Rahul Dev Ahirwar

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Rahul Dev Ahirwar

Rajasthani Pagdi 👑

2 weeks ago | [YT] | 5

Rahul Dev Ahirwar

“हार मान लेना ही सबसे बड़ी हार है।”

3 weeks ago | [YT] | 3

Rahul Dev Ahirwar

Zindagi ek safar hai suhana

Indian railway 🇮🇳

2 months ago | [YT] | 2

Rahul Dev Ahirwar

शिव का वास मंदिरों में कम,निर्मल हृदय में अधिक होता है।

2 months ago | [YT] | 1

Rahul Dev Ahirwar

“Time turns every pain into a lesson and every memory into strength.”

#timelessons #innerstrength #growthmindset

2 months ago | [YT] | 0

Rahul Dev Ahirwar

मानव इतिहास में आदर्श गढ़ने की आदत पुरानी है।हम जीवित चेहरों में अपने सपनों का प्रतिबिंब ढूँढते हैं सत्ता,धन,व्यवस्था और चमक के बीच किसी “सिद्ध” मनुष्य की कल्पना कर लेते हैं। पर एप्सटीन फ़ाइल्स जैसी घटनाएँ हमें कठोर यथार्थ से रूबरू कराती हैं । जीवित मनुष्य को आदर्श मानना जोखिम है,क्योंकि कब कौन किस रूप में सामने आए यह किसी को नहीं पता।

एप्सटीन का प्रकरण केवल एक व्यक्ति की गिरावट नहीं है यह उस परदे का फटना है जिसके पीछे सत्ता,पूँजी और प्रतिष्ठा की मिलीभगत छिपी थी। यह बताता है कि जब नैतिकता की जगह प्रभाव और प्रभावशाली संबंध ले लें,तो अपराध सभ्य आवरण ओढ़ लेता है।

जिन व्यवस्थाओं और देशों को लोगों ने आदर्श माना,उनकी विश्वसनीयता डगमगा गई है । सच यह है कि व्यवस्था स्वयं में न तो पवित्र होती है न पापी । उसे चलाने वाले हाथ उसे अर्थ देते हैं। लोकतंत्र हो या कानून,संस्थाएँ हो या मीडिया जब जवाबदेही शिथिल पड़ती है,तो आदर्श खोखले प्रतीक बन जाते हैं।शक्तिशाली और अपराधियों के प्रति दुनिया भर की शासन,प्रशासन व्यवस्था का व्यवहार इतना नर्म और मित्रतापूर्ण क्यों होता है,जबकि निर्बल और साधारण व्यक्ति के प्रति वही व्यवस्था कठोर और सख़्त दिखाई देती है ! ऐसा क्यों ?

#EpsteinFiles

2 months ago | [YT] | 2

Rahul Dev Ahirwar

Health is wealth ✌🏻

4 months ago | [YT] | 2

Rahul Dev Ahirwar

भीड़ आज नववर्ष के उल्लास में डूबी हुई हैं । यह उत्सव केवल तिथियों के परिवर्तन का नहीं,बल्कि हमारी उस आदत का प्रतीक है,जिसमें हम हर नए दिन को नए अर्थ के साथ देखना भूल चुके हैं। कैलेंडर का एक पन्ना पलटते ही हमें नवीनता का भ्रम होता है,जबकि जीवन तो प्रतिदिन अपने भीतर एक नया प्रभात समेटे मौन खड़ा रहता है ।

समय की आपाधापी,आकांक्षाओं की अंधी दौड़ और चिंताओं के कोलाहल में हर दिन की नवीनता और उसकी मधुर ध्वनियाँ दबकर रह गई हैं। न हमें भोर की कोमल पवन का स्पर्श छू पाता है,न ही उस दृश्य को हम देख पाते जहाँ उगते सूर्य के स्वर्णिम प्रकाश में नहाकर जब धरती अपना श्रृंगार करती है । आँखें इन दृश्यों को देखती अवश्य हैं,पर अनुभूति कहीं पीछे छूट जाती है ।

हम ओस की उन नन्ही बूँदों को भी अनदेखा कर देते हैं,जो मोतियों की तरह घास के तिनकों पर सजी रहती हैं। उनमें छिपी आकाश-यात्राओं की कथा । बादलों से उतरकर,पवन की गोद में झूलते हुए,धरती के किसी एकांत कोने तक पहुँचने का वह मौन प्रयास । क्या हमें यह सब विस्मित नहीं करता ?

4 months ago | [YT] | 1

Rahul Dev Ahirwar

मातृभाषा या हिंदी को जानना-समझना गर्व की बात है,वह हमारी जड़ों की पहचान है । पर अंग्रेज़ी पढ़ना और समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है । क्योंकि वही हमें विश्व से जोड़ती है,ज्ञान के नए द्वार खोलती है और दुनिया की सोच, विज्ञान, व्यापार अवसरों को समझने की दृष्टि देती है । भाषाएं दीवार नहीं होती । वह सेतु की तरह है । जो हमें अपनी मिट्टी से भी जोड़े रखे और पूरे विश्व से भी ।

4 months ago | [YT] | 0

Rahul Dev Ahirwar

Ganesh Utsav 2025

8 months ago | [YT] | 0