सुप्रभात मित्रों, आज की कहानी वैसे तो आप में से किसी न किसी ने अवश्य सुनी होंगी लेकिन फिर भी एक बार और पढ़ने लायक हैं.....
एक व्यक्ति अपने गुरु से बोला – “गुरुदेव! मेरी ज़िंदगी परेशानियों से भरी है। कभी पैसा नहीं टिकता, कभी काम बिगड़ जाता है, मुझे लगता है कि मेरे साथ ही सब बुरा होता है।”
गुरुदेव मुस्कुराए और उसे एक गिलास पानी में एक मुट्ठी नमक डालकर पीने को कहा। पानी पीते ही शिष्य बोला – “गुरुदेव! ये पानी तो बहुत कड़वा है।”
गुरु ने फिर उसे पास की झील में उतनी ही मुट्ठी नमक डालने को कहा और झील का पानी पिलाया। शिष्य ने पानी पिया और बोला “यह तो मीठा और ठंडा है।”
गुरु ने समझाया –
“समस्या तो वही नमक है, पर तुम्हारा मन गिलास जैसा छोटा है तो हर दुख बहुत बड़ा लगता है। अगर मन झील जैसा विशाल होगा, तो वही दुख उसमें घुलकर हल्का हो जाएगा।”
दोस्तों, दुख और परेशानियाँ हर किसी के जीवन में आती हैं, फर्क सिर्फ हमारे नजरिए का है। अगर मन को बड़ा, धैर्यवान और सकारात्मक बनाएँ, तो जीवन की हर कठिनाई आसानी से सहने योग्य बन जाती है।
जो व्यक्ति सघर्ष और मेहनत से आगे बढ़ता हैं उसका अपना एक अलग मुकाम बनता हैं और जो चांदी की चम्मच मुँह में लेकर पैदा होता हैं उसका कुछ अपना नही होता बस उपनाम के सहारे समाज में जिंदा रहता हैं जैसे एक 58 साल के युवा नेता। ऐसा ही एक बार एक किसान ने किया कि उसने खेत में उसने देखा कि एक तितली का प्यूपा (कोया) पड़ा है। उस कोये से तितली बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी। किसान ने सोचा कि उसकी मदद कर दे। उसने धीरे से कोया फाड़ दिया ताकि तितली आसानी से बाहर आ सके।
तितली बाहर तो आ गई, लेकिन उसके पंख कमजोर रह गए और वह उड़ नहीं पाई।
असल में संघर्ष करके बाहर निकलने की प्रक्रिया ही उसके पंखों को मजबूत बनाती है। किसान की जल्दी मदद ने तितली को जीवनभर उड़ान से वंचित कर दिया।
दोस्तों,
कभी-कभी जीवन में संघर्ष और कठिनाइयाँ हमारी "उड़ान" के लिए जरूरी होती हैं। बिना संघर्ष के सफलता अधूरी रह जाती है।
SHIV KUMAR - Nature Lover
सुप्रभात मित्रों, आज की कहानी वैसे तो आप में से किसी न किसी ने अवश्य सुनी होंगी लेकिन फिर भी एक बार और पढ़ने लायक हैं.....
एक व्यक्ति अपने गुरु से बोला –
“गुरुदेव! मेरी ज़िंदगी परेशानियों से भरी है। कभी पैसा नहीं टिकता, कभी काम बिगड़ जाता है, मुझे लगता है कि मेरे साथ ही सब बुरा होता है।”
गुरुदेव मुस्कुराए और उसे एक गिलास पानी में एक मुट्ठी नमक डालकर पीने को कहा।
पानी पीते ही शिष्य बोला –
“गुरुदेव! ये पानी तो बहुत कड़वा है।”
गुरु ने फिर उसे पास की झील में उतनी ही मुट्ठी नमक डालने को कहा और झील का पानी पिलाया।
शिष्य ने पानी पिया और बोला
“यह तो मीठा और ठंडा है।”
गुरु ने समझाया –
“समस्या तो वही नमक है, पर तुम्हारा मन गिलास जैसा छोटा है तो हर दुख बहुत बड़ा लगता है। अगर मन झील जैसा विशाल होगा, तो वही दुख उसमें घुलकर हल्का हो जाएगा।”
दोस्तों, दुख और परेशानियाँ हर किसी के जीवन में आती हैं, फर्क सिर्फ हमारे नजरिए का है। अगर मन को बड़ा, धैर्यवान और सकारात्मक बनाएँ, तो जीवन की हर कठिनाई आसानी से सहने योग्य बन जाती है।
जय हिंद!
3 months ago | [YT] | 0
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SHIV KUMAR - Nature Lover
दोस्तों,
जो व्यक्ति सघर्ष और मेहनत से आगे बढ़ता हैं उसका अपना एक अलग मुकाम बनता हैं और जो चांदी की चम्मच मुँह में लेकर पैदा होता हैं उसका कुछ अपना नही होता बस उपनाम के सहारे समाज में जिंदा रहता हैं जैसे एक 58 साल के युवा नेता। ऐसा ही एक बार एक किसान ने किया कि उसने खेत में उसने देखा कि एक तितली का प्यूपा (कोया) पड़ा है। उस कोये से तितली बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी। किसान ने सोचा कि उसकी मदद कर दे। उसने धीरे से कोया फाड़ दिया ताकि तितली आसानी से बाहर आ सके।
तितली बाहर तो आ गई, लेकिन उसके पंख कमजोर रह गए और वह उड़ नहीं पाई।
असल में संघर्ष करके बाहर निकलने की प्रक्रिया ही उसके पंखों को मजबूत बनाती है। किसान की जल्दी मदद ने तितली को जीवनभर उड़ान से वंचित कर दिया।
दोस्तों,
कभी-कभी जीवन में संघर्ष और कठिनाइयाँ हमारी "उड़ान" के लिए जरूरी होती हैं। बिना संघर्ष के सफलता अधूरी रह जाती है।
जय हिंद
4 months ago | [YT] | 0
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