Career Astrologer | Author | Devi Consciousness Practitioner
I’m Reetika Agarwal — a Career Astrologer and a seeker of Devi Consciousness, walking this path since childhood.
I bring with me 15 years of corporate experience, which helps me bridge practical career challenges with deeper spiritual understanding.
Here, you will explore
✨ Career Astrology & life path clarity
✨ Karma decoding & decision-making guidance
✨ Devi Consciousness & mantra wisdom
✨ Conscious manifestation & inner alignment
If you are feeling stuck in your career, purpose, or direction, this space is designed to help you move from confusion to clarity
My work combines astrology (outer guidance) with Devi Consciousness (inner transformation) — so you grow both professionally and spiritually.
🔍 Disclaimer:
This channel is solely for educational and spiritual-consciousness exploration. The content does not constitute medical, legal or mental-health advice, nor is it intended to offend anyone’s religious sentiments
Reetika Agarwal
ललितोपाख्यान में एक कथा आती है —
कहते हैं, दुर्वासा ऋषि श्री की उपासना करके उठे थे।
उस साधना के पश्चात उन्हें देवी की कृपा से एक माला प्राप्त हुई।
दुर्वासा ऋषि वह माला लेकर इंद्र के पास पहुँचे और आशीर्वाद स्वरूप उन्हें भेंट कर दी।
लेकिन इंद्र उस माला का महत्व समझ नहीं पाए।
उन्होंने उस दिव्य माला को आदरपूर्वक धारण करने के बजाय ऐरावत हाथी के गले में डाल दिया।
कहते हैं, ऐरावत ने भी उस माला के महत्व को नहीं समझा और उसे सूँड़ से नीचे गिराकर पैरों तले रौंद दिया।
यहीं से इंद्र के जीवन में श्री का क्षय आरंभ हुआ।
यहीं से आगे भण्डासुर के जन्म और माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी के प्राकट्य की अद्भुत कथा भी प्रारंभ होती है… 🌸
कैसे अधर्म बढ़ा, कैसे देवताओं ने प्रार्थना की,
और कैसे माँ ललिता का प्राकट्य हुआ —
यह पूरी कथा फिर कभी ललितोपाख्यान के माध्यम से विस्तार से Share करूँगी।
कभी-कभी शास्त्रों की ये कथाएँ केवल पुरानी कहानियाँ नहीं होतीं…
वे हमारे अपने जीवन में संकेत बनकर उतरती हैं
और हमें याद दिलाती हैं कि कृपा, प्रसाद, गुरु और साधना का सम्मान कितना आवश्यक है।
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आज शुक्रवार का दिन षष्ठी (Shashthi) सो सुब्रमण्यम होमम और श्रीसूक्तम् का परायण चल रहा था।
गणपति मंदिर में मंत्रों की ध्वनि गूँज रही थी।
और दूसरी ओर यज्ञशाला में हम गोपाल हवन के लिए बैठे थे।
गुरु गणपति आवाहन हुआ मंत्र द्वारा
यज्ञाहुति के लिए तब तक लिए संकल्प लिया जा चूका था
तभी आचार्य जी के पास फोन आया —
“गुरुदेव दर्शन देने आए हैं।”
आचार्य जी ने तुरंत कहा —
“आप पहले गुरुदेव के दर्शन कर आइए। यह बहुत शुभ संकेत है… फिर हम आपकी यज्ञ पूर्ण करवाएँगे।”
जहाँ हवन और कृष्ण साधना के लिए बैठे थे- ,यज्ञशाला वह स्थान गुरुकुल के गणपति मंदिर से थोड़ी दूरी पर था।
गणपति मंदिर दूसरी ओर था।
मन पूरी तरह शांत था — ऐसा नहीं कह सकती।
लेकिन भीतर एक अनोखी-सी खुशी, एक उत्सुकता, एक प्रतीक्षा थी…
जब गुरुदेव सामने आए, उन्होंने मेरी तरफ देखा…
और फिर बहुत ही प्रेम से पूछा —
“How are you?”
इतनी सहजता… इतनी मिठास…
कि उस क्षण जैसे सारे शब्द कहीं रुक गए।
कुछ बोल ही नहीं पाई।
बस इतना ही निकल पाया —
“आपका आशीर्वाद है…”
तभी गुरुदेव ने देवी पर चढ़ाई गई माला,
जो उनके साथ खड़े सेवक थाली में लिए हुए थे,
अपने हाथों से उठाकर मेरे गले में डाल दी।
और शायद…
श्रीसूक्तम् की साधना के बाद यदि गुरु अपने हाथों से माला पहनाएँ,
तो एक शिष्य के लिए उससे बड़ा "श्री " क्या हो सकता है? 🌸
उस क्षण भीतर अचानक वही ललितोपाख्यान की कथा जाग गई।
क्योंकि कभी-कभी गुरु द्वारा दी गई एक साधारण-सी माला भी केवल फूल नहीं होती…
फिर मैं वापस कृष्ण साधना के लिए लौट आई।
वहाँ बैठे-बैठे मेरी दृष्टि बार-बार उन तीन कलशों पर जा रही थी,
जो पूजा में स्थापित किए गए थे।
अष्टधा प्रकृति और कलश स्थापना का जो कॉन्सेप्ट है, उसके बारे में मुझे थोड़ी समझ थी। सामान्यतः नवरात्रि आदि में एक ही कलश स्थापित होते देखा था।
लेकिन south पूजाओं में मैंने तीन कलश स्थापित होते हुए देखे, इसलिए मन में जिज्ञासा हुई कि इसके पीछे का आध्यात्मिक और शास्त्रीय कारण क्या है।
सोचा इसकी भी स्पष्टता ले लूँ।
मन में जिज्ञासा उठी, तो मैंने पंडित जी से पूछ ही लिया —
“ये तीन कलश क्यों रखे जाते हैं?”
उन्होंने बहुत सुंदर उत्तर दिया —
“इन तीन कलशों में एक गणपति जी का होता है,
एक वरुण देव का…
असल में “कलश” केवल पानी का पात्र नहीं माना जाता। वैदिक दृष्टि में वह चेतना, प्राण और दिव्य ऊर्जा का पात्र होता है।
और जल के अधिष्ठाता देवता माने जाते हैं — Varuna।
ये दोनों आवाहन निश्चित रूप से हर यज्ञ से पहले किये जाते
और तीसरा इष्ट देव का होता है...जो बीच में रखा है
जैसे आज इस साधना में भगवान कृष्ण का आवाहन किया जा रहा है,
तो यह तीसरा कलश भगवान कृष्ण का है।
क्योंकि सनातन परंपरा में हर वस्तु केवल एक वस्तु नहीं होती…
हर स्थापना के पीछे एक चेतना, एक तत्त्व और एक विज्ञान छिपा होता है।
पूरी श्रद्धा के साथ होमम् सम्पन्न हुआ।
फिर जब आश्रम से बाहर निकल रही थी, तभी यह पंक्ति सामने लिखी दिखी —
“जो काम प्रयत्न से संभव नहीं होता,
वो प्रार्थना से संभव हो जाता है।”
और सच कहूँ… उस क्षण लगा जैसे आज के पूरे अनुभव का सार यही था।
……
यह बात उन सभी लोगों के साथ Share करने का मन हुआ,
जैसे मुझे इस quote ने याद दिलाया वैसे आपपको भी याद दिला देती .....
कई बार जीवन के कुछ द्वार प्रयास से नहीं खुल पाते,
वे केवल प्रार्थना से खुलते हैं। 🌸
आपकी,
रीतिका दीदी
जय माँ कामाक्षी, जय माँ ललितांबिका 🌸🙏
1 day ago (edited) | [YT] | 80
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Reetika Agarwal
आप अक्सर मुझसे पूछते हैं—
“रीतिका दीदी, गुरु कैसे ढूंढें? आप बता दीजिए…”
कभी पूछते हैं—
👉 “क्या इस श्रीविद्या कोर्स में रजिस्टर कर लूँ?”
👉 “ये गुरु सही होंगे?”
👉 “क्या यह संस्था सही सिखाएगी?”
सच तो यह है कि हम में से अधिकतर लोग एक आसान रास्ता ढूंढते हैं—जहाँ कोई हमारे लिए निर्णय ले ले, ताकि गलत होने पर हम जिम्मेदारी किसी और पर डाल सकें।
इसीलिए मैं हमेशा कहती हूँ:
✅ आपका रास्ता, आपका निर्णय।
✅ खुद को इतना सक्षम बनाइए कि आप सही और गलत के बीच का भेद पहचान सकें।
🌿 कलियुग में गुरु-तत्त्व: आडंबर बनाम वास्तविकता
कलियुग के इस समय में, यदि कोई स्वयं को 'गुरु' घोषित करता है, तो वहां मानवीय गुणों (Human traits) और सीमाओं का मिलना स्वाभाविक है।
मैं हमेशा एक व्यावहारिक (practical) बात करती हूँ—कृपया बाहरी आडंबरों और मार्केटिंग प्रोपेगैंडा के जाल में न फंसें।
अपनी समझ और विवेक का उपयोग स्वयं करें।
🔍 आध्यात्मिक गुरु का वास्तविक अर्थ समझिए - 🌿 गुरु और 'आध्यात्मिक गुरु' का सूक्ष्म अंतर
संस्कृत में “गु” का अर्थ है अंधकार और “रु” का अर्थ है उसका नाश करने वाला।
तकनीकी रूप से देखें तो, जिसने भी आपके किसी विषय के प्रति अज्ञान को मिटाया, वह आपका गुरु है।
भाषा का गुरु: यदि आप कोई शास्त्र पढ़ रहे हैं और भाषा के 'Barrier' (बाधा) की वजह से उसे समझ नहीं पा रहे, तो जो व्यक्ति आपको वह भाषा सिखाता है—ताकि आप उस बाधा को पार कर सकें—वह उस विषय का गुरु है।
लेकिन जब बात 'आध्यात्मिक गुरु' (Spiritual Guru) की आती है, तो परिभाषा और गहरी हो जाती है:
विषय का गुरु आपको 'सूचना' (Information) देता है, लेकिन आध्यात्मिक गुरु आपको 'रूपांतरण' (Transformation) देता है।
- सांसारिक गुरु: वह है जो आपकी बुद्धि को प्रशिक्षित (Train) करता है।
- आध्यात्मिक गुरु: वह है जो आपकी चेतना (Consciousness) को जगाता है।
आध्यात्मिक गुरु-तत्त्व: आडंबर बनाम वास्तविकता
गुरु कौन है और कौन नहीं?
गुरु वह नहीं है जो:
👉 केवल किसी किताब को पढ़कर उसे ट्रांसलेट कर सुना दे
👉 चार चमत्कार दिखाकर आपको प्रभावित कर दे।
👉 आपके मन की बात पढ़ ले।
👉 आपके कान में कोई मंत्र फूंक दे।
👉 या आपको कुछ तंत्र-कर्मकांड सिखा दे।
यह सब केवल बाहरी क्रियाएँ हैं। असली गुरु वह है जो आपकी चेतना को जगा दे। CONSCIOUSNESS
कुछ महान आत्माएं और संत, जिनकी वाणी और जीवन से मैं स्वयं प्रेरणा लेती हूँ और जिन्हें सुनती हूँ:
🌸 रामकृष्ण परमहंस: जिनकी सरलता में ही साक्षात ईश्वरीय दर्शन थे।
🌸 रमण महर्षि: जिन्होंने मौन और आत्म-खोज (Self-enquiry) का मार्ग दिखाया।
🌸 संत कबीर: जिन्होंने आडंबरों पर प्रहार किया और सहज साधना की बात कही।
वृन्दावन के सरल और निष्काम संत: जिनकी भक्ति में कोई प्रदर्शन नहीं, केवल समर्पण है।
🌿 गृहस्थ जीवन और सेवा का आदर्श
जब हम गुरु-तत्त्व की बात करते हैं, तो हमें उन विभूतियों को देखना चाहिए जिन्होंने कभी खुद को 'गुरु' नहीं कहा, लेकिन उनका पूरा जीवन एक मार्गदर्शन बन गया। जैसे:
🌸 भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार (गीताप्रेस, गोरखपुर):
जिन्होंने अपना पूरा जीवन व्यवसाय और सेवा में बिताया, लेकिन उनकी आध्यात्मिक गहराई ऐसी थी कि बड़े-बड़े संत उनका सम्मान करते थे। उन्होंने कभी कोई 'गद्दी' नहीं बनाई, कोई आडंबर नहीं किया, बल्कि गीताप्रेस के माध्यम से घर-घर तक सनातन धर्म का शुद्ध ज्ञान पहुँचाया। वे इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि बिना 'गुरु' कहलाए भी, आप लाखों लोगों के जीवन में प्रकाश ला सकते हैं।
🌿 इसीलिए एक बात स्पष्ट कहती हूँ…
जब आप मुझसे किसी संस्था या गुरु का नाम लेकर पूछते हैं— “दीदी, क्या मैं यहाँ रजिस्टर कर लूँ?” —तो संभव है कि मैं सीधा “हाँ” या “ना” न कहूँ।
मैंने इस पोस्ट में अपनी अलकेमिस्ट की यात्रा share की है
youtube.com/post/UgkxvVnYsnLt0ojZadtJoJBmVi0gIg97J…
मैं नहीं चाहती कि मेरे एक शब्द के कारण किसी 'कर्म-बंधन' में बंधें।
यह रास्ता आपका है, इसलिए यह निर्णय भी पूरी तरह आपकी अपनी चेतना का होना चाहिए।
🌸 जब आप कहते हैं— "दीदी, आप ही हमारी गुरु बन जाइए..."
तो यह ये बात बहुत स्पष्ट है की आप आध्यात्मिक गुरु की बात कर रहे
अक्सर आपके ऐसे संदेश भी आते हैं कि—
"ललिता सहस्रनाम पढ़ते समय हमने दिल से आपको ही गुरु मान लिया है, आप ही हमारा हाथ थाम लीजिए।"
आपके इस प्रेम और विश्वास के लिए मैं नतमस्तक हूँ, लेकिन मैं बहुत विनम्रता से एक बात कहना चाहती हूँ—मेरा उद्देश्य आपको 'मुझसे' जोड़ना नहीं, बल्कि आपको 'ललिता माँ' से जोड़ना है।
मैं पिछले 13 वर्षों से इस यात्रा में हूँ। बहुत कुछ सीखा है और आज भी सीख रही हूँ। यदि आप आज भी मुझसे पूछें कि मैं कौन हूँ, तो मैं मैं तो बस एक साधारण इंसान हूँ, ।
अभी स्वयं पर बहुत कार्य करना बाकी है....
आध्यात्म की इस यात्रा में मैं आपकी सहयात्री (Fellow Traveler) हो सकती हूँ, आपकी बड़ी बहन हो सकती हूँ,
गायत्री और देवगुरु बृहस्पति की कृपा से ज्ञान मिला ..... मैं बस वही आपसे Share करती हूँ ताकि आप स्वयं इतने सक्षम बन सकें कि अपने जीवन के निर्णय खुद ले सकें।
💫 समर्पण (Surrender): डर या प्रेम?
एक बार आँखें बंद करके इस गीत को जरूर सुनिए, ताकि आप महसूस कर सकें कि एक शिष्य का अपने गुरु के प्रति समर्पण क्या होता है:
🔗 https://www.youtube.com/watch?v=t5W9B...
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और एक बात हमेशा याद रखिये ....
समर्पण कोई मजबूरी नहीं है और न ही यह किसी दबाव में लिया जाता है। समर्पण दिल की वह अवस्था है जहाँ बिना शर्त, बिना डर के भीतर से भाव उठे
अगर कोई डर, गिल्ट (Guilt) या मानसिक दबाव बनाकर आपको झुकाने की कोशिश करे, तो वह अध्यात्म नहीं, नियंत्रण (Control) है।
🔍 एक छोटा सा आत्म-चिंतन
अंत में बस इतना ही: यदि कोई स्वयं को "आध्यात्मिक गुरु" घोषित करता है, या कहता की बनाया गया तो उसकी बातों को केवल सुनें नहीं—
उन्हें अपनी Logic की कसौटी पर भी परखें।
जब हम गुरु-तत्त्व को समझना चाहते हैं, तो केवल किताबी सिद्धांतों को न देखें।
किसी को भी सुनते समय खुद से यह सवाल ज़रूर पूछें:
यह व्यक्ति किस चेतना से बात कर रहा है?
क्या उसकी वाणी 'परा वाणी' (गहरी आध्यात्मिक चेतना) से निकल रही है?
क्या उसकी पर्सनालिटी में वह वास्तविक ठहराव और शांति है, जो शब्दों से परे महसूस होती है?
उनकी वाणी, उनके आचरण और उनकी उपस्थिति (Presence) को महसूस करें। आध्यात्मिक गहराई शब्दों में नहीं, बल्कि चेतना में होती है।
उत्तर आपको आपके भीतर ही मिल जाएगा। 🌸
आपकी,
रीतिका दीदी
जय माँ कामाक्षी, जय माँ ललितांबिका 🌸🙏
4 days ago (edited) | [YT] | 82
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Reetika Agarwal
दीदी… मैं क्या करूँ?” सरकारी नौकरी की तैयारी करूँ? प्राइवेट जॉब करूँ?आईटी जॉब करूँ… या स्टार्टअप करूँ?“मैं जॉब से थक गया हूँ… इसलिए बिज़नेस करना चाहता हूँ…”
ये सिर्फ सवाल नहीं है…
ये हर उस इंसान की उलझन है
जो सही करियर चुनना चाहता है,
लेकिन खुद को समझ नहीं पाता।
कई बार समस्या ये नहीं होती कि options ज़्यादा हैं…
समस्या ये होती है कि
👉 हम खुद को clear नहीं होते।
मैं भी इसी जगह खड़ी थी।
मैंने 3 स्टार्टअप किए थे…
और ये काफी समय पहले की बात है।
मेरा बिज़नेस कई साल तक लगातार नुकसान में चल रहा था।
और मैं रोज़ यही सोचती थी —
“रुकूँ… या छोड़ दूँ?”
फिर एक ज्योतिष से अचानक ही मुलकात हो गयी।। कोई प्लानिंग नहीं थी
उन्होंने मेरा हाथ और चेहरा देखा…
और सीधे कहा:
“ बिज़नेस छोड़ दो।
तुम स्पिरिचुअल टीचिंग और कंसल्टिंग जैसे career के लिए बनी हो।
सच बताऊँ?
मुझे उनकी बात सुनकर हँसी आ गई।
क्योंकि उस समय मेरे अंदर एक ही पहचान थी —
👉 “मैं तो बिज़नेस वुमन हूँ…”
तो ये रास्ता मेरा कैसे हो सकता है?
उन्होंने एक और बात कही जो आज भी याद है:
“तुम्हारा माथा बृहस्पति का है…
और तुम पर बुध की कृपा है।”
उन्होंने बहुत कुछ समझाया…
लेकिन मैंने उनकी बात नहीं मानी।
और घर आकर बहुत हसी की ये कैसा अटपटा करियर मेरे लिए बता रहा
जिससे दुर दूर तक कोई Relation नहीं
उसके बाद भी कई astrologers मिले…
सबने अलग-अलग तरीके से वही बात कही।
लेकिन मैं नहीं मानी।
क्यों?
👉 क्योंकि हम सच नहीं सुनते…
👉 हम वही सुनते हैं जो हम सुनना चाहते हैं।
और सच ये है —
मुझे बिज़नेस नहीं…
उसके पीछे की “freedom” चाहिए थी।
मेरा स्वभाव स्वतंत्र है.... तो नौकरी में मै वापस जाना नहीं चाहती थी
और ज्योतिष ने जो career बताया उससे दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं था
फिर ज़िंदगी ने अपने तरीके से सिखाया।
ऐसी परिस्थितियाँ आईं कि मुझे वो बिज़नेस छोड़ना ही पड़ा।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…
मैंने फिर नए बिज़नेस शुरू किए…
और उन्हें भी नुकसान में बेचा।
आज मैं ये बात पूरी ईमानदारी से मानती हूँ —
👉 गलतियाँ मेरी थीं।
और इसे स्वीकार करने में मुझे कोई शर्म नहीं है।
जब मैंने बाद में अपना SWOT analysis किया…
तो एक बहुत बड़ी सच्चाई सामने आई —
👉 मैंने अपने असली skill set को पहचाना ही नहीं था।
जो बात एक ज्योतिषी ने पहली बार में समझ ली थी…
उसे समझने में मुझे सालों लग गए।
हम बाहर opportunities ढूँढते रहते हैं…
लेकिन असली clarity अंदर से आती है —
👉 आप किस काम के लिए बने हैं।
मैंने 15 साल का कॉर्पोरेट करियर बनाया —
क्लाइंट सर्विसिंग से लेकर
मीडिया प्लानिंग,
फिर क्लाइंट साइड मैनेजमेंट और कंसल्टिंग तक।
और साथ में 3 स्टार्टअप भी किए।
लेकिन अंदर से एक आवाज़ हमेशा आती थी —
👉 “मुझे स्वतंत्र होकर काम करना है।”
आज समझ आता है —
👉बिज़नेस करना ही freedom का एकमात्र रास्ता नहीं होता।
मैं यहाँ भाग्यवादी बनने की बात नहीं कर रही…
मैं बात कर रही हूँ —
👉 जागरूक और सही निर्णय लेने की।
अगर मुझे पहले ही अपने स्वभाव और strengths की clarity होती…
तो शायद मैं इतने साल confusion में नहीं बिताती।
ऐसा समय आया जब भगवती के कुछ संकेतों से मैंने यह चैनल शुरू किया, आज से तीन साल पहले।
उसी के साथ, “मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है?” इस प्रश्न का उत्तर खोजते हुए मैंने ज्योतिष पढ़ना और सीखना शुरू किया।
इसी खोज में मैंने ज्योतिष सीखी…
किताबो को जितना पढ़ और रिसर्च कर सकती किया इन 4-5 सालो में
और जो समझा, अनुभव किया…
उसे आपके लिए एक किताब में लेकर आ रही हूँ।
📘 Astro Career Code — Coming Soon
ये किताब इसलिए है —
👉 ताकि आप वो गलती न करें जो मैंने की
👉 ताकि आप दूसरों को देखकर करियर न चुनें
👉 बल्कि अपने लिए सही रास्ता समझकर चुनें
अगर आप भी उस जगह पर हैं जहाँ
आपको समझ नहीं आ रहा — “मुझे करना क्या है?”
तो ये Book …
शायद आपके लिए ही है।
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और एक खुशखबरी… 🌸
इस अक्टूबर, शारदीय नवरात्रि से
मैं अपनी Astrology Consulting शुरू करने जा रही हूँ।
अभी मैं थोड़ा सा व्यस्त हूँ —
ललिता सहस्रनाम को पूर्ण करने
और कुछ महत्वपूर्ण किताबें लिखने में।
इसीलिए इस कार्य को थोड़ा विलंब दिया है।
लेकिन बहुत जल्द…
हम इस यात्रा में साथ चलेंगे। 🌿
आपकी,
रीतिका दीदी
जय माँ कामाक्षी, जय माँ ललितांबिका 🌸🙏
4 days ago (edited) | [YT] | 32
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Reetika Agarwal
नारायण सेवा से जुड़ा एक Miracle - personal Experience आपके साथ Share करना चाहती हूँ।
लगभग पाँच साल पहले, मैंने अपना नया बिज़नेस शुरू किया था—पूरी तरह bootstrapped।
मशीनरी, स्टॉक और इंफ्रास्ट्रक्चर—सब कुछ अपनी मेहनत से खड़ा किया था।
उसी समय अचानक Amazon के सर्वर में एक तकनीकी गड़बड़ी हुई…
और मेरी वेबसाइट का बिल, जो आमतौर पर ₹2000 महीना आता था,
सीधा ₹1,00,000 हो गया।
उस समय लॉकडाउन चल रहा था, ई-कॉमर्स ऑपरेशन्स बंद थे…
और एक नए बिज़नेस के लिए यह झटका था।
लेकिन उस पूरे समय में एक चीज़ मैंने नहीं छोड़ी—
नारायण सेवा।
👉 इस पूरे अनुभव को मैंने इस वीडियो में विस्तार से शेयर किया है—
https://www.youtube.com/watch?v=D-29y...
………..
आज भी हमारे देश में ऐसे अनेक बच्चे हैं,
जिन्हें basic education तक उपलब्ध नहीं है।
इसी भावना के साथ, मैंने एक छोटा-सा संकल्प लिया है—
इस वर्ष मेरे YouTube चैनल और मेरी पुस्तकों से जो भी profit होगा,
उसका 100% बच्चों की शिक्षा के लिए donate कर रही हूँ।
मैंने अपनी contribution की receipt भी यहाँ साझा की है—
ताकि यह केवल शब्द न लगे…..
कभी-कभी हम सोचते हैं—
“मैं अकेला क्या फर्क ला सकता हूँ?”
लेकिन सच्चाई यह है—
छोटे-छोटे प्रयास ही मिलकर बड़ा परिवर्तन बनाते हैं।
अगर आप भी अपने स्तर पर कुछ कर सकते हैं,
तो ज़रूर कीजिए 🙏
याद रखिए—कोई भी amount छोटा नहीं होता।
ज़रूरी नहीं कि आप वहीं सेवा करें जहाँ मैं कर रही हूँ…
विश्वास को समय लगता है।
लेकिन शुरुआत कहीं से भी की जा सकती है।
बस एक कदम उठाइए।
भारत में लगभग 30 मिलियन (3 करोड़) अनाथ बच्चे हैं।
मैं हर किसी की मदद नहीं कर सकती, लेकिन हाँ — हर कोई किसी न किसी की मदद ज़रूर कर सकता है।
अगर यह एक छोटी सी पोस्ट भी किसी एक बच्चे की मदद कर सके, तो मेरे लिए यह बहुत बड़ी गोविंद रूपी सेवा होगी।
.............................................
अगर कभी मन में यह विचार आए कि
“धन जा रहा है…”
तो बस एक बार अपना दृष्टिकोण बदलिए।
यह ब्रह्मांड एक अत्यंत उर्वर भूमि (fertile land) है।
आप जो भी इसमें बोते हैं—भाव, कर्म या सेवा—
वह कई गुना होकर आपके पास लौटता है…
कभी दुआओं के रूप में,
कभी अवसरों के रूप में,
और कभी एक अदृश्य सहारे की तरह।
इस पूरी पोस्ट को लिखने का मेरा उद्देश्य सिर्फ एक ही है
अगर हम उस माँ ललितांबिका के सामने हाथ फैलाकर अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं…
तो हमें देना भी सीखना होगा।
भगवती से मांग रहे हैं… तो एक हाथ से मांग रहे हैं तो दूसरे हाथ से देना भी आना चाहिए।
तुम्हें यही बात बड़ी-बड़ी Law of Attraction और Manifestation की क्लासेस में सिखाई जाती है - Using Terminology like ….Energy Exchange - Abundance Mindset etc etc
जिसे मैं यहाँ बिना किसी Fees के सरल तरीके से समझा रही हूँ।
“जिस दिन आप देना सीख जाते हैं, उसी दिन ब्रह्मांड आपको देना शुरू कर देता है।”
When YOU support Nature - Nature Support YOU
क्योंकि ललिताम्बा ही वह मूल प्रकृति है।
आपकी,
रीतिका दीदी
जय माँ कामाक्षी, जय माँ ललितांबिका 🌸🙏
2 weeks ago (edited) | [YT] | 75
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Reetika Agarwal
कल जगदगुरु शंकराचार्य की जयंती थी।
इस उपलक्ष्य में गुरुकुल में चारों वेदों का परायण चल रहा था…
जब भी मैं गुरुकुल जाती हूँ,
एक अलग ही अनुभव होता है…
“Different Dimension ” शब्द शायद सही नहीं है,
पर जो महसूस होता है, उसे शब्दों में बाँधना आसान भी नहीं।
इतनी लाइटनेस…
इतनी हल्की ऊर्जा…
वैसा अनुभव किसी कोने में भी नहीं होता,
जैसा गुरुकुल के उस वातावरण में होता है।
कल जब वेदोच्चारण हो रहा था,
सामवेद के सूक्त का सामूहिक पठन चल रहा था।
उसी सूक्त को मैं पहचानती थी,
क्योंकि वह हमारे मेडिटेशन प्रोग्राम में भी part है।
लेकिन उससे पहले
जो भी वेद पाठ हो रहा था—
मैं उसे बिल्कुल नहीं जानती थी…
न शब्द, न अर्थ…
वेद पाठ सुनकर हर बार एक अजीब सा भाव आता है…
जैसे ये स्वर पहले भी सुने हैं,
और दिल के किसी कोने से
एक आवाज़ बार-बार उठ रही थी—
“मैं इसे जानती हूँ…”
अर्थ समझ में नहीं आता,
शब्द भी स्पष्ट नहीं होते,
फिर भी हर एक उच्चारण
मन कहता था—
“तुम कुछ नहीं जानती…”
पर भीतर कुछ और ही कह रहा था…
और उसी समय,
दूसरी ओर अग्नि के सामने
आहुतियाँ दी जा रही थीं।
मुझसे पूछा गया—
“आपका गोत्र? आपकी नक्षत्र नाड़ी? आपकी राशि?”
कई आहुतियाँ मेरे गोत्र, नक्षत्र और राशि के नाम से दी गईं…
लगा—
जैसे एक ओर स्वर
भीतर की किसी पुरानी स्मृति को जगा रहे हैं…
और दूसरी ओर अग्नि
उसी स्मृति के साथ
मेरी सारी पहचान को भी समर्पित कर रही है।
सब कुछ संपन्न हुआ…
मंत्र, आहुति, संकल्प—सब पूरा हो गया…
पर एक प्रश्न
अब भी मन में रह गया—
कैसे है ये भाव
कि सब कुछ जानकर भी
कुछ भी न जानने जैसा लगता है?
क्यों लगता है
कि ये सब मैंने पहले भी जिया है…
और फिर भी
इस जीवन में जैसे कुछ भी नहीं किया?
और फिर
उसी प्रश्न के साथ
मैं वापस आ गई…
शायद इसे ही ‘डेजा वू’ (Déjà vu) कहते हैं।
आपकी रितिका दीदी,
जय माँ कामाक्षी, जय माँ ललितांबिका,
2 weeks ago (edited) | [YT] | 72
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Reetika Agarwal
आज आश्रम गुरुकुल के अंदर चारों वेदों का परायण चल रहा था।
और और मुझे होमम, संकल्प और पूजा के लिए बैठना था..जो एक अलग से आयोजित किया गया था, मैं वहाँ बैठी…
हवन शुरू होने से पहले आवाहन हुआ, संकल्प हुआ—ये सभी प्रक्रियाएँ सम्पन्न हुईं। इसके साथ ही श्रीसूक्त की कुछ पंक्तियाँ भी गूँजने लगीं।
मंत्रोच्चारण चल रहा था।
आज मैंने बहुत ध्यान से हर एक चरण को बारीकी से देखा और अनुभव किया।
जब हवन की आहुतियाँ शुरू हुईं, तो उससे पहले जो मंत्र उच्चारित हुए थे, उनकी पंक्ति मेरे हृदय में गूँजने लगी।
“चन्द्रम हिरान्मयी लक्ष्मी जातवेदो म आवह ||१ ||
हे अग्निदेव (जातवेद),
आप उस लक्ष्मी का आवाहन कीजिए
जो केवल धन नहीं, बल्कि “लक्ष्य” को दिखाने वाली शक्ति है —
जो जीवन में स्पष्टता लाए, दिशा दे,
और हर उस अभाव (अलक्ष्मी) को दूर करे
जो हमें हमारे सत्य से दूर करता है।
उस क्षण ऐसा लगा —
हर आहुति के साथ,
हर मंत्र की ध्वनि के साथ,
वही नारायणी शक्ति अग्नि के माध्यम से
हर कण में, हर श्वास में स्थापित हो रही है।
ललिता केवल एक देवी नहीं,
वह वही चेतना है —
जो “नारायण” बनकर सर्वत्र है,
और “नारायणी” बनकर उसे प्रकट करती है।
नारायण” केवल एक नाम नहीं, एक अनुभव है —
जो हर कण में व्याप्त है, हर श्वास में प्रवाहित है।
देवी को “नारायणी” इसलिए कहा गया, क्योंकि वही शक्ति है
जो स्वयं विष्णु की चेतना को भी धारण करती है।
वह विष्णुप्रिया है — प्रेम का स्वरूप,
वह विष्णु सहोदरी है — उसी सत्य की समान अभिव्यक्ति,
और नारायणी है — जो समस्त सृष्टि में ऊर्जा बनकर विराजमान है।
जब हम कहते हैं “नारायण”,
तो हम बाहर किसी देवता को नहीं पुकारते,
हम उस चेतना को पहचानते हैं
जो हर अणु, हर जीव, हर विचार में धड़क रही है।
ऐसा लगा जैसे हर अग्नि की लपट में,
हर मंत्र की ध्वनि में,
वही एक शक्ति प्रकट हो रही है —
नारायणी… ललिता… चैतन्य स्वरूपिणी।
#reetikagarwal #reetikaagarwal
2 weeks ago (edited) | [YT] | 85
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Reetika Agarwal
जब हम माँ के आगे सिर झुकाते हैं,
तो हम सिर्फ एक रूप को नहीं,
बल्कि उस मूल शक्ति को प्रणाम करते हैं
जिससे पूरी सृष्टि बनी है।
गीता के अनुसार यह शक्ति दो रूपों में है:
अपरा प्रकृति —
यह हमारी भौतिक दुनिया है:
शरीर, मन, बुद्धि और यह पूरा दिखाई देने वाला संसार।
परा प्रकृति —
यह वह चेतना है,
जो सबमें प्राण बनकर बह रही है
और पूरे ब्रह्मांड को चला रही है।
जगत जननी वही शक्ति हैं
जो इन दोनों का आधार हैं।
जब हम कहते हैं,
"I trust you with the prayers I whisper,"
तो हम अपने मन और जीवन को
उसी सर्वोच्च चेतना को समर्पित कर रहे होते हैं।
(पुस्तक “शक्ति से शिव तक” का अंश)
3 weeks ago | [YT] | 111
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Reetika Agarwal
योग वशिष्ठ — हर श्रीविद्या साधक के लिए Recommend Read at advance stage
जब साधना सवाल बन जाती है — वही क्षण योग वशिष्ठ का है
श्रीराम के प्रश्न कोई पुराने समय की कहानी नहीं हैं…
👉 वही प्रश्न हर श्रीविद्या साधक अपने mid-journey में face करता है।
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वह stage जब सब कुछ बदलने लगता है…
श्रीविद्या साधना में एक समय ऐसा आता है—
• जब life suddenly roller coaster की तरह बदलने लगती है
• emotions intense हो जाते हैं
• attachments टूटने लगते हैं
• जो पहले सही लगता था, अब meaningless लगने लगता है
👉 इसे आप Kundalini Awakening कह सकते हैं…
या Dark Night of the Soul।
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और फिर शुरू होता है questioning…
इस stage पर आप खुद से पूछते हैं—
• यह सब क्या हो रहा है?
• मैं ऐसा क्यों feel कर रहा हूँ?
• क्या यह संसार सच में real है?
• मैं कौन हूँ?
👉 और सबसे गहरा—
“अगर सब बदल रहा है… तो स्थिर क्या है?”
इन सब सवालों के जवाब आपको योग वशिष्ठ में मिलेंगे।
थोड़ा सा इसका introduction समझ लीजिए—ताकि आपके mind में एक clear concept बन सके।
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दो राजकुमार… एक ही प्रश्न — दो अलग Path
एक राजकुमार थे — Gautama Buddha (सिद्धार्थ)।
जब उनके भीतर यह प्रश्न जगा—
• जीवन क्या है?
• दुःख क्यों है?
• सत्य क्या है?
👉 तो उन्होंने राज्य त्याग दिया…
और उत्तर की खोज में निकल पड़े।
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वहीं… एक और राजकुमार थे — Lord Rama।
उनके भीतर भी वही प्रश्न उठे—
• यह संसार क्या है?
• मन अशांत क्यों है?
• अंत में क्या सत्य है?
लेकिन…
👉 उनके पास एक योग्य गुरु थे — Vasistha।
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यहीं मार्ग बदल जाता है…
• सिद्धार्थ ने बाहर निकलकर सत्य खोजा
• राम ने गुरु के माध्यम से भीतर ही सत्य को जाना
बहुत पहले अयोध्या में एक घटना हुई…
जो केवल इतिहास नहीं, हर साधक की आंतरिक यात्रा की शुरुआत है।
एक दिन महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में आए।
उन्होंने कहा—
👉 “मुझे यज्ञ की रक्षा के लिए आपके पुत्र राम चाहिए।”
दशरथ चिंतित हो गए…
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राम बदल चुके थे…
यह वही राम नहीं थे जिन्हें हम बालक रूप में जानते हैं।
वे अभी-अभी तीर्थ यात्रा और राज्य का भ्रमण करके लौटे थे—
और उनके भीतर गहरा वैराग्य (dispassion) जाग चुका था।
• न उन्हें राजमहल आकर्षित कर रहा था
• न भोग, न वैभव
• वे शांत थे… लेकिन भीतर से प्रश्नों से भरे हुए
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श्रीराम के प्रश्न — जो हर seeker के हैं
राम ने कहा—
• “यह संसार क्या है?”
• “हम दुखी क्यों होते हैं?”
• “मन इतना अशांत क्यों है?”
• “जो कुछ दिख रहा है, क्या वह सत्य है?”
• और सबसे गहरा—
👉 “जब सब कुछ समाप्त हो जाता है… तो क्या बचता है?”
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यहीं से शुरू होता है योग वशिष्ठ
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यह केवल राम की कहानी नहीं है…
यह हर उस साधक की कहानी है—
• जो श्रीविद्या में “श्री माता, श्री महाराज्ञी…” जप करता है
• जो लयकारी की बात करता है
• और भीतर कहीं यह पूछता है—
👉 “मैं कौन हूँ?”
“मैं किसमें विलीन हो रहा हूँ?”
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अंतिम समझ
योग वशिष्ठ की शुरुआत एक घटना से नहीं…
एक प्रश्न से होती है।
और वह प्रश्न आज भी वही है—
“इस सबका सत्य क्या है?”
यही प्रश्न आपको योग वशिष्ठ तक लाता है…
और वही प्रश्न आपको अपने स्वरूप तक ले जाता है।
योग वशिष्ठ को कैसे पढ़ें — सही तरीका (Must for every Srividya Seeker)
सीधे पढ़ना क्यों मुश्किल लगता है?
योग वशिष्ठ बहुत गहरा ग्रंथ है।
अगर आप इसे सीधे पढ़ना शुरू करेंगे, तो कई बार लगेगा—
• बात समझ में नहीं आ रही
• concepts abstract हैं
• मन connect नहीं कर पा रहा
👉 इसलिए यह तय है कि इसे सीधे पढ़ने से ज्यादा, समझकर पढ़ना जरूरी है।
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सही तरीका क्या है? (Recommended Approach)
👉 पहले Commentary सुनिए या पढ़िए
एक समर्थ गुरु…
जिसने उस सत्य को केवल पढ़ा नहीं, जिया है—
जब वह लिखता है,
तो वह केवल शब्द नहीं लिखता…
👉 वह “परावाणी” से लिखता है।
क्योंकि गुरु की दृष्टि से जब यह ज्ञान आता है,
तो वही बातें जो कठिन लगती हैं—बहुत सरल हो जाती हैं।
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मेरी Recommendation
• Sri Sri Ravi Shankar के शिष्य नकुल जी की योग वशिष्ठ पर commentary
👉 Art of Living app पर उपलब्ध है
👉 एक बार जरूर सुनिए
👉 बहुत ही सरल और relatable तरीके से समझाया गया है
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• और Kamlesh D. Patel (दाजी) की recent book
👉 इसमें योग वशिष्ठ को modern भाषा में beautifully pen down किया गया है
👉 beginners के लिए बहुत helpful है
आपकी
रितिका दीदी
3 weeks ago (edited) | [YT] | 41
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Reetika Agarwal
मणिपुर चक्र — जहाँ “मैं” dissolve होता है…ललिता सहस्रनाम का यह श्लोक केवल शब्द नहीं है,
यह हमारी चेतना की एक यात्रा है—
👉 निश्चिन्ता — जब भीतर कोई डर नहीं रहता
👉 निरहंकारा — जब “मैं” का बोझ गिर जाता है
👉 निर्मोहा — जब हम attachment से ऊपर उठते हैं
👉 निर्ममा — जब “मेरा” भी समाप्त हो जाता है
यही वह अवस्था है जहाँ
मणिपुर चक्र (Solar Plexus) transform होता है।
👉 मणिपुर चक्र केवल शक्ति (power) का केंद्र नहीं है…
यह अहंकार, नियंत्रण और पहचान (identity) का भी केंद्र है।
जब साधना के माध्यम से
अहंकार dissolve होता है—
✨ इसलिए इस श्लोक में देवी केवल एक गुण नहीं बता रहीं—
वह हमें एक inner alchemy सिखा रही हैं।
👉 क्या आपके भीतर अभी भी “मैं” और “मेरा” strong है?
👉 या आप धीरे-धीरे उसे observe करके dissolve कर पा रहे हैं?
मैंने मणिपुर चक्र और चेतना के deeper dimensions
इस किताब में detail में share किए हैं — link bio में है 📖
🛒 Book उपलब्ध है:
Amazon:
👉 www.amazon.in/dp/B0GT1CWH7C/
Kindle:
👉 www.amazon.in/dp/B0GT1WF9RL
💫 यह सिर्फ एक किताब नहीं है…
इससे आने वाला 100% लाभ
अनाथ बच्चों की पढ़ाई में लगाया जा रहा है।
आपका हर कदम—
चाहे purchase हो, review हो—
✨ किसी एक बच्चे की ज़िंदगी बदल सकता है।
👉 आप इस श्लोक को अपने जीवन में कैसे महसूस करते हैं?
Comment में जरूर बताएं… 💛
आपकी
रितिका दीदी
जय माँ कामाक्षी । जय माँ ललितांबिका 🌸🙏
1 month ago | [YT] | 135
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Reetika Agarwal
जब हम ललिता सहस्रनाम में
“विष्णु ग्रंथि विभेदन” और “हृदय चक्र” जैसे
चेतना के आयाम पढ़ते हैं…
👉 आप उसे कैसे समझते हैं?
क्या यह सिर्फ शास्त्रों का ज्ञान है…
या एक ऐसा अनुभव
जो धीरे-धीरे हमारे भीतर unfold होता है?
हृदय चक्र सिर्फ एक concept नहीं है…
यह वह स्थान है
जहाँ पहली बार हम
स्वार्थ से परे जाकर प्रेम करना सीखते हैं।
यही वह केंद्र है —
जहाँ हम expectation से acceptance में आते हैं…
जहाँ attachment धीरे-धीरे
करुणा में बदलने लगती है।
और शायद यही है
विष्णु ग्रंथि का विभेदन…
👉 क्या इन ग्रंथियों का “विभेदन”
सिर्फ पढ़ने की चीज़ है…
या वास्तव में
जीवन में समझने की प्रक्रिया?
मैंने Heart Chakra Description in detail इस किताब में Share की है — लिंक bio में है 📖
🛒 Book उपलब्ध है
1) On Amazon
आप इस पुस्तक को Amazon पर यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं
👉 www.amazon.in/dp/B0GT1CWH7C/
2) On Kindle
👉 www.amazon.in/dp/B0GT1WF9RL
( please note -
यह सिर्फ एक किताब नहीं है…
इससे आने वाला 100% लाभ
अनाथ बच्चों की पढ़ाई में लगाया जा रहा है।
हर एक बच्चे की पढ़ाई के लिए सालाना ₹20,000 की जरूरत होती है।
कोशिश यही है कि जितने ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को पढ़ाया जा सके।
आपका हर कदम—
चाहे वह खरीद हो, Review हो
किसी एक बच्चे की ज़िंदगी बदल सकता है। ✨
……….
जो लोग किताब अफोर्ड नहीं कर सकते या खरीद नहीं सकते,
वे निराश न हों।
इस किताब के चैप्टर्स मैं इसी साल धीरे-धीरे इस चैनल पर भी पढ़ाऊंगी। ✨
………..
आप क्या महसूस करते हैं?
Comment में जरूर बताएं —
आपके लिए हृदय चक्र और चेतना का क्या अर्थ है? 🌸
आपकी
रितिका दीदी
जय माँ कामाक्षी । जय माँ ललितांबिका 🌸🙏
1 month ago (edited) | [YT] | 89
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