Rajeev Ranjan Prasad



Rajeev Ranjan Prasad

आज एक हास्यास्पद एजेंडा की बात करेंगे। नहीं नहीं, मैं मौर्यकालीन अशोक से महाभारतकालीन युधिष्ठिर ने अहिंसा कैसे सीखी वाली टिप्पणी पर प्रतिटिप्पणी नहीं कर रहा हूँ। कुछ बातों पर विवेचनाओं के बिना भी ठहाका लगा कर हँसा जा सकता है। आज मेरा विषय ऐसे ही इतिहासवेताओं की उपज वह चुटकुला है जो एजेंडा बना दिया गया है। मुझे हर दूसरे तीसरे दिन किसी न किसी स्त्रोत से एक वीडियो टैग मिलती है जिसमें किसी वामन मेश्राम का उबाऊ लेकिन भडकाऊ भाषण होता है, उनके द्वारा यह सिद्ध करने का प्रयास रहता है कि वाल्मीकि रामायण की रचना पुष्यमित्र शुंग के काल में हुई। इतना ही नहीं पूरी धूर्तता और बेशर्मी के साथ ऐसे संदर्भों और वक्तव्यों के माध्यम से विशेष तरह की साम्प्रदायिकता प्रसारित करने का प्रयत्न होता है। लम्बे समय तक ऐसी बकवास को इग्नोर करने के बाद एक मानवर ने फॉर्वर्ड प्रेस के एक लेख का लिंक भेजा और पूरी नव-रामायण मेरे सामने रख दी। फॉर्वर्ड प्रेस वही वामपंथी दूकान है जिसपर अपने एक अंक में देवी दुर्गा के आपत्तिजनक चित्र प्रकाशित करने को ले कर मुकदमा चल रहा है, इस पत्रिका का केवल लाल-ऐंगिल नहीं है बल्कि सम्पादक-प्रकाशक आईवन कोस्का-सिल्विया फर्नांडिज के नामों पर गौर कीजिये और सोचिये कि क्या धर्म परिवर्तन वाली सोच-समझ भी ऐसी नौटंकियों के पीछे काम तो नहीं कर रही? बहरहाल मनगढ एजेंडाकारों की नव रामायण के अनुसार यदि पुष्यमित्र शुंग ही राम हैं तो रावण कौन था? उत्तर फॉर्वर्ड प्रेस पत्रिका ही दे देती है जिसने दस मौर्य राजाओं का गलत-सलत नामोल्लेख करते हुए प्रकाशित किया है कि “दस मुंह का आदमी – रावण, इन दस मौर्य बौद्धवादी राजाओं का प्रतीक है”। इस नवीन कथित रामायण में राम घोषित हो गये, रावण भी चिन्हित कर लिया गया लेकिन माता सीता, भाई लक्ष्मण-भरत-शत्रुघ्न सहित हनूमान, जाम्बवंत आदि का कोई उल्लेख नहीं है। विस्तार से समझें एजेंडा इस विडियो में।

4 years ago | [YT] | 85

Rajeev Ranjan Prasad

कौन थे लिच्छिवि? भारतीय इतिहास का स्वर्णयुग कहे जाने वाले गुप्त साम्राज्य से इनका क्या सम्बन्ध था? हाँ हम उन लिच्छिवियों की ही बात कर रहे हैं जिनका विनाश हर्यंक शासक अजातशत्रु द्वारा भीषण युद्ध के पश्चात किया गया। क्या वैशाली के पतन के बाद लिच्छिवि फिर कभी ऐसे शक्तिशाली हो सके थे कि वे किसी साम्राज्य निर्माण की आधारशिला बन सकें? यह प्रश्न विचारणीय इसलिये है क्योंकि अनेक गुप्त लेखों के परम्परागत गोत्रोचारों में उल्लेख मिलता है कि “समुद्रगुप्त महाराज श्रीगुप्त का प्रपौत्र महाराज श्री घटोत्कच्च का पौत्र महाराजाधिराज श्री चंद्रगुप्त का महादेवी कुमारदेवी से उत्पन्न लिच्छिवि दौहित्र था” इस संदर्भ में मैं कुछ शब्दों पर ध्यानाकृष्ट करना चाहूंगा पहला महाराज तथा महाराजाधिराज और दूसरा लिच्छिवि दौहित्र। विवेचना करें कि गुप्त साम्राज्य के आरम्भिक शासकों में श्रीगुप्त और घटोत्कच्च के लिये महाराज लेकिन चंद्रगुप्त के लिये महाराजधिराज प्रयोग में लाया गया है जो उनकी पदोन्नति अथवा साम्राज्य की अधिक वृहदता का सूचक है। यह भी जानकारी मिलती है कि राज्य तथा उपाधि विस्तार तब संभव हुआ जब लिच्छिवि कुमारी से गुप्त राजकुमार का विवाह हुआ। क्या यह संदर्भ दो शासित भूमियों के साथ साथ दो संस्कृतियों का भी समागम था?

4 years ago | [YT] | 56

Rajeev Ranjan Prasad

कोई भी हो उसमें कार्लमार्क्स घुसेड दिये जायें तो प्रगतिशीलता? भारतीय विचारकों के कार्यों से सम्बद्धता और विमर्श शिक्षा का भगवाकरण है? ऐसी ही हिपोक्रेसी वर्तमान की सच्चाई है इसलिये तब प्रश्नपत्र के सामने आते ही विदेशी मीडिया बीबीसी सहित वाममंथी संचार माध्यमों में हाय तौबा मच गयी, आलोचनात्मक आलेखों से अखबार रंग गये, विश्वविद्यालय से ले कर प्रश्नपत्र बनाने वाले प्राध्यापक को भी सफाई जारी करनी पड़ी। दुर्भाग्य कि इतिहास का निर्पेक्ष विद्यार्थी सत्यान्वेषी क्यों नहीं? वह मूल पुस्तकों को पढने जानने से परहेज क्यों करता है? वह वाहयात अनपढों-नारावादियों के प्रभाव में आ कर सत्य और मिथक की बहसों के मकड जाल में क्यों उलझ जाता है? आज इसी कहन को उसी प्रश्न पर ले चलते हैं कि क्या चाणक्यकृत अर्थशास्त्र इतनी गहन विवेचना प्रस्तुत करता है कि आधुनिक समय में भी उसकी अनेक बातें प्रासंगिक हैं? क्या अर्थशास्त्र में वर्णित कर प्रणाली और वर्ष 2017 से लागू की गयी जीएसटी अथवा गुड्स एण्ड सर्विसेज टैक्स में कोई तुलना बनती है?

4 years ago | [YT] | 38

Rajeev Ranjan Prasad

नदी द्वीपों की रहस्यमयताओं ने सर्वदा साधकों और शासकों को अपनी ओर आकृष्ट किया है। मदकूद्वीप की कहानी ऐसी ही रहस्यमय है साथ ही यह स्थल दुर्लभ ऐतिहासिक विरासतों के लिये जाना जाता है, विशेष रूप से विशिष्ठ स्मार्त लिंगों की बडी संख्या के लिये। आईये जानते हैं मदकू द्वीप के विषय में....।
https://youtu.be/k7BKrPFGN3Q

5 years ago | [YT] | 43

Rajeev Ranjan Prasad

सिन्धु-सरस्वती घाटी सभ्यता, वैदिक सभ्यता तथा उनकी सांस्कृतिक निरंतरता पर लम्बी-चौडी बहसें भारत में होती रही हैं। क्या हम एक ही सभ्यता को दो मान कर विवेचित कर रहे हैं? अथवा दो समान समय की सभ्यताओं में से एक को अनदेखा? क्या उस दौर की धार्मिक मान्यताओं से कोई निष्कर्ष निकाला जा सकता है? इस विडियो के माध्यम से प्रयास करते हैं।
https://youtu.be/LeGQr8DC56g

5 years ago | [YT] | 29

Rajeev Ranjan Prasad

दीपपर्व की हार्दिक शुभकामनायें। आज इस अवसर पर विशेष प्रस्तुति के रूप में राम कथा से जुडे एक रहस्यमय स्थान "रक्साहाड़ा" की जानकारी ले कर उपस्थित हुआ हूँ, जिसके विषय में जान कर निश्चय ही आप रोमांचित होंगे। दण्डकवन का वह हिस्सा जो छत्तीसगढ राज्य के बस्तर सम्भाग में, अबूझमाड की दुर्गमताओं में स्थित है, यहाँ का राक्षस कबन्ध से क्या सम्बंध था, यह स्थान राम-रक्ष युद्ध से कैसे जुडता है, कैसे बडी संख्या में हड्डियों के ढेर यहाँ इकट्ठे हुए और जीवाष्म में बदल गये.....जानते हैं इस विडियो में।
https://youtu.be/D8SrFdLD_RU

5 years ago | [YT] | 34

Rajeev Ranjan Prasad

आज रथों की बात करते हैं, कैसे प्राचीन भारत में होने वाले युद्धों का महत्वपूर्ण हिस्सा थे - रथ। युद्ध रथों की बात वैदिक समयों से आरम्भ कर गुप्त काल तक के महत्वपूर्ण संग्रामों के दृष्टिगत इस विडियो में -
https://youtu.be/UE2stiBzy7Q

5 years ago | [YT] | 25

Rajeev Ranjan Prasad

हम इतिहास में से जहर कैसे चुनते हैं इसका सबसे अच्छा उदाहरण पुष्यमित्र शुंग हैं। पुष्यमित्र शुंग के संदर्भ में सभी ज्ञात साहित्यिक और पुरातात्विक साक्ष्यों के आलोक में समझने का प्रयास करते हैं कि सलेक्टिव नैरेटिव कैसे बनाया जाता है, अतीत के संदर्भों से केवल अपने मतलब की पंक्तियाँ चुन कर कैसे खास किस्म के विचार की धाराओं ने खडे किये हैं नकली खलनायक। देखें यह विडियो -
https://youtu.be/iLNqBY4gZhY

5 years ago | [YT] | 32

Rajeev Ranjan Prasad

मिथक करार देने की हडबडी में कुछ आवश्यक विमर्श छोड दिये गये हैं। बाहृद्रथ वंश का जरासंध से सम्बंध और समुद्र में प्राप्त नगरी का द्वारिकाधीश से क्या सम्बंध है इसपर चर्चा होती रहेगी तथापि क्या यह सोचना आवश्यक नहीं कि साहित्यिक संदर्भों के आधार पर भी कृष्ण मगध के इतिहास में बडी भूमिका में दिखाई पडते हैं, क्यों? देखें यह विडियो -
https://youtu.be/XKZTToBD7Ho

5 years ago | [YT] | 25

Rajeev Ranjan Prasad

मैसूर, कुल्लू तथा बस्तर का दशहरा विश्व प्रसिद्ध है। देश-विदेश में ख्यातिअर्जित कर चुके बस्तर दशहरा, उसकी निहित परपराओं और रिवाजों पर चर्चा यह विमर्श देखें, इस विडियो में -
https://youtu.be/KE2_cFV4eac

5 years ago | [YT] | 25