पास मुद्दे कम ही बचे हैं। रोज-रोज पेट्रोल के बढ़ते दाम अब बचे नहीं, सिलेंडर एलपीजी का भी दम अब इतना ऊपर नीचे खास होता नहीं। लेकिन विपक्ष है कि......

4 months ago | [YT] | 3

Dipak M Pal

साल 2025 की शुरुआत इतनी खराब रही कि अंत तक मैं और मेरा परिवार उससे जूझते ही रहे। कहते हैं चुनौतियाँ सबके जीवन में आती हैं, पर मेरे सामने तो मानो चुनौतियों की कतार लग गई थी। मैं अकेला क्या कर पाता, मेरी क्या औक़ात थी, लेकिन मेरे आसपास रहने वाले हर इंसान से मुझे सहारा मिला। उसी सहारे की वजह से इन कठिनाइयों का सामना कर पाया।
मेरे दफ़्तर के लोग, मेरे सभी रिश्तेदार ( केवल ससुराल पक्ष के लोग), मेरे खास दोस्त, मेरी पत्नी के दोस्त, उनके दफ़्तर के सहकर्मी और मेरे घर के लोग—सभी ने किसी न किसी रूप में मेरी मदद की। इन सबका एहसान मैं जीवन भर नहीं भूल सकता।
जनवरी आती है तो लोग खुशियाँ मनाते हैं, मगर मैं और मेरी पत्नी अपने भाई की बिगड़ती तबीयत को लेकर कई बार रोए। जनवरी गुज़र गई, फरवरी भी बीतने लगी, लेकिन बुरा समय अभी खत्म नहीं हुआ था। आधा मार्च खत्म होते होते मेरी बेटी को ब्रेन ट्यूमर होने का पता चला और तुरंत उसका ऑपरेशन कराना पड़ा। वे चार-पाँच महीने कैसे चिंता और डर में निकल गए, इसका आज भी ठीक से एहसास नहीं होता।।इसके साथ ही मेरे दूसरे छोटे भाई की गृहस्थी उजड़ने की नौबत आ गई। पिता जी की तबियत अत्यंत खराब रहने लगी।
और जब साल का अंत आते-आते दिसंबर पहुँचा, तो मेरी पत्नी को आपातकाल में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आने वाला वर्ष 2026 सभी के जीवन में खुशियाँ लेकर आए। सभी स्वस्थ रहें, आगे बढ़ें और जीवन में खूब तरक्की करें।

आप सभी को नूतन वर्ष 2026 की शुभकामनाएं।

5 months ago | [YT] | 1

Dipak M Pal

मैं 2018 से पहले तक गणेश चतुर्थी का त्यौहार नहीं जानता था। मगर अहमदाबाद में रहने से दो त्यौहारों पर ज़ोर-शोर से होने वाला उत्सव देखा—एक गणेश चतुर्थी और दूसरा नवरात्रि। शुरुआत में ये त्यौहार मुझे उतने पसंद नहीं आते थे, क्योंकि सब नया था। लेकिन धीरे-धीरे ये अच्छे लगने लगे, मज़ा आने लगा।

मुझे गणेश चतुर्थी का त्यौहार मानो मानव कालचक्र जैसा लगता है।

उदाहरण के लिए:

गणेश भगवान की स्थापना एक बच्चे के जन्म जैसी लगती है, जैसे किसी मानव का जन्म होना।

जैसे बच्चे के जन्म से पहले माता-पिता तैयारियाँ करते हैं—भागदौड़, सजावट, खरीदारी—वैसे ही गणेशोत्सव में भी घर-घर यही होता है।

जब तक भगवान विराजमान रहते हैं, उनकी सुबह-शाम आरती की जाती है, अलग-अलग प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।

उन्हें दुलार किया जाता है। पता होते हुए भी कि यह मिट्टी की मूर्ति है, उनके चेहरे को देखते ही भीतर करुणा का भाव आ जाता है। लगता है मानो वे हमें बड़े प्यार से निहार रहे हों, साक्षात भगवान हमारे बीच आ गए हों। ऐसा भी लगता है कि उनसे कह दें—“हमारे सारे दुख और परेशानियाँ हर लो।”


लेकिन सब कुछ घूमकर फिर उसी सत्य पर लौट आता है—कि जो भी हुआ, उसमें बप्पा ने हमारे लिए कुछ अच्छा ही सोचा होगा।

लोग अपनी मान्यता के अनुसार 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन तक बप्पा को विराजमान रखते हैं। इस दौरान पूजा, आरती, व्यंजन और खुशियों का माहौल छाया रहता है। जब तक भगवान हमारे बीच रहते हैं, घर-परिवार में उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

धीरे-धीरे वह समय भी आता है, जब बप्पा को विदा करना होता है। और यही मानव जीवन का सत्य है—“एक न एक दिन सबका अंत होता है।”

फिर एक दिन हम उन्हें ढोल-नगाड़ों के साथ विदा करते हैं, विसर्जन कर देते हैं। इंसान रोता नहीं, क्योंकि इसे त्यौहार मानकर हर्षोल्लास से सम्पन्न किया जाता है।

लेकिन जब वह स्थान खाली हो जाता है, तो दिल में एक खालीपन रह जाता है। बार-बार उनकी याद आती है। उनकी सेवा करने का क्रम रुक जाता है और समय धीरे-धीरे भारी लगने लगता है। जब तक वे थे, हर दिन जल्दी बीत जाता था। अब वही दिन उदासी में बदल जाता है।

अगर इस दृष्टिकोण से देखें तो यह बिल्कुल मानव जीवन जैसा है—
जब कोई इंसान जन्म लेता है तो घर-परिवार और पड़ोसी तक सेवा में लगे रहते हैं, खुशियाँ छा जाती हैं। और जब वही इंसान हमें छोड़कर चला जाता है, तो दिल में गहरी उदासी छा जाती है।

बप्पा से मैं यही प्रार्थना करता हूं कि सबकी जिंदगी में खुशियां भर दे। वो हर साल पधारे हमें दर्शन दें हर साल खुशियों में बढ़ोत्तरी भी करे।

अंत में सारे बोलो…..

गणपति बप्पा मोरया! 🙏

9 months ago | [YT] | 3

Dipak M Pal

9 months ago | [YT] | 4

Dipak M Pal

15 अगस्त और 26 जनवरी वाले दिन चाहे कितनी war 2, 3, 4.... 5 देख लो मजा ही नहीं आता,

जब तक तिरंगा ना देखो.....

दिन नहीं कटता, .... रात नहीं होती।

#war2 #15august #15august2025 #तिरंगा #tirangamovie #nanapatekardialogue #Rajkumar

9 months ago (edited) | [YT] | 2