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Hindu bhajan

1.
शायरी:
लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमां पर,
भारत का नाम होगा सबकी जुबान पर,
ले लेंगे उसकी जान या दे देंगे अपनी जान,
कोई जो उठाएगा आँख हमारे हिंदुस्तान पर।
अर्थ: हमारा तिरंगा हमेशा ऊँचा रहेगा और भारत का नाम हर तरफ गूँजेगा, देश की रक्षा के लिए हम जान देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
2.
शायरी:
ना जियो धर्म के नाम पर,
ना मरो धर्म के नाम पर,
इंसानियत ही है धर्म वतन का,
बस जियो वतन के नाम पर।
अर्थ: धर्म के नाम पर लड़ना नहीं, बल्कि इंसानियत को धर्म मानकर देश के लिए जीना ही सच्ची देशभक्ति है।
3.
शायरी:
दे सलामी इस तिरंगे को,
जिस से तेरी शान है,
सर हमेशा ऊँचा रखना इसका,
जब तक दिल में जान है।
अर्थ: तिरंगा ही हमारी शान है, जब तक साँस है तब तक हमें इसके सम्मान को ऊँचा रखना है।
4.
शायरी:
वतन हमारा ऐसा कोई न छोड़ पाए,
रिश्ता हमारा ऐसा कोई न तोड़ पाए,
दिल एक है जान एक है हमारी,
हिंदुस्तान हमारा शान है हमारी।
अर्थ: हमारा देश से ऐसा अटूट रिश्ता है जिसे कोई तोड़ नहीं सकता, हम सब एक दिल और एक जान हैं।
5. सबसे ज्यादा शेयर होने वाली पोस्ट के लिए:
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
आओ झुक कर सलाम करें उनको,
जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है,
खुशनसीब होता है वो खून,
जो देश के काम आता है।
अर्थ: उन शहीदों को नमन करना चाहिए जिनका बलिदान ही उन्हें महान बनाता है, देश के लिए बहा खून सबसे पवित्र होता है।
6.
कुछ नशा तिरंगे की आन का है,
कुछ नशा मातृभूमि की शान का है,
हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा,
नशा ये हिंदुस्तान की शान का है।
अर्थ: हमें अपने तिरंगे और मातृभूमि पर गर्व का नशा है, हम हर जगह इसे शान से लहराएंगे।

1 week ago (edited) | [YT] | 2

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भोलेनाथ जी की ओर से सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं!

1 week ago | [YT] | 2

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यहाँ भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध और सम्पूर्ण स्तोत्र - शिव पञ्चाक्षर स्तोत्र दिया गया है, अर्थ सहित। इसमें शिव के पाँच अक्षर न-मः-शि-वा-य की महिमा है।
शिव पञ्चाक्षर स्तोत्र - अर्थ सहित
1. श्लोक
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै "न" काराय नमः शिवाय॥
अर्थ: जिनके गले में नागों का हार है, जिनके तीन नेत्र हैं, जो भस्म को आभूषण के रूप में धारण करते हैं, जो महेश्वर हैं, जो नित्य, शुद्ध और दिगम्बर हैं, उन 'न' कार स्वरूप शिव को मेरा नमस्कार है।

2. श्लोक
मन्दाकिनी सलिल चन्दन चर्चिताय
नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।
मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय
तस्मै "म" काराय नमः शिवाय॥
अर्थ: जो गंगा के जल और चन्दन से पूजित हैं, जो नंदी के स्वामी और प्रमथगणों के नाथ महेश्वर हैं, जो मंदार आदि फूलों से सदैव पूजित रहते हैं, उन 'म' कार स्वरूप शिव को मेरा नमस्कार है।

3. श्लोक
शिवाय गौरी वदनाब्जवृन्द
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय
तस्मै "शि" काराय नमः शिवाय॥
अर्थ: जो कल्याणकारी हैं, जो माता गौरी के मुख कमल को सूर्य के समान प्रकाशित करते हैं, जिन्होंने दक्ष के यज्ञ का विनाश किया था, जिनका कण्ठ नीला है और जिनके ध्वज में वृषभ (बैल) है, उन 'शि' कार स्वरूप शिव को मेरा नमस्कार है।

4. श्लोक
वसिष्ठ कुम्भोद्भव गौतमार्य
मुनीन्द्र देवार्चित शेखराय।
चन्द्रार्क वैश्वानर लोचनाय
तस्मै "वा" काराय नमः शिवाय॥
अर्थ: वसिष्ठ, अगस्त्य, गौतम आदि श्रेष्ठ मुनि और देवतागण जिनके शीश को पूजते हैं, जिनके चन्द्रमा, सूर्य और अग्नि तीन नेत्र हैं, उन 'वा' कार स्वरूप शिव को मेरा नमस्कार है।

5. श्लोक
यक्षस्वरूपाय जटाधराय
पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय
तस्मै "य" काराय नमः शिवाय॥
अर्थ: जिन्होंने यक्ष का रूप धारण किया है, जो जटाधारी हैं, जिनके हाथ में पिनाक धनुष है, जो सनातन हैं, जो दिव्य, देवस्वरूप और दिगम्बर हैं, उन 'य' कार स्वरूप शिव को मेरा नमस्कार है।

फलश्रुति
पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत् शिव सन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥
अर्थ: जो भी इस पवित्र पाँच अक्षरों वाले स्तोत्र का शिव जी के समीप पाठ करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और शिव जी के साथ आनन्द प्राप्त करता है।

3 weeks ago | [YT] | 1

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गुरुपूर्णिमा हिंदू धर्म का बहुत पवित्र पर्व है, इसे आषाढ़ पूर्णिमा भी कहते हैं।
गुरुपूर्णिमा क्या है?
आषाढ़ महीने की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस दिन हम अपने जीवन के सभी गुरुओं - माता-पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु और जीवन को सही दिशा दिखाने वाले हर व्यक्ति का सम्मान करते हैं।
इसका महत्व क्यों है?
1. महर्षि वेदव्यास जी का जन्मदिन
इसी दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। उन्होंने ही चारों वेद, 18 पुराण और महाभारत जैसे महान ग्रंथों की रचना की थी। इसलिए गुरुपूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। वे मानव जाति के पहले गुरु माने जाते हैं।

2. गुरु ही ब्रह्मा है
शास्त्रों में कहा गया है:
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
यानी गुरु ही हमें अज्ञान के अंधेरे से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। बिना गुरु के जीवन में सही मार्ग मिलना मुश्किल है।

3. बौद्ध और जैन धर्म में भी महत्व
बौद्ध मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था। जैन धर्म में इसी दिन भगवान महावीर ने अपने शिष्य को पहला गुरु बनाया था।
आध्यात्मिक महत्व
गुरुपूर्णिमा के दिन गुरु का आशीर्वाद लेना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। कहते हैं इस दिन गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने से जीवन के सारे दोष दूर होते हैं और ज्ञान, सफलता और शांति प्राप्त होती है।
इस दिन क्या करना चाहिए? • अपने गुरुओं, बड़ों और शिक्षकों को प्रणाम करें • गुरु मंत्र या गुरु वंदना करें • किसी जरूरतमंद को ज्ञान, किताब या भोजन का दान करें • मन से अपने गुरु को याद करके धन्यवाद दें

3 weeks ago | [YT] | 1

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गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

3 weeks ago | [YT] | 1

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#अगर कमाना चाहते है तो #इंसानियात और #दोस्त कमाओ

7 months ago (edited) | [YT] | 3