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LVM3-M5 / CMS-03 मिशन अब 2 नवंबर को प्रक्षेपित होने वाला है!

यह मिशन सीएमएस-03 नामक बहु-बैंड संचार उपग्रह प्रक्षेपित करेगा, जो भारतीय भूभाग सहित विस्तृत समुद्री क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करेगा।

4 months ago | [YT] | 0

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यह है Scientific Ravi का नया और अनोखा इन्वेंशन – फ्यूचरिस्टिक सोलर बैकपैक।
इस बैग की खासियत है कि यह हार्ड प्लास्टिक से बना है और इसके ऊपर एक लचीला (flexible) सोलर पैनल लगा है, जो बैग के डिज़ाइन के हिसाब से मुड़कर फिट हो जाता है।
दोपहर की तेज धूप में चलते-फिरते यह बैग अपने आप ऊर्जा पैदा करता है और बैग के साइड में बने USB पोर्ट से मोबाइल चार्ज किया जा सकता है।

सिर्फ इतना ही नहीं – इस इन्वेंशन में एक मॉडर्न नेकबैंड फैन भी जोड़ा गया है, जो गर्मी और पसीने से तुरंत राहत देता है।
मतलब यह बैग सिर्फ सामान रखने का नहीं, बल्कि सोलर चार्जिंग + कूलिंग सिस्टम का भी काम करता है।

यह कॉन्सेप्ट खासकर स्टूडेंट्स, ट्रैवलर्स और बाइक राइडर्स के लिए बनाया गया है, ताकि बिजली की टेंशन और गर्मी की परेशानी से छुटकारा मिल सके।

5 months ago | [YT] | 1

Scientific Ravi

यह एक बिल्कुल नए कॉन्सेप्ट – पूरी तरह से सोलर पावर्ड ड्रोन – को दिखाता है, जिसमें किसी भी तरह की बैटरी का इस्तेमाल नहीं किया गया है। ड्रोन की पूरी शक्ति सिर्फ और सिर्फ सोलर पैनल से आती है। उज्ज्वल धूप में लगे हुए सोलर पैनल सीधे प्रोपेलर को ऊर्जा देते हैं और ड्रोन हवा में उड़ान भरता है।

मैं हूँ Scientific Ravi, और मैं हमेशा ऐसे ही नए-नए आइडिया और फ्यूचरिस्टिक कॉन्सेप्ट्स पर रिसर्च करता रहता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि विज्ञान और तकनीक को और भी आगे ले जाया जाए और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया जा सके।

अगर आपको यह अनोखा प्रयोग पसंद आए, तो चैनल को ज़रूर सब्सक्राइब करें और मेरे साथ भविष्य की इस यात्रा में जुड़े रहें। 🚀✨

5 months ago | [YT] | 2

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ग्रहण का समय (Indian Standard Time - IST)

पेनुम्ब्रल चरण की शुरुआत: शाम लगभग 8:58 PM

पूर्ण ग्रहण (Totality) की शुरुआत: लगभग 11:00 PM

पूर्ण ग्रहण का अधिकतम (Maximum Eclipse): लगभग 11:42 PM

पूर्ण ग्रहण का अंत: लगभग 12:22 AM (8 सितम्बर की मध्यरात्रि)

पेनुम्ब्रल चरण समाप्ति: लगभग 2:25 AM (8 सितम्बर की सुबह)

6 months ago | [YT] | 1

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भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य एस्ट्रोनॉट्स के लिए अंतरिक्ष स्टेशन तक की ऐतिहासिक यात्रा पर फिलहाल मौसम ने ब्रेक लगा दिया है. NASA, SpaceX और Axiom Space इस मिशन को लेकर सांसें थामे बैठे हैं. फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरने वाली SpaceX रॉकेट अब 11 जून तक इंतजार करेगी. NASA और SpaceX दोनों पूरी तैयारी में हैं. लेकिन आखिरकार अंतिम फैसला प्रकृति के मिजाज पर ही टिका है. अगले 24-48 घंटे शुभांशु शुक्ला और भारत के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं. दुनिया की नजर अब फ्लोरिडा के आसमान पर टिकी है

9 months ago | [YT] | 0

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नमस्कार दोस्तों! मैं हूँ Scientific Ravi और आप जल्द ही देखने वाले हैं एक नई और ज्ञान से भरपूर वीडियो सीरीज़ जिसका नाम है SR Edu Facts। यह सीरीज़ खास उन सभी लोगों के लिए है जो विज्ञान, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और स्पेस जैसी रोमांचक दुनिया को सरल और रोचक तरीक़े से समझना चाहते हैं। इसमें आपको हर दिन मिलेगा एक नया फैक्ट, कॉन्सेप्ट या जानकारी, जिसे आसान भाषा, आकर्षक ग्राफिक्स और 3D विज़ुअल्स के ज़रिए इस तरह समझाया जाएगा कि वो सीधे दिमाग़ में बैठ जाए। चाहे आप एक छात्र हों, शिक्षक हों, या फिर सिर्फ़ ज्ञान की खोज में हों – SR Edu Facts हर किसी के लिए है। हमारा उद्देश्य है – आपकी सोच को वैज्ञानिक दिशा में आगे बढ़ाना, ताकि हर सवाल का जवाब आपको विज्ञान के ज़रिए मिले। तो तैयार हो जाइए, क्योंकि Scientific Ravi के साथ अब शुरू होगा एक अनोखा और रोचक सफ़र – SR Edu Facts, जो आपके ज्ञान को देगा एक नई उड़ान!

9 months ago | [YT] | 0

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*कावेरी इंजन (Kaveri Engine) - DRDO द्वारा विकसित भारतीय जेट इंजन*

*परिचय:*
कावेरी इंजन भारत का एक स्वदेशी टर्बोफैन इंजन है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की एक इकाई गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य भारत के लड़ाकू विमानों, विशेष रूप से हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस के लिए एक स्वदेशी जेट इंजन तैयार करना था।



*मुख्य विशेषताएँ (Main Features):*

1. इंजन का प्रकार: टर्बोफैन इंजन


2. थ्रस्ट (बिना बाद दहन): लगभग 52 किलो न्यूटन (kN)


3. थ्रस्ट (बाद दहन सहित): लगभग 81 किलो न्यूटन (kN)


4. लंबाई: लगभग 3.5 मीटर


5. वजन: लगभग 1100 किलोग्राम


6. फ्यूल: एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF)





*विकास का उद्देश्य (Development Purpose):*

कावेरी इंजन का मुख्य उद्देश्य था भारत को विदेशी इंजनों पर निर्भरता से मुक्त कराना और तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों के लिए अपना खुद का इंजन विकसित करना।



*अब तक की प्रगति (Progress So Far):*

कावेरी इंजन का विकास 1986 में शुरू किया गया था।

हालांकि इसमें कई तकनीकी चुनौतियाँ आईं और इंजन तेजस लड़ाकू विमान की जरूरतों को पूरी तरह से पूरा नहीं कर पाया।

इस कारण तेजस के पहले संस्करणों में General Electric (GE) F404 इंजन का उपयोग किया गया।

परंतु DRDO ने कावेरी इंजन पर रिसर्च जारी रखी और इसे अन्य प्लेटफॉर्म्स जैसे UAV (Unmanned Aerial Vehicle) या UCAV (Unmanned Combat Aerial Vehicle) के लिए उपयुक्त बनाने की योजना बनाई।


*सहयोग और भविष्य (Future Scope):*

DRDO और फ्रांस की कंपनी Safran के बीच सहयोग से कावेरी इंजन को फिर से डिज़ाइन और बेहतर बनाने पर काम हो रहा है।

इसे भारत के भविष्य के स्टील्थ फाइटर प्रोजेक्ट AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) में उपयोग करने की संभावना भी है।

*महत्त्व (Importance):*

आत्मनिर्भर भारत अभियान में यह एक बड़ा कदम है।

यदि यह इंजन पूरी तरह से सफल होता है, तो भारत दुनिया के उन कुछ देशों में शामिल हो जाएगा जो अपने खुद के जेट इंजन बनाते हैं।

9 months ago | [YT] | 0

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Nokia ने हाल ही में Intuitive Machines के साथ मिलकर चंद्रमा पर पहला सेलुलर नेटवर्क स्थापित किया है। यह नेटवर्क Intuitive Machines के IM-2 मिशन का हिस्सा था, जिसने 10 मार्च 2025 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में सफलतापूर्वक लैंडिंग की।

इस मिशन के दौरान, Nokia के लूनर सरफेस कम्युनिकेशन सिस्टम (LSCS) ने सफलतापूर्वक पावर अप होकर ऑपरेशनल डेटा पृथ्वी पर स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर को भेजा। हालांकि, पावर की कमी और अत्यधिक ठंड के कारण, चंद्रमा पर पहली सेलुलर कॉल नहीं की जा सकी। लेकिन, यह उपलब्धि भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यह परियोजना नासा के कमर्शियल लूनर पेलोड सर्विसेज (CLPS) कार्यक्रम का हिस्सा थी, और Nokia की तकनीक का प्रदर्शन NASA के टिपिंग पॉइंट इनिशिएटिव द्वारा आंशिक रूप से वित्तपोषित था।

11 months ago | [YT] | 1

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2025 में AI तेजी से हर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। यह न केवल तकनीकी जगत में बल्कि हमारे दैनिक जीवन में भी गहराई से प्रवेश कर चुका है। कुछ प्रमुख क्षेत्र जहां AI ने अपना कब्जा जमाया है:

1. बिजनेस और इंडस्ट्री – AI अब कंपनियों के लिए अनिवार्य हो चुका है। ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स, और AI-पावर्ड चैटबॉट्स कंपनियों की दक्षता बढ़ा रहे हैं। उत्पादन में रोबोटिक्स और AI का अधिक उपयोग हो रहा है।


2. स्वास्थ्य क्षेत्र – AI अब बीमारी का पहले से पता लगाने, उपचार की सटीक योजना बनाने और दवा अनुसंधान में तेजी लाने में मदद कर रहा है। रोबोटिक सर्जरी और AI-पावर्ड हेल्थ असिस्टेंट आम हो गए हैं।


3. शिक्षा और रिसर्च – AI आधारित पर्सनलाइज्ड लर्निंग अब शिक्षा को नए स्तर पर ले जा रही है। AI ट्यूटर और वर्चुअल क्लासरूम छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को आसान बना रहे हैं।


4. स्पेस और भविष्य की टेक्नोलॉजी – AI का उपयोग अब स्पेस मिशनों की योजना बनाने, ग्रहों की खोज और ब्रह्मांडीय रहस्यों को सुलझाने में किया जा रहा है। NASA और SpaceX जैसे संगठनों ने AI-पावर्ड रोबोटिक मिशन और ऑटोनॉमस स्पेसशिप विकसित किए हैं।


5. एंटरटेनमेंट और मीडिया – AI अब फिल्में, म्यूजिक और आर्ट क्रिएट कर सकता है। AI जनरेटेड कंटेंट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, और AI-पावर्ड वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स भी सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं।


6. डेली लाइफ और स्मार्ट असिस्टेंट – AI असिस्टेंट अब और ज्यादा स्मार्ट हो गए हैं। स्मार्ट होम, वॉयस कमांड डिवाइसेस और AI-पावर्ड ट्रांसलेटर अब जीवन को और आसान बना रहे हैं।


7. ड्रोन और ऑटोनॉमस व्हीकल्स – ड्राइवरलेस कारें और AI से नियंत्रित ड्रोन्स लॉजिस्टिक्स, डिलीवरी और सुरक्षा सेवाओं में क्रांति ला रहे हैं।



2025 में AI का प्रभाव इतना व्यापक हो चुका है कि यह लगभग हर क्षेत्र में एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। आगे आने वाले वर्षों में इसकी क्षमताएं और भी बढ़ेंगी, जिससे मानव जीवन पूरी तरह बदल सकता है।

1 year ago | [YT] | 2

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The PSLV-C59/PROBA-3 Mission, the 61st flight of PSLV and the 26th using PSLV-XL configuration, is set to carry ESA'S PROBA-3 satellites (~550kg) into a highly elliptical orbit.

PSLV-C59 Configuration:

Stages: 6PSOM-XL + S139 + PL40 + HPS3 + L2.5

Liftoff Mass: 320t

This mission exemplifies the trusted precision of PSLV and the collaboration of NSIL, ISRO, and ESA.

Liftoff: 4th Dec 2024, 16:08 IST

Location: SDSC-SHAR, Sriharikota

1 year ago | [YT] | 0