jyotishacharya Marwadi ji

सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने । विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते ॥

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संस्कृत में संभाषण में सम्मान समारोह सनातन संस्कृति उत्थान में सहयोग ,दिया गया सम्मान

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तीन राशियों पर होगी धन वर्षा

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१. पीठ पर बाल (पृष्ठभागे रोमाः) का शास्त्रीय उल्लेख

अंगशास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिषीय ग्रंथों में शरीर पर रोम (बाल) की स्थिति, दिशा और घनत्व का विशेष महत्व है।

(क) सामीरिका शास्त्र (भृगुसंहिता आधारित)

पीठ पर घने बाल को अशुभ लक्षण माना गया है। इससे जातक को जीवन में कष्ट, भार वहन (दूसरों का बोझ), और संघर्ष की अधिकता रहती है।

यदि बाल कम और सुन्दर, मध्यम रूप में हों तो जातक धार्मिक, सहनशील और दीर्घायु होता है।


(ख) गरुड़ पुराण – प्रेतकल्प (अंग लक्षण अध्याय)

> “पृष्ठे रोमवृन्दं यदि घनं भवेत्।
भारदुःखसमायुक्तः सदा भवति मानवः॥”



👉 अर्थ: जिसकी पीठ पर बहुत घने बाल हों वह मनुष्य जीवन भर बोझ और दुःख झेलता है।

(ग) सामीरिका लक्षण शास्त्र

> “पृष्ठभागे रोमाणि यदि मध्यमानि,
दीर्घायुष्मान धर्मनिष्ठश्च भवति।
यदि तु घनानि तत्र दुःखभागी।”



👉 अर्थ: यदि पीठ पर रोम (बाल) मध्यम मात्रा में हों तो आयुष्य लंबा और धर्मप्रिय होता है। परंतु यदि बहुत अधिक हों तो दुःख और विपत्ति का भागी होता है।

२. संस्कृत प्रमाण श्लोक

आपके लिए संकलित रूप में:

> “पृष्ठे रोमबहुल्यं च दुःखिनं भारवहनं विदुः।
मन्दं रोमयुतं पृष्ठं दीर्घायुष्यं शुभं स्मृतम्॥”
(सामीरिका लक्षण शास्त्र)



👉 भावार्थ:

पीठ पर यदि रोम अधिक और घने हों तो जातक को दुःख और भारी बोझ उठाने का जीवन मिलता है।

यदि रोम कम और संतुलित हों तो शुभफल, दीर्घायु और धर्मपरायणता मिलती है।


३. जिन ग्रंथों में उल्लेख है

सामीरिका शास्त्र (सामुद्रिक शास्त्र का अंग)

गरुड़ पुराण (प्रेतकल्प, लक्षण वर्णन अध्याय)

भृगु संहिता (लक्षण शास्त्र भाग)

सुपर्ण सूत्र (अंग लक्षण अध्याय)

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