Author | Entrepreneur | Consciousness Explorer

I’m Reetika Agarwal, a devotee on the path of Devi Consciousness since childhood, sharing insights that help seekers awaken awareness, understand karma, and manifest a life of inner peace and purpose.

Here you’ll find:

• Spiritual & mantra wisdom

• Astrology, cosmic insight & conscious manifestation guidance

Let’s pray: लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु 😇🙏🏻

Because the moment we radiate goodwill to all beings, we step into a higher field of collective consciousness—the space where clarity, transformation, and true abundance begin.

🔍 Disclaimer:
This channel is solely for educational and spiritual-consciousness exploration. It is not affiliated with any government or religious institution. The content does not constitute medical, legal or mental-health advice, nor is it intended to offend anyone’s religious sentiments.


Reetika Agarwal

'शक्ति से शिव तक' को हमारे बीच आए लगभग 12–13 दिन हो गए हैं।
इस दौरान आप सभी से जो जुड़ाव महसूस हुआ है, वह मेरे लिए शब्दों से परे है।

मयूरा जी का संदेश पढ़ा…एक first time writer के लिए इससे बड़ा कोई पुरस्कार नहीं होता कि उसकी सादगी भरी भाषा किसी के भीतर कुछ स्पर्श कर सके।

एक छोटा सा सहयोग आपसे चाहूँगी—
आप में से कई साथियों के पास अब यह पुस्तक पहुँच चुकी है।
यदि इसे पढ़ते समय आपको कुछ भी ऐसा लगा जो आपके काम आया हो, तो क्या आप Amazon पर अपना एक रिव्यू लिख सकते हैं?

यह आग्रह केवल इसलिए है क्योंकि आपके शब्द इस पुस्तक को और लोगों तक पहुँचने में मदद करेंगे—उन लोगों तक, जो शायद अभी उसी खोज में हैं…

और जैसा आप जानते हैं, इस पुस्तक से होने वाला 100% लाभ उन बच्चों की शिक्षा के लिए समर्पित है…
उनकी मुस्कुराहट ही इस पूरी यात्रा का सबसे सच्चा कारण है।

Amazon रिव्यू लिंक: amzn.in/d/0j7S62bg

आपका समय, आपके शब्द और आपका विश्वास—सब मेरे लिए बहुत मूल्यवान है।

ढेर सारा प्रेम और आभार।
जय माँ ललिता। जय माँ कामाक्षी। 🙏

23 hours ago (edited) | [YT] | 25

Reetika Agarwal

नवरात्रि खत्म हो गई…
माँ विदा हो गईं।

घर में एक अजीब सा खालीपन है…
जब तक कलश स्थापित होता है, ऐसा लगता है जैसे
“दुर्गा माँ आई हैं…”

और जैसे ही वो विदा होती हैं…
एक खालीपन रह जाता है।



आज माँ की साधना में मन नहीं लग रहा था…
तो मैंने नहीं की।

बहुत सारे काम pending हैं…
जो करने थे, लेकिन नहीं हुए।

और आज…
दिल ने कहा—

👉 “बस बैठो… और अपने दिल की सुनो।”

तो आज दिल की कलम से लिखने का मन हुआ…




🌸 “कर्म का बीज… और एक नई दिशा”

कभी-कभी लगता है…
कि जो मैं कर रही हूँ, वो सिर्फ content नहीं है।

इस चैनल की इस साल की 100% income—
अनाथ बच्चों की education के लिए जा रही है।

Book sales से जो भी 100% Profit आ रही है…
अगर उससे किसी बच्चे को पढ़ने का अवसर मिल जाए…

तो शायद—
👉 यही सबसे बड़ी साधना है।

और एक तरफ…
जो मैं यहाँ share कर रही हूँ,
उससे लोग सीख रहे हैं,
समझ रहे हैं,
माँ ललिता से जुड़ रहे हैं।

तो कहीं न कहीं…
ज्ञान और सेवा—दोनों के माध्यम से
कुछ अच्छा ही बोया जा रहा है।
............................................

🌺 कुछ मासूम सवाल…

बहुत सारे comments आते हैं…
हर दिन, हर पोस्ट पर।

कभी माँ ललिताम्बा को लेकर…
कभी ललिता सहस्रनाम को लेकर…
कभी श्रीविद्या साधना…
तो कभी गुरु को लेकर।

न जाने कितने सवाल…


जो boundary के अंदर होते हैं…
वो publish हो जाते हैं।

कुछ…
YouTube के filters में ही रुक जाते हैं—
कभी language की वजह से,
कभी tone की वजह से।


पिछले कुछ दिनों में बहुत कुछ हुआ…
ऐसा… जिसने रुककर सोचने पर मजबूर कर दिया।

और सच कहूँ तो,
वो सवाल बाहर से नहीं…
मेरे अंदर से भी उठ रहे थे।

आज अंदर से एक सच्चा जवाब आया—

कि इन सबको करते-करते
मेरी अपनी consciousness भी कहीं न कहीं impact हो रही है…

क्योंकि—

हज़ारों लोग…
हज़ारों विचार…
हज़ारों comments…

हर किसी की अपनी प्रकृति,
अपनी expectations,
अपना नजरिया…

और उन सबको
स्थितप्रज्ञ की तरह देख पाना—
सच में बहुत मुश्किल होता है।

कभी-कभी…
यह साधना से ज़्यादा सिरदर्द बन जाता है।



और फिर मन में एक विचार आया—

👉 “छोड़ दूँ न…”
👉 “क्यों चला रही हूँ यह सब?”

मुझे जो सीखना था,
शायद मैं सीख चुकी हूँ।

तो फिर इतना मानसिक भार क्यों लेना?

एक गहरा introspection…

“क्या हो रहा है श्रीविद्या साधना के साथ?”


क्या यह एक दूसरी तरह की दौड़ बन गई है—
जहाँ हम किसी को गिराकर
खुद को साबित करना चाहते हैं?

एक अनकही जंग…Violence..Harsh Words..Competition
जो physical नहीं होती…
पर words के through होती है—


कई बार…
रास्ते में ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं—
जहाँ सही और गलत का खेल चलता है…
कौन बड़ा, कौन छोटा…
किसके पास अधिक ज्ञान, किसके पास कम…
और फिर वाद-विवाद का अंतहीन चक्र।

लेकिन अब—
👉 मैं उस ऊर्जा से बाहर आने का चुनाव करती हूँ।


और उसी पल…
एक शांत सी आवाज़ आई—


भगवती की प्रेरणा से तुमने जो commitment की है उसे तो पूरा करना होगा तुमको।


🌺 एक Final Decision…

👉 ललिता सहस्रनाम और सौंदर्य लहरी complete होने के बाद
मैं अब श्रीविद्या के बारे में आगे बात नहीं करूँगी।
यह decision आज लिया है—
बहुत शांति के साथ।

बीच-बीच में
personal work आ जाती हैं…
जिससे यह journey थोड़ा रुक-रुक जाती है।

और मैं चाहती हूँ कि—

👉 अब यह रुकावट खत्म हो
👉 और यह पूरी series continuity में complete हो

................................................

🌸एक नई शुरुआत के लिए…

👉 अगले साल इस चैनल के लिए एक नई शुरुआत होगी।

इस शुरुआत की फाउंडेशन सिर्फ प्रेम और शांति होगी।

क्योंकि आज…
इस क्षण में इतना निश्चित है—

👉 I choose peace.
👉 I choose love. ✨

क्योंकि…

हम माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी को बुलाते हैं—

शांतिमयी… करुणामयी… प्रेममयी परमेश्वरी।

और सबसे बड़ी साधना यही है—
👉 कि आपके भीतर
आपके इष्ट के गुण उतरने लगें।

तभी साधना सफल होती है।


PS
अगले साल 🌸 चैत्र नवरात्रि 2027 🌸 इस चैनल के लिए एक नई शुरुआत होगी।
जैसे ही मैं भगवती की प्रेरणा से 3 साल पहले शुरू किया हुआ कार्य इस वर्ष 2026 में पूर्ण करूँगी।

आपकी,
रीतिका दीदी 🙏🏻

जय माँ कामाक्षी।
जय माँ ललिताम्बिका। ✨

2 days ago (edited) | [YT] | 93

Reetika Agarwal

किसी ने एक बात कही…
मैंने तीन सुना दी…”

अगर तुम एक उंगली मेरी तरफ उठाओगे,
तो मैं तुम्हारी तरफ तीन उंगलियाँ उठाऊँगी…
और अगर बात ज़्यादा बढ़ी,
तो कभी-कभी मुक्का भी जवाब दे सकता है…

“पहले मैं ऐसी ही थी…
react करना… तुरंत जवाब देना…

Meditation के बाद थोड़ा बदल गई…
लेकिन फिर भी…
अगर कोई ज़्यादा बोले…
और अगर सामने वाला हद पार करे,
तो मैं पलटकर बोल देती…

…………..,,,

कल मैं अपने first meditation गुरु से मिलने गई थी।
और हमेशा की तरह, दिल में एक शांति भी थी और एक हल्की सी उत्सुकता भी।


जब भी हम अपने गुरु से मिलते हैं,
तो बिना कहे ही वो बहुत कुछ कह जाते हैं…



शाम की appointment थी…

हम कुल 20 लोग थे, जिनकी appointment थी…
और Gurudev के आने से पहले हम सबको एक hall में बैठाया गया।

Gurudev के आने से पहले एक वीडियो चलाया गया…
मैं बस वैसे ही बैठकर देख रही थी…
लेकिन धीरे-धीरे लगा कि वो वीडियो नहीं,
जैसे मेरे अंदर ही कुछ चल रहा हो।

उसमें एक ही संदेश बार-बार आ रहा था—
Stress-free, Violence-free society…

Spread peace & love.


कल जब गुरुदेव मेरे सामने आए…
तो एक पल के लिए सब कुछ शांत हो गया।

मैंने अपनी पहली पुस्तक उन्हें दिखाई…Gifted Him
और जब झुककर उनके चरणों में आशीर्वाद लिया…

तो उस क्षण कोई शब्द नहीं थे…
बस अंदर से एक ही संकल्प उठा—

Violence सिर्फ actions से नहीं होता…
हमारे शब्द भी किसी का दिल तोड़ सकते हैं।

कुछ दिन पहले ही मेरे साथ एक incident हुआ था…
जहाँ बिना किसी वजह के किसी ने उल्टा-सीधा बोल दिया…

और उस पल… अंदर से गुस्सा भी आया…
और मन में ये भी चला—

‘माँ ललिता, ये मेरे पीछे ही क्यों पड़े हैं?’


At the end

मैंने भी उसे जवाब दे दिया…
लेकिन सच कहूँ,
मन में अभी भी चल रहा था कि—

चार बातें और सुनाऊँ…
ढूंढ-ढूंढ कर जवाब दूँ…
ताकि अगली बार वो बेवजह कुछ बोलने की हिम्मत ही ना करे…


लेकिन कल… के बाद एक बात बहुत गहराई से समझ आई—

No matter सामने वाला बिना मतलब के harsh words बोल रहा हो…
वो उसका violence है।

लेकिन अगर मैं भी उसी energy में जवाब देती हूँ,
तो वो violence मेरे अंदर भी activate हो जाता है…

और फिर पहली बार ऐसा लगा—

जो व्यक्ति किसी को hurt करता है,
वो खुद भी कहीं ना कहीं बहुत तकलीफ में होता है…

उसकी अपनी consciousness कितनी disturbed lower level होगी,
तभी वो ऐसे शब्द बाहर ला पा रहा है…


कभी-कभी गुरु कुछ कहते नहीं…
लेकिन उनकी उपस्थिति, उनकी आभा, उनकी ऊर्जा—
आपके भीतर चुपचाप बहुत कुछ बदल देती है…

और कल…
शायद उसी ऊर्जा के क्षेत्र में बैठकर…
मेरे अंदर भी एक शांत परिवर्तन हुआ

और वहीं बैठकर… बिना किसी effort के…
एक संकल्प अपने आप हो गया—

Be careful with what you speak.

और तब एक clarity आई—

मुझे हर बार prove नहीं करना है…

मुझे हर बार जीतना नहीं है…

मुझे बस अपनी चेतना को गिरने से बचाना है…

क्योंकि शब्द सिर्फ शब्द नहीं होते…
वो energy होते हैं…
जो या तो healing बन सकते हैं,
या फिर किसी के अंदर चोट।




कभी-कभी मुझे अपनी छोटी-सी गलती का भी एहसास हो जाता है
अंदर की आवाज़ तुरंत ट्रिगर करती है।

But

एक सवाल मन में हमेशा चलता है कि why


कुछ लोगों को अपनी गलती का एहसास कभी नहीं होता?


जो सालों तक किसी को मानसिक रूप से परेशान करते हैं,
और फिर भी …



Anyways

और अंत में बस यही भाव उठा—

सामने वाला क्या बोलता है,
वो उसका कर्म है…
लेकिन मैं क्या बोलती हूँ,
वो मेरा।

Lokah Samasta Sukhino Bhavantu…

सब सुखी रहें… सब शांति में रहें…


Ps
मैं देख रही हूँ कि मेरे पोस्ट के नीचे बहुत से लोग पूछ रहे हैं — “गुरु कौन?”

शायद मैंने यह मान लिया था कि आप समझ जाएंगे, लेकिन अब स्पष्ट करना ज़रूरी लगा।

मैं अपने चैनल पर कई बार यह Share कर चुकी हूँ कि
मेरी मेडिटेशन की शुरुआत
Art of Living
से हुई थी।

मेरी मेडिटेशन की यात्रा 2013 में शुरू हुई थी, जब मैंने पहली बार सुदर्शन क्रिया सीखी।
वहीं से मुझे पहली बार समझ आया कि मेडिटेशन वास्तव में होता क्या है।

और कल मुझे सौभाग्य मिला अपने गुरुदेव,
Sri Sri Ravi Shankar Ji से मिलने का जिन्हें हम सब प्यार से Gurudev कहते हैं… 🙏

Gurudev (Sri Sri Ravi Shankar )
ने राम मंदिर से जुड़े विवाद में भी मध्यस्थ (mediation) के रूप में प्रयास किए थे,
ताकि Peace के माध्यम से समाधान निकल सके।

उन्हें भारत सरकार द्वारा भारत रत्न , पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है,
और वे विश्वभर में शांति के लिए कार्य करते हुए
United Nations जैसे मंचों पर भी
World Peace Ambassador के रूप में जाने जाते हैं।





आपकी

रितिका दीदी

जय माँ कामाक्षी, जय माँ ललिताम्बिका 🙏🌸

3 days ago (edited) | [YT] | 116

Reetika Agarwal

पिछले कुछ दिनों से एक चीज़ मैं लगातार notice कर रही हूँ…
आप सबका प्यार ❤️

हर दिन…
किसी ना किसी का message आता है,
किसी ने order किया, किसी को book मिली…

ये धीरे-धीरे बढ़ता हुआ विश्वास… सच में बहुत खास है ✨



साथ ही, बहुत सारे comments भी आ रहे थे –
“दीदी, हमारी book अभी तक deliver नहीं हुई…”
“थोड़ा delay हो रहा है…” 📦

तो मैंने सोचा…
👉 चलो मैं ही order करके देखती हूँ

कि actually कितना time लग रहा है,
और experience कैसा है


✨ अब यहाँ समझने वाली बात है…

पहले जो delivery थी, वो publisher handle कर रहा था
इसलिए पूरा process थोड़ा slow हो रहा था



🎉 लेकिन अब बहुत बड़ी खुशखबरी है…

अब ये किताब Amazon Prime पर available है 🚀

👉 मतलब अब delivery और packaging दोनों Amazon Prime handle करेगा

👉 और आपको मिलेगा much faster delivery experience

तो अब आपको wait करने की उतनी tension नहीं होगी ❤️

🛒 Book अब उपलब्ध है

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📦: Unboxing moment



youtube.com/shorts/6SuuCP48Jm...



💬 अब आप बताइए… आपकी deliver हुई क्या?
कितने दिन लगे? comment में जरूर share करें 👇




🙏 दिल से धन्यवाद
हर उस व्यक्ति को जिसने इस किताब पर trust किया और order किया ❤️

6 days ago (edited) | [YT] | 29

Reetika Agarwal

चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं ✨इस नवरात्रि ललितांबिका की कृपा से मेरी पहली किताब शक्ति से शिव तक हिंदी भाषा में Amazon, Kindle पर उपलब्ध है।🙏

अब इंतज़ार खत्म हुआ....


आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके इसे खरीद सकते हैं 🙏

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यह पुस्तक अभी **अगले 48 घंटों के लिए Kindle Unlimited पर उपलब्ध है।**

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⏳ सिर्फ 48 घंटे — Available on Kindle Unlimited


⏳ यह अवसर सीमित समय के लिए है,




यदि आप समझना चाहते हैं कि इस पुस्तक में क्या है,
तो एक छोटा सा teaser sample यहाँ Share कर रही हूँ — यह आपकी अपेक्षाओं को सही दिशा देगा।


📖 PDF preview यहाँ पढ़ सकते हैं >>>

drive.google.com/file/d/1_gvua9UvaaMK1hKR72GDfF5s2…


शायद यह केवल एक पुस्तक न हो…
बल्कि आपकी अपनी खोज की शुरुआत हो।

ऊर्जा से चेतना तक,
मंत्र से मन तक,
शक्ति से शिव तक।


आपकी
रितिका दीदी
जय माँ कामाक्षी । जय माँ ललितांबिका 🌸🙏

2 weeks ago (edited) | [YT] | 292

Reetika Agarwal

भारत में आज लगभग 2.5 से 3 करोड़ बच्चे अनाथ या परित्यक्त हैं—यह संख्या कई देशों की पूरी आबादी से भी अधिक है।
इनमें से केवल 50–60% बच्चे ही किसी तरह स्कूल तक पहुँच पाते हैं, बाकी शिक्षा से पूरी तरह वंचित रह जाते हैं।
जो बच्चे स्कूल जाते भी हैं, उनमें से बड़ी संख्या बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती है।
यानी करोड़ों बच्चे आज भी किताब और कक्षा से दूर हैं।
यह सिर्फ एक आँकड़ा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य का सबसे बड़ा सवाल है।


📚 शिक्षा — एक देश की नींव

एक देश की असली ताकत उसकी सेना या अर्थव्यवस्था नहीं,
बल्कि उसकी शिक्षा होती है।

शिक्षा ही वह शक्ति है जो—

एक गरीब बच्चे को आत्मनिर्भर बनाती है

एक अनाथ बच्चे को पहचान देती है

और एक पूरे देश को विकास की राह पर ले जाती है

जब एक बच्चा पढ़ता है,
तो सिर्फ उसका जीवन नहीं बदलता…
उसके साथ उसका परिवार, समाज और देश भी आगे बढ़ता है।



🌱 हमारा छोटा सा प्रयास

आपमें से बहुत से लोग comment filter में देख रही कहते हैं—
"बुक का प्राइस
क्या होगा
हम खरीद पाएंगे या नहीं … लेकिन पढ़ना चाहते हैं…"

मेरी किताब को पढ़ने के लिए उत्सुक्ता और प्यार ये सिर्फ


मै कहूँगी कृपा है ललितांबिका की .....

मैं आपकी भावना समझती हूँ।

💭 एक सच्चाई — जो हमें सोचने पर मजबूर करती है….

लेकिन इसी के साथ एक और सच्चाई है—

आज हममे से बहुत लोग

किताबें खरीद सकते हैं…
ज्ञान तक पहुँच सकते हैं…

आज आप और हम यह पढ़ पा रहे हैं…

लेकिन भारत में ऐसे भी बच्चे हैं
जो "अ" से "अनार" भी नहीं पढ़ सकते।


कोई अम्बानी नहीं हूँ लेकिन ललिताम्बिका ने इतना दिया है की मै संतुष्ट हूँ ( contentment)


इसी सोच के साथ,
इस चैनल का एक संकल्प है—

✨ इस वर्ष की 100% Youtube Chanel Monetisation Income Education में जाएगी गरीब और अनाथ बच्चों की पढ़ाई के लिए



✨ इस किताब से होने वाला 100% प्रॉफिट भी शिक्षा में समर्पित होगा

🔥 एक मिशन — एक ज्योति

मैं कोई बड़ी संस्था नहीं हूँ…
बस एक छोटी सी ज्योति बनना चाहती हूँ।

लेकिन अगर यह ज्योति आप सबके साथ मिल जाए,
तो यह एक आंदोलन बन सकती है।

क्योंकि अंत में—

👉 पढ़ेगा भारत, तो बढ़ेगा भारत।


आपकी
रितिका दीदी
जय माँ कामाक्षी । जय माँ ललितांबिका 🌸🙏

2 weeks ago (edited) | [YT] | 65

Reetika Agarwal

यह मंदिर माँ ललिता का है, जो श्री श्री गुरुकुल के परिसर के अंदर स्थित है। इस बार मेरे meditation program के बाद, गुरुकुल से कुछ कार्य था, माँ ललिता और गुरु कृपा से मुझे गुरुकुल के भीतर जाने का अवसर मिला।

श्रीविद्या परंपरा में श्रीकुल की अधिष्ठात्री देवी माँ ललिता ही मानी जाती हैं, इसलिए इस गुरुकुल की आध्यात्मिक धुरी माँ ललिता की उपासना से ही जुड़ी हुई है।

जैसे ही मैंने गुरुकुल के परिसर में प्रवेश किया, सच कहूँ तो ऐसा लगा मानो मैं किसी दूसरी ही दुनिया में आ गई हूँ।

मैंने Meditation आश्रम की शांत और सुकून देने वाली वाइब्रेशन पहले भी महसूस की हैं, लेकिन गुरुकुल की वाइब्रेशन सच में beyond words है — शब्दों में उसे व्यक्त करना बहुत कठिन है।



वह वाइब्रेशन इतनी soothing थी soul के लिए, कि भीतर तक शांति उतरती हुई महसूस हो रही थी।

ऐसा लग रहा था जैसे उस ऊर्जा से उठने का मन ही नहीं कर रहा हो…

उस पल मन में एक ही भावना आई —
अगर इस धरती पर स्वर्ग जैसी कोई अनुभूति हो सकती है, तो शायद वही है..( vibrations of Peace ✌️)

जैसे ही परिसर में प्रवेश किया, सबसे पहले गणपति मंदिर के दर्शन हुए। मन में यही भाव आया कि गणपति के आशीर्वाद के बिना आगे कैसे बढ़ सकते हैं।

और उसके बाद सामने था माँ त्रिपुर सुंदरी का यह दिव्य मंदिर —
सच कहूँ, यह अनुभव सच में beyond words था। 🌸🙏

इस मंदिर की एक खासियत और भी है। यहाँ माँ के चार हाथ हैं और उनमें से एक हाथ अभय मुद्रा में है। यह देखकर मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ….

जब मैंने वहाँ पूछा कि ऐसा क्यों है, तो उन्होंने बताया कि यह त्रिपुर सुंदरी का पूर्ण स्वरूप है।

इस स्वरूप में माँ के एक हाथ काअभय मुद्रा में होना भी माना जाता है, जो अपने भक्तों को आशीर्वाद देता है।


सोचा यह सुंदर ज्ञान और अनुभव आप सभी के साथ भी साझा करूँ।

मंदिर में इसके बगल में माँ भुवनेश्वरी और राजराजेश्वरी की तस्वीरें भी स्थापित थीं।

मंदिर एक विशाल हॉल के भीतर स्थित है और वहाँ का वातावरण इतना शांत है कि कुछ समय वहाँ बैठते ही मन पूरी तरह स्थिर हो जाता है। ऐसा अनुभव होता है मानो उस स्थान पर साक्षात देवी की ऊर्जा विराजमान हो।

आप सभी भी इस पवित्र स्थान के दर्शन कीजिए।

इस गुरुकुल में लगभग 650 छात्र अध्ययन करते हैं, जहाँ उन्हें वेद और आगम की शिक्षा दी जाती है

Sri Sri Gurukul - Bengaluru tour video 👇🏻👇🏻

youtube.com/shorts/wiy0oXzeeU...


Website:

srisrigurukulam.bangaloreashram.org/

Google map

share.google/98Jmzf9AtlIFa3iez

2 weeks ago (edited) | [YT] | 130

Reetika Agarwal

पिछले कुछ समय से मैं आपके कमेंट्स का समय पर उत्तर नहीं दे पा रही हूँ, उसके लिए मैं आप सभी से क्षमा चाहती हूँ।
इन दिनों कुछ महत्वपूर्ण कार्यों में हूँ और साथ ही आपके लिए कुछ नए वीडियो भी तैयार हो रहे हैं। इसलिए थोड़ा धैर्य रखिए — जल्द ही वीडियो भी आएँगे और मैं फिर से आपके कमेंट्स पढ़कर उत्तर देने का प्रयास करूँगी।

इसी बीच एक छोटी सी प्रार्थना भी है।
आने वाली चैत्र नवरात्रि को बहुत अच्छे से साधना कीजिए।

आदि शंकराचार्य जी ने भी सौंदर्यलहरी में कहा है —

“भवानी त्वं दासे मयि वितर दृष्टिं सकरुणाम्
इति स्तोतुं वाञ्छन् कथयति भवानी त्वमिति यः।
तदैव त्वं तस्मै दिशसि निजसायुज्य पदवीं
मुकुन्द-ब्रह्मेन्द्र-स्फुट-मकुट-नीराजित-पदाम्॥”

अर्थ:
हे माँ भवानी! जो भक्त केवल इतना भी कह देता है —
“भवानी, मैं आपका दास हूँ, मुझ पर करुणा की दृष्टि कीजिए।”

और वह पूरी प्रार्थना भी नहीं कर पाता, केवल “भवानी त्वम्…” इतना ही बोल पाता है —
तो माँ इतनी करुणामयी हैं कि उसे सायुज्य मुक्ति तक प्रदान कर देती हैं।



अगर ललिता सहस्रनाम आता है तो उसका पाठ कीजिए।
अगर नहीं आता तो भी कोई बात नहीं — केवल माँ का नाम जपिए।

जो लोग दुर्गा सप्तशती पढ़ते हैं लेकिन संस्कृत नहीं आती, वे हिंदी में भी पढ़ सकते हैं।

https://youtu.be/bsuPE_4B3_w

देवी की साधना में सबसे महत्वपूर्ण भक्ति और समर्पण है।

इसी भाव को व्यक्त करने वाली मेरी सबसे प्रिय प्रार्थना भी है —

“न जानामि दानं न च ध्यानयोगं
न जानामि तन्त्रं न च स्तोत्रमन्त्रम्।
न जानामि पूजां न च न्यासयोगं
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥”

अर्थ:
हे माँ! मुझे न दान करना आता है,
न ध्यानयोग का ज्ञान है।
न मुझे तंत्र पता है,
न स्तोत्र और मंत्रों का ज्ञान है।

मुझे सही विधि से पूजा करना भी नहीं आता
और न ही न्यास आदि योग की जानकारी है।

हे माँ भवानी!
आप ही मेरी गति हैं,
आप ही मेरा सहारा हैं,
आप ही मेरी एकमात्र शरण हैं।


नवरात्रि के समय एक बहुत सामान्य प्रश्न बार-बार आता है — हमें ललिता सहस्रनाम करना चाहिए या दुर्गा सप्तशती?
नवरात्रि के दिन सीमित होते हैं, इसलिए इस विषय पर मैंने इस वीडियो में तर्क और सरल उदाहरणों के साथ विस्तार से समझाने का प्रयास किया है।

https://youtu.be/w0-q73WToiU?si=cpfVj...

अंततः निर्णय आपको स्वयं लेना होगा। शांत होकर अपने भीतर देखें कि माँ का कौन-सा स्वरूप आपको अधिक आकर्षित कर रहा है, किसकी ओर आपका मन स्वाभाविक रूप से खिंच रहा है।

हमारी चेतना के भीतर ही एक साक्षी होता है — जैसे चित्त का ‘चित्रगुप्त’ — वही हमें संकेत देता है कि हमारे लिए कौन-सा मार्ग उपयुक्त है।
इसलिए इसका अंतिम उत्तर मैं नहीं दे सकती, यह उत्तर आपको अपनी ही अंतरात्मा से मिलेगा।


नवरात्रि में जहाँ भी सामूहिक जप या साधना हो रही हो, यदि अवसर मिले तो उसमें अवश्य जुड़िए।
समूह में साधना करने से ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है।

उद्देश्य केवल एक है —
भक्ति में प्राण आ जाएँ, और माँ का नाम अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे।
..................................

थोड़ा धैर्य रखिए, जल्द ही नए वीडियो लेकर आ रही हूँ।

माँ की कृपा आप सभी पर बनी रहे। 🙏


Stay tuned.

आपकी रीतिका दीदी,
जय माँ कामाक्षी, जय माँ ललिताम्बिका। 🌸🙏

2 weeks ago (edited) | [YT] | 145

Reetika Agarwal

आज मन में एक अजीब सी हैरानी और कृतज्ञता (gratitude) का भाव है।

कुछ समय पहले भी मैंने इस डेटा का उल्लेख किया था, लेकिन आज जब इसे फिर से देखा तो मन में एक अलग ही तरह का चिंतन शुरू हो गया।

अपने YouTube चैनल के लिए रिसर्च करते समय मैंने देखा कि जहाँ हमारे इस छोटे से परिवार में लगभग 16,100 subscribers हैं, वहीं हर महीने 33,747 से अधिक लोग YouTube पर सीधे मेरा नाम “Reetika Agarwal” सर्च कर रहे हैं।
(Source: vidIQ)

अगर इसे YouTube analytics के दृष्टिकोण से देखें, तो सामान्यतः जब किसी चैनल की mid-size community होती है, तो उसके नाम की search volume आमतौर पर 5–10% के आसपास रहती है।

लेकिन इस मामले में अनुपात थोड़ा अलग दिख रहा है।
यह लगभग 2:1 का ratio है—यानी subscribers की संख्या की तुलना में searches लगभग दोगुनी हैं, और वह भी सिर्फ एक वर्ष के भीतर।

Analytics के दृष्टिकोण से इसका एक सरल अर्थ यह भी हो सकता है कि बहुत से लोग चैनल के बाहर से सीधे नाम सर्च करके कंटेंट तक पहुँच रहे हैं, जबकि उन्होंने अभी तक चैनल को subscribe नहीं किया है।

Another aspect - यह शायद एक संकेत भी हो सकता है कि Lalita Maa content से जुड़ा एक natural brand recall बन रहा है, जहाँ लोग किसी topic या discussion के संदर्भ में सीधे नाम सर्च करके content तक पहुँच रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ दो-तीन महीने पहले तक यह संख्या लगभग 10–12 हजार के आसपास थी, और अचानक पिछले कुछ महीनों में यह बढ़कर 33,000+ हो गई।

एक पल के लिए लगा कि शायद यह कोई तकनीकी गलती होगी। लेकिन जब दोबारा देखा तो मन अपने आप कई साल पीछे चला गया।



मुझे वो दौर याद आया, जब सालों पहले मैंने सब कुछ खो दिया था….मेरी जिंदगी में कुछ नहीं बचा था..

आज जब यह संख्या 33,000+ searches तक पहुँच गई है, उसी समय जीवन में कुछ और अप्रत्याशित अवसर भी सामने आ रहे हैं—
कई startup collaborations और funding proposals, और कुछ international meditation organisations की ओर से उनके corporate meditation programs को lead करने के प्रस्ताव भी मिल रहे हैं।

जब मैं इस startup funding की दौड़ और इन सभी अवसरों के बारे में गहराई से सोचती हूँ, तो अपने आप एक सवाल मन में उठता है।

हमारी मूलभूत ज़रूरतें तो किसी न किसी तरह पूरी हो ही जाती हैं।

लेकिन अगर उसी दौड़ में हम अपनी सेहत खो दें, अपना सुकून खो दें, तो फिर उस सफलता का अर्थ क्या रह जाता है?

इतिहास में हमने कई बड़े उद्यमियों और सम्राटों की कहानियाँ सुनी हैं—
अंत में सब खाली हाथ ही गए।


पिछले वर्ष मेरे जीवन में एक ऐसा समय भी आया
जब Multiple hospitalization और Major surgeries से गुजरना पड़ा।

हॉस्पिटल के कमरों में बैठकर
और patients को देखकर
एक बात बहुत गहराई से समझ में आई—

सिकंदर भी खाली हाथ गया।

तो फिर
मैं कौन हूँ?

जब अंत में सब कुछ यहीं रह जाना है,
तो शायद हमें यह भी याद रखना चाहिए कि

नाम, पहचान, searches, achievements —
ये सब क्षणिक हैं।

मेरी आप सभी से एक विनम्र प्रार्थना है:

• अपनी सेहत को प्राथमिकता दें: इस भाग-दौड़ में खुद को मत खोइये। यह शरीर ही है जो आपको इस जीवन का अनुभव कराता है।

• भीतर की यात्रा शुरू करें: भौतिक दुनिया से परे क्या है, उसे जानने की कोशिश करें। Near-Death Experiences (NDEs) के बारे में पढ़ें और अपनी आत्मा को समझें।

• Meditation को जीवन का हिस्सा बनाएं: कम से कम एक मेडिटेशन प्रैक्टिस ज़रूर अपनाएं। अंत में सिर्फ यही आंतरिक शांति आपके साथ रहेगी।

एक Spiritual seeker और रिसर्चर के तौर पर, मेरे सबसे मुश्किल वक्त में देवी ललिताम्बा की कृपा ही मेरी शक्ति बनी।

शायद इन्हीं अनुभवों और इस आंतरिक यात्रा ने मुझे लिखने के लिए प्रेरित किया।
इसीलिए इस चैत्र नवरात्रि मेरी “Devi Consciousness Series” की पहली पुस्तक आ रही है।

इसी भाव के साथ, मैं एक छोटी सी घोषणा करना चाहती हूँ। मेरी जो किताब इस चैत्र नवरात्रि पर आ रही है, उसका 100% प्रॉफिट (profit) गरीब बच्चों की शिक्षा (education) के लिए जाएगा।

मेरा मानना है कि एक शिक्षित बच्चा ही एक आत्मनिर्भर भारत की नींव रख सकता है।

अंत में बस इतना ही कहूँगी—
नाम में आखिर रखा ही क्या है?
क्या लेकर आए थे इस जग में, और क्या लेकर जाएँगे?
दो दिन की ज़िंदगी है, दो दिन का मेला।

Must listen - My Recommendation

क्या लेकर आए थे इस जग में,
https://www.youtube.com/watch?v=9VNI3...

मत कर माया को अहंकार

https://www.youtube.com/watch?v=SxAah...

#LifeLessons #Resilience #Meditation #HealthFirst #ReetikaAgarwal #SpiritualJourney #HumbleBeginnings

3 weeks ago (edited) | [YT] | 51

Reetika Agarwal

आज मैंने एक छोटी-सी लेकिन गहरी बात को बहुत ध्यान से observe किया।

सुबह मैंने सांभर, टमाटर की चटनी और पोंगल खाया — बिना प्याज-लहसुन का, सात्विक भोजन।
लेकिन सांभर में जो चटपटापन और खट्टापन था, वह थोड़ा अधिक था।

उस समय तो सब सामान्य लगा।

लेकिन जब मैं मेडिटेशन के लिए बैठी —

तो मन अत्यंत चंचल था।
बैठ ही नहीं पा रही थी।
विचार रुक नहीं रहे थे।
मेडिटेशन बिल्कुल नहीं लग रहा था।

मैं भीतर से थोड़ी परेशान भी हो गई —
“अभी तो सब ठीक था, फिर अचानक मन इतना अस्थिर क्यों हो गया?”



🌿 फिर मुझे एक बात समझ आई…

थोड़ा शांत होकर जब मैंने भीतर देखा,
तो मुझे realize हुआ —

आज मैंने जो भोजन किया,
वह पूरी तरह सात्विक प्रभाव वाला नहीं था।

सामग्री भले ही सात्विक थी,
लेकिन उसका स्वाद — खट्टा, चटपटा, तीखा —
उसमें हल्का राजसिक गुण अधिक था।

और तभी समझ आया —

राजस का स्वभाव है गति, उत्तेजना, चंचलता।
वही मेरे मन में दिखाई दे रहा था।

मन अचानक खराब नहीं हुआ था,
वह केवल उसी ऊर्जा को व्यक्त कर रहा था
जो मैंने भीतर डाली थी।






🌿 दोपहर का सत्र

दोपहर में भी बैठते समय भीतर हलचल थी।
विचार अब भी आ रहे थे।

लेकिन उसके बाद कुछ विशेष प्राणायाम करवाए गए —

जिन्हें दक्षिण भारत की अठारह सिद्ध ऋषि परंपरा से संबंधित बताया जाता है (He is regarded as one among the revered 18 Siddha sages of the South Indian tradition.)

(अठारह सिद्ध ऋषि परंपरा में प्रमुख नाम माने जाते हैं: अगस्त्य, नंदीदेवर, तिरुमूलर, भोगनाथर, कोंकणार, मच्छमुनि, गोरखनाथ/गोरक्कर, सत्तैमुनि, सुंदरानंदर, रामदेवर, कुधम्बै सिद्धर, करुवूरार, इडैक्कदर, कमलामुनि, वाल्मीकि, पतंजलि, धन्वंतरि और पाम्बट्टी सिद्धर। “सिद्ध” शब्द का अर्थ है — जिसने साधना द्वारा पूर्णता प्राप्त की हो। इस परंपरा का मूल आधार है: नाड़ी शुद्धि, प्राण संतुलन, शरीर को साधना का उपकरण मानना, और साक्षी भाव।)

उन प्राणायामों से श्वास की गति बदली गई।
फिर कुछ सरल योगिक क्रियाएँ करवाई गईं।

और उसके बाद जब मेडिटेशन के लिए बैठाया गया —

यहाँ मेडिटेशन के लिए बहुत पहले से एक मंत्र दिया जाता है —
एक व्यक्तिगत मंत्र।

वह मंत्र केवल जप के लिए नहीं होता।
वह वास्तव में धारणा का कार्य करता है।

जब मन भटकता है,
तो वही मंत्र उसे एक केंद्र देता है।
वही मंत्र चित्त को एक दिशा देता है।

पहले प्राण संतुलित किए गए,
फिर उस मंत्र के माध्यम से धारणा स्थापित की गई।

और उसके बाद जब मेडिटेशन के लिए बैठाया गया —

तो कुछ अलग ही हुआ।

श्वास गहरी थी,
प्राण स्थिर थे,
और चेतना सहज रूप से भीतर उतरती चली गई।

जैसे मेडिटेशन “किया” नहीं गया —
बल्कि स्वयं घटित हुआ।

तभी समझ आया —

मंत्र धारणा बनाता है,
धारणा से मेडिटेशन जन्म लेता है,
और मेडिटेशन परिपक्व होकर समाधि की दिशा खोलता है।



🌿 गहरी समझ

तभी एक बहुत गहरी बात समझ में आई —



🌺 Lalita Sahasranama और धारणा

Lalita Sahasranama केवल स्तुति नहीं है।
यह एक गहरी धारणा है — मेडिटेशन में प्रवेश का केंद्र।

🌺 ललिता सहस्रनाम एक धारणा कैसे है?

और पहले ध्यान श्लोक क्यों दिया जाता है?

ललिता सहस्रनाम केवल देवी के हजार नामों का पाठ नहीं है, बल्कि यह मन को एक दिव्य केंद्र पर स्थिर करने की प्रक्रिया है। योग के अनुसार धारणा का अर्थ है — चित्त को एक बिंदु पर बांध देना।

सहस्रनाम का प्रत्येक नाम मन को बार-बार उसी एक तत्त्व, उसी एक चेतना में लौटाता है।



महर्षि Agastya ने ललिता सहस्रनाम का श्रवण दिव्य ज्ञान के रूप में प्राप्त किया।

वे प्राण, नाड़ी और चेतना के गहरे ज्ञाता थे।

जब महर्षि Agastya समाधि की अवस्था में स्थित हुए, तब उनकी चेतना इतनी निर्मल और अंतर्मुख थी कि वे परा वाणी को ग्रहण करने योग्य बने। उसी परा स्तर पर जो दिव्य वाणी प्रकट हुई, उसे उन्होंने श्रुति के रूप में ग्रहण किया और वही आगे चलकर Lalita Sahasranama के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।

श्रीविद्या परंपरा में कहा गया है कि यह ज्ञान उन्हें भगवान Hayagriva से प्राप्त हुआ, जैसा कि Brahmanda Purana में वर्णित है।

यह कोई “डाउनलोड” नहीं था — यह श्रुति थी।
जब प्राण संतुलित हों, मन निर्मल हो और चेतना समाधि के निकट हो, तभी परा वाणी का अवतरण संभव होता है। 🌺


🌺 अंतिम समझ

हम अभी धारणा पर कार्य कर रहे हैं।
लेकिन उद्देश्य समाधि है।

इसीलिए ललिता सहस्रनाम में देवी के नाम आते हैं — “अन्तर्मुख-समाराध्या” और “ध्यान-ध्यातृ-ध्येय-रूपा”।
क्योंकि देवी बाहर खोजने की वस्तु नहीं, भीतर अनुभव करने की चेतना है

इसीलिए पहले ध्यान श्लोक दिया जाता है — ताकि साधक को स्पष्ट हो कि किस स्वरूप पर मन को टिकाना है।

जब स्वरूप स्पष्ट होता है, तब जप केवल शब्द नहीं रहता, वह धारणा बनता है; और वही धारणा गहराकर मेडिटेशन में प्रवेश कराती है।

जब प्राण संतुलित हों,
नाड़ी शुद्ध हो,
चित्त स्थिर हो —

तब नाम केवल शब्द नहीं रहते,
वे अनुभव बन जाते हैं।

जब साधक अंतर्मुख होता है, प्राण संतुलित करता है और मन को एक बिंदु पर स्थिर करता है, तब वही देवी ध्यान बन जाती हैं।
वह ही ध्यान करने वाला है, वही ध्यान का विषय है — और अंततः वही समाधि की अवस्था है। 🌺

1 month ago (edited) | [YT] | 143